राजस्थानी भाषा एवं बोलियाँ PYQ in Hindi | Previous Year Questions with Answers
इस पोस्ट में राजस्थान की कला एवं संस्कृति के टॉपिक
राजस्थानी भाषा एवं बोलियाँ से संबंधित Latest व पूर्णतः updated महत्वपूर्ण
PYQ
प्रश्न दिए गए हैं।
इनमें ब्रज, देवनागरी, महाजनी, मारवाड़ी, बागड़ी, भीली आदि से सम्बंधित महत्वपूर्ण जानकारियों को व्याख्या सहित शामिल किया गया है।
ये PYQ प्रश्न
RPSC,
RSMSSB,
RSSB,
RAS, Patwar, Police, LDC, VDO, Fireman, REET
तथा राजस्थान राज्य की अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं में पूछे जा चुके हैं,
इसलिए आगामी परीक्षाओं के लिए अत्यंत उपयोगी हैं।
✍️ Prepared & Reviewed by:
Rajputana Diary –
Rajasthan GK Faculty & Content Team
(Since 2021)
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1. निम्नांकित राजस्थानी बोलियों को उनके क्षेत्र से सुमेलित कीजिए-
बोलियाँ - क्षेत्र
(A) खेराड़ी - (I) दक्षिणी राजस्थानी
(B) निमाड़ी - (II) वक्षिण-पूर्वी राजस्थानी
(C) राजावाटी - (III) पश्चिमी राजस्थानी
(D) सोंडवाड़ी - (IV) मध्य-पूर्वी राजस्थानी
📚 Deputy Commandant 2026
A
A-II, B-1, C-III. D-IV
B
A-1, B-IV, C-III, D-II
C
A-III, B-I, C-IV, D-II
D
A-IV, B-II, C-I, D-III
📖 व्याख्या
राजस्थानी बोलियों का क्षेत्रीय वितरण इस प्रकार है: खेराड़ी बोली मुख्य रूप से शाहपुरा और भीलवाड़ा क्षेत्र (पश्चिमी/मध्य भाग का संगम) में बोली जाती है। निमाड़ी को 'दक्षिणी राजस्थानी' कहा जाता है। राजावाटी जयपुर के पूर्वी भाग (मध्य-पूर्वी) की बोली है। सोंडवाड़ी झालावाड़ के सोंधवाड़ क्षेत्र (दक्षिण-पूर्वी) में बोली जाती है।
2. राजस्थानी बोलियों के निम्नलिखित क्षेत्रों को उत्तर से दक्षिण के अनुसार व्यवस्थित करें :
A. ढूँढाड़ी
B. शेखावाटी
C. वागड़ी
D. हाड़ौती
नीचे दिए गए विकल्पों में से सबसे उपयुक्त उत्तर चुनेंः
📚 Reet Mains [L-1] 2026
A
A, B, C, D
B
B, A, D, C
C
D, C, A, B
D
C. D. B, A
📖 व्याख्या
राजस्थान की बोलियों का उत्तर से दक्षिण की ओर सही भौगोलिक क्रम है: शेखावाटी (चूरू, सीकर, झुंझुनूं सबसे उत्तर में). ढूंढाड़ी, (जयपुर, दौसा मध्य-पूर्व). हाड़ौती (कोटा, बूँदी दक्षिण-पूर्व), और वागड़ी (डूंगरपुर, बाँसवाड़ा सबसे दक्षिण में)।
3. निम्न कथनों पर विचार करें:
(A) मरुभाषा कुवलयमाला में उल्लिखित 18 वेशी भाषाओं में से एक है।
(B) राजस्थानी भाषा कभी एक स्वतंत्र भाषा के रूप में विकसित नहीं हुई।
(C) जब प्राकृत लोगों से दूर होना शुरू हुई तो अपभ्रंश ने इसका स्थान ग्रहण किया।
(D) वैदिक संस्कृत को समस्त भारतीय भाषाओं की माता नहीं माना जा सकता है।
नीचे विए गए विकल्पों में से सबसे उपयुक्त उत्तर चुनें :
📚 REET Mains [L-2] 2026
A
केवल (A) और (C)
B
केवल (B) और (C)
C
केवल (C) और (D)
D
केवल (D) और (A)
📖 व्याख्या
उद्योतन सूरि द्वारा 4वीं शताब्दी में रचित ग्रंथ 'कुवलयमाला' में वर्णित 18 देशी भाषाओं में 'मरुभाषा' (मारवाड़ी का प्राचीन रूप) का भी उल्लेख है, जो राजस्थानी भाषा की प्राचीनता का प्रमाण है। राजस्थानी भाषा अपभ्रंश से विकसित होकर एक स्वतंत्र भाषा के रूप में स्थापित हुई है, जिसकी अपनी समृद्ध साहित्यिक परम्परा है। यह भारतीय आर्य भाषाओं के विकास का सही क्रम है। संस्कृत के बाद प्राकृत और फिर प्राकृत के बाद अपभ्रंश भाषाएँ आम बोलचाल में आई. जिनसे आधुनिक भारतीय भाषाओं का विकास हुआ।
4. डॉ. ग्रियर्सन ने राजस्थानी बोलियों को मुख्य समूहों में बाँटा है। नीचे विए गए विकल्पों में से सबसे उपयुक्त उत्तर चुनें :
📚 REET Mains [L-2] 2026, पशु परिचर 2024, EO-RO 2023
📖 व्याख्या
प्रसिद्ध भाषाविद् जॉर्ज अब्राहम ग्रियर्सन ने अपने सुप्रसिद्ध ग्रंथ 'Linguistic Survey of India' में इस क्षेत्र की विभिन्न बोलियों के समूह के लिए सर्वप्रथम 'राजस्थानी' शब्द का प्रयोग किया था। डॉ. ग्रियर्सन ने राजस्थानी बोलियों को भौगोलिक आधार पर पाँच प्रमुख उपसमूहों में विभाजित किया, जिनमें पश्चिमी (मारवाड़ी), उत्तर-पूर्वी (मेवाती), मध्य-पूर्वी (ढूँढाड़ी), दक्षिण-पूर्वी (मालवी) और दक्षिणी (निमाड़ी) शामिल है।
5. थली एवं थटकी बोलियाँ का समावेश किस बोली में है?
📚 Jr. Instructor 2025, A.R.O. 2022, जेल प्रहरी 2017, REET Mains [L-2] 2026
A
पश्चिमी मारवाड़ी
B
दक्षिणी मारवाड़ी
C
उत्तरी मारवाड़ी
D
पूर्वी मारवाड़ी
📖 व्याख्या
पश्चिमी राजस्थान में बोली जाने वाली मारवाड़ी की विभिन्न उपभाषाओं में थली, गोडवाड़ी और थटकी बोलियाँ शामिल होती हैं। ये बोलियाँ पश्चिमी मारवाड़ी का हिस्सा मानी जाती हैं। थली और थटकी बोलियाँ मुख्यतः जोधपुर, बीकानेर, नागौर, पाली और आसपास के क्षेत्रों में प्रचलित है।
6. नीचे दो कथन दिए गए हैं
अभिकथन A: भरतपुर के निकटतम क्षेत्रों में उनकी बोली पर ब्रज भाषा का प्रभाव देखा जा सकता है।
कारण R: अलवर का क्षेत्र और भरतपुर का कुछ भाग मेवात के नाम से जाना जाता है और यहाँ मेवाती बोली जाती है।
उपरोक्त कथन के आलोक में, नीचे दिए गए विकल्पों में से सबसे उपयुक्त उत्तर का चयन कीजिए :
📚 REET Mains [L-2] 2026
A
A सही नहीं है लेकिन R सही है।
B
A और R दोनों सही हैं और R, A की सही व्याख्या है।
C
A और R दोनों सही हैं लेकिन R, A की सही व्याख्या नहीं है।
D
A सही है लेकिन R सही नहीं है।
📖 व्याख्या
भरतपुर और धौलपुर क्षेत्र उत्तर प्रदेश की सीमा से लगे होने के कारण यहाँ की बोली पर ब्रजभाषा का गहरा प्रभाव है। अलवर और भरतपुर के क्षेत्रों को संयुक्त रूप से मेवात कहा जाता है और यहाँ की प्रमुख बोली मेवाती है। दोनों कथन व्यक्तिगत रूप से सत्य है। व्रज भाषा का प्रभाव भौगोलिक निकटता और सांस्कृतिक आदान-प्रदान के कारण है।
7. निम्नलिखित में से पश्चिमी राजस्थानी बोलियों का चयन करें:
A. मारवाड़ी
B. मेवाड़ी
C. वागड़ी
D. हाड़ौती
E. मेवाती
नीचे दिए गए विकल्पों में से सबसे उपयुक्त उत्तर चुनेंः
📚 REET Mains [L-2] 2026
A
A, B, C
B
A, B, E
C
B, D, E
D
C, D, E
📖 व्याख्या
राजस्थानी भाषा को मुख्य रूप से पश्चिमी और पूर्वी भागों में बाँटा गया है। पश्चिमी राजस्थानीः इसकी प्रतिनिधि बोली मारवाड़ी है। मेवाड़ी और वागड़ी भी इसी के अंतर्गत या इससे प्रभावित दक्षिणी-पश्चिमी बोलियाँ मानी जाती हैं। शेखावाटी भी इसी का हिस्सा है। पूर्वी राजस्थानीः इसकी मुख्य बोलियाँ ढूंढाड़ी. हाड़ौती (दक्षिण-पूर्व) और मेवाती (उत्तर-पूर्व) हैं।
8. नीचे वो कथन विए गए हैं: एक अभिकथन A के रूप में लिखित है तो दूसरा उसके कारण R के रूप में;
अभिकथन A: मारवाड़ी (मारवाड़ में प्रचलित बोली) सभी राजस्थानी बोलियों में सबसे महत्त्वपूर्ण है और इसे राजस्थानी का पर्याय समझा जाता है।
कारण R: ऐतिहासिक और भौगोलिक रूप से, मारवाड़ का राजस्थान में महत्त्वपूर्ण स्थान है।
📚 REET Mains [L-2] 2026
A
A और R दोनों सही हैं, लेकिन R, A की सही व्याख्या नहीं है।
B
A सही है लेकिन R सही नहीं है।
C
A सही नहीं है लेकिन R सही है।
D
A और R दोनों सही हैं और R, A की सही व्याख्या है।
📖 व्याख्या
मारवाड़ी राजस्थान की सर्वाधिक बोली जाने वाली और साहित्यिक दृष्टि से संपन्न बोली है। मारवाड़ रियासत का विस्तार भौगोलिक रूप से सबसे बड़ा था और यहाँ के कवियों ने इसे अपनी रचनाओं का आधार बनाया, जिससे इसे मानक राजस्थानी की पहचान मिली। ऐतिहासिक प्रधानता के कारण ही इस बोली को राजस्थानी का पर्याय माना जाता जाता है। अतः कथन और कारण दोनों सही हैं और कारण कथन की पुष्टि करता है।
9. सूची I को सूची II से सुमेलित करें
सूची-I - सूची-II
(राजस्थानी बोलियाँ) - (क्षेत्र/अंचल)
A. शेखावाटी -I. जयपुर और वौसा
B. मेवाती - II. कोटा और बूँदी
C. ढूँढाड़ी - III. चूरू और गौर झुंझुनूँ
D. हाड़ौती - IV. अलवर और भरतपुर
नीचे दिए गए विकल्पों में से सबसे उपयुक्त उत्तर चुनेंः
📚 REET Mains [L-2] 2026
A
A-II. B-III, C-I, D-IV
B
A-IV, B-III, C-II, D-I
C
A-I, B-II, C-III, D-IV
D
A-III, B-IV, C-I, D-II
📖 व्याख्या
शेखावाटी बोली चूरू, झुंझुनूँ, सीकर क्षेत्र में बोली जाती है। मेवाती अलवर और भरतपुर क्षेत्र (मेवात) की बोली है। ढूँढाड़ी जयपुर और दौसा क्षेत्र में बोली जाती है। हाड़ौती कोटा और बूँदी क्षेत्र की बोली है।
10. थाली और गोड़वाड़ी, राजस्थान की किस बोली की उपबोलियाँ?
📚 Live Stock Asst. 2025, REET Mains [L-2] 2026
A
हाड़ौती
B
शेखावाटी
C
मारवाड़ी
D
ढूँढाड़ी
📖 व्याख्या
थाली और गोडवाड़ी, दोनों ही राजस्थान की सबसे प्रमुख बोली ‘मारवाड़ी’ की उपबोलियाँ हैं। गोडवाड़ी बोली मुख्य रूप से पाली और जालौर के क्षेत्र में बोली जाती है, जिसे गोडवाड़ क्षेत्र भी कहते हैं। यहीं. थाली बोली बीकानेर और जैसलमेर के कुछ हिस्सों में प्रचलित है। मारवाड़ी पश्चिमी राजस्थान की सबसे महत्त्वपूर्ण और सर्वाधिक बोली जाने वाली बोली है।
11. नीचे वो कथन विए गए हैं एक अभिकथन A के रूप में लिखित है तो दूसरा उसके कारण R के रूप में।
अभिकथन A: मारवाड़ी बोली जोधपुर, नागौर, जैसलमेर और पाली में प्रचलित है।
कारण R: ढूँढ़ाड़ी बोली जयपुर और वौसा में प्रचलित है।
उपरोक्त कथन के आलोक में, नीचे दिए गए विकल्पों में से सबसे उपयुक्त उत्तर का चयन कीजिए:
📚 REET Mains [L-2] 2026
A
A और R दोनों सही हैं और R, A की सही है।
B
A और R दोनों सही हैं लेकिन R, A की सही नहीं है।
C
A सही है लेकिन R सही नहीं है।
D
A सही नहीं है लेकिन R सही है।
📖 व्याख्या
मारवाड़ी बोली पश्चिमी राजस्थान के प्रमुख जिलों जैसे जोधपुर, नागौर, जैसलमेर, पाली आदि में बोली जाती है। इसी प्रकार, ढूँढाड़ी बोली पूर्वी राजस्थान के जयपुर, दौसा और आसपास के क्षेत्रों में प्रचलित है। हालाँकि, ढूँढाड़ी का जयपुर में प्रचलित होना इस बात की नहीं करता कि मारवाड़ी जोधपुर में क्यों बोली जाती है। ये दोनों अलग-अलग और स्वतंत्र भौगोलिक तथ्य हैं।
12. राजस्थान की बोलियों के बारे में निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
(A) रांगड़ी और निमाड़ी, मालवी की उप-बोलियाँ हैं।
(B) हाड़ौती कोटा, बूँदी, झालावाड़ और बाराँ बाएँ। क्षेत्र की बोली है।
(c) शेखावाटी उदयपुर, चित्तौड़गढ़ और भीलवाड़ा में बोली जाती है।
(D) मेवाती अलवर और भरतपुर के भागों में बोली जाती है।
नीचे दिए गए विकल्पों में से सबसे उपयुक्त उत्तर चुनें:
📚 REET Mains [L-2] 2026
A
केवल (A), (B) और (D)
B
केवल (A), (B) और (C)
C
केवल (A), (C) और (D)
D
केवल (B), (C) और (D)
📖 व्याख्या
रांगड़ी (मालवी और मारवाड़ी का मिश्रण) और निमाड़ी मालवी की उप-बोलियाँ मानी जाती हैं। हाड़ौती बोली हाड़ौती क्षेत्र (कोटा, बूँदी, बाराँ, झालावाड़) में बोली जाती है।
मेवाती बोली मेवात क्षेत्र (अलवर, भरतपुर) में बोली जाती है। शेखावाटी बोली (मारवाड़ी की उपबोली) सीकर, चूरू, झुंझुनूं क्षेत्र में बोली जाती है, न कि उदयपुर, चित्तौड़गढ़ में। उदयपुर-चित्तौड़गढ़ में मेवाड़ी बोली जाती है।
13. नीचे दो कथन दिए गए हैं: एक अभिकथन A के रूप में लिखित है तो दूसरा उसके कारण R के रूप में।
अभिकथन A: गुर्जरी से राजस्थान और गुजरात की सर्वसामान्य भाषा मारू-गुर्जर विकसित हुई थी।
कारण R: बाद में राजस्थानी और गुजराती विभेदित होना शुरू हो गई तथा पश्चात्वर्ती शताब्दियों में विशिष्ट राजस्थानी भाषा (मारु-भाषा) (डिंगल) विकसित हुई।
उपरोक्त कथन के आलोक में, नीचे दिए गए विकल्पों में से सबसे उपयुक्त उत्तर का चयन कीजिए:
📚 REET Mains [L-1] 2026
A
A और R दोनों सही हैं लेकिन R, A की सही व्याख्या नहीं है।
B
A सही है लेकिन R सही नहीं है।
C
A सही नहीं है लेकिन R सही है।
D
A और R दोनों सही हैं और R, A की सही व्याख्या है।
📖 व्याख्या
दोनों कथन सही हैं और कारण, अभिकथन की सही करता है। भाषाविदों के अनुसार, प्राचीन ‘गुर्जरी अपभ्रंश’ से आधुनिक राजस्थानी और गुजराती भाषाओं का विकास हुआ, जिसकी प्रारंभिक अवस्था को ‘मारू-गुर्जर’ कहा गया। समय के साथ, लगभग 13वीं-14 वीं शताब्दी के बाद, भौगोलिक और राजनीतिक कारणों से यह भाषा दो अलग-अलग शाखाओं-राजस्थानी और गुजराती में विभाजित होने लगी। बाद में राजस्थानी ने अपना विशिष्ट साहित्यिक रूप ‘डिंगल’ विकसित किया है।
14. राजस्थान की प्रमुख भाषाएँ हैं:
A. हिन्दी
B. अंग्रेजी
C. राजस्थानी
D. ब्रज
नीचे दिए गए विकल्पों में से सबसे उपयुक्त उत्तर चुनेंः
📚 Reet Mains [L-2] 2026
A
B और C
B
A और C
C
C और D
D
A और B
📖 व्याख्या
राजस्थान की प्रमुख भाषाओं के संदर्भ में: हिन्दी राजस्थान की राजभाषा है और शिक्षा तथा संचार की प्रमुख भाषा है। राजस्थानी राज्य की मातृभाषा है. जिसे करोड़ों लोग बोलते हैं और इसकी कई बोलियाँ (जैसे मारवाड़ी, मेवाड़ी) हैं। अंग्रेजी शिक्षा और आधिकारिक कार्यों में सहायक भाषा के रूप में प्रयुक्त होती है, लेकिन प्रमुख भाषा नहीं है। ब्रजभाषा राजस्थान के पूर्वी सीमावर्ती क्षेत्रों (भरतपुर, धौलपुर) में बोली जाती है, लेकिन यह पूरे राज्य की प्रमुख भाषा नहीं है।
15. सूची I को सूची II से सुमेलित करें-
सूची I (बोलियाँ/उप-बोलियाँ) सूची II (जिला)
A. गोरवारी - I. दौसा
B. राजावाती - II. जोधपुर
C. मालवी - III. डूंगरपुर
D. वागड़ी - IV. प्रतापगढ़
नीचे दिए गए विकल्पों में से सबसे उपयुक्त उत्तर चुनेंः
📚 Reet Mains [L-2] 2026
A
A-II, B-I, C-IV, D-III
B
A-I, B-II, C-III, D-IV
C
A-I, B-II, C-IV, D-III
D
A-II, B-1, C-III, D-IV
📖 व्याख्या
गोडवाड़ी (गोरवारी) मारवाड़ी की उपबोली है और यह पाली और जोधपुर के सीमावर्ती क्षेत्रों में बोली जाती है। राजावाटी ढूँढाड़ी को उपबोली है और यह जयपुर के पूर्वी भाग तथा दौसा में बोली जाती है। मालवी बोली का प्रभाव मालवा से सटे प्रतापगढ़ और झालावाड़ जिलों में है। वागड़ी बोली मुख्य रूप से डूंगरपुर और बाँसवाड़ा के वागड़ क्षेत्र में बोली जाती है।
16. निम्नलिखित में से कौनसी पूर्वी राजस्थानी बोलियाँ हैं?
A. मारवाड़ी
B. हाड़ौती
C. मेवाड़ी
D. ढूँढाड़ी
नीचे दिए गए विकल्पों में से सबसे उपयुक्त उत्तर चुनेंः
📚 Reet Mains |L-2] 2026
A
A और C
B
C और D
C
A और D
D
B और D
📖 व्याख्या
पूर्वी राजस्थानी के अंतर्गत मुख्य रूप से ढूँढाड़ी बोली (जयपुर क्षेत्र) और इसकी उपबोलियाँ आती हैं। हाड़ौती (कोटा, बूँदी क्षेत्र) को भी ढूँढाड़ी की ही एक उपबोली माना जाता है और यह भी पूर्वी राजस्थान में ही बोली जाती है। मारवाड़ी पश्चिमी राजस्थान की मुख्य बोली है। मेवाड़ी दक्षिण-मध्य राजस्थान (उदयपुर क्षेत्र) में बोली जाती है।
17. राजस्थान की सबसे अधिक प्रयुक्त की जाने वाली बोली कौनसी है ? नीचे दिए गए विकल्पों में से सबसे उपयुक्त उत्तर चुनें:
📚 REET Mains [L-1] 2026
A
मेवाती
B
बागड़ी
C
मारवाड़ी
D
ढूंढाड़ी
📖 व्याख्या
मारवाड़ी, राजस्थानी भाषा की प्रमुख बोली है और यह क्षेत्रफल और बोलने वालों की संख्या, दोनों ही दृष्टि से राजस्थान की सबसे बड़ी बोली है। यह मुख्य रूप से पश्चिमी राजस्थान के जोधपुर, बीकानेर जैसलमेर, बाड़मेर, पाली, नागौर और सीकर क्षेत्रों में बोली जाती है। मेवाती बोली अलवर और भरतपुर के मेवात क्षेत्र में, बागड़ी डूंगरपुर-बाँसवाड़ा क्षेत्र में, और ढूँढ़ाड़ी जयपुर तथा उसके आसपास के क्षेत्र में बोली जाती है।
18. पूर्वी राजस्थानी बोलियाँ है-
A. हाड़ौती
B. मारवाड़ी
C. वागड़ी
D. ढूंढाड़ी
E. मेवाती
नीचे दिए गए विकल्पों में से सबसे उपयुक्त उत्तर चुनें-
📚 Reet Mains [L-1] 2026
A
A, B, C
B
C, D, E
C
B, C, D
D
A, D, E
📖 व्याख्या
पूर्वी राजस्थानी के अंतर्गत मुख्य रूप से ढूंढाड़ी और उसकी उपबोलियाँ आती हैं। ढूँढाड़ी जयपुर और आसपास के क्षेत्र में बोली जाती है। हाड़ौती कोटा, बूँदी, बारा, झालावाड़ में बोली जाती है और इसे ढूँढाड़ी की ही उपबोली माना जाता है। मेवाती अलवर और भरतपुर के मेवात क्षेत्र में बोली जाती है, जिस पर ब्रजभाषा का भी प्रभाव है। वहीं, मारवाड़ी पश्चिमी राजस्थान की बोली है और वागड़ी दक्षिणी राजस्थान (डूंगरपुर-बाँसवाड़ा) में बोली जाती है।
19. राजस्थानी भाषा किस भाषा परिवार से संबंधित है?
📚 Raj. Pol. const. 2025
A
द्रविड़ियन
B
ऑस्ट्रोएशियाटिक
C
वेस्टर्न इंडो-आर्यन
D
तिब्बती-बर्मन
📖 व्याख्या
भाषा विज्ञान के वर्गीकरण के अनुसार, राजस्थानी भाषा भारोपीय भाषा परिवार की इंडो-आर्यन शाखा के अंतर्गत आती है। राजस्थानी भाषा का उद्भव "शौरसेनी अपभ्रंश के गुर्जरी अपभ्रंश" से हुआ है। शौरसेनी अपभ्रंश मूलतः संस्कृत से संबंधित है। डॉ. जॉर्ज ग्रियर्सन का मतः इनके अनुसार, राजस्थानी का उद्भव नागर अपभ्रंश से हुआ, जो शौरसेनी अपभ्रंश का ही एक रूप है।
20. 1912 में भारतीय भाषाई सर्वेक्षण (Linguistic Survey of India) में राजस्थान की भाषाओं के लिए 'राजस्थानी' शब्द का प्रयोग सर्वप्रथम किसने किया था?
📚 (VDO) 2025
A
जॉर्ज रिचर्ड
B
जॉर्ज मैकाले
C
जेम्स टॉड
D
जॉर्ज अब्राहम ग्रियर्सन
📖 व्याख्या
प्रसिद्ध भाषाविद् जॉर्ज अब्राहम ग्रियर्सन ने अपने सुप्रसिद्ध ग्रंथ 'Linguistic Survey of India' में इस क्षेत्र की विभिन्न बोलियों के समूह के लिए सर्वप्रथम 'राजस्थानी' शब्द का प्रयोग किया था। डॉ. ग्रियर्सन ने राजस्थानी बोलियों को भौगोलिक आधार पर पाँच प्रमुख उपसमूहों में विभाजित किया, जिनमें पश्चिमी (मारवाड़ी), उत्तर-पूर्वी (मेवाती), मध्य-पूर्वी (ढूँढाड़ी), दक्षिण-पूर्वी (मालवी) और दक्षिणी (निमाड़ी) शामिल है।
21. बूँदी, कोटा व झालावाड़ में बोली जाने वाली बोली है?
📚 4TH GRADE 2025, जेल प्रहरी 2017, CET (10+2) 2023 - 2024, पशु परिचर 2024
A
रांगड़ी
B
बागड़ी
C
हाड़ौती
D
मेवाड़ी
📖 व्याख्या
राजस्थान के बूँदी, कोटा, बाराँ और झालावाड़ जिलों में मुख्य रूप से हाड़ौती बोली बोली जाती है। भरतपुर क्षेत्र में व्रज व मेवाती बोली बोली जाती है। मेवाती बोली मेव जाति के लोगों द्वारा बोली जाती है यह व्रजभाषा के समान है। मेवाती बोली में राजस्थानी और पश्चिमी हिंदी भाषाओं का मिश्रण है। हाड़ा राजपूतों द्वारा शासित क्षेत्र (कोटा, बूँदी, झालावाड़ और बारा) को 'हाड़ौती' के नाम से जाना जाता है।
22. सूची-1 में दी गयी राजस्थानी बोलियों का मिलान सूची-II में विए गए राजस्थान के जिलों के साथ कीजिए।
सूची-1 सूची-II
A. हाड़ौती i. जयपुर
B. मेवाती ii. कोटा
C. ढूंढाड़ी iii. उदयपुर
D. मेवाड़ी iv. अलवर/भरतपुर
नीचे दिए गए विकल्पों में से सबसे उपयुक्त उत्तर चुनेंः
📚 (VDO) 2025
A
A-II, B-IV, C-I, D-III
B
A-IV, B-II, C-I, D-III
C
A-III, B-II, C-IV, D-I
D
A-II, B-III, C-IV. D-I
📖 व्याख्या
हाड़ौती कोटा क्षेत्र में बोली जाती है, जिसमें बूँदी, बारां और झालावाड़ भी शामिल हैं। मेवाती अलवर भरतपुर क्षेत्र में बोली जाती है, जो हरियाणा से सटे हुए हैं। ढूँढाड़ी जयपुर क्षेत्र में बोली जाती है, और इसे जयपुरी भी कहते हैं, यह पूर्वी राजस्थान की प्रमुख बोली है। मेत्राड़ी उदयपुर क्षेत्र में बोली जाती है, और इसमें चित्तौड़गढ़, राजसमंद के कुछ भाग भी
शामिल हैं।
23. बागड़ी' बोली किस क्षेत्र में बोली जाती है?
📚 Jr. Instructor 2025, CET (10+2) 2023, COMPILER 2016, A.A.R.O. 2022, Pol. const. 1998-99
A
कोटा - बूँदी झालावाड़
B
हनुमानगढ़ श्रीगंगानगर
C
डूंगरपुर - बाँसवाड़ा
D
सीकर - झुंझुनूँ
📖 व्याख्या
बागड़ी' बोली राजस्थान के दक्षिणी भाग, जिसे वागड़ क्षेत्र भी कहते हैं, में प्रमुख रूप से बोली जाती है। इसमें डूंगरपुर और बाँसवाड़ा जिले शामिल हैं। यह एक भीली बोली है, जिस पर गुजराती भाषा का गहरा प्रभाव है। भाषाविद् डॉ. जॉर्ज ग्रियर्सन ने इसे 'भीली' की एक उपबोली माना है। वागड़ के प्रसिद्ध संत मावजी महाराज के 'चोपड़े' नामक ग्रंथ इसी बोली में रचित हैं।
24. रांगड़ी' और 'निमाड़ी' किस राजस्थानी बोली की उपबोलियाँ हैं?
📚 JEN 2025
A
शेखावाटी
B
नागदी
C
मालवी
D
मारवाड़ी
📖 व्याख्या
एक स्वतंत्र बोली है, जो मेवाती और हरियाणवी (बांगरू) के बीच की कड़ी मानी जाती है। यह अलवर के बहरोड़-मुंडावर और कोटपूतली क्षेत्र में प्रचलित है, और यह ढूँढाड़ी की उप-बोली नहीं है।
25. राजस्थान के किस क्षेत्र में “मालवी” बोली प्रचलित है?
📚 Platoon Commander 2025
A
झालावाड़
B
प्रतापगढ़
C
चूरू
D
बारा
📖 व्याख्या
एक स्वतंत्र बोली है, जो मेवाती और हरियाणवी (बांगरू) के बीच की कड़ी मानी जाती है। यह अलवर के बहरोड़-मुंडावर और कोटपूतली क्षेत्र में प्रचलित है, और यह ढूँढाड़ी की उप-बोली नहीं है।
26. कौन सी बोली, चूरू, झुंझुनूँ, हनुमानगढ़, सूरतगढ़ और गंगानगर क्षेत्र में बोली जाती है? (निम्न में से सबसे उपयुक्त विकल्प चुनेंः)
📚 JEN 2025, CET (10+2) 2024, पशु परिचर 2024
A
मालवी
B
मेवाड़ी
C
शेखावाटी
D
मारवाड़ी
📖 व्याख्या
शेखावाटी बोली, चूरू, झुंझुनू, हनुमानगढ़, सूरतगढ़ और गंगानगर क्षेत्रों में बोली जाती है। यह राजस्थानी भाषा की एक उपभाषा है।
27. राजस्थानी भाषा का उद्भव किस से माना जा सकता है?
(A) मारू-गुर्जरी अपभ्रंश
(B) नागर अपभ्रंश
(C) शौरसेनी अपभ्रंश
(D) मागधी अपभ्रंश
सही विकल्प चुनिए –
📚 Asst. Director 2025
A
(A), (B), (C)
B
(A), (B), (C), (D)
C
(A), (C), (D)
D
(B), (C), (D)
📖 व्याख्या
राजस्थानी भाषा की उत्पत्ति के संबंध में विद्वानों में मतभेद हैं, लेकिन अधिकांश विद्वान मानते हैं कि इसका उद्भव शौरसेनी प्राकृत से हुआ है। डॉ. एल.पी. तेस्सितोरी और मोतीलाल मेनारिया के अनुसार, राजस्थानी भाषा का उद्भव शौरसेनी अपभ्रंश से हुआ है। के.एम. मुंशी इसे गुर्जर अपभ्रंश से उत्पन्न मानते हैं, जिसे मारू-गुर्जरी भी कहा जाता है। नागर अपभ्रंश को भी इसका एक स्रोत माना जाता है। मागधी अपभ्रंश से बिहारी, बांग्ला, उड़िया और असमिया भाषाओं का विकास हुआ, इसका संबंध राजस्थानी से नहीं है।
28. निम्नलिखित में से कौन पश्चिमी राजस्थानी बोली नहीं है?
📚 JEN 2025
A
शेखावाटी
B
बागड़ी
C
मारवाड़ी
D
मेवाती
📖 व्याख्या
मेवाती बोली राजस्थान के उत्तर-पूर्वी क्षेत्र (अलवर भरतपुर डीग) में बोली जाती है, इसलिए यह पश्चिमी राजस्थानी बोली नहीं है। पश्चिमी राजस्थानी वर्ग में मारवाड़ी, शेखावाटी, बागड़ी और बीकानेरी जैसी बोलियाँ शामिल हैं। मेवाती पर ब्रज भाषा का गहरा प्रभाव देखा जाता है। लालदासी और चरणदासी संप्रदायों का साहित्य इसी बोली में रचा गया है, जो इसकी सांस्कृतिक समृद्धि को दर्शाता है।
29. निम्नलिखित में से कौन राजस्थान की बोली नहीं है?
📚 JEN 2025
A
गवरी
B
हाड़ौती
C
वागड़ी
D
मेवाती
📖 व्याख्या
गवरी वास्तव में एक राजस्थानी बोली नहीं है। गवरी एक पारंपरिक नृत्य-नाटिका है जो भील समुदाय द्वारा राजस्थान में की जाती है। यह एक सांस्कृतिक प्रस्तुति है, जबकि हाड़ौती, वागड़ी, और मेवाती राजस्थान की बोलियाँ हैं।
30. राजस्थानी भाषा के संदर्भ में निम्न कथनों पर विचार कीजिए
(अ) मध्यकालीन राजस्थानी भाषा में “गीत” और “दूहा” प्रमुख छंद थे।
(ब) इस समय पिंगल भाषा का प्रचलन हुआ, जिस पर ब्रज भाषा का प्रभाव था।
नीचे दिये गये विकल्पों में से सही उत्तर का चयन कीजिए-
📚 PTI 2025
A
(अ) एवं (ब) दोनों सही हैं।
B
केवल (ब) सही है।
C
(अ) एवं (ब) दोनों सही नहीं हैं।
D
केवल (अ) सही है।
📖 व्याख्या
मध्यकालीन राजस्थानी साहित्य में चारण और भाट कवियों द्वारा ‘गीत’ (वीरों की प्रशंसा में गाये जाने वाले छंद) और ‘दूहा’ (दोहा) का व्यापक प्रयोग किया गया। ‘पिंगल’ पूर्वी राजस्थान की साहित्यिक शैली है, जिस पर ब्रज भाषा का गहरा प्रभाव है और इसका प्रयोग भाट कवियों द्वारा श्रृंगार और कोमल भावों के लिए किया जाता था।
31. राजस्थानी लिपि को किस रूप में लिखा जाता था?
(i) महाजनी (ii) कामवारी (iii) शास्त्री
सही विकल्प चुनिये –
📚 PTI 2025
A
(ii), (iii)
B
(i), (ii)
C
(i), (ii), (iii)
D
(i), (iii)
📖 व्याख्या
राजस्थानी भाषा की लिपि को मुख्य रूप से ‘मुड़िया’ या ‘महाजनी’ लिपि कहा जाता है क्योंकि इसका प्रयोग महाजनों (व्यापारियों) द्वारा बही-खातों में किया जाता था। इसे बिना कलम उठाए (घसीट रूप में) लिखा जाता है। रियासती काल में प्रशासनिक और अदालती कार्यों में प्रयुक्त होने के कारण इसे ‘कामदारी’ लिपि भी कहा जाता था। विद्वानों और धार्मिक कार्यों में देवनागरी के प्रभाव वाली शैली को ‘शास्त्री’ संदर्भ में भी देखा जाता है।
32. मुड़िया लिपि के बारे में कौनसा कथन सही नहीं है?
📚 Asst. Director 2025
A
इसका उपयोग मुख्य रूप से वित्तीय रिकॉर्ड बनाने और व्यवसायिक विवरण लिखने में किया जाता है।
B
मुड़िया लिपि, ब्राह्मी लिपि पर आधारित महाजनी लिपि के नाम से भी जानी जाती है।
C
यह दाएँ से बाएँ लिखी जाती है।
D
मुड़िया लिपि के शब्दों को अलग-अलग न लिखकर एक ही क्रम में लिखकर वाक्य पूर्ण किया जाता है।
📖 व्याख्या
राजस्थानी भाषा की लिपि को मुख्य रूप से ‘मुड़िया’ या ‘महाजनी’ लिपि कहा जाता है क्योंकि इसका प्रयोग महाजनों (व्यापारियों) द्वारा बही-खातों में किया जाता था। इसे बिना कलम उठाए (घसीट रूप में) लिखा जाता है। रियासती काल में प्रशासनिक और अदालती कार्यों में प्रयुक्त होने के कारण इसे ‘कामदारी’ लिपि भी कहा जाता था। विद्वानों और धार्मिक कार्यों में देवनागरी के प्रभाव वाली शैली को ‘शास्त्री’ संदर्भ में भी देखा जाता है।
33. ‘मालवी’ भाषा को लिखने के लिए किस लिपि का प्रयोग किया जाता है?
📚 IV GRADE 2025
A
उर्दू
B
रोमन
C
गुरुमुखी
D
देवनागरी
📖 व्याख्या
मालवी भाषा मुख्य रूप से मध्य प्रदेश के मालवा क्षेत्र और राजस्थान के सीमावर्ती जिलों में बोली जाती है। यह भाषा हिन्दी की पश्चिमी हिंन्दी उपशाखा से संबंधित है। भारत की अधिकांश आधुनिक भाषाओं की तरह, मालवी का पारंपरिक और मानक लेखन भी देवनागरी लिपि में ही किया जाता है। उर्दू लिपि का उपयोग उर्दू भाषा के लिए, रोमन लिपि का अंग्रेजी के लिए और गुरुमुखी लिपि का पंजाबी भाषा के लिए किया जाता है।
34. कवि शंकर राव द्वारा रचित ‘भीम विलास’ राजस्थानी की किस बोली में लिखी गई है?
📚 Α.Ο. 2025
A
मेवाड़ी
B
बागड़ी
C
ढूंढाड़ी
D
अहीरवाटी
📖 व्याख्या
‘भीम विलास’ की रचना नीमराणा के राजा के दरबारी कवि शंकर राव ने की थी। यह ग्रंथ अहीरवाटी बोली में लिखा गया है। अहीरवाटी, जिसे ‘हीरवाटी’ या ‘राठी’ भी कहा जाता है, मुख्य रूप से अलवर जिले के बहरोड़ और मुंडावर क्षेत्र तथा हरियाणा के महेंद्रगढ़ और गुड़गाँव के आसपास बोली जाती है। यह मेवाती और बांगरू (हरियाणवी) के बीच की एक मिश्रित बोली मानी जाती है। जोधराज द्वारा रचित ‘हम्मीर रासो महाकाव्य’ भी इसी बोली का एक अन्य महत्त्वपूर्ण ग्रंथ है।
35. तोरावाटी निम्नलिखित में से किस बोली की उप-बोली है?
📚 B.S.T.C (Pre.) 2025, Jr. Instructor 2025, Veterinary Officer 2020
A
वागड़ी
B
ढूँड़ाड़ी
C
हाड़ौती
D
मेवाती
📖 व्याख्या
तोरावाटी ढूंढाड़ी बोली की एक उपबोली है। यह मुख्य रूप से सीकर जिले के नीम का थाना क्षेत्र और जयपुर जिले के उत्तरी भाग में बोली जाती है, जो प्राचीन काल में तंवर राजपूतों द्वारा शासित होने के कारण ‘तंवराबाटी’ या ‘तोरावाटी’ कहलाता था। ढूँढाड़ी बोली पूर्वी राजस्थान की प्रमुख बोली है और जयपुर, दौसा. टोंक आदि क्षेत्रों में बोली जाती है।
36. राजस्थानी भाषा में मुड़िया लिपि को और किस नाम से जाना जाता है?
📚 Asst. Prof. 2024
A
ब्रज
B
देवनागरी
C
महाजनी
D
मारवाड़ी
📖 व्याख्या
मुड़िया लिपि जिसे महाजनी लिपि भी कहा जाता है, ब्राह्मी लिपि पर आधारित थी और यह दाएं से बाएं लिखी जाती थी। यह लिपि मुख्य रूप से वाणिज्यिक कार्यों के लिए उपयोग की जाती थी जैसे व्यापारिक खाता-बही और लेन-देन के दस्तावेज़। मुड़िया लिपि में 33 अक्षर होते थे लेकिन इसमें स्वर का स्पष्ट रूप से पता नहीं चलता था और मात्रा की जानकारी भी नहीं दी जाती थी जिससे इसे पढ़ना मुश्किल होता था।
37. निम्नलिखित में से किस जिले में 'गोडवाड़ी' बोली बोली जाती है?
📚 Jr. Instructor 2024, CET (स्नातक स्तर) 2023, PTI (II-Gr:) 2011
A
जैसलमेर
B
जालौर
C
डूंगरपुर
D
अजमेर
📖 व्याख्या
गोडवाडी बोली मुख्य रूप से जालौर, सिरोही जिले और पाली जिले के दक्षिणी भागों में बोली जाती है। यह मारवाड़ी भाषा की एक उपबोली है और इसे गोडवाड़ क्षेत्र में बोली जाने के कारण 'गोडवाडी' कहा जाता है। जैसलमेर जिले में मारवाड़ी की मेवाड़ी उपबोली का प्रभाव है। डूंगरपुर जिले में वागड़ी बोली का प्रचलन है. जो गुजराती भाषा से प्रभावित है। अजमेर जिले में मारवाड़ी और ढूंढाड़ी दोनों का प्रभाव देखा जा सकता है। इस प्रकार, गोडवाडी का प्रमुख क्षेत्र जालोर है।
38. गोडवाड़ी उपबोली किस राजस्थानी भाषा से सम्बन्धित है ?
📚 PTI (III-Gr.) 2022, Jr. Instructor 2024
A
मारवाड़ी
B
हाड़ौती
C
ढूंढाड़ी
D
अहीरवाटी
📖 व्याख्या
गोडवाडी बोली मुख्य रूप से जालौर, सिरोही जिले और पाली जिले के दक्षिणी भागों में बोली जाती है। यह मारवाड़ी भाषा की एक उपबोली है और इसे गोडवाड़ क्षेत्र में बोली जाने के कारण 'गोडवाडी' कहा जाता है। जैसलमेर जिले में मारवाड़ी की मेवाड़ी उपबोली का प्रभाव है। डूंगरपुर जिले में वागड़ी बोली का प्रचलन है. जो गुजराती भाषा से प्रभावित है। अजमेर जिले में मारवाड़ी और ढूंढाड़ी दोनों का प्रभाव देखा जा सकता है। इस प्रकार, गोडवाडी का प्रमुख क्षेत्र जालोर है।
39. गौड़वाड़ी बोली का क्षेत्र है ?
📚 जेल प्रहरी 2017, Veterinary Officer 2013, Jr. Instructor 2024
A
सिरोही
B
अलवर
C
चूरू
D
बूँदी
📖 व्याख्या
गोडवाडी बोली मुख्य रूप से जालौर, सिरोही जिले और पाली जिले के दक्षिणी भागों में बोली जाती है। यह मारवाड़ी भाषा की एक उपबोली है और इसे गोडवाड़ क्षेत्र में बोली जाने के कारण 'गोडवाडी' कहा जाता है। जैसलमेर जिले में मारवाड़ी की मेवाड़ी उपबोली का प्रभाव है। डूंगरपुर जिले में वागड़ी बोली का प्रचलन है. जो गुजराती भाषा से प्रभावित है। अजमेर जिले में मारवाड़ी और ढूंढाड़ी दोनों का प्रभाव देखा जा सकता है। इस प्रकार, गोडवाडी का प्रमुख क्षेत्र जालोर है।
40. निम्नलिखित में से किसने सर्वप्रथम 1912 में भारतीय भाषा सर्वेक्षण में राजस्थान की भाषा के लिए राजस्थानी शब्द का प्रयोग किया था?
📚 पशु परिचर 2024
A
जॉर्ज थामस
B
जॉर्ज हेलेन्स्की
C
जॉर्ज अब्राहम ग्रियर्सन
D
जॉर्ज फर्नाडिस
📖 व्याख्या
प्रसिद्ध भाषाविद् जॉर्ज अब्राहम ग्रियर्सन ने अपने सुप्रसिद्ध ग्रंथ 'Linguistic Survey of India' में इस क्षेत्र की विभिन्न बोलियों के समूह के लिए सर्वप्रथम 'राजस्थानी' शब्द का प्रयोग किया था। डॉ. ग्रियर्सन ने राजस्थानी बोलियों को भौगोलिक आधार पर पाँच प्रमुख उपसमूहों में विभाजित किया, जिनमें पश्चिमी (मारवाड़ी), उत्तर-पूर्वी (मेवाती), मध्य-पूर्वी (ढूँढाड़ी), दक्षिण-पूर्वी (मालवी) और दक्षिणी (निमाड़ी) शामिल है।
41. राजस्थान की भाषा के लिए सर्वप्रथम 'राजस्थानी' शब्द का प्रयोग किसने किया था?
📚 Jr. Instructor 2024, Investigator 2016
A
जॉर्ज अब्राहम ग्रियर्सन
B
विजयदान देथा
C
कर्नल जेम्स टॉड
D
एल. सी. टेसीटोरी.
📖 व्याख्या
प्रसिद्ध भाषाविद् जॉर्ज अब्राहम ग्रियर्सन ने अपने सुप्रसिद्ध ग्रंथ 'Linguistic Survey of India' में इस क्षेत्र की विभिन्न बोलियों के समूह के लिए सर्वप्रथम 'राजस्थानी' शब्द का प्रयोग किया था। डॉ. ग्रियर्सन ने राजस्थानी बोलियों को भौगोलिक आधार पर पाँच प्रमुख उपसमूहों में विभाजित किया, जिनमें पश्चिमी (मारवाड़ी), उत्तर-पूर्वी (मेवाती), मध्य-पूर्वी (ढूँढाड़ी), दक्षिण-पूर्वी (मालवी) और दक्षिणी (निमाड़ी) शामिल है।
42. राजस्थान के चूरू क्षेत्र में कौन-सी बोली बोली जाती है?
📚 पशु परिचर 2024
A
वागड़ी
B
मालवी
C
शेखावाटी
D
हाड़ौती
📖 व्याख्या
चूरू जिला राजस्थान के शेखावाटी क्षेत्र (सीकर, झुंझुनूं, चूरू) का हिस्सा है। अतः यहाँ मुख्य रूप से शेखावाटी बोली बोली जाती है, जो मारवाड़ी की एक उप-बोली है। वागड़ी दक्षिणी राजस्थान (डूंगरपुर-बाँसवाड़ा) में, और हाड़ौती दक्षिण-पूर्वी राजस्थान (कोटा-बूंदी) में बोली जाती है। मलावी मध्य प्रदेश के मालवा क्षेत्र से सटी बोली है।
43. हाड़ा राजपूतों द्वारा शासित क्षेत्र में बोली जाने वाली बोली को बोली कहा जाता है।
📚 EO-RO 2023, पशु परिचर 2024
A
वागड़ी
B
भीली
C
हाड़ौती
D
मेवाती
📖 व्याख्या
राजस्थान के बूँदी, कोटा, बाराँ और झालावाड़ जिलों में मुख्य रूप से हाड़ौती बोली बोली जाती है। भरतपुर क्षेत्र में व्रज व मेवाती बोली बोली जाती है। मेवाती बोली मेव जाति के लोगों द्वारा बोली जाती है यह व्रजभाषा के समान है। मेवाती बोली में राजस्थानी और पश्चिमी हिंदी भाषाओं का मिश्रण है। हाड़ा राजपूतों द्वारा शासित क्षेत्र (कोटा, बूँदी, झालावाड़ और बारा) को 'हाड़ौती' के नाम से जाना जाता है।
44. राजस्थानी भाषा का विकास किस “अपभ्रंश” भाषा से नहीं हुआ है?
📚 पशु परिचर 2024
A
शौरसेनी अपभ्रंश
B
नागर अपभ्रंश
C
मारु गुर्जर अपभ्रंश
D
मागधी अपभ्रंश
📖 व्याख्या
मागधी अपभ्रंश पूर्वी भारत की भाषा थी, जिससे बिहारी, बांग्ला और असमिया जैसी भाषाओं का विकास हुआ। अतः इसका संबंध राजस्थानी भाषा के विकास से नहीं है। राजस्थानी भाषा का उद्भव शौरसेनी अपभ्रंश के एक विशिष्ट रूप ‘गुर्जरी अपभ्रंश’ से माना जाता है, जिसे कुछ विद्वान नागर या मारू-गुर्जर अपभ्रंश भी कहते हैं।
45. बीकानेरी, बागड़ी, शेखावाटी, मेवाड़ी, खैराड़ी, गोडवाड़ी, नागुरी, देवड़ावावी आदि उपबोलियाँ हैं-
📚 Archivist 2024
A
मेवाड़ी की
B
ढूँढाड़ी की
C
मेवाती की
D
मारवाड़ी की
📖 व्याख्या
बीकानेरी, बागड़ी, शेखावाटी, खैराड़ी, गोडवाड़ी, नागुरी, देवड़ावादी आदि सभी मारवाड़ी बोली की प्रमुख उपबोलियाँ हैं। मारवाड़ी, राजस्थान की सबसे प्रमुख और क्षेत्रफल की दृष्टि से सबसे बड़ी बोली है। मारवाड़ी पश्चिमी राजस्थान की मुख्य बोली है और इसका साहित्यिक रूप ‘डिंगल’ कहलाता है।
46. शब्द ‘छे’ कौन-सी बोली पर गुजराती प्रभाव दर्शाता है?
📚 पशु परिचर 2024
A
ढूंढाड़ी
B
वागड़ी
C
मेवाती
D
भीली
📖 व्याख्या
शब्द ‘छे’ का उपयोग ढूँढाड़ी बोली में गुजराती भाषा के प्रभाव को दर्शाता है। ढूँढाड़ी राजस्थान में बोली जाती है और इसमें गुजराती का प्रभाव देखा जाता है। इसलिए ‘छे’ शब्द का उपयोग ढूँढाड़ी में प्रचलित है।
47. राजस्थानी भाषा के निश्चित साहित्य में चारणों द्वारा कौन-सी भाषा प्रयुक्त की जाती थी?
📚 Jr. Instructor 2024, B.S.T.C (Pre.) 2016
A
मारवाड़ी
B
मारुवणी
C
पिंगल
D
डिंगल
📖 व्याख्या
राजस्थानी साहित्य की दो प्रमुख शैलियों रही हैं डिंगल और पिंगल। हिंगल शैली विशेष रूप से चारण कवियों द्वारा विकसित की गई थी, जो पश्चिमी राजस्थानी (मारवाड़ी) का साहित्यिक रूप है। यह वीर रस की कविताओं के लिए अत्यंत उपयुक्त मानी जाती है क्योंकि इसमें ध्वन्यात्मकता और ओज का गुण प्रधान होता है।
48. सूची-1 को सूची-II से सुमेलित कीजिए :
सूची-I बोली/ उपभाषा - सूची-II मुख्य रूप से इन मंडलों / क्षेत्रों में बोली जाती है।
(A) हाड़ौती -(i) जोधपुर, जैसलमेर
(B) ब्रज भाषा -(ii) सीकर, झुंझुनूँ
(c) मारवाड़ी -(iii) भरतपुर, करौली
(D) शेखावाटी -(iv) झालावाड़, बाराँ
नीचे दिए गए विकल्पों में से सर्वाधिक उपयुक्त उत्तर चुनिएः
📚 CET (10+2) 2024
A
A-ii, B-iii, C-iv, D-i
B
A-iii, B-ii, C-iv, D-i
C
A-iv, B-iii, C-(c), D-ii
D
A-(c), B-iv, C-iii, D-ii
📖 व्याख्या
हाड़ौती- झालावाड़, बाराँ (यह कोटा, बूँदी, बाराँ और झालावाड़ के हाड़ौती क्षेत्र में बोली जाती है)। ब्रज भाषा भरतपुर, करौली (यह राजस्थान के पूर्वी क्षेत्रों में, विशेषकर भरतपुर और धौलपुर में बोली जाती है)। मारवाड़ी – जोधपुर, जैसलमेर (यह पश्चिमी राजस्थान की प्रमुख बोली है)। शेखावाटी सीकर, झुंझुनूँ (यह सीकर, झुंझुनूँ और चूरू के शेखावाटी क्षेत्र में बोली जाती है)।
49. निम्न में से कौन सा युग्म सही नहीं है?
📚 B.S.T.C (Pre.) 2024
A
अलवर – मेवाती
B
झुंझुनूं – शेखावाटी
C
भरतपुर – ढूँढाड़ी
D
झालावाड़ हाड़ौती
📖 व्याख्या
भरतपुर – ढूँढाड़ी युग्म सही नहीं है क्योंकि भरतपुर में ब्रज भाषा बोली जाती है, जबकि ढूँढाड़ी जयपुर और उसके आसपास के क्षेत्रों में बोली जाती है। मेवाती अलवर में, शेखावाटी झुंझुनूं में और हाड़ौती झालावाड़ में बोली जाती है।
50. ‘निमाड़ी एवं रागड़ी’ किस बोली की विशेषता है?
📚 (VDO) 2016 - 2021, Technical Asst. 2024
A
हाड़ौती
B
मेवाती
C
मालवी
D
अहीरवाटी
📖 व्याख्या
निमाड़ी/रागड़ी बोली मालवी की एक उपबोली है और यह दक्षिणी राजस्थानी के अंतर्गत आती है। यह मुख्य रूप से मध्य प्रदेश के नीमाड़ क्षेत्र में बोली जाती है, जो राजस्थान की सीमा से लगा हुआ है। निमाड़ी और रागड़ी मालवी बोली की उपबोली है। पश्चिमी राजस्थानीः इसमें मारवाड़ी, मेवाड़ी जैसी बोलियाँ आती हैं।