राजस्थान की प्रथाएँ व रीति-रिवाज, संस्कार, कुप्रथाएं MCQ Quiz | Practice Set with Detailed Explanation
इस पोस्ट में राजस्थान की कला एवं संस्कृति के टॉपिक राजस्थान की प्रथाएँ व रीति-रिवाज, संस्कार, कुप्रथाएं से संबंधित Latest व पूर्णतः updated महत्वपूर्ण MCQ प्रश्न दिए गए हैं। इनमें गर्भाधान, पुंसवन, जातकर्म, नामकरण, फेरी देना आदि से सम्बंधित महत्वपूर्ण जानकारियों को व्याख्या सहित शामिल किया गया है।
ये MCQ प्रश्न RPSC, RSMSSB, RSSB, RAS, Patwar, Police, LDC, VDO, Fireman, Woman Superwiser, REET तथा राजस्थान राज्य की अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए अत्यंत उपयोगी हैं।
- Subject: राजस्थान की कला एवं संस्कृति
- Topic: राजस्थान की प्रथाएँ व रीति-रिवाज, संस्कार, कुप्रथाएं
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- Content Type: MCQ Practice Set
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Rajputana Diary –
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1. 16 संस्कारों में हिन्दुओं का प्रथम संस्कार माना जाता है?
- (A) गर्भाधान
- (B) पुंसवन
- (C) जातकर्म
- (D) नामकरण
हिंदू धर्म के सोलह संस्कारों में गर्भाधान को पहला संस्कार माना जाता है। यह संतान प्राप्ति की धार्मिक प्रक्रिया से जुड़ा संस्कार है, जिसका उद्देश्य स्वस्थ और संस्कारी संतान की कामना करना होता है। प्राचीन भारतीय परंपरा में इसे पारिवारिक जीवन की शुरुआत का महत्वपूर्ण धार्मिक चरण माना गया है।
2. राजस्थान में बच्चे के जन्म के बाद कुलदेवी-देवता के मंदिर पर पूजा करने जाना क्या कहलाता है?
- (A) फेरी देना
- (B) मंदिर जाना
- (C) जात देना
- (D) शिशु परिक्रमा
बच्चे के जन्म के बाद कुलदेवी या कुलदेवता के मंदिर में जाकर पूजा करने की परंपरा को जात देना कहा जाता है। यह रस्म नवजात के अच्छे स्वास्थ्य और परिवार की सुख-समृद्धि की कामना के लिए की जाती है। राजस्थान में यह पारिवारिक आस्था और धार्मिक परंपराओं का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
3. विवाह के दूसरे दिन वर पक्ष द्वारा आशीर्वाद व प्रीतिभोज को क्या कहते हैं?
- (A) कू
- (B) बढ़ार
- (C) औलंदी
- (D) आणों
विवाह के दूसरे दिन आयोजित आशीर्वाद और सामूहिक भोज को बढ़ार कहा जाता है। इसमें रिश्तेदार नवदंपति को आशीर्वाद देते हैं और सामाजिक मेल-मिलाप होता है।
4. मृत्यु उत्सव के लिए राजस्थान में कौनसा नाम प्रचलित है?
- (A) दापा
- (B) मोसर
- (C) हेल्मो
- (D) बढ़ार
मृत्यु के बाद आयोजित भोज को मौसर या मोसर कहा जाता है। यह सामाजिक रूप से शोक व्यक्त करने और मृतक की स्मृति में आयोजित किया जाता है।
5. काट्टा, मेक, लोकाई, कांदिया व मौसर संबंधित है?
- (A) मृत्यु भोज से
- (B) शादी में भोजन
- (C) वस्त्र
- (D) आभूषण
भीलों के मृत्यु भोज को काट्टा कहते हैं तथा गरासियों के मृत्यु भोज को मेक या कांदिया कहा जाता है।
6. बालक को प्रथम बार सूर्य व चन्द्रमा के दर्शन करवाये जाते हैं, इस संस्कार को कहेंगे?
- (A) निष्कर्मण
- (B) जातकर्म
- (C) अन्नप्रासन
- (D) नामकरण
निष्कर्मण संस्कार में बालक को पहली बार घर से बाहर निकालकर सूर्य और चन्द्रमा के दर्शन कराए जाते हैं। यह संस्कार बच्चे को बाहरी वातावरण से परिचित कराने का प्रतीक है। हिंदू परंपरा में इसे शिशु के विकास और प्रकृति से जुड़ाव की शुरुआत माना जाता है।
7. वर-वधू के ननिहाल पक्ष के लोग विवाह के दिन वस्त्र, गहने व नकदी आदि लेकर आते हैं, इस प्रथा का राजस्थान में प्रचलित नाम है?
- (A) पहरावनी
- (B) मायरा भरना
- (C) मायरा न्यूतना
- (D) कोथला
राजस्थान में विवाह के अवसर पर ननिहाल पक्ष द्वारा वस्त्र, आभूषण और नकदी लाने की परंपरा को मायरा भरना कहा जाता है। यह रस्म मामा पक्ष के स्नेह और सामाजिक दायित्व का प्रतीक होती है। विवाह समारोह में इसका विशेष महत्व होता है और इसे पारिवारिक सम्मान से जोड़ा जाता है।
8. वर व वधू की माताएँ अपने पीहर पक्ष को शादी में आने का न्यौता देती है, इस प्रथा का राजस्थान में प्रचलित नाम है?
- (A) मायरा भरना
- (B) कोथला
- (C) पहरावनी
- (D) बत्तीसी न्यूतना
विवाह के अवसर पर वर और वधू की माताओं द्वारा अपने पीहर पक्ष को निमंत्रण देने की परंपरा बत्तीसी न्यूतना कहलाती है। यह रस्म पारिवारिक संबंधों को मजबूत करने और रिश्तेदारों की सहभागिता सुनिश्चित करने के लिए की जाती है। राजस्थान की विवाह परंपराओं में इसका विशेष सामाजिक महत्व है।
9. वधू पक्ष की तरफ से लड़के को वस्त्र, गहने व नकदी आदि भेंट करना कहलाता है?
- (A) कोथला
- (B) टीका
- (C) गोद भराई
- (D) चिकनी कोथली
विवाह के अवसर पर वधू पक्ष द्वारा वर को वस्त्र, आभूषण और नकद राशि भेंट करने की रस्म को टीका कहा जाता है। यह सम्मान और रिश्ते की स्वीकृति का प्रतीक होती है। राजस्थान की पारंपरिक विवाह विधियों में टीका एक महत्वपूर्ण रस्म मानी जाती है, जिसमें परिवार के बीच स्नेह और आदर प्रदर्शित किया जाता है।
10. नवजात बच्चे को पेय पदार्थ घूंटी पिलाने वाले संस्कार को कहेंगे?
- (A) निष्कर्मण
- (B) जातकर्म
- (C) अन्नप्रासन
- (D) नामकरण
जातकर्म संस्कार शिशु के जन्म के तुरंत बाद किया जाता है, जिसमें नवजात को घूंटी या पेय पदार्थ पिलाने की रस्म शामिल होती है। यह संस्कार शिशु के जीवन की शुभ शुरुआत और स्वास्थ्य की कामना से जुड़ा होता है। हिंदू परंपराओं में इसे जन्म से संबंधित प्रमुख संस्कारों में गिना जाता है।
11. चिकनी कोथली है।
- (A) अंत्येष्टि संस्कार
- (B) विवाह की रस्म
- (C) मृत्यु की रस्म
- (D) सीमन्तोनयन संस्कार
चिकनी कोथली सीमन्तोनयन संस्कार से संबंधित मानी जाती है। यह गर्भावस्था के दौरान होने वाली रस्मों में शामिल है, जिसका उद्देश्य गर्भवती महिला और गर्भस्थ शिशु के कल्याण की कामना करना होता है। राजस्थान की लोक परंपराओं में यह रस्म धार्मिक आस्था और पारिवारिक उत्सव का हिस्सा मानी जाती है।
12. भदर का संबंध किससे है?
- (A) विवाह संस्कार
- (B) कर्णवेध संस्कार
- (C) समावर्तन संस्कार
- (D) अंत्येष्टि संस्कार
भदर का संबंध अंत्येष्टि संस्कार से माना जाता है। यह मृत्यु के बाद की जाने वाली रस्मों में शामिल है, जो शोक और श्रद्धांजलि से जुड़ी होती हैं। राजस्थान की लोक परंपराओं में भदर सामाजिक सहभागिता और मृतक के प्रति सम्मान का प्रतीक माना जाता है।
13. 16 संस्कारों में अंतिम संस्कार माना जाता है?
- (A) उपनयन
- (B) अंत्येष्टि
- (C) निष्कर्मण
- (D) सीमन्तोनयन
सोलह संस्कारों में अंत्येष्टि अंतिम संस्कार माना जाता है। यह मृत्यु के बाद की धार्मिक प्रक्रिया है, जिसमें शरीर का अंतिम संस्कार कर आत्मा की शांति की कामना की जाती है। हिंदू धर्म में इसे जीवन चक्र का अंतिम चरण माना गया है और धार्मिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है।
14. निम्न में से किस प्रथा का संबंध विवाह से नहीं है?
- (A) कोथला
- (B) बरसी
- (C) गोद भराई
- (D) चिकनी कोथली
किसी की मृत्यु का दिन उसकी पुण्यतिथि को बरसी कहा जाता है।
15. कांकण डोरा, घुड़चढ़ी, मधुपर्क, जुआ-जुई संबंधित है?
- (A) विवाह की रस्में
- (B) 16 संस्कारों में से
- (C) मृत्यु की रस्में
- (D) इनमें से कोई नहीं
कांकण डोरा, घुड़चढ़ी, मधुपर्क और जुआ-जुई सभी विवाह से संबंधित पारंपरिक रस्में हैं। ये रस्में विवाह समारोह को सांस्कृतिक और मनोरंजक बनाती हैं। राजस्थान की विवाह परंपराओं में इनका विशेष महत्व है, क्योंकि ये परिवारों के बीच आनंद और सामाजिक सहभागिता को दर्शाती हैं।
16. जौ या बाजरे के आटे से बना पिंड मृतक के हाथ में रखा जाता है, यह रस्म कहलाती है?
- (A) बिखेर
- (B) शांतरवारा
- (C) पिण्डदान
- (D) गोलपिण्ड
पिण्डदान मृत्यु संस्कार से संबंधित एक महत्वपूर्ण रस्म है, जिसमें आटे या चावल से बने पिंड अर्पित किए जाते हैं। यह मृतक की आत्मा की शांति और मोक्ष की कामना के लिए किया जाता है। हिंदू परंपराओं में इसे पितरों के प्रति श्रद्धा व्यक्त करने का प्रमुख माध्यम माना जाता है।
17. विवाह के बाद दामाद के पहली बार ससुराल आने पर चंवरी की मिट्टी उठवाकर जल स्रोत में बहाने की रस्म क्या कहलाती है?
- (A) नांगल
- (B) मांडा झांकना
- (C) रोड़ी पूजन
- (D) जुआ-जुई
विवाह के बाद जब दामाद पहली बार ससुराल आता है, तब चंवरी स्थान की मिट्टी उठवाकर जल स्रोत में बहाने की रस्म को मांडा झांकना कहा जाता है। यह रस्म वैवाहिक जीवन की शुभता और नई शुरुआत का प्रतीक मानी जाती है। राजस्थान की लोक परंपराओं में यह विशेष सांस्कृतिक महत्व रखती है।
18. शादी के बाद देव स्थान पर वर-वधू द्वारा नीम की डाली से खेला जाने वाला खेल क्या कहलाता है?
- (A) सोटा-सोटी
- (B) जुआ-जुई
- (C) वर व वधू पिटाई
- (D) मांडान झांकना
सोटा-सोटी विवाह के बाद खेली जाने वाली पारंपरिक रस्म है, जिसमें वर-वधू नीम की डाली से प्रतीकात्मक रूप से एक-दूसरे को मारते हैं। यह खेल आपसी स्नेह और हास्य का प्रतीक होता है। राजस्थान की विवाह परंपराओं में ऐसे खेल वैवाहिक जीवन की शुरुआत को आनंदमय बनाने के लिए शामिल किए जाते हैं।
19. श्मशान जाते समय चौराहे पर अर्थी के पासे बदलना क्या कहलाता है?
- (A) अदला-बदली
- (B) आधेंटा
- (C) मुँह घुमाना
- (D) दंडोत
अंतिम यात्रा के दौरान किसी चौराहे पर अर्थी के कंधे बदलने या दिशा परिवर्तन की रस्म को आधेंटा कहा जाता है। यह मृत्यु संस्कार से जुड़ी पारंपरिक प्रक्रिया है, जिसका धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व माना जाता है। राजस्थान की लोक परंपराओं में इसे अंतिम यात्रा की आवश्यक रस्मों में शामिल किया जाता है।
20. वधू पक्ष द्वारा बारात की अगवानी करना क्या कहलाता है?
- (A) बंदौला
- (B) तोरण
- (C) ऊझणो
- (D) सामेला
विवाह के अवसर पर जब वधू पक्ष द्वारा बारात का स्वागत किया जाता है, तो इस रस्म को सामेला कहा जाता है। इसमें बारात की अगवानी सम्मान और उत्साह के साथ की जाती है। राजस्थान की विवाह परंपराओं में सामेला सामाजिक आदर और पारिवारिक संबंधों का प्रतीक माना जाता है तथा इसे शुभ रस्म के रूप में निभाया जाता है।
21. जडूला एक प्रमुख संस्कार है, जिसे क्या कहते हैं?
- (A) चूड़ाकर्म
- (B) निष्कर्मण
- (C) संवर्तन
- (D) जातकर्म
चूडाकर्म / जडूला शिशू को दो या तीन वर्ष का होने पर अपने किसी कूलदेवी या कूलदेवता के स्थान पर बच्चे का पहनी बाग मुण्डन करना चूडाकर्म/जडूला कहलाता है।
22. फूल चुनने की क्रिया दाह संस्कार के बाद किस दिन की जाती है?
- (A) तीसरे दिन
- (B) बारहवें दिन
- (C) चौथे दिन
- (D) दूसरे दिन
दाह संस्कार के बाद फूल चुनना एक महत्वपूर्ण मृत्यु संस्कार है, जो सामान्यतः तीसरे दिन किया जाता है। इस रस्म में चिता की राख से अस्थियाँ और फूल एकत्रित किए जाते हैं, जिन्हें बाद में पवित्र नदी या जल स्रोत में विसर्जित किया जाता है। यह मृतक की आत्मा की शांति और धार्मिक परंपरा से जुड़ी प्रक्रिया मानी जाती है।
23. संथारा प्रथा किस धर्म से सम्बन्धित है?
- (A) बौद्ध
- (B) मुस्लिम
- (C) जैन
- (D) हिन्दू
संथारा प्रथा जैन धर्म से संबंधित है। इसमें व्यक्ति जीवन के अंतिम चरण में स्वेच्छा से अन्न और जल का त्याग कर समभाव से मृत्यु का वरण करता है। जैन दर्शन में इसे आत्मशुद्धि और मोक्ष प्राप्ति की प्रक्रिया माना जाता है। यह धार्मिक अनुशासन और तपस्या से जुड़ी विशेष परंपरा है।
24. पानीवाड़ा संस्कार किससे सम्बन्धित है?
- (A) विवाह
- (B) गृह प्रवेश
- (C) बच्चे के जन्म
- (D) मृत्यु
किसी व्यक्ति की मृत्यु के समय जब लोग एकत्रित होकर स्नान करके मृतक के परिवार जनों को सांत्वना देते है, तो इस समय किया जाने वाला स्नान पानीवाड़ा कहलाता है।
25. जीवित रहते ही मृत्यु से पहले भोज दिया जाना कहलाता है?
- (A) मौसर
- (B) बढ़ार
- (C) औसर
- (D) कांधिया
कुछ क्षेत्रों में व्यक्ति द्वारा जीवित रहते हुए ही मृत्यु से पहले दिया जाने वाला भोज औसर कहलाता है। इसका उद्देश्य समाज और रिश्तेदारों के साथ अंतिम बार मिलना तथा धार्मिक भावना के साथ दान और भोजन कराना होता है। राजस्थान की लोक परंपराओं में इसे विशेष सामाजिक और सांस्कृतिक महत्व दिया जाता है।
26. मृत व्यक्ति को बैठाकर श्मशान ले जाने के लिए प्रयुक्त शैया क्या कहलाती है?
- (A) बिखेर
- (B) अर्था
- (C) बैकुंठी
- (D) आधेटा
मृत व्यक्ति को बैठी अवस्था में श्मशान ले जाने के लिए प्रयुक्त विशेष शैया को बैकुंठी कहा जाता है। यह मृत्यु संस्कार से संबंधित पारंपरिक व्यवस्था है, जिसमें मृतक को सम्मानपूर्वक अंतिम यात्रा पर ले जाया जाता है। राजस्थान की लोक परंपराओं में इस शब्द का प्रयोग अंतिम संस्कार की प्रक्रिया के संदर्भ में किया जाता है।
27. सागड़ी प्रथा से तात्पर्य है?
- (A) बंधुआ मजदूर प्रथा
- (B) मृत्यु के बारहवें दिन का भोज
- (C) विवाह पश्चात बारात को भेंट देना
- (D) मृत्यु के तीसरे दिन की शोक सभा
सागड़ी या बंधुआ मजदूर प्रथा उधार दी गई राशि के बदले उस व्यक्ति से नौकर की तरह कार्य करवाने से सम्बन्धित है। इनसे खेतों में काम करवाना हाली प्रथा व घर में काम करवाना चाकर प्रथा कहलाता था।
28. राजस्थान की वह परम्परा, जिसमें दूल्हे की बारात के घर से चले जाने के बाद घर की स्त्रियों द्वारा लोक नाट्य किया जाता है, कहलाता है?
- (A) टूटिया
- (B) रम्मत
- (C) स्वांग
- (D) ख्याल
टूटिया वह लोकनाट्य है जो दूल्हे की बारात जाने के बाद घर की महिलाओं द्वारा किया जाता है। इसमें हास्य, गीत और अभिनय के माध्यम से मनोरंजन किया जाता है। यह राजस्थान की पारंपरिक स्त्री-लोक संस्कृति का हिस्सा है और विवाह समारोह को आनंदमय बनाने के लिए किया जाता है।
29. राजस्थानी संस्कृति में 'औलंदी' क्या है?
- (A) विवाह का एक प्रकार
- (B) एक देशी खेल
- (C) नववधु के साथ जाने वाली लड़की या स्त्री
- (D) राजस्थानी लोक-गीत
औलंदी उस स्त्री या लड़की को कहा जाता है जो नववधू के साथ ससुराल जाती है। इसका उद्देश्य नई दुल्हन को नए वातावरण में सहयोग देना और उसे सहज महसूस कराना होता है। यह रस्म पारिवारिक सहयोग और सामाजिक सुरक्षा का प्रतीक मानी जाती है।
30. अप्रैल 1930 में बाल विवाह निरोधक कानून के प्रणेता कौन थे?
- (A) अर्जुनलाल सेठी
- (B) रायबहादुर हरविलास
- (C) हीरालाल शास्त्री
- (D) जमनालाल बजाज
हरविलास शारदा एक शिक्षाविद, न्यायाधीश और समाज सुधारक थे। उनके प्रयासों से बाल विवाह निरोधक अधिनियम (शारदा एक्ट) अस्तित्व में आया, जो बाल विवाह रोकने की दिशा में महत्वपूर्ण कानून था। यह कानून भारतीय समाज में सामाजिक सुधार का बड़ा कदम माना जाता है।
31. अनमेल विवाह और अलवर रियासत विवाह निषेध अधिनियम सबसे पहले कब निषेध किया गया?
- (A) 5 मार्च 1902
- (B) 10 दिसम्बर 1903
- (C) 10 मार्च 1901
- (D) 10 जनवरी 1904
अलवर रियासत के शासक सर जयसिंह प्रभाकर ने 10 दिसम्बर 1903 को बाल विवाह और अनमेल विवाह पर रोक लगाई। यह सामाजिक सुधार की दिशा में प्रारंभिक प्रयासों में से एक था। इस कदम ने राजस्थान में विवाह संबंधी सुधारों को बढ़ावा दिया।
32. कन्या वध को गैर कानूनी घोषित करने वाली राजस्थान की पहली रियासत कौनसी थी?
- (A) झालावाड़
- (B) जयपुर
- (C) शाहपुरा
- (D) कोटा
कन्यावध को सर्वप्रथम कोटा रियासत में राव रामसिंह के समय गैरकानूनी घोषित किया गया। इसके बाद अन्य रियासतों जैसे बूंदी, बीकानेर, जोधपुर और उदयपुर में भी इस प्रथा पर रोक लगाई गई। यह राजस्थान में सामाजिक सुधार की दिशा में महत्वपूर्ण कदम था।
33. राजस्थान के रीति-रिवाजों में 'आणो' क्या है?
- (A) विवाह के बाद दुल्हन को दूसरी बार ससुराल भेजना
- (B) जलझूलनी एकादशी पूजा
- (C) कुआ पूजन
- (D) बारात का डेरा देखने जाना
आणो विवाह के बाद की वह रस्म है जिसमें दुल्हन को दूसरी बार ससुराल भेजा जाता है। यह विवाह के बाद संबंधों की स्थिरता और सामाजिक स्वीकृति का प्रतीक माना जाता है। राजस्थान की पारंपरिक विवाह व्यवस्था में इसका विशेष महत्व है।
34. जयपुर राज्य ने कन्यावध को किस वर्ष गैर कानूनी घोषित किया?
- (A) 1840
- (B) 1842
- (C) 1844
- (D) 1846
जयपुर राज्य में 1844 में कन्या वध को गैरकानूनी घोषित किया गया। यह सामाजिक कुरीतियों को समाप्त करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम था। इस निर्णय ने अन्य रियासतों को भी ऐसे सुधार लागू करने के लिए प्रेरित किया।
35. सती रोकथाम अधिनियम 1987 किस राज्य सरकार द्वारा लागू किया गया?
- (A) पश्चिम बंगाल
- (B) राजस्थान
- (C) बिहार
- (D) असम
1987 में दिवराला (सीकर) की रूपकंवर घटना के बाद राजस्थान सरकार ने सती निवारण अध्यादेश लागू किया। बाद में 3 जनवरी 1988 को इसे अधिनियम का रूप दिया गया। इसका उद्देश्य सती प्रथा और उसके महिमामंडन को रोकना था।
36. निम्नलिखित में से कौन सा संस्कार जन्म से संबंधित है?
- (A) सामेला
- (B) बान
- (C) मौसर
- (D) जडूला
जडूला (मुंडन संस्कार) बच्चे के जन्म से जुड़े संस्कारों में माना जाता है। जब बालक दो या तीन वर्ष का हो जाता है तब उसका प्रथम बार मुण्डन कराया जाता है। यह धार्मिक और सांस्कृतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण संस्कार है।
37. निम्न में से कौनसी प्रथा विवाह से संबंधित है?
- (A) जड़ूला
- (B) जलवा पूजन
- (C) मूठ भराई
- (D) मौसर
मूठ भराई विवाह से संबंधित रस्म है जिसमें वर को शगुन के रूप में धन दिया जाता है। यह विवाह समारोह की पारंपरिक रस्मों में शामिल है।
38. बढ़ार भोज किस अवसर पर रखा जाता है?
- (A) मृत्यु
- (B) उत्सव
- (C) विवाह
- (D) जन्म
बढ़ार विवाह के अवसर पर दिया जाने वाला सामूहिक भोज है। इसमें परिवार और समाज के लोग शामिल होकर नवदंपति को आशीर्वाद देते हैं।
39. सांसी जनजाति में शादी होने पर युवती को अपनी चारित्रिक पवित्रता की परीक्षा देने की रस्म क्या कहलाती है?
- (A) चारी प्रथा
- (B) कुकड़ी की रस्म
- (C) अग्नि रस्म
- (D) चर भर की रस्म
सांसी जनजाति की परंपराओं में विवाह के समय कुछ विशेष रस्में निभाई जाती हैं। इनमें कुकड़ी की रस्म युवती की चारित्रिक पवित्रता से जुड़ी मानी जाती है। यह सामाजिक स्वीकृति और पारंपरिक मान्यताओं का प्रतीक रही है। समय के साथ ऐसी रस्मों का सामाजिक महत्व कम हुआ है, लेकिन लोकसंस्कृति के अध्ययन में इनका उल्लेख महत्वपूर्ण माना जाता है।
40. मारवाड़ में किसी खास मौके पर अफीम गलाने व एक दूसरे को देने की रस्म क्या कहलाती है?
- (A) हलोटा
- (B) डाण
- (C) अखराई
- (D) रियाण
मारवाड़ में रियाण का अर्थ सभा होता है जिसमें अफीम गालने व एक-दूसरे को प्रदान करने की प्रथा है। मारवाड़ में विवाह, मृत्यु के अवसर व सामाजिक कार्यक्रमों में रियाण की परम्परा है।
41. निम्न में से कौनसी प्रथा मृत्यु से संबंधित नहीं है?
- (A) भदर होना
- (B) उठावना
- (C) पगड़ी दस्तूर
- (D) रंगबरी
रंगबरी विवाह से संबंधित रस्म है।
42. शिशु जन्म के अवसर पर वह रस्म जिसमें पूजा के लिए गाँव के कुएँ या जलस्रोत पर एक शोभायात्रा के साथ जच्चा को ले जाया जाता है?
- (A) जलवा पूजन
- (B) पानी पूजन
- (C) मटकी पूजन
- (D) चूड़ा पूजन
जलवा पूजन राजस्थान की पारंपरिक जन्म संस्कार संबंधी रस्म है। शिशु जन्म के बाद निर्धारित समय पर जच्चा को गीत-संगीत और शोभायात्रा के साथ गाँव के कुएँ या जलस्रोत तक ले जाया जाता है। वहाँ पूजा कर नवजात के सुखद जीवन और परिवार की समृद्धि की कामना की जाती है। यह रस्म सामाजिक सहभागिता और पारिवारिक उत्सव का प्रतीक मानी जाती है।
43. आदिवासी क्षेत्र में किसी व्यक्ति की संदिग्ध मृत्यु होने पर मृत्यु स्थान के स्वामी या आरोपी से हर्जाना लेने की परम्परा क्या कहलाती है?
- (A) मौताणा
- (B) महर
- (C) नाता
- (D) मूकाण
आदिवासी समाज में मौताणा एक पारंपरिक प्रथा रही है जिसमें संदिग्ध मृत्यु या विवादित परिस्थितियों में मृतक के परिवार को हर्जाना दिया जाता है। इसका उद्देश्य सामाजिक विवाद को शांत करना और समुदाय के भीतर समझौता स्थापित करना होता था। आधुनिक कानून व्यवस्था लागू होने के बाद इस प्रथा पर नियंत्रण किया गया है, फिर भी सांस्कृतिक अध्ययन में इसका विशेष महत्व है।
44. निम्न में से सोलह संस्कार में शामिल नहीं है-
- (A) पुंसवन
- (B) सप्तपदी
- (C) निष्क्रमण
- (D) केशान्त
हिंदू धर्म के सोलह संस्कार जीवन के विभिन्न चरणों से जुड़े धार्मिक अनुष्ठान हैं। पुंसवन, निष्क्रमण और केशान्त इनमें शामिल माने जाते हैं। जबकि सप्तपदी मुख्य रूप से विवाह की एक रस्म है, जिसे सात फेरे के रूप में जाना जाता है। इसलिए इसे सोलह संस्कारों की पारंपरिक सूची में स्वतंत्र संस्कार के रूप में शामिल नहीं किया जाता।
45. दुनिया का एकमात्र ऐसा शहर कौनसा है, जहाँ का पूरा परकोटा एक छत है?
- (A) जयपुर
- (B) बीकानेर
- (C) जैसलमेर
- (D) जोधपुर
बीकानेर में पुष्करणा ब्राह्मण समाज द्वारा 2 वर्ष के अंतराल से आयोजित होने वाला सामूहिक विवाह अनूठा अवसर होता है। जिसे ओलम्पिक सावा के नाम से भी जाना जाता है। बीकानेर दूनिया का एकमात्र शहर है, जहाँ का पूरा परकोटा एक छत है।
46. राजस्थान में त्याग प्रथा पर सर्वप्रथम रोक लगाने वाली रियासत है?
- (A) कोटा
- (B) जयपुर
- (C) जोधपुर
- (D) बीकानेर
त्याग प्रथा पर सर्वप्रथम प्रतिबंध जोधपुर में महाराजा मानसिंह के समय 1841 ई. में लगाई गयी।
47. मेवाड़ रियासत में मेवाड़ के महाराणा के प्रति स्थायी भक्ति की शपथ लेना क्या कहलाती थी?
- (A) आन प्रथा
- (B) तागा करना
- (C) वधारा देना
- (D) प्राण प्रथा
मेवाड़ की परंपराओं में आन प्रथा निष्ठा और सम्मान का प्रतीक मानी जाती थी। इसमें व्यक्ति महाराणा के प्रति स्थायी भक्ति और वफादारी की शपथ लेता था। यह केवल राजनीतिक निष्ठा ही नहीं बल्कि सामाजिक और नैतिक दायित्व भी माना जाता था। राजपूत संस्कृति में आन शब्द सम्मान और प्रतिष्ठा से जुड़ा हुआ है, इसलिए इस प्रथा का विशेष महत्व रहा।
48. वह रिवाज जिसमें पुत्र के जन्म के अवसर पर ननिहाल पक्ष द्वारा बालक और उसके वस्त्र व आभूषण दिये जाते हैं, क्या कहलाता है?
- (A) मायरा
- (B) मुगधणा
- (C) जामणा
- (D) जनोंटण
जामणा राजस्थान की पारंपरिक जन्म संबंधी रस्म है, जिसमें ननिहाल पक्ष नवजात शिशु के लिए वस्त्र, आभूषण और उपहार लेकर आता है। यह रस्म मातृ पक्ष के स्नेह और सामाजिक संबंधों को मजबूत करने का प्रतीक मानी जाती है। परिवारों के बीच प्रेम और सहयोग बढ़ाने में इसका विशेष महत्व होता है तथा इसे उत्सव के रूप में मनाया जाता है।
49. विवाह के समय वधू के लिए वर पक्ष द्वारा लाये गये कपड़े व आभूषण क्या कहलाते हैं?
- (A) मायरा
- (B) बरी-पडला
- (C) बेस
- (D) कांकण डोरा
विवाह में वर पक्ष द्वारा वधू के लिए लाए गए कपड़े, आभूषण और अन्य उपहार बरी-पडला कहलाते हैं। यह रस्म विवाह संबंध की स्वीकृति और सम्मान का प्रतीक होती है। राजस्थान की लोक परंपराओं में इसका सामाजिक महत्व है, क्योंकि इससे दोनों परिवारों के बीच संबंध मजबूत होते हैं। यह प्रथा आज भी कई स्थानों पर पारंपरिक रूप से निभाई जाती है।
50. विवाह के दूसरे दिन वर पक्ष द्वारा नवदम्पति के लिए आशीर्वाद समारोह व प्रतिभोज क्या कहलाता है?
- (A) सीख
- (B) बिंदौली
- (C) बढ़ार
- (D) सामेला
विवाह के बाद दूसरे दिन आयोजित होने वाला आशीर्वाद समारोह और सामूहिक भोज बढ़ार कहलाता है। इसमें रिश्तेदार और समाज के लोग नवदम्पति को आशीर्वाद देते हैं। यह रस्म सामाजिक मेल-मिलाप और नए वैवाहिक जीवन की शुभ शुरुआत का प्रतीक मानी जाती है। राजस्थान में बढ़ार को पारिवारिक सम्मान और सामूहिक उत्सव से जोड़कर देखा जाता है।
51. कौनसी रस्म विवाह से सम्बन्धित नहीं है?
- (A) कांकण डोरा
- (B) पहरावणी
- (C) बरी पड़ला
- (D) मोकाण
मोकाण, मृतक के रिश्तेदारों द्वारा मृतक के परिजनों को सांत्वना देने के लिये आने को कहा जाता है।
52. राजस्थान में अंतिम सती होने की घटना किस जिले की है?
- (A) सीकर
- (B) झुंझुनूं
- (C) जयपुर
- (D) चुरू
राजस्थान की अंतिम सती सीकर जिले के देवराला गांव की रूपकँवर नामक महिला थी।
53. आदिवासियों में किस प्रथा के तहत् पत्नी अपने पति को छोड़कर किसी अन्य पुरुष के साथ रह सकती है?
- (A) डावरी प्रथा
- (B) सिरावन
- (C) नाता
- (D) सामेला
आदिवासी समाज में नाता प्रथा एक सामाजिक व्यवस्था के रूप में प्रचलित रही है, जिसमें स्त्री आपसी सहमति से पति को छोड़कर दूसरे पुरुष के साथ वैवाहिक जीवन शुरू कर सकती है। इसमें सामान्यतः कुछ सामाजिक नियम और आर्थिक लेन-देन भी शामिल होते थे। यह प्रथा समुदाय की पारंपरिक सामाजिक संरचना का हिस्सा रही है और आधुनिक समय में इसके स्वरूप में बदलाव आया है।
54. राजस्थान में बाल विवाह पर सर्वप्रथम रोक लगाने वाली रियासत है?
- (A) कोटा
- (B) जयपुर
- (C) जोधपुर
- (D) मेवाड़
बालविवाह पर सर्वप्रथम जोधपुर के प्रधानमंत्री सर प्रताप ने 1885 ई. में रोक लगाई ।
55. सर्वप्रथम राजस्थान की किस रियासत ने सती प्रथा को गैरकानूनी घोषित किया था?
- (A) कोटा
- (B) जयपुर
- (C) बूंदी
- (D) मेवाड़
राजस्थान में सती प्रथा पर रोक लगाने वाली प्रथम रियासत बूंदी (शासक विष्णुसिंह) थी, जिसमें 1822 ई. में सती प्रथा पर रोक लगाई गई।
56. डाकण प्रथा मुख्य रूप से राजस्थान की किस जनजाति में पायी जाती है?
- (A) मीणा
- (B) भील
- (C) गरासिया
- (D) कंजर
डाकण प्रथा मुख्य रूप से भील जनजाति से संबंधित मानी जाती है। इस प्रथा में अंधविश्वास के आधार पर महिलाओं को जादू-टोना करने वाली मान लिया जाता था। सामाजिक अज्ञानता और भय के कारण कई बार महिलाओं को उत्पीड़न का सामना करना पड़ता था। समय के साथ जागरूकता, शिक्षा और कानूनी प्रावधानों के कारण इस प्रथा पर नियंत्रण के प्रयास किए गए हैं।
57. राजस्थान में सती प्रथा का सर्वाधिक प्रचलन किस जाति में रहा है?
- (A) गुर्जर जाति
- (B) राजपूत जाति
- (C) जाट जाति
- (D) ब्राह्मण जाति
राजस्थान के इतिहास में सती प्रथा का सर्वाधिक उल्लेख राजपूत समाज में मिलता है। यह प्रथा वीरता, सम्मान और पारिवारिक प्रतिष्ठा से जोड़कर देखी जाती थी। युद्धकालीन परिस्थितियों और सामाजिक मान्यताओं के कारण इसका प्रभाव अधिक रहा। समय के साथ सामाजिक सुधार आंदोलनों और कानूनों के माध्यम से इस प्रथा पर रोक लगाई गई और इसे गैरकानूनी घोषित किया गया।
58. राजस्थान डायन प्रथा निवारण अधिनियम किस वर्ष से लागू हुआ?
- (A) 2015
- (B) 2016
- (C) 2017
- (D) 2014
राजस्थान डायन प्रताड़ना निवारण अधिनियम (2015) को 26 जनवरी, 2016 से लागू कर इसे गैर-कानूनी घोषित कर दिया।
59. रियासती काल में शासक या जागीरदार अपनी लड़की की शादी में दहेज के साथ कुछ कुंवारी कन्याएँ भी देते थे, जो कहलाती थी?
- (A) चारी
- (B) ओलन्दी
- (C) डावरिया
- (D) पासवान
रियासती काल में विवाह के समय दहेज के साथ कुछ कुंवारी कन्याओं को भी भेजने की परंपरा प्रचलित थी, जिन्हें डावरिया कहा जाता था। ये प्रथा तत्कालीन सामाजिक व्यवस्था और सामंती परंपराओं से जुड़ी थी। बाद में सामाजिक सुधारों और आधुनिक कानूनों के कारण ऐसी प्रथाओं में कमी आई। इतिहास और लोकसंस्कृति के अध्ययन में इस शब्द का विशेष महत्व माना जाता है।
60. किसी स्त्री के दूसरे पति द्वारा महिला के पूर्व पति को दी जाने वाली राशि क्या कहलाती है?
- (A) नाता राशि
- (B) दापा राशि
- (C) तोरण गशि
- (D) झगड़ा राशि
राजस्थान की पारंपरिक सामाजिक व्यवस्था में यदि कोई महिला दूसरे पुरुष के साथ वैवाहिक संबंध बनाती थी, तो पूर्व पति को एक निश्चित राशि दी जाती थी। इसे झगड़ा राशि कहा जाता था। इसका उद्देश्य सामाजिक विवादों को समाप्त करना और समुदाय में समझौता स्थापित करना होता था। यह प्रथा मुख्यतः ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों में प्रचलित रही है।
61. जैन सम्प्रदाय में स्वेच्छा से अन्न, जल त्याग कर मोक्ष प्राप्त करने के लिए देह त्याग करने की प्रथा क्या कहलाती है?
- (A) संथारा
- (B) उठावना
- (C) अंत्येष्टि
- (D) पानीवाड़ा
जैन ग्रन्थों में उल्लेखित इस प्रथा में अन्न जल त्याग कर समत्वभाव से स्वेच्छा से मोक्ष प्राप्ति के लिए देह त्याग की जाती है। चन्द्रगुप्त मौर्य ने श्रवणबेलगोला में संथारा किया था।
62. मानव व्यापार पर राजस्थान की किस रियासत ने सर्वप्रथम प्रतिबन्ध लगाया?
- (A) जोधपुर
- (B) जयपुर
- (C) उदयपुर
- (D) कोटा
मानव व्यापार पर सर्वप्रथम प्रतिबंध जयपुर रियासत में जॉन लूडलों के प्रयासों से 1847 ई. में लगाया गया।
63. यदि राजा द्वारा किसी दासी को उपपत्नी के रूप में स्वीकार कर लिया जाता था तो वह क्या कहलाती थी?
- (A) पड़दायत
- (B) सागड़ी
- (C) ओलन्दी
- (D) ईकताई
रियासती काल में यदि किसी दासी को राजा द्वारा उपपत्नी के रूप में स्वीकार किया जाता था, तो उसे पड़दायत कहा जाता था। यह व्यवस्था राजदरबार की सामाजिक संरचना का हिस्सा थी। ऐसी महिलाओं को कुछ विशेष अधिकार और संरक्षण भी प्राप्त होते थे, परंतु उनका स्थान मुख्य रानी से अलग माना जाता था। इतिहास में यह शब्द सामंती सामाजिक व्यवस्था को समझने के लिए महत्वपूर्ण है।
64. राजस्थान की किस रियासत ने दास प्रथा पर सर्वप्रथम रोक लगाई?
- (A) जयपुर
- (B) जोधपुर
- (C) कोटा
- (D) उदयपुर
लॉर्ड विलियम बैंटिक ने 1832 में दास प्रथा पर रोक लगाई। भारत में दास प्रथा पर सर्वप्रथम अकबर ने रोक लगाई।
65. शारदा एक्ट का सम्बन्ध किस प्रथा से है?
- (A) सागड़ी प्रथा
- (B) त्याग प्रथा
- (C) दास प्रथा
- (D) बाल विवाह
शारदा एक्ट को बाल विवाह निषेध अधिनियम के रूप में जाना जाता है। इसे बाल विवाह की प्रथा को रोकने के उद्देश्य से लागू किया गया था। इस कानून के तहत विवाह की न्यूनतम आयु निर्धारित की गई ताकि बच्चों के स्वास्थ्य, शिक्षा और भविष्य की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके। भारत में सामाजिक सुधार की दिशा में यह एक महत्वपूर्ण कानूनी कदम माना जाता है।
66. विवाह के दिन वधू के माता-पिता व भाइयों द्वारा रखा जाने वाला उपवास क्या कहलाता है?
- (A) हथलेवा
- (B) ऊझणो
- (C) कन्यावल
- (D) उजमणी
विवाह के दिन वधू के माता-पिता और भाईयों द्वारा रखा जाने वाला उपवास कन्यावल कहलाता है। यह रस्म बेटी के सुखी वैवाहिक जीवन और नए परिवार में मंगलमय भविष्य की कामना के लिए की जाती है। राजस्थान की पारंपरिक विवाह रस्मों में इसका विशेष धार्मिक और भावनात्मक महत्व है। यह परिवार के स्नेह और जिम्मेदारी का प्रतीक माना जाता है।
67. दामाद को ससुराल पक्ष के लोगों द्वारा टीका निकालकर दी जाने वाली नगद राशि क्या कहलाती है?
- (A) पगधोई
- (B) जुहारी
- (C) पहरावणी
- (D) कन्यादान
विवाह के अवसर पर दामाद का सम्मान करने के लिए ससुराल पक्ष द्वारा टीका लगाकर जो नगद राशि दी जाती है, उसे जुहारी कहा जाता है। यह रस्म सम्मान, स्नेह और पारिवारिक संबंधों को मजबूत करने का प्रतीक होती है। राजस्थान की पारंपरिक विवाह प्रथाओं में जुहारी का विशेष सामाजिक महत्व है और इसे शुभ अवसर की रस्म माना जाता है।
68. मृतक के रिश्तेदारों द्वारा मृतक के परिजनों के लिए लाए गए वस्त्र आदि क्या कहलाते हैं?
- (A) पहरावणी
- (B) पानीवाड़ा
- (C) ओढ़ावणी
- (D) चिकनी कोथली
मृत्यु संस्कारों में मृतक के रिश्तेदारों द्वारा परिवार के सदस्यों के लिए लाए गए वस्त्र और सामग्री को ओढ़ावणी कहा जाता है। यह रस्म शोक व्यक्त करने और परिवार के प्रति संवेदना प्रकट करने का प्रतीक मानी जाती है। राजस्थान की लोक परंपराओं में ऐसी रस्में सामाजिक सहयोग और भावनात्मक समर्थन को दर्शाती हैं।
69. नवनिर्मित घर में गृह प्रवेश की रस्म क्या कहलाती है?
- (A) ल्हास
- (B) नांगल
- (C) बार रूकाई
- (D) जनोटण
नए घर में प्रवेश के समय की जाने वाली धार्मिक और पारंपरिक रस्म को नांगल कहा जाता है। इसमें पूजा-पाठ और शुभ कार्यों के माध्यम से घर में सुख-समृद्धि की कामना की जाती है। परिवार और रिश्तेदार इस अवसर पर एकत्र होकर नए जीवन की शुरुआत का उत्सव मनाते हैं। यह रस्म ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में परंपरागत रूप से निभाई जाती है।
70. ग्रामीण क्षेत्रों में एक-दूसरे के खेतों में बिना पारिश्रमिक के सामूहिक रूप से मदद करने की परम्परा कहलाती है?
- (A) बेगार
- (B) चाकरी
- (C) ल्हास
- (D) सागड़ी
राजस्थान में मृत शरीर को भी राजस्थानी भाषा में लाश कहते है।
71. महिलाओं द्वारा अपने पति की चिता के साथ जीवित अवस्था में अपने आप को जला लेना और मृत्यु का वरण करना, क्या कहलाता है?
- (A) जौहर
- (B) सती
- (C) साका
- (D) अग्निजौहर
सती प्रथा में पति की मृत्यु के बाद पत्नी द्वारा उसकी चिता पर स्वयं को समर्पित कर देना शामिल था। यह प्रथा प्राचीन सामाजिक मान्यताओं और परंपराओं से जुड़ी रही, लेकिन समय के साथ इसे अमानवीय मानते हुए कानूनी रूप से प्रतिबंधित कर दिया गया। सामाजिक सुधार आंदोलनों ने इस प्रथा के उन्मूलन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
72. मृतक के बेटे व पोतों द्वारा शव यात्रा के आगे-आगे चलते हुए अर्थी को प्रणाम करने की रस्म क्या कहलाती है?
- (A) पिंडदान
- (B) बिखेर
- (C) दंडोत
- (D) औसर
अंतिम संस्कार की प्रक्रिया में मृतक के बेटे और पोते शव यात्रा के दौरान अर्थी को प्रणाम करते हुए चलते हैं, जिसे दंडोत कहा जाता है। यह रस्म मृतक के प्रति सम्मान और अंतिम विदाई का प्रतीक मानी जाती है। राजस्थान की पारंपरिक मृत्यु संबंधी रस्मों में इसका धार्मिक और भावनात्मक महत्व होता है।
73. तोरण पर वधू की माता द्वारा की जाने वाली, दुल्हे की आरती व टीका क्या कहलाता है?
- (A) सामेला
- (B) झाला मिला की आरती
- (C) हथलेवा
- (D) रंगबरी
विवाह के समय जब दूल्हा तोरण पर पहुंचता है, तब वधू की माता द्वारा उसकी आरती और टीका करने की रस्म को झाला मिला की आरती कहा जाता है। यह दूल्हे के स्वागत और शुभकामनाओं का प्रतीक होती है। राजस्थान की विवाह परंपराओं में यह रस्म अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जाती है और पारिवारिक सम्मान से जुड़ी होती है।
74. बाल विवाह प्रतिबंध अधिनियम 1929 पूरे भारत में कब से लागू हुआ?
- (A) 1 अप्रैल, 1929
- (B) 1 अप्रैल, 1930
- (C) 1 अप्रैल, 1932
- (D) 1 अप्रैल, 1934
भारत में बालविवाह प्रतिबंध अधिनियम 1929 28 सितम्बर, 1929 को इम्पीरियर लेजिस्लेटिव काउंसिल ऑफ इंडिया में पारित हुआ। यह कानून 1 अप्रैल, 1930 से पूरे भारत में लागू हुआ। इसमें लड़कियों के विवाह की न्यूनतम उम्र 14 साल व लड़कों के विवाह की उम्र 18 साल रखी गयी।
75. रूपकंवर सती प्रकरण के समय राजस्थान के मुख्यमंत्री कौन थे?
- (A) मोहनलाल सुखाड़िया
- (B) जगन्नाथ पहाड़िया
- (C) भैरोसिंह शेखावत
- (D) हरिदेव जोशी
रूपकंवर सती प्रकरण 1987 में राजस्थान के सीकर जिले के देवराला गाँव में हुआ था। उस समय राजस्थान के मुख्यमंत्री हरिदेव जोशी थे। इस घटना के बाद पूरे देश में सती प्रथा के विरुद्ध व्यापक चर्चा हुई और सरकार ने सती निवारण के लिए कड़े कानूनी कदम उठाए। यह घटना सामाजिक सुधार और कानून व्यवस्था के संदर्भ में महत्वपूर्ण मानी जाती है।
76. गाँव या नगर के बाहर जाकर, वधू पक्ष की ओर से की जाने वाली बारात की अगवानी क्या कहलाती है?
- (A) बरी पड़ला
- (B) पड़जान
- (C) हीरावणी
- (D) बरोटी
विवाह में जब वधू पक्ष के लोग गाँव या नगर के बाहर जाकर बारात का स्वागत करते हैं, तो इस रस्म को पड़जान कहा जाता है। यह सम्मान और आतिथ्य का प्रतीक मानी जाती है। राजस्थान की पारंपरिक विवाह संस्कृति में बारात की अगवानी को विशेष महत्व दिया जाता है और इसे उत्सव के रूप में मनाया जाता है।
77. राजस्थान में 'साका' किसे कहते है?
- (A) जौहर + केसरिया
- (B) जौहर
- (C) केसरिया
- (D) इनमें से कोई नहीं
जब राजपुत यौद्धा केसरिया करते थे व राजपुत वीरांगनाएँ जौहर व्रत करती थी वह साका कहलाता था।
78. किस संस्कार के पश्चात् ब्रह्मचार्य आश्रम की शुरूआत होती है?
- (A) चूण्डाकर्म
- (B) उपनयन
- (C) समावर्तन
- (D) विद्यारंभ
हिंदू धर्म में उपनयन संस्कार के बाद बालक के ब्रह्मचर्य आश्रम की शुरुआत मानी जाती है। इस संस्कार के माध्यम से उसे शिक्षा, अनुशासन और धार्मिक कर्तव्यों के पालन के लिए तैयार किया जाता है। पारंपरिक रूप से इसे गुरुकुल जीवन की शुरुआत का प्रतीक माना गया है और यह सोलह संस्कारों में महत्वपूर्ण स्थान रखता है।
79. विवाह के अवसर पर दर्जी द्वारा वर-वधू के शादी के जोड़े बनाने के लिए लिया जाने वाला नाप क्या कहलाता है?
- (A) इकताई
- (B) ऊझणो
- (C) ऊजमणौ
- (D) गंगाजली
विवाह की तैयारियों में दर्जी द्वारा वर-वधू के वस्त्र तैयार करने के लिए जो नाप लिया जाता है, उसे इकताई कहा जाता है। यह रस्म विवाह की तैयारियों का एक व्यावहारिक हिस्सा है और पारंपरिक रूप से इसे भी एक छोटी रस्म की तरह माना जाता है। ग्रामीण क्षेत्रों में इस प्रक्रिया से जुड़ी कई स्थानीय परंपराएँ भी देखने को मिलती हैं।
80. किसी योद्धा की मृत्यु के बाद उसकी निशानी के साथ उसकी विधवा पत्नी द्वारा चितारोहण होना कहलाता है?
- (A) साका
- (B) चारी
- (C) जौहर
- (D) अनुमरण
अनुमरण उस प्रथा को कहा जाता है जिसमें किसी योद्धा की मृत्यु के बाद उसकी विधवा पत्नी उसकी निशानी के साथ चिता पर चढ़ जाती थी। यह प्रथा वीरता और पति के प्रति समर्पण से जोड़कर देखी जाती थी। इतिहास में इसे सामाजिक परंपराओं का हिस्सा माना गया, लेकिन आधुनिक समय में ऐसी प्रथाओं को समाप्त कर दिया गया है।
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Mukesh Khunga
Mukesh Khunga को राजस्थान में आयोजित होने वाली विभिन्न प्रतियोगी एवं भर्ती परीक्षाओं के परीक्षा पैटर्न और प्रश्नों के स्वरूप की अच्छी समझ है। उनके मार्गदर्शन में यह अध्ययन सामग्री और MCQ content तैयार एवं review किया गया है। Read More...








