राजस्थान की जनजातियाँ MCQ in Hindi | Questions, Answers and Explanation
इस पोस्ट में राजस्थान की कला एवं संस्कृति के टॉपिक
राजस्थान की जनजातियाँ से संबंधित Latest व पूर्णतः updated महत्वपूर्ण
MCQ
प्रश्न दिए गए हैं।
इनमें भील, सहरिया, गरासिया, मीणा, सांसी, डामोर आदि से सम्बंधित महत्वपूर्ण जानकारियों को व्याख्या सहित शामिल किया गया है।
ये महत्वपूर्ण MCQ प्रश्न
RPSC,
RSSB,
RAS, Patwar, Police, LDC, VDO, REET
तथा राजस्थान राज्य की अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए
उपयोगी हैं। इनमें विषयवार प्रश्न, सही उत्तर एवं विस्तृत व्याख्या
शामिल हैं।
✍️ Prepared & Reviewed by:
Rajputana Diary –
Rajasthan GK Faculty & Content Team
(Since 2021)
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1. राजस्थान की कौनसी जनजाति भारत सरकार द्वारा आदिम जनजाति समूह में शामिल है?
A
भील
B
सहरिया
C
गरासिया
D
मीणा
📖 व्याख्या
सहरिया जनजाति राजस्थान की एकमात्र जनजाति है जिसे आदिम जनजाति समूह (PVTG) में शामिल किया गया है। यह समुदाय सामाजिक और आर्थिक रूप से कमजोर माना जाता है और इनके विकास के लिए विशेष योजनाएँ चलाई जाती हैं। सहरिया जनजाति मुख्य रूप से जंगल क्षेत्रों में निवास करती है।
2. राजस्थान के किस जिले में सहरिया जनजाति केन्द्रित है?
A
सिरोही
B
डूंगरपुर-बांसवाड़ा
C
उदयपुर-चित्तौड़गढ़
D
बारां
📖 व्याख्या
सहरिया जनजाति मुख्य रूप से बारां जिले में केंद्रित है, खासकर शाहबाद और किशनगंज तहसीलों में। यह राजस्थान की आदिम जनजाति मानी जाती है। कुछ आबादी कोटा और झालावाड़ जिलों में भी पाई जाती है। बारां क्षेत्र इनकी संस्कृति और सामाजिक जीवन का मुख्य केंद्र है।
3. राजस्थान में किस तहसील में सहरिया जनजाति का घनत्व अधिकतम है?
A
धरियाबाद
B
किशनगंज
C
छबरा
D
मांगरोल
📖 व्याख्या
सहरिया जनजाति का घनत्व बारां जिले की किशनगंज तहसील में सबसे अधिक पाया जाता है। यह क्षेत्र उनकी पारंपरिक बसावट का प्रमुख केंद्र है। सहरिया समुदाय वाल्मीकि को अपना आदि गुरु मानता है और सीताबाड़ी मेला इनके लिए विशेष धार्मिक महत्व रखता है।
4. डामोर जनजाति का मुख्य व्यवसाय क्या है?
A
खेती करना
B
शिकार
C
फल इकट्ठा करना
D
मछली पालन
📖 व्याख्या
डामोर जनजाति का मुख्य व्यवसाय कृषि और पशुपालन है। यह समुदाय मुख्य रूप से दक्षिणी राजस्थान में पाया जाता है। पुरुषों द्वारा आभूषण पहनना इसकी विशेष सांस्कृतिक पहचान है। खेती पर आधारित जीवनशैली के कारण ये लोग ग्रामीण क्षेत्रों में स्थायी रूप से बसे हुए मिलते हैं।
5. धारी संस्कार राजस्थान की किस जनजाति में प्रचलित है?
A
गरासिया
B
मीणा
C
सहरिया
D
भील
📖 व्याख्या
धारी संस्कार सहरिया जनजाति में प्रचलित एक विशेष परंपरा है। इसमें मृतक की राख और अस्थियाँ आंगन में रखकर संकेत देखे जाते हैं और बाद में कपिलधारा में प्रवाहित की जाती हैं। यह संस्कार पुनर्जन्म की मान्यता और धार्मिक आस्था से जुड़ा हुआ है।
6. हेलरू संस्था संबद्ध है –
A
गरासिया
B
सहरिया
C
भील
D
मीणा
📖 व्याख्या
हेलरू गरासिया जनजाति की सहकारी संस्था मानी जाती है। यह सामूहिक सहयोग और सामाजिक कार्यों से जुड़ी व्यवस्था है। गरासिया समाज में सामूहिक कृषि और सामाजिक सहयोग की परंपराएँ मजबूत हैं, जो उनकी सामुदायिक जीवनशैली को दर्शाती हैं।
7. ‘फाइरे-फाइरे’ किस जनजाति का रणघोष है?
A
भील
B
गरासिया
C
डामोर
D
मीणा
📖 व्याख्या
‘फाइरे-फाइरे’ भील जनजाति का रणघोष है। संकट या आपदा के समय यह पुकार देकर समुदाय के लोग तीर-कमान लेकर एकत्र हो जाते थे। यह उनकी एकता और सामूहिक सुरक्षा व्यवस्था का प्रतीक है, जो पारंपरिक जीवनशैली का महत्वपूर्ण हिस्सा रही है।
8. गरासिया जनजाति में गांव के मुखिया को क्या कहा जाता है?
A
तदवी
B
सहलोत
C
मुखी
D
पटेल
📖 व्याख्या
गरासिया जनजाति में गांव के मुखिया को सहलोत कहा जाता है। यह व्यक्ति सामाजिक निर्णय लेने और समुदाय का नेतृत्व करने का कार्य करता है। अलग-अलग जनजातियों में मुखिया के नाम अलग होते हैं, जैसे डामोर में मुखी और भील में गमेती।
9. कनजारा-खाड़लिया भूत लोकनाट्य किस जनजाति का प्रसिद्ध है?
A
गरासिया
B
भील
C
मीणा
D
सहरिया
📖 व्याख्या
कनजारा-खाड़लिया लोकनाट्य भील जनजाति की सांस्कृतिक पहचान का हिस्सा है। भील समुदाय में लोकनाट्य, नृत्य और गीतों के माध्यम से परंपराएं पीढ़ी दर पीढ़ी आगे बढ़ती हैं। यह लोकनाट्य धार्मिक विश्वास, लोककथाओं और सामाजिक संदेशों को प्रस्तुत करता है। ग्रामीण क्षेत्रों में आज भी इसे उत्सवों और विशेष अवसरों पर किया जाता है।
10. राजस्थान में सर्वाधिक मीणा जाति के लोग कहाँ निवास करते हैं?
A
जोधपुर
B
उदयपुर
C
जयपुर
D
बांरा
📖 व्याख्या
राजस्थान में मीणा जनजाति की आबादी सबसे अधिक उदयपुर जिले में पाई जाती है। जनगणना के आंकड़ों के अनुसार उदयपुर के बाद जयपुर और प्रतापगढ़ में भी इनकी संख्या अधिक है। मीणा समाज कृषि और स्थानीय प्रशासनिक गतिविधियों से जुड़ा हुआ है। उनकी सांस्कृतिक पहचान, लोकदेवताओं में आस्था और पारंपरिक रीति-रिवाज राजस्थान की जनजातीय संस्कृति का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं।
11. मीणा जनजाति के प्रसिद्ध पाँच कबीलों को किस नाम से जाना जाता है?
A
पाँच सितारे
B
पंचलड़ा
C
पंचवाड़ा
D
पंचायत
📖 व्याख्या
मीणा जनजाति में कई उपसमूह या कबीले पाए जाते हैं, जिनमें पाँच प्रमुख कबीलों को सामूहिक रूप से पंचवाड़ा कहा जाता है। यह नाम उनके सामाजिक संगठन और पारंपरिक पहचान को दर्शाता है। इन कबीलों के माध्यम से विवाह, सामाजिक नियम और पारंपरिक व्यवस्थाएं तय की जाती हैं। मीणा समाज में यह व्यवस्था सामाजिक एकता बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
A
भीलों के घरों का समूह
B
मीणाओं के घरों का समूह
C
आदिवासियों की महापंचायत
D
भीलों के कुल देवता
📖 व्याख्या
भील जनजाति में घरों के छोटे समूह को ‘फला’ कहा जाता है। यह सामान्यतः एक ही परिवार या रिश्तेदारी से जुड़े लोगों का निवास क्षेत्र होता है। फला सामाजिक और सांस्कृतिक रूप से महत्वपूर्ण इकाई होती है, जहाँ लोग आपसी सहयोग और सामूहिक जीवन शैली का पालन करते हैं। ग्रामीण और वन क्षेत्रों में आज भी इस प्रकार की बसावट देखने को मिलती है।
13. मीणा का शाब्दिक अर्थ क्या है?
A
मछली
B
माँ
C
तीर चलाने वाला
D
जनजाति
📖 व्याख्या
‘मीणा’ शब्द का शाब्दिक अर्थ मछली माना जाता है। कई इतिहासकारों के अनुसार इसका संबंध प्राचीन मत्स्य जनपद से जोड़ा जाता है। इस जनजाति का इतिहास राजस्थान की प्राचीन सभ्यताओं से जुड़ा हुआ है। मीणा समाज अपनी विशिष्ट संस्कृति, लोकदेवताओं और परंपराओं के कारण राजस्थान की प्रमुख जनजातियों में गिना जाता है।
14. भील जनजाति विवाह में मंडप की सजावट किस वृक्ष की पत्तियों से की जाती है?
📖 व्याख्या
भील जनजाति विवाह के अवसर पर मंडप की सजावट आम के पत्तों से करती है। आम को शुभ माना जाता है और इसे मंगल कार्यों में उपयोग किया जाता है। विवाह समारोह में प्राकृतिक तत्वों का प्रयोग भील समाज की प्रकृति से जुड़ी जीवनशैली को दर्शाता है।
15. भील जनजाति द्वारा पहाड़ी ढालों पर की जाने वाली स्थानांतरित कृषि कहलाती है?
A
दजिया
B
चिमाता
C
दिप्पा
D
दहिया
📖 व्याख्या
पहाड़ी ढालों पर की जाने वाली भीलों की स्थानांतरित कृषि को चिमाता कहा जाता है। इसमें जंगल साफ करके अस्थायी खेती की जाती है। यह पारंपरिक कृषि पद्धति प्राकृतिक परिस्थितियों के अनुसार विकसित हुई है और जनजातीय जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा रही है।
16. ‘बीजा’ व ‘माला’ किस जनजाति की शाखाएँ हैं?
A
सांसी
B
डामोर
C
सहरिया
D
कंजर
📖 व्याख्या
बीजा और माला सांसी जनजाति की दो प्रमुख उपशाखाएँ हैं। सांसी समुदाय को घुमक्कड़ और खानाबदोश प्रवृत्ति वाला माना जाता है। राजस्थान में यह समुदाय मुख्य रूप से भरतपुर और झुंझुनूं जिलों में पाया जाता है।
17. राजस्थान में सर्वाधिक प्रतिशत वाली जनजाति कौनसी है?
A
भील
B
मीणा
C
गरासिया
D
भील मीणा
📖 व्याख्या
मीणा जनजाति राजस्थान की सबसे बड़ी जनजाति है और कुल जनजातीय आबादी में इसका प्रतिशत सबसे अधिक है। यह समुदाय मुख्य रूप से उदयपुर, जयपुर और प्रतापगढ़ क्षेत्रों में पाया जाता है। सामाजिक और राजनीतिक दृष्टि से भी मीणा जनजाति का महत्वपूर्ण स्थान है।
18. ‘धारी संस्कार’ किस आदिवासी जनजाति में प्रचलित है?
A
सहरिया
B
गरासिया
C
भील
D
मीणा
📖 व्याख्या
धारी या बेलपत्ती संस्कार सहरिया जनजाति की एक विशेष परंपरा है। इसमें मृतक की अस्थियाँ और राख कुछ समय तक आंगन में रखी जाती हैं और बनने वाले चिह्नों को अगले जन्म का संकेत माना जाता है। बाद में इन्हें पवित्र स्थान पर विसर्जित किया जाता है। यह संस्कार सहरिया समाज की धार्मिक मान्यताओं और पुनर्जन्म की आस्था को दर्शाता है।
19. निम्नलिखित में से कौनसा कथन राजस्थान की सहरिया जनजाति के बारे में सही नहीं है?
A
इनमें चौहान, डोडिया आदि गोत्र होते हैं।
B
सहरिया जादू-मंतर और देवी-देवताओं में विश्वास करते हैं।
C
सहरिया समुदाय में लट्ठमार होली की परंपरा प्रचलित है।
D
सहरिया जनजाति के मुखिया को तपाड़ा कहा जाता है।
📖 व्याख्या
सहरिया जनजाति राजस्थान की प्रमुख आदिम जनजातियों में से एक है। इनके समाज में गोत्र व्यवस्था, लोकदेवताओं में आस्था और पारंपरिक रीति-रिवाज मिलते हैं। लेकिन “तपाड़ा” शब्द इनके मुखिया के लिए प्रचलित नहीं है, इसलिए यह कथन गलत माना जाता है। यह प्रश्न सहरिया जनजाति की सामाजिक संरचना और सांस्कृतिक विशेषताओं की समझ को जांचता है।
20. ‘छेड़ा फाड़ना’ से संबंधित है?
A
आदिवासी जनजाति में तलाक की परम्परा
B
कपड़े का टुकड़ा करना
C
परिवार से अलग होना
D
युद्ध में मारे जाना
📖 व्याख्या
छेड़ा फाड़ना आदिवासी समाज में तलाक से जुड़ी एक पारंपरिक प्रथा है। इसमें पति-पत्नी के संबंध समाप्त होने का प्रतीकात्मक संकेत दिया जाता है। यह प्रक्रिया सामाजिक मान्यता के साथ की जाती है ताकि भविष्य में विवाद न हो। जनजातीय समाज में ऐसे रीति-रिवाज सामाजिक संतुलन और सामुदायिक सहमति बनाए रखने का माध्यम माने जाते हैं।
21. आदिवासियों में सामूहिक सहयोग की परम्परा कहलाती है?
A
हीड़ा
B
हांडा
C
हलमा
D
उपर्युक्त सभी
📖 व्याख्या
आदिवासी समाज में सामूहिक सहयोग की परंपरा को हलमा, हांडा या हीड़ा जैसे नामों से जाना जाता है। जब किसी परिवार को घर बनाना हो, खेती का काम करना हो या अन्य सहायता की जरूरत हो, तब पूरा समुदाय मिलकर मदद करता है। यह परंपरा सामाजिक एकता और सहयोग की भावना को मजबूत बनाती है और जनजातीय जीवन की खास पहचान मानी जाती है।
A
भीलों का अन्तिम संस्कार
B
भीलों का मृत्युभोज
C
मीणाओं का मृत्युभोज
D
सांसी जनजाति का शिकार
📖 व्याख्या
भील जनजाति में मृत्युभोज की परंपरा को ‘काट्टा’ कहा जाता है। यह आयोजन मृतक की स्मृति में किया जाता है, जिसमें रिश्तेदार और समुदाय के लोग शामिल होते हैं। इसका उद्देश्य सामाजिक एकता बनाए रखना और परिवार को सांत्वना देना होता है। जनजातीय समाज में ऐसे आयोजन सामाजिक संबंधों को मजबूत करने का महत्वपूर्ण माध्यम होते हैं।
23. आदिवासियों के कुम्भ के नाम से प्रसिद्ध बेणेश्वर मेला कब भरता है?
A
कार्तिक पूर्णिमा
B
माघ पूर्णिमा
C
चैत्र शुक्ल तृतीया
D
आश्विन पूर्णिमा
📖 व्याख्या
बेणेश्वर मेला राजस्थान के आदिवासी क्षेत्रों का सबसे बड़ा धार्मिक मेला माना जाता है और इसे आदिवासियों का कुम्भ भी कहा जाता है। यह मेला माघ पूर्णिमा के अवसर पर आयोजित होता है। भील और अन्य जनजातियाँ यहाँ बड़ी संख्या में एकत्रित होकर धार्मिक अनुष्ठान, स्नान और सांस्कृतिक कार्यक्रमों में भाग लेती हैं। यह मेला आस्था और संस्कृति का महत्वपूर्ण केंद्र है।
24. भील पुरुषों की तंग धोती को क्या कहा जाता है?
A
ढेपाड़ी
B
ढेपाड़ा
C
मिलाला
D
माट्टा
📖 व्याख्या
भील पुरुषों के पारंपरिक वस्त्रों में तंग धोती को ढेपाड़ा या टेपाड़ा कहा जाता है। यह पहनावा उनके दैनिक जीवन और कामकाज के अनुकूल होता है। इसके साथ फेंटा और अन्य वस्त्र भी पहने जाते हैं। पारंपरिक वेशभूषा भील संस्कृति की पहचान मानी जाती है और त्योहारों तथा सामाजिक आयोजनों में आज भी इसका उपयोग किया जाता है।
25. भील पुरुषों द्वारा सिर को ढकने का सफेद वस्त्र क्या कहलाता है?
A
पोत्या
B
पगड़ी
C
अंगोछा
D
ढेपाड़ा
📖 व्याख्या
भील पुरुषों द्वारा सिर ढकने के लिए इस्तेमाल किया जाने वाला सफेद कपड़ा ‘पोत्या’ कहलाता है। यह गर्मी और धूल से बचाव के साथ-साथ सम्मान का प्रतीक भी माना जाता है। ग्रामीण और जनजातीय क्षेत्रों में पारंपरिक पहनावे का अभी भी महत्व है। पोत्या पहनना सामाजिक पहचान और परंपरा को दर्शाने का एक तरीका माना जाता है।
26. भील स्त्रियों द्वारा शादी के अवसर पर पहना जाने वाला पीले रंग का लहंगा क्या कहलाता है?
A
ढारिया
B
पिरिया
C
पुलाव
D
बोलावा
📖 व्याख्या
भील महिलाओं का पारंपरिक पहनावा रंग-बिरंगा और आकर्षक होता है। शादी जैसे विशेष अवसरों पर वे पीले रंग का लहंगा पहनती हैं, जिसे पिरिया कहा जाता है। यह वस्त्र शुभता और उत्सव का प्रतीक माना जाता है। इसके साथ चोली, ओढ़नी और अन्य आभूषण भी पहने जाते हैं, जो भील संस्कृति की सुंदरता और परंपरा को दर्शाते हैं।
A
हरे रंग की साड़ी
B
लाल रंग की साड़ी
C
वृद्ध महिला
D
उच्च गोत्र
📖 व्याख्या
भील महिलाओं द्वारा पहनी जाने वाली लाल रंग की साड़ी को सिंदूरी कहा जाता है। यह विशेष रूप से पारंपरिक और सांस्कृतिक अवसरों पर पहनी जाती है। लाल रंग को शुभ और उत्सव का प्रतीक माना जाता है। भील समाज में वस्त्रों के अलग-अलग नाम उनकी संस्कृति और जीवनशैली की पहचान को दर्शाते हैं।
A
भीलों के घर का बाहरी बैठक बरामदा
B
मीणा जनजाति के घर
C
जानवर बांधने का स्थल
D
शादी का मंडप
📖 व्याख्या
भील घरों में बाहरी बैठक या बरामदे को ढालिया कहा जाता है। यह स्थान मेहमानों के बैठने और सामाजिक बातचीत के लिए उपयोग में आता है। ग्रामीण जीवन में ऐसे स्थान सामुदायिक संबंधों को मजबूत बनाने में मदद करते हैं। ढालिया पारंपरिक घरों की संरचना का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है।
29. होली के अवसर पर भील कौनसा नृत्य करते हैं?
A
हाथीमना
B
गैर
C
गवरी
D
राई
📖 व्याख्या
होली के अवसर पर भील जनजाति द्वारा गैर नृत्य किया जाता है। यह सामूहिक नृत्य होता है जिसमें पुरुष और महिलाएं पारंपरिक वेशभूषा में भाग लेते हैं। ढोल और लोकवाद्यों की धुन पर किया जाने वाला यह नृत्य उत्साह और सामाजिक एकता का प्रतीक है। राजस्थान की लोकसंस्कृति में गैर नृत्य का विशेष स्थान है।
30. राजस्थान में भीलों के गाँवों के समूह के मुखिया को क्या कहते हैं?
A
मुखिया
B
गमेती
C
फलावी
D
फला
📖 व्याख्या
भील समाज में प्रशासनिक व्यवस्था पारंपरिक रूप से संगठित होती है। गाँवों के समूह के मुखिया को गमेती कहा जाता है, जबकि एक गाँव के मुखिया को अलग नाम से जाना जाता है। गमेती सामाजिक विवादों का समाधान और समुदाय का नेतृत्व करता है। यह पद जनजातीय समाज में सम्मान और जिम्मेदारी का प्रतीक माना जाता है।
31. भीलों द्वारा कन्या का मूल्य चुकाने की प्रथा कहलाती है?
A
दापा
B
ढारिया
C
गमेती
D
नतारा
📖 व्याख्या
भील जनजाति में विवाह के समय कन्या पक्ष को दिया जाने वाला मूल्य दापा कहलाता है। यह परंपरा सामाजिक स्वीकृति के साथ निभाई जाती है और विवाह संबंध को औपचारिक रूप देती है। इसका उद्देश्य आर्थिक सहयोग और सामाजिक मान्यता देना होता है। जनजातीय समाज में ऐसी परंपराएँ लंबे समय से चली आ रही हैं।
32. भीलों द्वारा पहाड़ी भाग में की जाने वाली कृषि क्या कहलाती है?
A
दजिया
B
वालरा
C
चिमाता
D
झूमिंग
📖 व्याख्या
भील जनजाति पहाड़ी क्षेत्रों में विशेष प्रकार की कृषि करती है, जिसे चिमाता कहा जाता है। यह स्थानीय परिस्थितियों और सीमित संसाधनों के अनुसार विकसित खेती की पद्धति है। इसमें प्राकृतिक संसाधनों का उपयोग कर खेती की जाती है। यह पद्धति जनजातीय जीवन और पर्यावरण के बीच संतुलन बनाए रखने का उदाहरण है।
33. ऐसे विवाह जिनमें लड़का लड़की के माता-पिता के घर रहकर सेवा करता है?
A
सेवा विवाह
B
हरण विवाह
C
हठ विवाह
D
परीवीक्षा विवाह
📖 व्याख्या
सेवा विवाह जनजातीय क्षेत्रों में प्रचलित एक विशेष विवाह पद्धति है। इसमें लड़का विवाह से पहले या बाद में लड़की के परिवार के साथ रहकर उनकी सेवा करता है। यह परंपरा आपसी समझ और परिवार की सहमति पर आधारित होती है। इससे दोनों परिवारों के बीच विश्वास और सहयोग बढ़ता है।
34. निम्नलिखित में से कौनसी राजस्थान की जनजाति नहीं है?
A
खटीक
B
भील
C
मीणा
D
डामोर
📖 व्याख्या
खटीक राजस्थान की जनजाति नहीं मानी जाती, जबकि भील, मीणा और डामोर प्रमुख जनजातियों में शामिल हैं। जनजातियों की पहचान उनके पारंपरिक जीवन, संस्कृति और सामाजिक ढांचे से होती है। राजस्थान में विभिन्न जनजातियाँ अपनी अलग संस्कृति और रीति-रिवाजों के लिए जानी जाती हैं, जो राज्य की सांस्कृतिक विविधता को दर्शाती हैं।
35. ‘भाखर बावजी’ किस जनजाति के संरक्षक माने जाते हैं?
A
गरासिया
B
भील
C
मीणा
D
सहरिया
📖 व्याख्या
भाखर बावजी को गरासिया जनजाति का संरक्षक और आदिपुरुष माना जाता है। सिरोही क्षेत्र का भाखर इलाका गरासिया समाज का मूल क्षेत्र माना जाता है। इस समुदाय में भाखर बावजी के प्रति गहरी आस्था है और धार्मिक अवसरों पर उनकी पूजा की जाती है। यह परंपरा गरासिया समाज की सांस्कृतिक पहचान और इतिहास से जुड़ी हुई है।
36. राजस्थान में किस जनजाति की जनसंख्या सर्वाधिक है?
A
मीणा
B
भील
C
गरासिया
D
सहरिया
📖 व्याख्या
राजस्थान में जनसंख्या की दृष्टि से मीणा जनजाति सबसे बड़ी मानी जाती है। यह जनजाति मुख्य रूप से पूर्वी राजस्थान के जिलों में अधिक पाई जाती है। मीणा समाज कृषि, सामाजिक नेतृत्व और स्थानीय प्रशासनिक गतिविधियों में सक्रिय भूमिका निभाता है। उनकी सांस्कृतिक परंपराएँ और लोकदेवताओं में आस्था राजस्थान की जनजातीय पहचान का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं।
37. निम्न में से कौनसा वृक्ष भील जनजाति का पवित्र वृक्ष है?
A
पीपल
B
खेजड़ी
C
महुआ
D
बरगद
📖 व्याख्या
महुआ वृक्ष भील जनजाति के लिए अत्यंत पवित्र और उपयोगी माना जाता है। इसके फूलों से पेय पदार्थ, भोजन और कई घरेलू चीजें तैयार की जाती हैं। भील समाज का जीवन जंगल और प्राकृतिक संसाधनों से जुड़ा हुआ है, इसलिए महुआ का धार्मिक और आर्थिक दोनों महत्व है। त्योहारों और पारंपरिक अनुष्ठानों में भी इसका विशेष स्थान होता है।
38. निम्न में से असंगत है?
A
भील – बाँसवाड़ा
B
गरासिया – सिरोही
C
सहरिया – जयपुर
D
डामोर – डूंगरपुर
📖 व्याख्या
सहरिया जनजाति मुख्य रूप से बारां, कोटा और झालावाड़ क्षेत्रों में पाई जाती है, इसलिए सहरिया – जयपुर का संयोजन असंगत माना जाता है। अन्य विकल्प सही क्षेत्रीय संबंध दर्शाते हैं। राजस्थान की प्रत्येक जनजाति का अपना भौगोलिक क्षेत्र और सांस्कृतिक आधार होता है, जो उनकी पहचान और जीवनशैली को प्रभावित करता है।
39. राज्य में सर्वाधिक सहरिया जनजाति के लोग किस जिले में रहते हैं?
A
कोटा
B
बारां
C
झालावाड़
D
उदयपुर
📖 व्याख्या
सहरिया जनजाति राजस्थान में सबसे अधिक बारां जिले की शाहबाद और किशनगंज तहसीलों में निवास करती है। यह जनजाति आदिम जनजातियों में गिनी जाती है और जंगलों के निकट रहने वाली जीवनशैली अपनाती है। इनके अलावा कोटा और झालावाड़ जिलों में भी इनकी उपस्थिति मिलती है। बारां क्षेत्र इनके सामाजिक और सांस्कृतिक जीवन का प्रमुख केंद्र माना जाता है।
40. किस जनजाति में मरे हुए व्यक्ति के मुँह में शराब की बूंदे डालने का रिवाज है?
A
भील
B
गरासिया
C
सहरिया
D
कंजर
📖 व्याख्या
कंजर जनजाति में मृत्यु से जुड़े कुछ विशेष पारंपरिक रीति-रिवाज पाए जाते हैं। इनमें मृतक के मुँह में शराब की बूंदें डालने की परंपरा भी शामिल है, जिसे धार्मिक आस्था और सम्मान से जोड़ा जाता है। जनजातीय समाजों में ऐसे संस्कार उनके विश्वासों और लोक परंपराओं को दर्शाते हैं। यह परंपरा पीढ़ियों से चली आ रही सांस्कृतिक मान्यताओं का हिस्सा है।
41. घोटिया अम्बा का प्रसिद्ध भील मेला किस जिले में लगता है?
A
डूंगरपुर
B
बाँसवाड़ा
C
उदयपुर
D
जालौर
📖 व्याख्या
घोटिया अम्बा का मेला भील जनजाति का प्रसिद्ध धार्मिक और सांस्कृतिक आयोजन है, जो बाँसवाड़ा जिले में आयोजित होता है। इस मेले में बड़ी संख्या में आदिवासी समुदाय भाग लेते हैं। यहाँ धार्मिक पूजा के साथ लोकनृत्य, गीत और पारंपरिक गतिविधियाँ भी होती हैं। यह मेला सामाजिक मेलजोल और सांस्कृतिक पहचान का महत्वपूर्ण अवसर माना जाता है।
42. जनजातियों के संबंध में ‘कू’ से तात्पर्य है?
A
भीलों के घरों का छोटा समूह
B
गरासिया का घर
C
भील जनजाति का घर
D
गाँव का मुखिया
📖 व्याख्या
भील जनजाति अपने घर को ‘कू’ या ‘टापरा’ कहती है। यह घर सामान्यतः स्थानीय सामग्री से बनाया जाता है और प्राकृतिक वातावरण के अनुसार ढाला जाता है। जनजातीय जीवन में घर केवल रहने का स्थान नहीं बल्कि सामाजिक और पारिवारिक गतिविधियों का केंद्र होता है। कू शब्द भील संस्कृति की पारंपरिक जीवन शैली को दर्शाता है।
43. सहरिया जनजाति में मुखिया को क्या कहते हैं?
A
गमेती
B
प्रधान
C
मेठ
D
कोतवाल
📖 व्याख्या
सहरिया जनजाति में मुखिया को कोतवाल कहा जाता है। यह व्यक्ति सामाजिक पंचायतों में निर्णय लेने और विवादों का समाधान करने का कार्य करता है। कोतवाल समुदाय में अनुशासन और परंपराओं को बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। जनजातीय समाज में ऐसे पद सामाजिक व्यवस्था और सामूहिक निर्णय प्रणाली को मजबूत बनाते हैं।
44. गरासिया जनजाति द्वारा अन्न भंडार की कोठियाँ क्या कहलाती हैं?
A
मोहरी
B
सोहरी
C
कोठरी
D
माट्टा
📖 व्याख्या
गरासिया जनजाति में अन्न भंडारण के लिए बनाई गई पारंपरिक कोठियों को सोहरी कहा जाता है। ये कोठियाँ अनाज को सुरक्षित रखने के लिए बनाई जाती हैं ताकि लंबे समय तक भोजन की व्यवस्था बनी रहे। ग्रामीण और जनजातीय जीवन में अन्न भंडारण का विशेष महत्व होता है। यह व्यवस्था उनकी आत्मनिर्भर जीवनशैली और पारंपरिक ज्ञान को दर्शाती है।
45. किस जनजाति को भारत सरकार द्वारा आदिम जनजाति समूह में रखा गया है?
A
सहरिया
B
गरासिया
C
भील
D
कथौड़ी
📖 व्याख्या
सहरिया जनजाति को भारत सरकार द्वारा विशेष रूप से कमजोर आदिम जनजाति समूह (PVTG) में शामिल किया गया है। यह जनजाति सामाजिक और आर्थिक रूप से पिछड़ी मानी जाती है। सरकार द्वारा इनके विकास के लिए विशेष योजनाएँ चलाई जाती हैं। जंगलों पर निर्भर जीवन और सीमित संसाधनों के कारण इन्हें संरक्षण और सहायता की आवश्यकता होती है।
46. सहरिया जनजाति की कुल देवी है?
A
आमजा माता
B
कोडिया देवी
C
शीलता माता
D
छींच माता
📖 व्याख्या
सहरिया जनजाति की कुल देवी कोडिया देवी मानी जाती हैं। सहरिया समाज में देवी-देवताओं के प्रति गहरी आस्था होती है और धार्मिक अनुष्ठानों में कुल देवी की पूजा विशेष महत्व रखती है। यह पूजा सामाजिक एकता और परंपराओं को बनाए रखने का माध्यम होती है। जनजातीय संस्कृति में कुल देवी का स्थान परिवार और समुदाय दोनों के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है।
47. किस जनजाति के लोग मेलों में अपना जीवनसाथी चुनते हैं?
A
सहरिया
B
गरासिया
C
कंजर
D
सांसी
📖 व्याख्या
गरासिया जनजाति में मेलों के दौरान जीवनसाथी चुनने की परंपरा प्रसिद्ध है। यह विवाह प्रणाली सामाजिक स्वीकृति के साथ अपनाई जाती है और युवाओं को अपनी पसंद का साथी चुनने का अवसर देती है। इस समाज में प्रेम विवाह और विधवा विवाह जैसी प्रथाएँ भी प्रचलित हैं। यह परंपरा गरासिया समाज की सामाजिक स्वतंत्रता को दर्शाती है।
48. राज्य में सहरिया जनजाति का प्रमुख स्थान कौनसा है?
A
अलवर
B
बाँसवाड़ा
C
जयपुर
D
बारां (शाहबाद-किशनगंज)
📖 व्याख्या
राजस्थान में सहरिया जनजाति का मुख्य निवास क्षेत्र बारां जिले की शाहबाद और किशनगंज तहसीलें हैं। यहाँ इनकी आबादी सबसे अधिक पाई जाती है। जंगलों के निकट रहने वाली यह जनजाति पारंपरिक जीवन शैली अपनाती है। इन क्षेत्रों में उनकी संस्कृति, रीति-रिवाज और सामाजिक व्यवस्था आज भी स्पष्ट रूप से देखी जा सकती है।
49. राजस्थान में कौनसी जनजाति सांप पकड़ने का कार्य करती है?
A
कथौड़ी
B
कालबेलिया
C
सांसी
D
कंजर
📖 व्याख्या
कालबेलिया जनजाति सांप पकड़ने और उनसे जुड़े पारंपरिक ज्ञान के लिए प्रसिद्ध है। इनका जीवन सांपों के साथ जुड़ा रहा है और इसी कारण इनकी पहचान पूरे देश में बनी है। कालबेलिया नृत्य भी विश्व प्रसिद्ध है, जो उनकी संस्कृति का महत्वपूर्ण हिस्सा है। यह जनजाति लोककला और पारंपरिक जीवनशैली के लिए जानी जाती है।
50. कौनसी जनजाति के लोग ‘हाकम राजा का प्याला’ पीकर झूठ नहीं बोलते?
A
सहरिया
B
कंजर
C
गरासिया
D
डामोर
📖 व्याख्या
कंजर जनजाति में ‘हाकम राजा का प्याला’ एक पारंपरिक मान्यता से जुड़ा है। इसे पीने के बाद झूठ न बोलने की शपथ मानी जाती है। इस समाज में अपराध या महत्वपूर्ण निर्णय से पहले ईश्वर से अनुमति लेने की परंपरा भी मिलती है। यह विश्वास उनकी सामाजिक नैतिकता और धार्मिक आस्था को दर्शाता है।