राजस्थान की प्रथाएँ व रीति-रिवाज, संस्कार, कुप्रथाएं MCQ Questions with Answers

राजस्थान की प्रथाएँ व रीति-रिवाज, संस्कार, कुप्रथाएं (Customs and Customs, Rituals, and Evil Practices of Rajasthan) MCQ – Part 5

इस पोस्ट में राजस्थान की कला एवं संस्कृति के टॉपिक राजस्थान की प्रथाएँ व रीति-रिवाज, संस्कार, कुप्रथाएं से संबंधित Latest व पूर्णतः updated महत्वपूर्ण MCQ प्रश्न दिए गए हैं। इनमें कोथला, पहरावनी, मायरा भरना, जातकर्म, गोद भराई, चिकनी कोथली, निष्कर्मण, जुआ-जुई, उजमणो, व्रत खोलना आदि से सम्बंधित महत्वपूर्ण जानकारियों को व्याख्या सहित शामिल किया गया है।

ये MCQ प्रश्न RPSC, RSMSSB, RSSB, RAS, Patwar, Police SI & Constable, LDC, VDO, Agriculture Supervisor, Fireman, Woman Superwiser, REET, Teacher, वनपाल, वनरक्षक तथा राजस्थान राज्य की अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए अत्यंत उपयोगी हैं।

  • Subject: राजस्थान की कला एवं संस्कृति
  • Topic: राजस्थान की प्रथाएँ व रीति-रिवाज, संस्कार, कुप्रथाएं
  • Question: 81 से 100
  • Last Updated:

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81. किसी व्रत का उद्यापन कहलाता है?

  • (A) उजमणो
  • (B) व्रत खोलना
  • (C) व्रत समापन
  • (D) व्रत क्रिया

किसी व्रत के पूर्ण होने पर की जाने वाली अंतिम धार्मिक प्रक्रिया को ‘उजमणो’ कहा जाता है। इसमें पूजा, दान और प्रसाद वितरण जैसी क्रियाएँ शामिल होती हैं। यह व्रत की सफलता और धार्मिक संकल्प की पूर्ति का प्रतीक माना जाता है। राजस्थान की लोक परंपराओं में उजमणो को शुभ और धार्मिक समापन के रूप में महत्व दिया जाता है।

82. राजस्थान में बच्चे के जन्म के बाद कुलदेवी-देवता के मंदिर पर पूजा करने जाना क्या कहलाता है?

  • (A) फेरी देना
  • (B) मंदिर जाना
  • (C) जात देना
  • (D) शिशु परिक्रमा

बच्चे के जन्म के बाद कुलदेवी या कुलदेवता के मंदिर में जाकर पूजा करने की परंपरा को ‘जात देना’ कहा जाता है। यह रस्म नवजात के अच्छे स्वास्थ्य और परिवार की सुख-समृद्धि की कामना के लिए की जाती है। राजस्थान में यह पारिवारिक आस्था और धार्मिक परंपराओं का महत्वपूर्ण हिस्सा है।

83. काट्टा, मेक, लोकाई, कांदिया व मौसर संबंधित है?

  • (A) मृत्यु भोज से
  • (B) शादी में भोजन
  • (C) वस्त्र
  • (D) आभूषण

भीलों के मृत्यु भोज को काट्टा कहते हैं तथा गरासियों के मृत्यु भोज को मेक या कांदिया कहा जाता है।

84. बालक को प्रथम बार सूर्य व चन्द्रमा के दर्शन करवाये जाते हैं, इस संस्कार को कहेंगे?

  • (A) निष्कर्मण
  • (B) जातकर्म
  • (C) अन्नप्रासन
  • (D) नामकरण

निष्कर्मण संस्कार में बालक को पहली बार घर से बाहर निकालकर सूर्य और चन्द्रमा के दर्शन कराए जाते हैं। यह संस्कार बच्चे को बाहरी वातावरण से परिचित कराने का प्रतीक है। हिंदू परंपरा में इसे शिशु के विकास और प्रकृति से जुड़ाव की शुरुआत माना जाता है।

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85. वर-वधू के ननिहाल पक्ष के लोग विवाह के दिन वस्त्र, गहने व नकदी आदि लेकर आते हैं, इस प्रथा का राजस्थान में प्रचलित नाम है?

  • (A) पहरावनी
  • (B) मायरा भरना
  • (C) मायरा न्यूतना
  • (D) कोथला

राजस्थान में विवाह के अवसर पर ननिहाल पक्ष द्वारा वस्त्र, आभूषण और नकदी लाने की परंपरा को ‘मायरा भरना’ कहा जाता है। यह रस्म मामा पक्ष के स्नेह और सामाजिक दायित्व का प्रतीक होती है। विवाह समारोह में इसका विशेष महत्व होता है और इसे पारिवारिक सम्मान से जोड़ा जाता है।

86. 16 संस्कारों में हिन्दुओं का प्रथम संस्कार माना जाता है?

  • (A) गर्भाधान
  • (B) पुंसवन
  • (C) जातकर्म
  • (D) नामकरण

हिंदू धर्म के सोलह संस्कारों में गर्भाधान को पहला संस्कार माना जाता है। यह संतान प्राप्ति की धार्मिक प्रक्रिया से जुड़ा संस्कार है, जिसका उद्देश्य स्वस्थ और संस्कारी संतान की कामना करना होता है। प्राचीन भारतीय परंपरा में इसे पारिवारिक जीवन की शुरुआत का महत्वपूर्ण धार्मिक चरण माना गया है।

87. वर व वधू की माताएँ अपने पीहर पक्ष को शादी में आने का न्यौता देती है, इस प्रथा का राजस्थान में प्रचलित नाम है?

  • (A) मायरा भरना
  • (B) कोथला
  • (C) पहरावनी
  • (D) बत्तीसी न्यूतना

विवाह के अवसर पर वर और वधू की माताओं द्वारा अपने पीहर पक्ष को निमंत्रण देने की परंपरा ‘बत्तीसी न्यूतना’ कहलाती है। यह रस्म पारिवारिक संबंधों को मजबूत करने और रिश्तेदारों की सहभागिता सुनिश्चित करने के लिए की जाती है। राजस्थान की विवाह परंपराओं में इसका विशेष सामाजिक महत्व है।

88. वधू पक्ष की तरफ से लड़के को वस्त्र, गहने व नकदी आदि भेंट करना कहलाता है?

  • (A) कोथला
  • (B) टीका
  • (C) गोद भराई
  • (D) चिकनी कोथली

विवाह के अवसर पर वधू पक्ष द्वारा वर को वस्त्र, आभूषण और नकद राशि भेंट करने की रस्म को ‘टीका’ कहा जाता है। यह सम्मान और रिश्ते की स्वीकृति का प्रतीक होती है। राजस्थान की पारंपरिक विवाह विधियों में टीका एक महत्वपूर्ण रस्म मानी जाती है, जिसमें परिवार के बीच स्नेह और आदर प्रदर्शित किया जाता है।

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89. नवजात बच्चे को पेय पदार्थ घूंटी पिलाने वाले संस्कार को कहेंगे?

  • (A) निष्कर्मण
  • (B) जातकर्म
  • (C) अन्नप्रासन
  • (D) नामकरण

जातकर्म संस्कार शिशु के जन्म के तुरंत बाद किया जाता है, जिसमें नवजात को घूंटी या पेय पदार्थ पिलाने की रस्म शामिल होती है। यह संस्कार शिशु के जीवन की शुभ शुरुआत और स्वास्थ्य की कामना से जुड़ा होता है। हिंदू परंपराओं में इसे जन्म से संबंधित प्रमुख संस्कारों में गिना जाता है।

90. चिकनी कोथली है।

  • (A) अंत्येष्टि संस्कार
  • (B) विवाह की रस्म
  • (C) मृत्यु की रस्म
  • (D) सीमन्तोनयन संस्कार

चिकनी कोथली सीमन्तोनयन संस्कार से संबंधित मानी जाती है। यह गर्भावस्था के दौरान होने वाली रस्मों में शामिल है, जिसका उद्देश्य गर्भवती महिला और गर्भस्थ शिशु के कल्याण की कामना करना होता है। राजस्थान की लोक परंपराओं में यह रस्म धार्मिक आस्था और पारिवारिक उत्सव का हिस्सा मानी जाती है।

91. भदर का संबंध किससे है?

  • (A) विवाह संस्कार
  • (B) कर्णवेध संस्कार
  • (C) समावर्तन संस्कार
  • (D) अंत्येष्टि संस्कार

भदर का संबंध अंत्येष्टि संस्कार से माना जाता है। यह मृत्यु के बाद की जाने वाली रस्मों में शामिल है, जो शोक और श्रद्धांजलि से जुड़ी होती हैं। राजस्थान की लोक परंपराओं में भदर सामाजिक सहभागिता और मृतक के प्रति सम्मान का प्रतीक माना जाता है।

92. 16 संस्कारों में अंतिम संस्कार माना जाता है?

  • (A) उपनयन
  • (B) अंत्येष्टि
  • (C) निष्कर्मण
  • (D) सीमन्तोनयन

सोलह संस्कारों में अंत्येष्टि अंतिम संस्कार माना जाता है। यह मृत्यु के बाद की धार्मिक प्रक्रिया है, जिसमें शरीर का अंतिम संस्कार कर आत्मा की शांति की कामना की जाती है। हिंदू धर्म में इसे जीवन चक्र का अंतिम चरण माना गया है और धार्मिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है।

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93. निम्न में से किस प्रथा का संबंध विवाह से नहीं है?

  • (A) कोथला
  • (B) बरसी
  • (C) गोद भराई
  • (D) चिकनी कोथली

किसी की मृत्यु का दिन उसकी पुण्यतिथि को 'बरसी' कहा जाता है।

94. कांकण डोरा, घुड़चढ़ी, मधुपर्क, जुआ-जुई संबंधित है?

  • (A) विवाह की रस्में
  • (B) 16 संस्कारों में से
  • (C) मृत्यु की रस्में
  • (D) इनमें से कोई नहीं

कांकण डोरा, घुड़चढ़ी, मधुपर्क और जुआ-जुई सभी विवाह से संबंधित पारंपरिक रस्में हैं। ये रस्में विवाह समारोह को सांस्कृतिक और मनोरंजक बनाती हैं। राजस्थान की विवाह परंपराओं में इनका विशेष महत्व है, क्योंकि ये परिवारों के बीच आनंद और सामाजिक सहभागिता को दर्शाती हैं।

95. जौ या बाजरे के आटे से बना पिंड मृतक के हाथ में रखा जाता है, यह रस्म कहलाती है?

  • (A) बिखेर
  • (B) शांतरवारा
  • (C) पिण्डदान
  • (D) गोलपिण्ड

पिण्डदान मृत्यु संस्कार से संबंधित एक महत्वपूर्ण रस्म है, जिसमें आटे या चावल से बने पिंड अर्पित किए जाते हैं। यह मृतक की आत्मा की शांति और मोक्ष की कामना के लिए किया जाता है। हिंदू परंपराओं में इसे पितरों के प्रति श्रद्धा व्यक्त करने का प्रमुख माध्यम माना जाता है।

96. विवाह के बाद दामाद के पहली बार ससुराल आने पर चंवरी की मिट्टी उठवाकर जल स्रोत में बहाने की रस्म क्या कहलाती है?

  • (A) नांगल
  • (B) मांडा झांकना
  • (C) रोड़ी पूजन
  • (D) जुआ-जुई

विवाह के बाद जब दामाद पहली बार ससुराल आता है, तब चंवरी स्थान की मिट्टी उठवाकर जल स्रोत में बहाने की रस्म को ‘मांडा झांकना’ कहा जाता है। यह रस्म वैवाहिक जीवन की शुभता और नई शुरुआत का प्रतीक मानी जाती है। राजस्थान की लोक परंपराओं में यह विशेष सांस्कृतिक महत्व रखती है।

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97. शादी के बाद देव स्थान पर वर-वधू द्वारा नीम की डाली से खेला जाने वाला खेल क्या कहलाता है?

  • (A) सोटा-सोटी
  • (B) जुआ-जुई
  • (C) वर व वधू पिटाई
  • (D) मांडान झांकना

सोटा-सोटी विवाह के बाद खेली जाने वाली पारंपरिक रस्म है, जिसमें वर-वधू नीम की डाली से प्रतीकात्मक रूप से एक-दूसरे को मारते हैं। यह खेल आपसी स्नेह और हास्य का प्रतीक होता है। राजस्थान की विवाह परंपराओं में ऐसे खेल वैवाहिक जीवन की शुरुआत को आनंदमय बनाने के लिए शामिल किए जाते हैं।

98. श्मशान जाते समय चौराहे पर अर्थी के पासे बदलना क्या कहलाता है?

  • (A) अदला-बदली
  • (B) आधेंटा
  • (C) मुँह घुमाना
  • (D) दंडोत

अंतिम यात्रा के दौरान किसी चौराहे पर अर्थी के कंधे बदलने या दिशा परिवर्तन की रस्म को ‘आधेंटा’ कहा जाता है। यह मृत्यु संस्कार से जुड़ी पारंपरिक प्रक्रिया है, जिसका धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व माना जाता है। राजस्थान की लोक परंपराओं में इसे अंतिम यात्रा की आवश्यक रस्मों में शामिल किया जाता है।

99. वधू पक्ष द्वारा बारात की अगवानी करना क्या कहलाता है?

  • (A) बंदौला
  • (B) तोरण
  • (C) ऊझणो
  • (D) सामेला

विवाह के अवसर पर जब वधू पक्ष द्वारा बारात का स्वागत किया जाता है, तो इस रस्म को ‘सामेला’ कहा जाता है। इसमें बारात की अगवानी सम्मान और उत्साह के साथ की जाती है। राजस्थान की विवाह परंपराओं में सामेला सामाजिक आदर और पारिवारिक संबंधों का प्रतीक माना जाता है तथा इसे शुभ रस्म के रूप में निभाया जाता है।

100. जडूला एक प्रमुख संस्कार है, जिसे क्या कहते हैं?

  • (A) चूड़ाकर्म
  • (B) निष्कर्मण
  • (C) संवर्तन
  • (D) जातकर्म

चूडाकर्म / जडूला शिशू को दो या तीन वर्ष का होने पर अपने किसी कूलदेवी या कूलदेवता के स्थान पर बच्चे का पहनी बाग मुण्डन करना चूडाकर्म/जडूला कहलाता है।

राजस्थान की प्रथाएँ व रीति-रिवाज, संस्कार, कुप्रथाएं MCQ – सभी भाग:
Part 1 | Part 2 | Part 3 | Part 4 | Part 5 | Part 6 | Part 7

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