राजस्थान की प्रथाएँ व रीति-रिवाज, संस्कार, कुप्रथाएं MCQ | Important Questions with Answers
इस पोस्ट में राजस्थान की कला एवं संस्कृति के टॉपिक
राजस्थान की प्रथाएँ व रीति-रिवाज, संस्कार, कुप्रथाएं से संबंधित Latest व पूर्णतः updated महत्वपूर्ण
MCQ
प्रश्न दिए गए हैं।
इनमें बढ़ार, औलंदी, आणों, मोसर, हेल्मो, जलवा पूजन आदि से सम्बंधित महत्वपूर्ण जानकारियों को व्याख्या सहित शामिल किया गया है।
ये महत्वपूर्ण MCQ प्रश्न
RPSC,
RSSB,
RAS, Patwar, Police, LDC, VDO, REET
तथा राजस्थान राज्य की अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए
उपयोगी हैं। इनमें विषयवार प्रश्न, सही उत्तर एवं विस्तृत व्याख्या
शामिल हैं।
✍️ Prepared & Reviewed by:
Rajputana Diary –
Rajasthan GK Faculty & Content Team
(Since 2021)
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1. विवाह के दूसरे दिन वर पक्ष द्वारा आशीर्वाद व प्रीतिभोज को क्या कहते हैं?
A
कू
B
बढ़ार
C
औलंदी
D
आणों
📖 व्याख्या
विवाह के दूसरे दिन आयोजित आशीर्वाद और सामूहिक भोज को बढ़ार कहा जाता है। इसमें रिश्तेदार नवदंपति को आशीर्वाद देते हैं और सामाजिक मेल-मिलाप होता है।
2. मृत्यु उत्सव के लिए राजस्थान में कौनसा नाम प्रचलित है?
A
दापा
B
मोसर
C
हेल्मो
D
बढ़ार
📖 व्याख्या
मृत्यु के बाद आयोजित भोज को मौसर या मोसर कहा जाता है। यह सामाजिक रूप से शोक व्यक्त करने और मृतक की स्मृति में आयोजित किया जाता है।
3. निम्न में से कौनसी प्रथा विवाह से संबंधित है?
A
जड़ूला
B
जलवा पूजन
C
मूठ भराई
D
मौसर
📖 व्याख्या
मूठ भराई विवाह से संबंधित रस्म है जिसमें वर को शगुन के रूप में धन दिया जाता है। यह विवाह समारोह की पारंपरिक रस्मों में शामिल है।
4. बढ़ार भोज किस अवसर पर रखा जाता है?
A
मृत्यु
B
उत्सव
C
विवाह
D
जन्म
📖 व्याख्या
बढ़ार विवाह के अवसर पर दिया जाने वाला सामूहिक भोज है। इसमें परिवार और समाज के लोग शामिल होकर नवदंपति को आशीर्वाद देते हैं।
5. सांसी जनजाति में शादी होने पर युवती को अपनी चारित्रिक पवित्रता की परीक्षा देने की रस्म क्या कहलाती है?
A
चारी प्रथा
B
कुकड़ी की रस्म
C
अग्नि रस्म
D
चर भर की रस्म
📖 व्याख्या
सांसी जनजाति की परंपराओं में विवाह के समय कुछ विशेष रस्में निभाई जाती हैं। इनमें ‘कुकड़ी की रस्म’ युवती की चारित्रिक पवित्रता से जुड़ी मानी जाती है। यह सामाजिक स्वीकृति और पारंपरिक मान्यताओं का प्रतीक रही है। समय के साथ ऐसी रस्मों का सामाजिक महत्व कम हुआ है, लेकिन लोकसंस्कृति के अध्ययन में इनका उल्लेख महत्वपूर्ण माना जाता है।
6. मारवाड़ में किसी खास मौके पर अफीम गलाने व एक दूसरे को देने की रस्म क्या कहलाती है?
A
हलोटा
B
डाण
C
अखराई
D
रियाण
📖 व्याख्या
मारवाड़ में रियाण का अर्थ 'सभा' होता है जिसमें अफीम गालने व एक-दूसरे को प्रदान करने की प्रथा है। मारवाड़ में विवाह, मृत्यु के अवसर व सामाजिक कार्यक्रमों में रियाण की परम्परा है।
7. निम्न में से कौनसी प्रथा मृत्यु से संबंधित नहीं है?
A
भदर होना
B
उठावना
C
पगड़ी दस्तूर
D
रंगबरी
📖 व्याख्या
रंगबरी विवाह से संबंधित रस्म है।
8. शिशु जन्म के अवसर पर वह रस्म जिसमें पूजा के लिए गाँव के कुएँ या जलस्रोत पर एक शोभायात्रा के साथ जच्चा को ले जाया जाता है?
A
जलवा पूजन
B
पानी पूजन
C
मटकी पूजन
D
चूड़ा पूजन
📖 व्याख्या
जलवा पूजन राजस्थान की पारंपरिक जन्म संस्कार संबंधी रस्म है। शिशु जन्म के बाद निर्धारित समय पर जच्चा को गीत-संगीत और शोभायात्रा के साथ गाँव के कुएँ या जलस्रोत तक ले जाया जाता है। वहाँ पूजा कर नवजात के सुखद जीवन और परिवार की समृद्धि की कामना की जाती है। यह रस्म सामाजिक सहभागिता और पारिवारिक उत्सव का प्रतीक मानी जाती है।
9. आदिवासी क्षेत्र में किसी व्यक्ति की संदिग्ध मृत्यु होने पर मृत्यु स्थान के स्वामी या आरोपी से हर्जाना लेने की परम्परा क्या कहलाती है?
A
मौताणा
B
महर
C
नाता
D
मूकाण
📖 व्याख्या
आदिवासी समाज में मौताणा एक पारंपरिक प्रथा रही है जिसमें संदिग्ध मृत्यु या विवादित परिस्थितियों में मृतक के परिवार को हर्जाना दिया जाता है। इसका उद्देश्य सामाजिक विवाद को शांत करना और समुदाय के भीतर समझौता स्थापित करना होता था। आधुनिक कानून व्यवस्था लागू होने के बाद इस प्रथा पर नियंत्रण किया गया है, फिर भी सांस्कृतिक अध्ययन में इसका विशेष महत्व है।
10. निम्न में से सोलह संस्कार में शामिल नहीं है-
A
पुंसवन
B
सप्तपदी
C
निष्क्रमण
D
केशान्त
📖 व्याख्या
हिंदू धर्म के सोलह संस्कार जीवन के विभिन्न चरणों से जुड़े धार्मिक अनुष्ठान हैं। पुंसवन, निष्क्रमण और केशान्त इनमें शामिल माने जाते हैं। जबकि सप्तपदी मुख्य रूप से विवाह की एक रस्म है, जिसे सात फेरे के रूप में जाना जाता है। इसलिए इसे सोलह संस्कारों की पारंपरिक सूची में स्वतंत्र संस्कार के रूप में शामिल नहीं किया जाता।
11. दुनिया का एकमात्र ऐसा शहर कौनसा है, जहाँ का पूरा परकोटा एक छत है?
A
जयपुर
B
बीकानेर
C
जैसलमेर
D
जोधपुर
📖 व्याख्या
बीकानेर में पुष्करणा ब्राह्मण समाज द्वारा 2 वर्ष के अंतराल से आयोजित होने वाला सामूहिक विवाह अनूठा अवसर होता है। जिसे 'ओलम्पिक सावा' के नाम से भी जाना जाता है। बीकानेर दूनिया का एकमात्र शहर है, जहाँ का पूरा परकोटा एक छत है।
12. राजस्थान में त्याग प्रथा पर सर्वप्रथम रोक लगाने वाली रियासत है?
A
कोटा
B
जयपुर
C
जोधपुर
D
बीकानेर
📖 व्याख्या
त्याग प्रथा पर सर्वप्रथम प्रतिबंध जोधपुर में महाराजा मानसिंह के समय 1841 ई. में लगाई गयी।
13. मेवाड़ रियासत में मेवाड़ के महाराणा के प्रति स्थायी भक्ति की शपथ लेना क्या कहलाती थी?
A
आन प्रथा
B
तागा करना
C
वधारा देना
D
प्राण प्रथा
📖 व्याख्या
मेवाड़ की परंपराओं में ‘आन प्रथा’ निष्ठा और सम्मान का प्रतीक मानी जाती थी। इसमें व्यक्ति महाराणा के प्रति स्थायी भक्ति और वफादारी की शपथ लेता था। यह केवल राजनीतिक निष्ठा ही नहीं बल्कि सामाजिक और नैतिक दायित्व भी माना जाता था। राजपूत संस्कृति में ‘आन’ शब्द सम्मान और प्रतिष्ठा से जुड़ा हुआ है, इसलिए इस प्रथा का विशेष महत्व रहा।
14. वह रिवाज जिसमें पुत्र के जन्म के अवसर पर ननिहाल पक्ष द्वारा बालक और उसके वस्त्र व आभूषण दिये जाते हैं, क्या कहलाता है?
A
मायरा
B
मुगधणा
C
जामणा
D
जनोंटण
📖 व्याख्या
जामणा राजस्थान की पारंपरिक जन्म संबंधी रस्म है, जिसमें ननिहाल पक्ष नवजात शिशु के लिए वस्त्र, आभूषण और उपहार लेकर आता है। यह रस्म मातृ पक्ष के स्नेह और सामाजिक संबंधों को मजबूत करने का प्रतीक मानी जाती है। परिवारों के बीच प्रेम और सहयोग बढ़ाने में इसका विशेष महत्व होता है तथा इसे उत्सव के रूप में मनाया जाता है।
15. विवाह के समय वधू के लिए वर पक्ष द्वारा लाये गये कपड़े व आभूषण क्या कहलाते हैं?
A
मायरा
B
बरी-पडला
C
बेस
D
कांकण डोरा
📖 व्याख्या
विवाह में वर पक्ष द्वारा वधू के लिए लाए गए कपड़े, आभूषण और अन्य उपहार ‘बरी-पडला’ कहलाते हैं। यह रस्म विवाह संबंध की स्वीकृति और सम्मान का प्रतीक होती है। राजस्थान की लोक परंपराओं में इसका सामाजिक महत्व है, क्योंकि इससे दोनों परिवारों के बीच संबंध मजबूत होते हैं। यह प्रथा आज भी कई स्थानों पर पारंपरिक रूप से निभाई जाती है।
16. विवाह के दूसरे दिन वर पक्ष द्वारा नवदम्पति के लिए आशीर्वाद समारोह व प्रतिभोज क्या कहलाता है?
A
सीख
B
बिंदौली
C
बढ़ार
D
सामेला
📖 व्याख्या
विवाह के बाद दूसरे दिन आयोजित होने वाला आशीर्वाद समारोह और सामूहिक भोज ‘बढ़ार’ कहलाता है। इसमें रिश्तेदार और समाज के लोग नवदम्पति को आशीर्वाद देते हैं। यह रस्म सामाजिक मेल-मिलाप और नए वैवाहिक जीवन की शुभ शुरुआत का प्रतीक मानी जाती है। राजस्थान में बढ़ार को पारिवारिक सम्मान और सामूहिक उत्सव से जोड़कर देखा जाता है।
17. कौनसी रस्म विवाह से सम्बन्धित नहीं है?
A
कांकण डोरा
B
पहरावणी
C
बरी पड़ला
D
मोकाण
📖 व्याख्या
मोकाण, मृतक के रिश्तेदारों द्वारा मृतक के परिजनों को सांत्वना देने के लिये आने को कहा जाता है।
18. राजस्थान में अंतिम सती होने की घटना किस जिले की है?
A
सीकर
B
झुंझुनूं
C
जयपुर
D
चुरू
📖 व्याख्या
राजस्थान की अंतिम सती सीकर जिले के देवराला गांव की रूपकँवर नामक महिला थी।
19. आदिवासियों में किस प्रथा के तहत् पत्नी अपने पति को छोड़कर किसी अन्य पुरुष के साथ रह सकती है?
A
डावरी प्रथा
B
सिरावन
C
नाता
D
सामेला
📖 व्याख्या
आदिवासी समाज में ‘नाता’ प्रथा एक सामाजिक व्यवस्था के रूप में प्रचलित रही है, जिसमें स्त्री आपसी सहमति से पति को छोड़कर दूसरे पुरुष के साथ वैवाहिक जीवन शुरू कर सकती है। इसमें सामान्यतः कुछ सामाजिक नियम और आर्थिक लेन-देन भी शामिल होते थे। यह प्रथा समुदाय की पारंपरिक सामाजिक संरचना का हिस्सा रही है और आधुनिक समय में इसके स्वरूप में बदलाव आया है।
20. राजस्थान में बाल विवाह पर सर्वप्रथम रोक लगाने वाली रियासत है?
A
कोटा
B
जयपुर
C
जोधपुर
D
मेवाड़
📖 व्याख्या
बालविवाह पर सर्वप्रथम जोधपुर के प्रधानमंत्री सर प्रताप ने 1885 ई. में रोक लगाई ।
21. सर्वप्रथम राजस्थान की किस रियासत ने सती प्रथा को गैरकानूनी घोषित किया था?
A
कोटा
B
जयपुर
C
बूंदी
D
मेवाड़
📖 व्याख्या
राजस्थान में सती प्रथा पर रोक लगाने वाली प्रथम रियासत बूंदी (शासक विष्णुसिंह) थी, जिसमें 1822 ई. में सती प्रथा पर रोक लगाई गई।
22. डाकण प्रथा मुख्य रूप से राजस्थान की किस जनजाति में पायी जाती है?
A
मीणा
B
भील
C
गरासिया
D
कंजर
📖 व्याख्या
डाकण प्रथा मुख्य रूप से भील जनजाति से संबंधित मानी जाती है। इस प्रथा में अंधविश्वास के आधार पर महिलाओं को जादू-टोना करने वाली मान लिया जाता था। सामाजिक अज्ञानता और भय के कारण कई बार महिलाओं को उत्पीड़न का सामना करना पड़ता था। समय के साथ जागरूकता, शिक्षा और कानूनी प्रावधानों के कारण इस प्रथा पर नियंत्रण के प्रयास किए गए हैं।
23. राजस्थान में सती प्रथा का सर्वाधिक प्रचलन किस जाति में रहा है?
A
गुर्जर जाति
B
राजपूत जाति
C
जाट जाति
D
ब्राह्मण जाति
📖 व्याख्या
राजस्थान के इतिहास में सती प्रथा का सर्वाधिक उल्लेख राजपूत समाज में मिलता है। यह प्रथा वीरता, सम्मान और पारिवारिक प्रतिष्ठा से जोड़कर देखी जाती थी। युद्धकालीन परिस्थितियों और सामाजिक मान्यताओं के कारण इसका प्रभाव अधिक रहा। समय के साथ सामाजिक सुधार आंदोलनों और कानूनों के माध्यम से इस प्रथा पर रोक लगाई गई और इसे गैरकानूनी घोषित किया गया।
24. राजस्थान डायन प्रथा निवारण अधिनियम किस वर्ष से लागू हुआ?
A
2015
B
2016
C
2017
D
2014
📖 व्याख्या
राजस्थान डायन प्रताड़ना निवारण अधिनियम (2015) को 26 जनवरी, 2016 से लागू कर इसे गैर-कानूनी घोषित कर दिया।
25. रियासती काल में शासक या जागीरदार अपनी लड़की की शादी में दहेज के साथ कुछ कुंवारी कन्याएँ भी देते थे, जो कहलाती थी?
A
चारी
B
ओलन्दी
C
डावरिया
D
पासवान
📖 व्याख्या
रियासती काल में विवाह के समय दहेज के साथ कुछ कुंवारी कन्याओं को भी भेजने की परंपरा प्रचलित थी, जिन्हें ‘डावरिया’ कहा जाता था। ये प्रथा तत्कालीन सामाजिक व्यवस्था और सामंती परंपराओं से जुड़ी थी। बाद में सामाजिक सुधारों और आधुनिक कानूनों के कारण ऐसी प्रथाओं में कमी आई। इतिहास और लोकसंस्कृति के अध्ययन में इस शब्द का विशेष महत्व माना जाता है।
26. किसी स्त्री के दूसरे पति द्वारा महिला के पूर्व पति को दी जाने वाली राशि क्या कहलाती है?
A
नाता राशि
B
दापा राशि
C
तोरण गशि
D
झगड़ा राशि
📖 व्याख्या
राजस्थान की पारंपरिक सामाजिक व्यवस्था में यदि कोई महिला दूसरे पुरुष के साथ वैवाहिक संबंध बनाती थी, तो पूर्व पति को एक निश्चित राशि दी जाती थी। इसे ‘झगड़ा राशि’ कहा जाता था। इसका उद्देश्य सामाजिक विवादों को समाप्त करना और समुदाय में समझौता स्थापित करना होता था। यह प्रथा मुख्यतः ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों में प्रचलित रही है।
27. जैन सम्प्रदाय में स्वेच्छा से अन्न, जल त्याग कर मोक्ष प्राप्त करने के लिए देह त्याग करने की प्रथा क्या कहलाती है?
A
संथारा
B
उठावना
C
अंत्येष्टि
D
पानीवाड़ा
📖 व्याख्या
जैन ग्रन्थों में उल्लेखित इस प्रथा में अन्न जल त्याग कर समत्वभाव से स्वेच्छा से मोक्ष प्राप्ति के लिए देह त्याग की जाती है। चन्द्रगुप्त मौर्य ने श्रवणबेलगोला में संथारा किया था।
28. मानव व्यापार पर राजस्थान की किस रियासत ने सर्वप्रथम प्रतिबन्ध लगाया?
A
जोधपुर
B
जयपुर
C
उदयपुर
D
कोटा
📖 व्याख्या
मानव व्यापार पर सर्वप्रथम प्रतिबंध जयपुर रियासत में जॉन लूडलों के प्रयासों से 1847 ई. में लगाया गया।
29. यदि राजा द्वारा किसी दासी को उपपत्नी के रूप में स्वीकार कर लिया जाता था तो वह क्या कहलाती थी?
A
पड़दायत
B
सागड़ी
C
ओलन्दी
D
ईकताई
📖 व्याख्या
रियासती काल में यदि किसी दासी को राजा द्वारा उपपत्नी के रूप में स्वीकार किया जाता था, तो उसे ‘पड़दायत’ कहा जाता था। यह व्यवस्था राजदरबार की सामाजिक संरचना का हिस्सा थी। ऐसी महिलाओं को कुछ विशेष अधिकार और संरक्षण भी प्राप्त होते थे, परंतु उनका स्थान मुख्य रानी से अलग माना जाता था। इतिहास में यह शब्द सामंती सामाजिक व्यवस्था को समझने के लिए महत्वपूर्ण है।
30. राजस्थान की किस रियासत ने दास प्रथा पर सर्वप्रथम रोक लगाई?
A
जयपुर
B
जोधपुर
C
कोटा
D
उदयपुर
📖 व्याख्या
लॉर्ड विलियम बैंटिक ने 1832 में दास प्रथा पर रोक लगाई। भारत में दास प्रथा पर सर्वप्रथम अकबर ने रोक लगाई।
31. शारदा एक्ट का सम्बन्ध किस प्रथा से है?
A
सागड़ी प्रथा
B
त्याग प्रथा
C
दास प्रथा
D
बाल विवाह
📖 व्याख्या
शारदा एक्ट को बाल विवाह निषेध अधिनियम के रूप में जाना जाता है। इसे बाल विवाह की प्रथा को रोकने के उद्देश्य से लागू किया गया था। इस कानून के तहत विवाह की न्यूनतम आयु निर्धारित की गई ताकि बच्चों के स्वास्थ्य, शिक्षा और भविष्य की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके। भारत में सामाजिक सुधार की दिशा में यह एक महत्वपूर्ण कानूनी कदम माना जाता है।
32. विवाह के दिन वधू के माता-पिता व भाइयों द्वारा रखा जाने वाला उपवास क्या कहलाता है?
A
हथलेवा
B
ऊझणो
C
कन्यावल
D
उजमणी
📖 व्याख्या
विवाह के दिन वधू के माता-पिता और भाईयों द्वारा रखा जाने वाला उपवास ‘कन्यावल’ कहलाता है। यह रस्म बेटी के सुखी वैवाहिक जीवन और नए परिवार में मंगलमय भविष्य की कामना के लिए की जाती है। राजस्थान की पारंपरिक विवाह रस्मों में इसका विशेष धार्मिक और भावनात्मक महत्व है। यह परिवार के स्नेह और जिम्मेदारी का प्रतीक माना जाता है।
33. दामाद को ससुराल पक्ष के लोगों द्वारा टीका निकालकर दी जाने वाली नगद राशि क्या कहलाती है?
A
पगधोई
B
जुहारी
C
पहरावणी
D
कन्यादान
📖 व्याख्या
विवाह के अवसर पर दामाद का सम्मान करने के लिए ससुराल पक्ष द्वारा टीका लगाकर जो नगद राशि दी जाती है, उसे ‘जुहारी’ कहा जाता है। यह रस्म सम्मान, स्नेह और पारिवारिक संबंधों को मजबूत करने का प्रतीक होती है। राजस्थान की पारंपरिक विवाह प्रथाओं में जुहारी का विशेष सामाजिक महत्व है और इसे शुभ अवसर की रस्म माना जाता है।
34. मृतक के रिश्तेदारों द्वारा मृतक के परिजनों के लिए लाए गए वस्त्र आदि क्या कहलाते हैं?
A
पहरावणी
B
पानीवाड़ा
C
ओढ़ावणी
D
चिकनी कोथली
📖 व्याख्या
मृत्यु संस्कारों में मृतक के रिश्तेदारों द्वारा परिवार के सदस्यों के लिए लाए गए वस्त्र और सामग्री को ‘ओढ़ावणी’ कहा जाता है। यह रस्म शोक व्यक्त करने और परिवार के प्रति संवेदना प्रकट करने का प्रतीक मानी जाती है। राजस्थान की लोक परंपराओं में ऐसी रस्में सामाजिक सहयोग और भावनात्मक समर्थन को दर्शाती हैं।
35. नवनिर्मित घर में गृह प्रवेश की रस्म क्या कहलाती है?
A
ल्हास
B
नांगल
C
बार रूकाई
D
जनोटण
📖 व्याख्या
नए घर में प्रवेश के समय की जाने वाली धार्मिक और पारंपरिक रस्म को ‘नांगल’ कहा जाता है। इसमें पूजा-पाठ और शुभ कार्यों के माध्यम से घर में सुख-समृद्धि की कामना की जाती है। परिवार और रिश्तेदार इस अवसर पर एकत्र होकर नए जीवन की शुरुआत का उत्सव मनाते हैं। यह रस्म ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में परंपरागत रूप से निभाई जाती है।
36. ग्रामीण क्षेत्रों में एक-दूसरे के खेतों में बिना पारिश्रमिक के सामूहिक रूप से मदद करने की परम्परा कहलाती है?
A
बेगार
B
चाकरी
C
ल्हास
D
सागड़ी
📖 व्याख्या
राजस्थान में मृत शरीर को भी राजस्थानी भाषा में 'लाश' कहते है।
37. महिलाओं द्वारा अपने पति की चिता के साथ जीवित अवस्था में अपने आप को जला लेना और मृत्यु का वरण करना, क्या कहलाता है?
A
जौहर
B
सती
C
साका
D
अग्निजौहर
📖 व्याख्या
सती प्रथा में पति की मृत्यु के बाद पत्नी द्वारा उसकी चिता पर स्वयं को समर्पित कर देना शामिल था। यह प्रथा प्राचीन सामाजिक मान्यताओं और परंपराओं से जुड़ी रही, लेकिन समय के साथ इसे अमानवीय मानते हुए कानूनी रूप से प्रतिबंधित कर दिया गया। सामाजिक सुधार आंदोलनों ने इस प्रथा के उन्मूलन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
38. मृतक के बेटे व पोतों द्वारा शव यात्रा के आगे-आगे चलते हुए अर्थी को प्रणाम करने की रस्म क्या कहलाती है?
A
पिंडदान
B
बिखेर
C
दंडोत
D
औसर
📖 व्याख्या
अंतिम संस्कार की प्रक्रिया में मृतक के बेटे और पोते शव यात्रा के दौरान अर्थी को प्रणाम करते हुए चलते हैं, जिसे ‘दंडोत’ कहा जाता है। यह रस्म मृतक के प्रति सम्मान और अंतिम विदाई का प्रतीक मानी जाती है। राजस्थान की पारंपरिक मृत्यु संबंधी रस्मों में इसका धार्मिक और भावनात्मक महत्व होता है।
39. तोरण पर वधू की माता द्वारा की जाने वाली, दुल्हे की आरती व टीका क्या कहलाता है?
A
सामेला
B
झाला मिला की आरती
C
हथलेवा
D
रंगबरी
📖 व्याख्या
विवाह के समय जब दूल्हा तोरण पर पहुंचता है, तब वधू की माता द्वारा उसकी आरती और टीका करने की रस्म को ‘झाला मिला की आरती’ कहा जाता है। यह दूल्हे के स्वागत और शुभकामनाओं का प्रतीक होती है। राजस्थान की विवाह परंपराओं में यह रस्म अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जाती है और पारिवारिक सम्मान से जुड़ी होती है।
40. बाल विवाह प्रतिबंध अधिनियम 1929 पूरे भारत में कब से लागू हुआ?
A
1 अप्रैल, 1929
B
1 अप्रैल, 1930
C
1 अप्रैल, 1932
D
1 अप्रैल, 1934
📖 व्याख्या
भारत में 'बालविवाह प्रतिबंध अधिनियम 1929' 28 सितम्बर, 1929 को 'इम्पीरियर लेजिस्लेटिव काउंसिल ऑफ इंडिया' में पारित हुआ। यह कानून 1 अप्रैल, 1930 से पूरे भारत में लागू हुआ। इसमें लड़कियों के विवाह की न्यूनतम उम्र 14 साल व लड़कों के विवाह की उम्र 18 साल रखी गयी।
41. रूपकंवर सती प्रकरण के समय राजस्थान के मुख्यमंत्री कौन थे?
A
मोहनलाल सुखाड़िया
B
जगन्नाथ पहाड़िया
C
भैरोसिंह शेखावत
D
हरिदेव जोशी
📖 व्याख्या
रूपकंवर सती प्रकरण 1987 में राजस्थान के सीकर जिले के देवराला गाँव में हुआ था। उस समय राजस्थान के मुख्यमंत्री हरिदेव जोशी थे। इस घटना के बाद पूरे देश में सती प्रथा के विरुद्ध व्यापक चर्चा हुई और सरकार ने सती निवारण के लिए कड़े कानूनी कदम उठाए। यह घटना सामाजिक सुधार और कानून व्यवस्था के संदर्भ में महत्वपूर्ण मानी जाती है।
42. गाँव या नगर के बाहर जाकर, वधू पक्ष की ओर से की जाने वाली बारात की अगवानी क्या कहलाती है?
A
बरी पड़ला
B
पड़जान
C
हीरावणी
D
बरोटी
📖 व्याख्या
विवाह में जब वधू पक्ष के लोग गाँव या नगर के बाहर जाकर बारात का स्वागत करते हैं, तो इस रस्म को ‘पड़जान’ कहा जाता है। यह सम्मान और आतिथ्य का प्रतीक मानी जाती है। राजस्थान की पारंपरिक विवाह संस्कृति में बारात की अगवानी को विशेष महत्व दिया जाता है और इसे उत्सव के रूप में मनाया जाता है।
43. राजस्थान में 'साका' किसे कहते है?
A
जौहर + केसरिया
B
जौहर
C
केसरिया
D
इनमें से कोई नहीं
📖 व्याख्या
जब राजपुत यौद्धा केसरिया करते थे व राजपुत वीरांगनाएँ जौहर व्रत करती थी वह 'साका' कहलाता था।
44. किस संस्कार के पश्चात् ब्रह्मचार्य आश्रम की शुरूआत होती है?
A
चूण्डाकर्म
B
उपनयन
C
समावर्तन
D
विद्यारंभ
📖 व्याख्या
हिंदू धर्म में उपनयन संस्कार के बाद बालक के ब्रह्मचर्य आश्रम की शुरुआत मानी जाती है। इस संस्कार के माध्यम से उसे शिक्षा, अनुशासन और धार्मिक कर्तव्यों के पालन के लिए तैयार किया जाता है। पारंपरिक रूप से इसे गुरुकुल जीवन की शुरुआत का प्रतीक माना गया है और यह सोलह संस्कारों में महत्वपूर्ण स्थान रखता है।
45. विवाह के अवसर पर दर्जी द्वारा वर-वधू के शादी के जोड़े बनाने के लिए लिया जाने वाला नाप क्या कहलाता है?
A
इकताई
B
ऊझणो
C
ऊजमणौ
D
गंगाजली
📖 व्याख्या
विवाह की तैयारियों में दर्जी द्वारा वर-वधू के वस्त्र तैयार करने के लिए जो नाप लिया जाता है, उसे ‘इकताई’ कहा जाता है। यह रस्म विवाह की तैयारियों का एक व्यावहारिक हिस्सा है और पारंपरिक रूप से इसे भी एक छोटी रस्म की तरह माना जाता है। ग्रामीण क्षेत्रों में इस प्रक्रिया से जुड़ी कई स्थानीय परंपराएँ भी देखने को मिलती हैं।
46. किसी योद्धा की मृत्यु के बाद उसकी निशानी के साथ उसकी विधवा पत्नी द्वारा चितारोहण होना कहलाता है?
A
साका
B
चारी
C
जौहर
D
अनुमरण
📖 व्याख्या
अनुमरण उस प्रथा को कहा जाता है जिसमें किसी योद्धा की मृत्यु के बाद उसकी विधवा पत्नी उसकी निशानी के साथ चिता पर चढ़ जाती थी। यह प्रथा वीरता और पति के प्रति समर्पण से जोड़कर देखी जाती थी। इतिहास में इसे सामाजिक परंपराओं का हिस्सा माना गया, लेकिन आधुनिक समय में ऐसी प्रथाओं को समाप्त कर दिया गया है।
47. राजस्थानी संस्कृति में 'औलन्दी' क्या है?
A
नववधू के साथ जाने वाला पुरुष या स्त्री
B
विवाह के अवसर पर आयोज्य भोज
C
वधूपक्ष द्वारा बारात की अगवानी करना
D
वर पक्ष की महिलाओं द्वारा खेला जाने वाला खेल
📖 व्याख्या
राजस्थानी संस्कृति में ‘औलन्दी’ उस व्यक्ति को कहा जाता है जो नववधू के साथ ससुराल तक जाता है। यह व्यक्ति सामान्यतः परिवार का विश्वसनीय सदस्य होता है, जो नई दुल्हन को नए वातावरण में सहज बनाने में मदद करता है। यह परंपरा सामाजिक सुरक्षा और पारिवारिक सहयोग का प्रतीक मानी जाती है और ग्रामीण क्षेत्रों में विशेष रूप से प्रचलित रही है।
48. सती प्रथा पर रोक लगाने का सर्वप्रथम प्रयास करने वाले प्रथम मुस्लिम शासक कौन थे?
A
ग्यासुद्दीन तुगलक
B
अकबर
C
मुहम्मद तुगलक
D
हुमायूँ
📖 व्याख्या
इतिहासकारों के अनुसार सती प्रथा को नियंत्रित करने के प्रारंभिक प्रयास कुछ मुस्लिम शासकों द्वारा किए गए थे, जिनमें मुहम्मद तुगलक का उल्लेख मिलता है। बाद में अकबर ने भी सामाजिक सुधारों के अंतर्गत इस प्रथा को हतोत्साहित किया। हालांकि पूर्ण कानूनी प्रतिबंध अंग्रेजी शासनकाल में लगाया गया, लेकिन प्रारंभिक सुधार प्रयास मध्यकालीन शासन में दिखाई देते हैं।
49. भारत सरकार द्वारा 'सागड़ी निवारण अधिनियम' कब से गैरकानूनी घोषित किया गया था?
A
Sun May 14 1905 00:00:00 GMT+0521 (India Standard Time)
B
1980
C
Sat May 13 1905 00:00:00 GMT+0521 (India Standard Time)
D
1963
📖 व्याख्या
सागड़ी प्रथा एक प्रकार की बंधुआ श्रम व्यवस्था थी, जिसमें आर्थिक कारणों से व्यक्ति या परिवार को श्रम के लिए बाध्य होना पड़ता था। भारत सरकार ने सामाजिक शोषण रोकने के उद्देश्य से इसे 1961 से गैरकानूनी घोषित किया। इस कानून का उद्देश्य श्रमिकों को स्वतंत्रता दिलाना और सामाजिक न्याय सुनिश्चित करना था।
50. किसके प्रयासों से सती प्रथा पर रोक लगाई गई?
A
विलियम लूडलो
B
जॉन लूडलो
C
कॉर्नवालिस
D
विलियम बैंटिक
📖 व्याख्या
भारत में सतीप्रथा पर रोक के लिए राजा राम मोहनराय के प्रयासों से लॉर्ड विलियम बैंटिक द्वारा दिसम्बर 1829 को एक अधिनियम द्वारा सती प्रथा को एक दण्डनीय अपराध घोषित किया गया।