राजस्थान में मध्यकालीन प्रशासन व सामंती व्यवस्था Important MCQ | Rajasthan GK Questions in Hindi
इस पोस्ट में राजस्थान का इतिहास के टॉपिक
राजस्थान में मध्यकालीन प्रशासन व सामंती व्यवस्था से संबंधित Latest व पूर्णतः updated महत्वपूर्ण
MCQ
प्रश्न दिए गए हैं।
ये महत्वपूर्ण MCQ प्रश्न
RPSC,
RSSB,
RAS, Patwar, Police, LDC, VDO, REET
तथा राजस्थान राज्य की अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए
उपयोगी हैं। इनमें विषयवार प्रश्न, सही उत्तर एवं विस्तृत व्याख्या
शामिल हैं।
✍️ Prepared & Reviewed by:
Rajputana Diary –
Rajasthan GK Faculty & Content Team
(Since 2021)
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1. जयपुर राज्य में प्रधानमंत्री के लिए किस शब्द का प्रयोग किया जाता था?
A
मुसाहिब
B
फौजदार
C
दीवान
D
कोतवाल
📖 व्याख्या
जयपुर राज्य में प्रधानमंत्री के लिए ‘मुसाहिब’ शब्द का प्रयोग किया जाता था। मुसाहिब शासक का निकट सहयोगी होता था और प्रशासनिक कार्यों में प्रमुख भूमिका निभाता था। विभिन्न रियासतों में प्रधानमंत्री के लिए अलग-अलग पदनाम प्रचलित थे, जैसे कोटा में फौजदार कहा जाता था।
2. भाटों और चारणों को शासकों द्वारा दी गई जमीन जानी जाती थी?
A
चकरी
B
पुण्य-उदक
C
सनद
D
भोग
📖 व्याख्या
चारणों और भाटों को दी गई भूमि ‘पुण्य-उदक’ कहलाती थी। यह दान स्वरूप दी जाती थी और सामान्यतः वापस नहीं ली जाती थी। ‘उदक उथापै ताही उदक लागै नाही’ कहावत इसी परंपरा को दर्शाती है, जो राजस्थान की सामाजिक-धार्मिक व्यवस्था में महत्वपूर्ण थी।
3. मध्य कालीन राजस्थानी समाज में शराब के एक प्रकार के लिए किस पद का प्रयोग किया जाता था?
A
इंडोर
B
मोफोर
C
दारू
D
आउटडोर
📖 व्याख्या
मध्यकालीन राजस्थानी समाज में ‘मोफोर’ शब्द शराब के एक प्रकार के लिए प्रयुक्त होता था। उस समय विभिन्न प्रकार के स्थानीय शब्द प्रचलित थे जो सामाजिक जीवन और लोक संस्कृति को दर्शाते हैं। यह शब्द विशेष रूप से ग्रामीण एवं सामंती परिवेश में उपयोग में आता था।
4. भयाद अथवा भाईबंद की परंपरा का संबंध निम्न में से किससे है?
A
कर व्यवस्था
B
मनसबदारी
C
जागीर प्रणाली
D
भू-राजस्व
📖 व्याख्या
‘भयाद’ या ‘भाईबंद’ परंपरा का संबंध जागीर प्रणाली से था। इसमें एक ही वंश या परिवार के सदस्यों को जागीरें प्रदान की जाती थीं। इससे सत्ता और संपत्ति परिवार के भीतर ही बनी रहती थी और प्रशासनिक नियंत्रण भी सुदृढ़ रहता था।
5. मारवाड़ में जागीरदारों की चार मुख्य श्रेणियाँ
A
राजवी, हजुरथी, देशरथी, सरदार
B
राजवी, गनायत, सरदार, खासचौकी
C
राजवी, सरदार, मुत्सद्दी, गनायत
D
राजवी, ताजीमी, सरदार, गनायत
📖 व्याख्या
मारवाड़ में जागीरदारों को चार मुख्य श्रेणियों—राजवी, सरदार, मुत्सद्दी और गनायत—में विभाजित किया गया था। यह वर्गीकरण उनके पद, अधिकार और प्रशासनिक भूमिका के आधार पर किया जाता था, जिससे शासन व्यवस्था सुचारु रूप से संचालित हो सके।
6. निम्न में से कौन गाँव के चाकर होते थे, जो जागीरदार के लिए संदेश वाहक का कार्य करते थे?
A
भांभी या बलाई
B
कणवारिया
C
मीना / बावरी
D
दरोगा
📖 व्याख्या
भांभी या बलाई गाँव के चाकर होते थे जो संदेश वाहक का कार्य करते थे। ये लोग सफाई जैसे कार्य भी करते थे और ग्रामीण प्रशासन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते थे। जागीरदार और जनता के बीच संचार में इनकी विशेष भूमिका होती थी।
7. मारवाड़ में मृत पशुओं की कच्ची खालों पर लगने वाली एक प्रमुख लाग थी-
A
भावां लाग
B
तिवारा लाग
C
अखराई लाग
D
न्यौता लाग
📖 व्याख्या
मारवाड़ में मृत पशुओं की कच्ची खालों पर ‘भावां लाग’ नामक कर लगाया जाता था। यह स्थानीय कर व्यवस्था का हिस्सा था, जिससे राज्य को आय प्राप्त होती थी। विभिन्न वस्तुओं पर अलग-अलग प्रकार की लागें लगाई जाती थीं।
8. लाटा अथवा लाटाई क्या था?
A
पट्टा में लिखा हुआ निर्धारित कर
B
भू-राजस्व व्यवस्था, जिसमें भुगतान फसल के रूप में होता था।
C
अनाज तैयार होने के बाद का बंटवारा
D
इनमें से कोई नहीं
📖 व्याख्या
‘लाटा’ या ‘लाटाई’ एक प्रकार की भू-राजस्व व्यवस्था थी जिसमें कर का भुगतान नकद के बजाय फसल के रूप में किया जाता था। यह प्रणाली कृषि आधारित अर्थव्यवस्था में प्रचलित थी और किसानों के लिए सुविधाजनक मानी जाती थी।
9. मेवाड़ में नए महाराणा का सिंहासनारोहण किस ठिकाने की सहमति से होता था?
A
बनेड़ा
B
शाहपुरा
C
सलूम्बर
D
बेदला
📖 व्याख्या
मेवाड़ में नए महाराणा के सिंहासनारोहण के लिए सलूम्बर ठिकाने की सहमति आवश्यक होती थी। सलूम्बर के सरदारों का विशेष महत्व था और वे उत्तराधिकार की प्रक्रिया में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते थे।
10. जयपुर राज्य में भूमि संबंधी रिकॉर्ड किस नाम से जाता था?
A
खसरा
B
तजकीरा
C
अड़सट्टा
D
छूट के कागद
📖 व्याख्या
जयपुर राज्य में भूमि संबंधी रिकॉर्ड को ‘अड़सट्टा’ कहा जाता था। इसमें परगनों के गाँवों, भूमि, पैदावार आदि का विस्तृत विवरण होता था। यह राजस्व प्रशासन के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण दस्तावेज था।
11. मुगल बादशाह द्वारा जारी शाही आदेश..... कहलाता था।
A
फरमान
B
परवाना
C
निशान
D
रूक्का
📖 व्याख्या
मुगल बादशाह द्वारा जारी आधिकारिक आदेश को ‘फरमान’ कहा जाता था। यह सर्वोच्च स्तर का शाही आदेश होता था और पूरे साम्राज्य में इसका पालन अनिवार्य होता था।
12. राजा द्वारा अपने अधीनस्थ को जारी किया जाने वाला आदेश कहलाता था।
A
फरमान
B
मन्सूर
C
सनद
D
परवाना
📖 व्याख्या
राजा द्वारा अपने अधीनस्थ अधिकारियों को जारी आदेश को ‘परवाना’ कहा जाता था। यह प्रशासनिक आदेश होता था, जो स्थानीय स्तर पर कार्यों के संचालन के लिए जारी किया जाता था।
13. खाती, लुहार, नाई, धोबी आदि को धान की ढेरी में से कुछ मुट्ठियों अनाज देने का रिवाज किस रियासत में था?
A
बीकानेर
B
मारवाड़
C
कोटा
D
जयपुर
📖 व्याख्या
मारवाड़ में यह प्रथा प्रचलित थी कि खाती, लुहार, नाई, धोबी आदि को धान की ढेरी से कुछ अनाज दिया जाता था। इसके साथ ही मंदिरों को भी भेंट स्वरूप अनाज देना निर्धारित था, जो सामाजिक सहयोग की परंपरा को दर्शाता है।
14. बादशाह की मौजूदगी में शहजादे द्वारा जारी किया गया शाही आदेश कहलाता था।
A
निशान
B
मन्सूर
C
रूक्का
D
खरीता
📖 व्याख्या
बादशाह की उपस्थिति में शहजादे द्वारा जारी आदेश को ‘मन्सूर’ कहा जाता था। यह आदेश शाही अधिकार का प्रतीक होता था और प्रशासनिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जाता था।
15. जब तब बंटाई नहीं होती थी, तब तक खलिहान में रखे धान की चौकीदारी का कार्य किसका होता था?
A
मीणा व बावरी
B
पटवारी व कामदार
C
बलाई व सहणा
D
पटरवारी व हवालदार
📖 व्याख्या
बंटाई होने तक खलिहान में रखे धान की चौकीदारी का कार्य बलाई व सहणा करते थे। सामान्य परिस्थितियों में चौकीदारी मीणा व बावरी करते थे, लेकिन विशेष स्थिति में यह जिम्मेदारी बलाई व सहणा को दी जाती थी।
16. मुगल बादशाह द्वारा अपने अधीनस्थ को जागीर प्रदान करने की लिखित स्वीकृति क्या कहलाती थी?
A
सनद
B
रूक्का
C
वाकया
D
निशान
📖 व्याख्या
मुगल शासन में जागीर प्रदान करने की लिखित स्वीकृति को ‘सनद’ कहा जाता था। यह आधिकारिक दस्तावेज होता था जो जागीरदार के अधिकारों को प्रमाणित करता था और प्रशासनिक रूप से महत्वपूर्ण था।
17. परगना प्रशासन में शासकीय व न्याय सम्बन्धी कार्यों के लिए नियुक्त सर्वोच्च अधिकारी था-
A
ओहदेदार
B
हाकिम
C
पोतदार
D
आमील
📖 व्याख्या
परगना स्तर पर प्रशासनिक और न्यायिक कार्यों के लिए ‘हाकिम’ सर्वोच्च अधिकारी होता था। इसकी नियुक्ति सीधे महाराजा द्वारा की जाती थी और यह प्रशासन का प्रमुख प्रतिनिधि होता था।
18. प्रशासन की सबसे छोटी इकाई गाँव थी, जिसे कहा जाता था-
A
चीरा
B
तपो
C
मौजा
D
जागीर
📖 व्याख्या
प्रशासन की सबसे छोटी इकाई गाँव को ‘मौजा’ कहा जाता था। राजस्व वसूली की सुविधा के लिए परगनों को ‘तपो’ में विभाजित किया जाता था, जो गाँवों का समूह होता था।
19. राज्य/राजा के सीधे स्वामित्व की भूमि कहलाती थी-
A
खालसा
B
हवाला
C
जागीर
D
भोम
📖 व्याख्या
राज्य या राजा के सीधे स्वामित्व वाली भूमि को ‘खालसा’ कहा जाता था। यह भूमि अधिक उपजाऊ होती थी और इसका नियंत्रण सीधे राज्य के पास रहता था, जिसका प्रबंधन दीवान द्वारा किया जाता था।
20. किसी मन्दिर, मठ या धार्मिक स्थान को दान में दी गई भूमि कहलाती थी?
A
इनाम
B
भोम
C
डोहली
D
मजारा
📖 व्याख्या
मंदिर, मठ या अन्य धार्मिक संस्थानों को दान में दी गई भूमि ‘डोहली’ कहलाती थी। यह धार्मिक उद्देश्यों के लिए दी जाती थी और सामान्यतः इस पर कर नहीं लगाया जाता था, जिससे धार्मिक संस्थानों का संचालन सुचारु रूप से हो सके।
21. लगान वसूल करने की वह प्रणाली जिसमें खेत में खड़ी फसल का अनुमान लगाकर राज्य का हिस्सा तय किया जाता था?
A
लाटा
B
कुंता
C
बंटाई
D
जब्ती
📖 व्याख्या
‘कुंता’ प्रणाली में खेत में खड़ी फसल का अनुमान लगाकर लगान निर्धारित किया जाता था। इसे ‘कांकड़ कुंता’ भी कहा जाता था। इस पद्धति में वास्तविक उत्पादन से पहले ही राज्य का हिस्सा तय कर लिया जाता था, जिससे प्रशासन को अनुमानित राजस्व प्राप्त हो सके।
22. मेवाड़ क्षेत्र के किसानों से लगान या अदायगी के लिए राज्य द्वारा स्थानीय महाजन से आश्वासन लिया जाता था यह प्रथा कहलाती थी?
A
इजारा प्रणाली
B
घुघरी
C
साद प्रथा
D
मुकाता
📖 व्याख्या
मेवाड़ में ‘साद प्रथा’ के अंतर्गत राज्य किसानों से लगान वसूली के लिए स्थानीय महाजन से आश्वासन लेता था। महाजन किसानों की ओर से भुगतान की गारंटी देता था, जिससे राज्य को राजस्व सुनिश्चित रूप से प्राप्त हो सके।
23. महाराजा तख्त सिंह द्वारा किस वर्ष अध्यादेश जारी कर सामंतों द्वारा भूमिदान में देना अवैध घोषित किया गया-
A
1850
B
1750
C
1845
D
1745
📖 व्याख्या
महाराजा तख्त सिंह ने 30 मई, 1850 को एक अध्यादेश जारी किया, जिसमें सामंतों द्वारा भूमिदान देना अवैध घोषित किया गया। इस निर्णय का उद्देश्य भूमि व्यवस्था को नियंत्रित करना और अनियंत्रित दान को रोकना था।
24. बीकानेर राज्य में सामन्त कितने भागों में विभाजित थे?
📖 व्याख्या
बीकानेर राज्य में सामंतों को तीन भागों में विभाजित किया गया था। यह विभाजन उनके अधिकार, कर्तव्यों और प्रशासनिक स्थिति के आधार पर किया जाता था, जिससे शासन व्यवस्था को व्यवस्थित रखा जा सके।
25. निम्न में से कौनसा कूट (रियासत - शासक) सुमेलित नहीं है?
A
मारवाड़ राज्य में गृहकर कहलाता था - घर गिनती
B
जयपुर राज्य में गृहकर कहलाता था- घर की बिछीती
C
बीकानेर राज्य में गृहकर कहलाता था- धुँआ भाछ
D
मेवाड़ राज्य में गृहकर कहलाता था- घर बराड़
📖 व्याख्या
मेवाड़ राज्य में गृहकर ‘घर गिनती बराड़’ कहलाता था, न कि केवल ‘घर बराड़’। जबकि ‘घर बराड़’ शब्द कोटा राज्य में प्रचलित था। इसलिए दिया गया संयोजन असंगत है।
26. जोधपुर राज्य में विधवा के पुनर्विवाह पर लिया जाने वाला कर था?
A
नाता बराड़
B
नाता कागली
C
कागली
D
जेली राशि
📖 व्याख्या
जोधपुर राज्य में विधवा के पुनर्विवाह पर ‘कागली’ नामक कर लिया जाता था। इसे ‘नाता कर’ भी कहा जाता था और प्रति विवाह एक रुपये की दर से लिया जाता था, जो सामाजिक प्रथाओं से जुड़ा हुआ था।
27. मेवाड़ और जैसलमेर राज्यों में माल के आयात व निर्यात पर लगाया जाने वाला कर था?
A
राहदारी
B
गनीम बराड़
C
दाण
D
राली लाग
📖 व्याख्या
मेवाड़ और जैसलमेर में आयात-निर्यात पर ‘दाण’ नामक कर लगाया जाता था। यह व्यापारिक कर था, जिससे राज्य को राजस्व प्राप्त होता था और व्यापारिक गतिविधियों को नियंत्रित किया जाता था।
28. पशुओं की बिक्री के समय वसूली जाने वाली लाग थी?
A
सिंगोटी
B
अखराई लाग
C
कांसा लाग
D
जाजम लाग
📖 व्याख्या
पशुओं की खरीद-बिक्री के समय ‘सिंगोटी’ नामक लाग वसूली जाती थी। यह स्थानीय कर प्रणाली का हिस्सा था और पशु व्यापार से राज्य को आय प्राप्त करने का एक प्रमुख साधन था।
29. राजस्थान की सामंती व्यवस्था की तुलना किस विद्वान ने मध्ययुगीन युरोपीय सामंती पद्धति से की है?
A
कर्नल जेम्स टॉड
B
गोपीनाथ शर्मा
C
डी. डी. कौशाम्बी
D
कोवालस्की
📖 व्याख्या
कर्नल जेम्स टॉड ने राजस्थान की सामंती व्यवस्था की तुलना यूरोप की मध्ययुगीन सामंती प्रणाली से की थी। उन्होंने अपनी प्रसिद्ध कृति में राजस्थान की सामाजिक-राजनीतिक संरचना का विस्तृत वर्णन किया है।
30. जयपुर राज्य में उत्तराधिकार शुल्क को किस नाम से जाना जाता था?
A
पेशकशी
B
नजराना
C
कैदखालसा
D
हुक्मनामा
📖 व्याख्या
जयपुर राज्य में उत्तराधिकार शुल्क को ‘नजराना’ कहा जाता था। यह शुल्क उत्तराधिकारी द्वारा गद्दी संभालते समय दिया जाता था। अन्य रियासतों में इसके अलग नाम थे, जैसे जोधपुर में ‘पेशकशी’ और बाद में ‘हुक्मनामा’।
31. राजस्थान की वह एकमात्र रियासत जहाँ उत्तराधिकार शुल्क नहीं लिया जाता था ?
A
बीकानेर
B
कोटा
C
जैसलमेर
D
किशनगढ़
📖 व्याख्या
जैसलमेर वह एकमात्र रियासत थी जहाँ उत्तराधिकार शुल्क नहीं लिया जाता था। यह इसकी विशिष्ट प्रशासनिक परंपरा को दर्शाता है, जो अन्य राज्यों से भिन्न थी।
32. मेवाड़ में द्वितीय श्रेणी के सामन्त क्या कहलाते थे?
A
उमराव
B
बत्तीस के सरदार
C
गोल
D
गनायत
📖 व्याख्या
मेवाड़ में सामंतों को विभिन्न श्रेणियों में बांटा गया था, जिसमें द्वितीय श्रेणी के सामंत ‘बत्तीस के सरदार’ कहलाते थे। यह वर्गीकरण उनके पद और महत्व के अनुसार किया गया था।
33. किस राज्य में सामंतों का विभाजन बारह कोटड़ी पर आधारित वा?
A
जयपुर
B
मेवाड़
C
मारवाड़
D
कोटा
📖 व्याख्या
जयपुर राज्य में सामंतों का विभाजन ‘बारह कोटड़ी’ के आधार पर किया गया था। यह व्यवस्था कच्छवाहा शासक पृथ्वीराज के 12 पुत्रों से संबंधित थी, जिनके नाम पर स्थायी जागीरें स्थापित की गई थीं।
34. उमराव किस रियासत के सामंत थे?
A
जयपुर
B
मेवाड़
C
मारवाड़
D
कोटा
📖 व्याख्या
‘उमराव’ मेवाड़ राज्य के प्रथम श्रेणी के सामंत थे। इनकी संख्या सोलह थी और ये राज्य के सबसे प्रतिष्ठित सरदार माने जाते थे, जो प्रशासन और युद्ध में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते थे।
35. कोटा राज्य में सामंत कितनी श्रेणियों में विभाजित थे?
📖 व्याख्या
कोटा राज्य में सामंत दो श्रेणियों—देशथी और हजूरथी—में विभाजित थे। यह वर्गीकरण उनके कार्य और राज्य से संबंध के आधार पर किया गया था, जिससे प्रशासनिक कार्यों का संचालन सुचारु रूप से हो सके।
36. 19 वीं सदी के प्रथम इतिहासकार जिन्होंने राजस्थान की सामंतवादी व्यवस्था के बारे में लिखा, वह थे-
A
डॉ. ओझा
B
कर्नल टॉड
C
टेस्सीटोरी
D
दशरथ शर्मा
📖 व्याख्या
19वीं सदी में कर्नल टॉड पहले इतिहासकार थे जिन्होंने राजस्थान की सामंतवादी व्यवस्था का विस्तृत वर्णन किया। उनकी कृति ‘Annals and Antiquities of Rajasthan’ ऐतिहासिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जाती है।
37. मुगल परिपाटी के अनुसार सामन्तों की जागीर की वार्षिक उपज का अनुमान क्या कहलाता था?
A
उत्तराधिकारी शुल्क
B
न्योता शुल्क
C
रेख
D
तलवार बंधाई
📖 व्याख्या
मुगल प्रशासन में जागीर की वार्षिक आय के अनुमान को ‘रेख’ कहा जाता था। यह अनुमान राजस्व निर्धारण के लिए महत्वपूर्ण होता था और जागीरदार की आय एवं दायित्व तय करने में सहायक था।
38. राजस्थान की रियासतों में प्रशासन का संचालन करने वाला अधिकारी क्या कहलाता था?
A
पालाध्यक्ष
B
मुत्सद्दी
C
खानसामान
D
प्याद बख्शी
📖 व्याख्या
राजस्थान की रियासतों में प्रशासनिक कार्यों का संचालन ‘मुत्सद्दी’ द्वारा किया जाता था। यह अधिकारी विभिन्न विभागों का प्रबंधन करता था और शासन व्यवस्था को सुचारु बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता था।
39. मारवाड़ व बीकानेर राज्यों में परगने का मुख्य अधिकारी हाकिम होता था, इसी प्रकार कोटा राज्य में परगने का प्रधान अधिकारी क्या कहलाता था?
A
पोतदार
B
फौजदार
C
हवालगिर
D
हवलदार
📖 व्याख्या
कोटा राज्य में परगने के मुख्य अधिकारी को ‘हवालगिर’ कहा जाता था। यह अधिकारी प्रशासनिक और राजस्व कार्यों का संचालन करता था, जबकि अन्य राज्यों में इसी पद को ‘हाकिम’ या ‘फौजदार’ कहा जाता था।
40. राज्य प्रशासन में राजा के बाद निम्न में से किसकी सर्वाधिक महत्ता वी व उसको राज्य की रीढ़ की हड्डी माना जाता था?
A
फौजदार
B
सेनापति
C
सामन्त
D
किलेदार
📖 व्याख्या
राज्य प्रशासन में राजा के बाद ‘सामंत’ सबसे महत्वपूर्ण माने जाते थे। उन्हें राज्य की रीढ़ की हड्डी कहा जाता था क्योंकि वे प्रशासन, सैन्य सहायता और राजस्व व्यवस्था में महत्वपूर्ण योगदान देते थे।
41. निम्नलिखित में से कौनसा कथन असत्य है-
A
मेवाड़ में नगर प्रशासन का अधिकारी शिकदार होता था।
B
जोधपुर में नगर प्रशासन का अधिकारी शिकदार होता था जिसे कालांतर में कोतवाल के नाम से जाना जाने लगा।
C
धर्म तथा दान संबंधी कार्यों के लिए एक पृथक विभाग होता था जिसे धर्मार्थ विभाग कहा जाता था।
D
उदयपुर में धर्मार्थ विभाग के अध्यक्ष को 'दानाध्यक्ष' कहा जाता था।
📖 व्याख्या
मेवाड़ राज्य में ‘शिकदार’ पद का उल्लेख नहीं मिलता। वहाँ नगर प्रशासन का मुख्य अधिकारी ‘कोतवाल’ होता था। अन्य कथन सही हैं, क्योंकि जोधपुर में शिकदार बाद में कोतवाल कहलाने लगा तथा धर्मार्थ विभाग और दानाध्यक्ष का उल्लेख भी ऐतिहासिक रूप से सही है।
42. निम्नलिखित को सुमेलित कीजिये तथा नीचे दिये गये कूटों में से सही उत्तर का चुनाव कीजिए:
4 परगना में शासकीय तथा न्याय संबंधी अधिकारी - i. दरोगा-ए-फरासरखाना
B. डाक प्रबंध के कार्य का अधिकारी - ii. दरोगा-ए-डाकचौकी
C. सामान के विभाग का अध्यक्ष - iii. हाकिम
D. चूंगी वसूली के कार्य का अधिकारी - iv. दरोगा-ए-सायर
A
i, ii, iii, iv
B
ii, i, iv, iii
C
iii, ii, i, iv
D
iii, ii, iv, i
📖 व्याख्या
सही सुमेल इस प्रकार है—परगना का शासकीय व न्याय अधिकारी ‘हाकिम’ (iii), डाक प्रबंध अधिकारी ‘दरोगा-ए-डाकचौकी’ (ii), सामान विभाग का अध्यक्ष ‘दरोगा-ए-फरासरखाना’ (i) तथा चूंगी वसूली अधिकारी ‘दरोगा-ए-सायर’ (iv) होता था। इसलिए सही कूट (iii, ii, iv, i) है।
43. मध्यकालीन प्रशासन व्यवस्था में वित्त विभाग का सचिव किस नाम से जाना जाता था?
A
दरोगा-ए-आबदार
B
दरोगा-ए-सायर
C
मुशरीफ
D
शिकदार
📖 व्याख्या
मध्यकालीन प्रशासन में ‘मुशरीफ’ वित्त विभाग का सचिव होता था। यह अधिकारी आय-व्यय का लेखा-जोखा रखता था तथा राजस्व व्यवस्था को व्यवस्थित बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता था।
44. राजा की अनुपस्थिति में राज्य प्रशासन की बागडोर दीवान के हाथों में रहती थी तब उसे क्या कहा जाता था?
A
अमीन
B
देश दीवान
C
दरोगा मुशरिफ
D
आमिल
📖 व्याख्या
जब राजा अनुपस्थित होता था, तब दीवान को पूर्ण प्रशासनिक अधिकार मिल जाते थे और उसे ‘दरोगा मुशरिफ’ कहा जाता था। वह राज्य के वित्त और प्रशासन दोनों का संचालन करता था।
45. मेवाड़ में प्रत्येक बड़े नगर में एक 'नगर सेठ' होता था जिसे किस पद पर मनोनीत किया जाता था?
A
साहूकार
B
पटवारी
C
न्यायाधीश
D
चौधरी या पटेल
📖 व्याख्या
मेवाड़ में ‘नगर सेठ’ को न्यायाधीश के पद पर नियुक्त किया जाता था। वह व्यापारिक विवादों और स्थानीय मामलों का निपटारा करता था, जिससे नगर प्रशासन में संतुलन बना रहता था।
46. निम्न में से किस प्रणाली के तहत् अधिक बोली लगाने वाले किसान को भूमि ठेके पर दी जाती थी, जिससे राज्य को अधिक राजस्व की प्राप्ति होती थी?
A
मुकाता प्रणाली
B
बीज घुघरी
C
लाटा प्रणाली
D
इजारा प्रणाली
📖 व्याख्या
‘इजारा प्रणाली’ में भूमि ठेके पर उस किसान को दी जाती थी जो अधिक बोली लगाता था। इससे राज्य को अधिक राजस्व प्राप्त होता था, लेकिन किसानों पर आर्थिक बोझ भी बढ़ जाता था, जिससे उनकी स्थिति प्रभावित होती थी।
47. अधिकारियों के पशुओं की चराई के लिए कौनसा कर लिया जाता था?
A
नाली
B
सिराणा
C
खूंटा
D
हुजदार
📖 व्याख्या
अधिकारियों के पशुओं की चराई के लिए ‘खूंटा कर’ लिया जाता था। यह कर पशुओं को बांधने या चराने के अधिकार के बदले लिया जाता था और यह स्थानीय कर व्यवस्था का हिस्सा था।
48. खानवा युद्ध के बाद राजपुताना में भी तोपखाने खोले गए। यहाँ तोपे मुख्यतः कितने प्रकार की होती थी?
📖 व्याख्या
खानवा युद्ध के बाद राजपूताना में तोपखानों का विकास हुआ। यहाँ मुख्यतः दो प्रकार की तोपें होती थीं—जिन्सी और दस्ती। जिन्सी भारी तोपें होती थीं, जबकि दस्ती हल्की और चलाने में आसान होती थीं।
49. निम्न कथनों पर विचार करें-
(1) 'खेड़ खर्च' सेना के नाम से लिया जाने वाला कर था।
(2) जयपुर में 'दस्तुर-उल-अमल' में राजस्व दरें दर्ज होती थीं।
(3) मेवाड़ में जागीरदार अपनी आय का 1/6 भाग 'छटूंद' के रूप में देता था।
(4) बंटाई तक धान की चौकीदारी बलाई व सहणा करते थे।
सही कूट का चयन करें-
A
Fri Jan 02 2026 00:00:00 GMT+0530 (India Standard Time)
B
2,3,4
C
Wed Mar 04 2026 00:00:00 GMT+0530 (India Standard Time)
D
1, 2, 3, 4
📖 व्याख्या
सभी कथन सही हैं। ‘खेड़ खर्च’ सेना हेतु कर था, ‘दस्तुर-उल-अमल’ में राजस्व दरें दर्ज होती थीं, मेवाड़ में ‘छटूंद’ के रूप में 1/6 आय दी जाती थी तथा बंटाई तक धान की चौकीदारी बलाई और सहणा करते थे।
50. राजस्थान में विभिन्न रियासतों में कवियों, दरबारियों व अन्य श्रेष्ठ व्यक्तियों को राजपरिवार की तरफ से सम्मान / पुरस्कार दिया जाता था जिसे 'सिरोपाव' कहा जाता था, मारवाड़ का सर्वोच्च सिरोपाव था?
A
घोड़ा सिरोपाव
B
हाथी सिरोपाव
C
कड़ा दुशाला सिरोपाव
D
मदील सिरोपाव
📖 व्याख्या
मारवाड़ में ‘हाथी सिरोपाव’ सर्वोच्च सम्मान माना जाता था। यह विशेष अवसरों पर उत्कृष्ट सेवाओं के लिए दिया जाता था और यह राजकीय सम्मान का उच्चतम प्रतीक था, जो प्राप्तकर्ता की प्रतिष्ठा को दर्शाता था।