राजस्थान की हस्तकलाएँ MCQ | Latest Important Questions with Answers
इस पोस्ट में राजस्थान की कला एवं संस्कृति के टॉपिक राजस्थान की हस्तकलाएँ से संबंधित Latest व पूर्णतः updated महत्वपूर्ण MCQ प्रश्न दिए गए हैं। इनमें मीनाकारी, जाजम चितौड़गढ़, तोरण, बाजोट, राली आदि से सम्बंधित महत्वपूर्ण जानकारियों को व्याख्या सहित शामिल किया गया है।
ये MCQ प्रश्न RPSC, RSMSSB, RSSB, RAS, Patwar, Police, LDC, VDO, Fireman, Woman Superwiser, REET तथा राजस्थान राज्य की अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए अत्यंत उपयोगी हैं।
- Subject: राजस्थान की कला एवं संस्कृति
- Topic: राजस्थान की हस्तकलाएँ
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- Content Type: MCQ Practice Set
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(Since 2021)
1. मोती भारत' किस जिले में पारंपरिक कढ़ाई का नाम है?
- (A) पाली
- (B) सीकर
- (C) बूंदी
- (D) जालौर
मोती भारत जालौर जिले की प्रसिद्ध पारंपरिक कढ़ाई है। इसकी उत्पत्ति गुजरात से मानी जाती है और यह मुख्यतः मोची और काठी जाति की महिलाओं द्वारा की जाती है। इस कढ़ाई में मोतियों का प्रयोग करके आकर्षक डिज़ाइन तैयार किए जाते हैं। सीता बेन इस कला की प्रमुख कलाकार रही हैं। यह कला जालौर की लोक संस्कृति और महिलाओं की सृजनशीलता को दर्शाती है।
2. जयपुर में मीनाकारी की कला महाराजा मानसिंह प्रथम द्वारा कहाँ से लाई गई?
- (A) चीन
- (B) लाहौर
- (C) बलूचिस्तान
- (D) बंगाल
जयपुर में प्रसिद्ध मीनाकारी की कला महाराजा मानसिंह प्रथम द्वारा लाहौर से लाई गई थी। यह कला सोने, चाँदी और तांबे पर रंगीन पच्चीकारी करके की जाती है। मीनाकारी का प्रमुख प्रयोग आभूषणों, पूजा सामग्री और सजावटी वस्तुओं में किया जाता है। जयपुर की मीनाकारी विश्व प्रसिद्ध है और इसे शाही संरक्षण मिलने के कारण यह कला और भी विकसित हुई।
3. जाजम / आजम छपाई प्रसिद्ध है।
- (A) बाड़मेर
- (B) चितौड़
- (C) दौसा
- (D) जोधपुर
जाजम चितौड़गढ़ की प्रसिद्ध कला है। यह सूती मोटे धागे की रेजा या रेजी द्वारा बनी मोटी दरी होती है, जिस पर हाथ से रंगीन छपाई की जाती है। इसे विशेष रूप से मांगलिक और धार्मिक अवसरों पर जमीन पर बिछाया जाता है। जाजम में सामान्यतः लाल और हरे रंग का प्रयोग होता है। यह कला राजस्थान की लोक परंपरा और सामूहिक सामाजिक जीवन का प्रतीक मानी जाती है।
4. विवाह के अवसर पर दुल्हन के घर के मुख्य द्वार पर लकड़ी की एक कलाकृति टंगाई जाती है, जिसके शीर्ष भाग पर मयूर या चिड़िया बनी होती है। जिसे दुल्हा अपनी तलवार या पेड़ की डाली से छूता है, यह लकड़ी की कलाकृति क्या कहलाती है?
- (A) तोरण
- (B) बाजोट
- (C) राली
- (D) चोपड़ा
विवाह के समय दुल्हन के घर के मुख्य द्वार पर लकड़ी की कलाकृति टांगी जाती है, जिसे तोरण कहते हैं। इसके शीर्ष भाग पर मयूर या चिड़िया की आकृति बनी होती है। दुल्हा घर में प्रवेश करने से पहले अपनी तलवार या पेड़ की डाली से इसे छूता है। यह परंपरा सौभाग्य और मंगल का प्रतीकमानी जाती है।
5. लप्पा, लप्पी, किरण और गोखरू क्या है?
- (A) राजस्थानी फिल्म 'सासु माँ' में किरदार
- (B) गोटा की विभिन्न किस्में
- (C) शेरवानी के नाम
- (D) अधिक उपज देने वाले कीट
लप्पा, लप्पी, किरण और गोखरू राजस्थान की पारंपरिक सजावटी कला गोटा की विभिन्न किस्में हैं। गोटे का प्रयोग विशेष रूप से महिलाओं के वस्त्रों में किनारों और डिजाइनों को सुंदर बनाने के लिए किया जाता है। जयपुर, जोधपुर और अन्य क्षेत्रों में गोटे का व्यवसाय और कला अत्यधिक लोकप्रिय है। यह राजस्थान की लोकवेशभूषा की शान मानी जाती है।
6. ऊन से निर्मित वियना व फारसी डिजायन के गलीचों के लिए कौनसा स्थान विख्यात है?
- (A) बीकानेर
- (B) उदयपुर
- (C) भरतपुर
- (D) बाँसवाड़ा
राजस्थान में ऊन से बने वियना और फारसी डिज़ाइन के गलीचे मुख्यतः बीकानेर में बनाए जाते हैं। बीकानेर के गलीचे अपनी मजबूती, सुंदर डिज़ाइन और पारंपरिक बुनाई तकनीक के कारण प्रसिद्ध हैं। रियासती काल में बीकानेर जेल में भी गलीचे तैयार किए जाते थे, जो आज संग्रहणीय धरोहर माने जाते हैं।
7. सूती या रेशमी कपड़े पर बादले से छोटी-छोटी बिंदकी की कढ़ाई कहलाती है-
- (A) मुकेश का काम
- (B) पेचवर्क
- (C) चटापटी का कार्य
- (D) ब्लॉक प्रिंटिंग
सूती या रेशमी कपड़े पर बादले (पतले तार) से छोटी-छोटी बिंदकी की कढ़ाई को मुकेश का काम कहा जाता है। यह कला विशेष रूप से दुपट्टों, चुनरियों और महिलाओं के परिधानों पर की जाती है। इसमें महीनता और चमक बहुत महत्वपूर्ण होती है। यह काम राजस्थान की पारंपरिक कढ़ाई शैलियों में से एक है, जो आज भी लोकप्रिय है।
8. कृषिगत औजारों के लिए प्रसिद्ध स्थान हैं-
- (A) गजसिंहपुर (गंगानगर)
- (B) नागौर
- (C) झोटवाड़ा (जयपुर)
- (D) उक्त सभी
राजस्थान में कृषिगत औजारों के निर्माण के लिए कई स्थान प्रसिद्ध हैं। गजसिंहपुर (गंगानगर) में हल और अन्य कृषि उपकरण बनते हैं, नागौर में कृषि उपकरणों की लोहे की कारीगरी विशेष रूप से प्रसिद्ध है तथा झोटवाड़ा (जयपुर) भी इस क्षेत्र में जाना जाता है। इसलिए सही उत्तर उक्त सभी है क्योंकि ये सभी स्थान कृषिगत औजारों के लिए उल्लेखनीय हैं।
9. स्वर्णाभूषणों में कीमती पत्थर जड़ने की कला कहलाती है-
- (A) कुन्दन
- (B) मिरर वर्क
- (C) पेपरमैशी
- (D) मुरादाबादी का काम
स्वर्णाभूषणों में कीमती और अर्ध-कीमती रत्नों को जड़ने की कला को कुंदन कार्य कहते हैं। इसमें सोने की पन्नियों के साथ रत्नों को सावधानीपूर्वक जड़ा जाता है। यह कला मुख्य रूप से जयपुर, बड़ौदा और दिल्ली के शाही परिवारों में लोकप्रिय रही। राजस्थान की कुंदन जड़ाई विश्व प्रसिद्ध है और आज भी पारंपरिक गहनों का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
10. पीतल के बर्तनों पर खुदाई करके उस पर कलात्मक नक्काशी का कार्य कहलाता है-
- (A) मीनाकारी
- (B) थेवा कला
- (C) मुरादाबादी कार्य
- (D) मुनव्वती का काम
मुरादाबादी कार्य में पीतल या तांबे के बर्तनों पर खुदाई और नक्काशी की जाती है। यह कला धातु शिल्प की सुंदर परंपरा है, जो मुख्यतः सजावटी वस्तुओं जैसे थाल, लोटे, हुक्के और दीपदान में दिखाई देती है। राजस्थान में यह कला हस्तशिल्पियों द्वारा विकसित की गई और आज भी इसका निर्यात बड़े पैमाने पर होता है।
11. ऊँट की खाल के कुप्पों पर सोने या चाँदी से कलात्मक चित्रांकन व नक्काशी कहलाती है-
- (A) उस्ता कला या मुनव्वती का काम
- (B) कुंदन का कार्य
- (C) कोफ्तागिरी
- (D) मुरादाबादी का काम
ऊँट की खाल पर की जाने वाली कलात्मक नक्काशी और सोने-चाँदी की सजावट को उस्ता कला या मुनव्वती का काम कहते हैं। यह कला विशेष रूप से बीकानेर में प्रसिद्ध है। इसमें ऊँट की खाल पर चित्रांकन और नक्काशी कर सुंदर सजावटी वस्तुएँ बनाई जाती हैं। 1975 में इसके लिए बीकानेर में उस्ता कैमल हाइड सेंटर भी स्थापित किया गया।
12. जयपुर मीनाकारी का एक प्रसिद्ध स्थल है। इस कला को लाने का श्रेय किनको है-
- (A) महाराजा मानसिंह प्रथम
- (B) मिर्जा राजा जयसिंह
- (C) राजा भारमल
- (D) सवाई जयसिंह
जयपुर में मीनाकारी की कला लाने का श्रेय महाराजा मानसिंह प्रथम को जाता है। उन्होंने इस कला के कलाकारों को लाहौर से आमेरबुलवाया था। हरिसिंह, अमरसिंह, किशनसिंह, गोभासिंह और श्यामसिंह जैसे प्रमुख कलाकारों ने इस कला को राजस्थान में विकसित किया। आज जयपुर मीनाकारी आभूषणों और सजावटी वस्तुओं के लिए विश्व प्रसिद्ध है।
13. ऊँट के शरीर के बालों को कतर कर शरीर पर कई तरह की आकृतियाँ उकेरने की कला है-
- (A) जट कतराई
- (B) चर्म कला
- (C) कुट्टी कला
- (D) उस्ता कला
ऊँट के शरीर के बालों को काटकर आकृतियाँ और डिज़ाइन बनाने की कला जट कतराई कहलाती है। यह कला विशेष रूप से पशु मेलों जैसे पुष्कर और नागौर में दिखाई देती है। इसमें ऊँट के शरीर पर फूल, पत्ते, ज्यामितीय आकृतियाँ और कभी-कभी धार्मिक चिह्न भी उकेरे जाते हैं। यह कला राजस्थान की पारंपरिक पशुपालन संस्कृति का अनोखा रूप है।
14. फड़ चित्रण' के लिए राजस्थान का कौनसा जिला प्रसिद्ध है?
- (A) केकड़ी (अजमेर)
- (B) उदयपुर
- (C) शाहपुरा (भीलवाड़ा)
- (D) भीलवाड़ा
फड़ चित्रण के लिए राजस्थान का शाहपुरा (भीलवाड़ा) प्रसिद्ध है। इसमें कपड़े या कैनवास पर प्राकृतिक रंगों की सहायता से देवी-देवताओं और पौराणिक कथाओं के दृश्य बनाए जाते हैं। फड़ चलित मंदिर के रूप में धार्मिक अनुष्ठानों में प्रयुक्त होती है। यह कला पीढ़ी-दर-पीढ़ी जोशी परिवार द्वारा संरक्षित और विकसित की गई है।
15. बकरी के बालों से जट पट्टी की बुनाई का मुख्य केन्द्र कहाँ स्थित है?
- (A) जयपुर
- (B) सवाई माधोपुर
- (C) जसोल (बालोतरा)
- (D) खेतड़ी (झुंझुनूं)
बकरी के बालों से जट पट्टी की बुनाई का प्रमुख केंद्र जसोल (बालोतरा) है। यहाँ पारंपरिक तरीके से बकरी के बालों को संसाधित करके उनसे मजबूत और टिकाऊ पट्टियाँ बनाई जाती हैं। इनका प्रयोग विशेष रूप से रस्सियों और मोटे कपड़ों में किया जाता है। यह कला ग्रामीण कारीगरों की आजीविका का महत्वपूर्ण साधन रही है।
16. कागज की लुगदी बनाकर उससे कलात्मक वस्तुएँ बनाने की कला क्या कहलाती है?
- (A) पेपर मेशी
- (B) कागजी टेराकोटा
- (C) कोफ्तगिरी
- (D) बादला
कागज की लुगदी से विभिन्न कलात्मक वस्तुएँ बनाने की कला पेपर मेशी कहलाती है। इसमें गत्ते और कागज को गला कर गाढ़ा पेस्ट बनाया जाता है और उससे खिलौने, सजावटी सामान तथा मूर्तियाँ तैयार की जाती हैं। यह कला राजस्थान में बच्चों के खिलौनों और त्योहारों की सजावट में विशेष रूप से देखी जाती है।
17. मलीर प्रिंट का संबंध किस जिले से है?
- (A) बाड़मेर
- (B) चितौड़गढ़
- (C) जयपुर
- (D) जोधपुर
मलीर प्रिंट का संबंध बाड़मेर जिले से है। यहाँ की खत्री जाति के लोग यह कार्य करते हैं। बाड़मेर में छपाई की विशिष्ट शैलियों को अजरख और मलीर छपाई कहते हैं। मलीर प्रिंट की विशेषता यह है कि इसमें केवल एक तरफ छपाई की जाती है और इसमें कत्थई व काले रंग का उपयोग अधिक होता है। यह कला राजस्थान की पारंपरिक ब्लॉक प्रिंटिंग का हिस्सा है।
18. लकड़ी के झूलों के लिए कौनसा स्थान प्रसिद्ध है?
- (A) उदयपुर
- (B) चितौड़गढ़
- (C) जोधपुर
- (D) बाड़मेर
राजस्थान में लकड़ी के झूलों के निर्माण के लिए जोधपुर प्रसिद्ध है। यहाँ के कारीगर लकड़ी पर सुंदर नक्काशी करके झूले और फर्नीचर तैयार करते हैं। ये झूले न केवल राजस्थान में बल्कि देश-विदेश में भी लोकप्रिय हैं। पारंपरिक डिज़ाइनों और मजबूत लकड़ी की वजह से जोधपुर का फर्नीचर और झूले विशेष पहचान रखते हैं।
19. लकड़ी का नक्काशीदार फर्नीचर कहाँ का प्रसिद्ध है?
- (A) उदयपुर
- (B) जोधपुर
- (C) बाड़मेर
- (D) जालौर
राजस्थान का लकड़ी का नक्काशीदार फर्नीचर विशेष रूप से बाड़मेर का प्रसिद्ध है। यहाँ के कारीगर पारंपरिक ढंग से लकड़ी पर बारीक नक्काशी करके अलमारियाँ, चौखटें, झूले और अन्य सजावटी सामान तैयार करते हैं। बाड़मेर का फर्नीचर अपनी टिकाऊ बनावट और आकर्षक डिज़ाइन के लिए देश-विदेश में लोकप्रिय है।
20. अजरख प्रिन्ट के लिये राजस्थान में कौनसा स्थान प्रसिद्ध है?
- (A) जैसलमेर
- (B) बाड़मेर
- (C) पाली
- (D) सांगानेर
राजस्थान में अजरख प्रिंट के लिए बाड़मेर प्रसिद्ध है। यह ब्लॉक प्रिंटिंग की पारंपरिक कला है, जिसमें गहरे नीले, लाल और काले रंगों का प्रयोग किया जाता है। खत्री समाज इस कला का मुख्य संरक्षक है। अजरख प्रिंट आज भी राजस्थान की लोककला और वस्त्र परंपरा का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
21. किस जिले की मसूरिया, मलमल व डोरा साड़ियाँ प्रसिद्ध है?
- (A) कोटा
- (B) जोधपुर
- (C) बीकानेर
- (D) टोंक
मसूरिया, मलमल और डोरा साड़ियाँ विशेष रूप से कोटा जिले की प्रसिद्ध हैं। इन्हें कोटा डोरिया साड़ी भी कहा जाता है। इन साड़ियों में महीन सूती या रेशमी धागों से जालीदार बुनाई की जाती है, जो इन्हें हल्का और आरामदायक बनाती है। यह साड़ियाँ राजस्थान की वस्त्र परंपरा की शान हैं।
22. निम्न में से कौनसा युग्म असंगत है?
- (A) हाथीदाँत की चूड़ियाँ - जोधपुर
- (B) छपाई के घाघरे - आकोला (चित्तौड़गढ़)
- (C) आम पापड़ - बाँसवाड़ा
- (D) जस्ते की मूर्तियाँ - अलवर
जस्ते की मूर्तियाँ अलवर की नहीं बल्कि जोधपुर की प्रसिद्ध कला है। जोधपुर में बादला और जस्ते के शिल्प विशेष पहचान रखते हैं। जबकि अन्य युग्म सही हैं – जोधपुर हाथीदाँत की चूड़ियों के लिए, आकोला छपाई के घाघरों के लिए और बाँसवाड़ा आम पापड़ के लिए प्रसिद्ध है।
23. बादला' क्या होता है?
- (A) लाख की चूड़िया बनाने वाला
- (B) फेरों के समय पहने जाने वाले दुल्हन के वस्त्र
- (C) जिंक से निर्मित पानी की बोतल
- (D) ऊँट के खाल से बनी कुप्पी
बादला जिंक से बना या जिंक का लेप किया हुआ जल पात्र होता है। इसका प्रयोग विशेष रूप से पानी को ठंडा रखने के लिए किया जाता है। यह कला और बर्तन जोधपुर की प्रसिद्ध विशेषता हैं। राजस्थान में धातु शिल्प की परंपरा के अंतर्गत बादला एक अनोखा उदाहरण है, जो आज भी पारंपरिक उपयोग में लाया जाता है।
24. बिनोटा (दुल्हा-दुल्हन की जूतियाँ) कहाँ के प्रसिद्ध हैं?
- (A) जोधपुर
- (B) उदयपुर
- (C) चुरू
- (D) जैसलमेर
राजस्थान की पारंपरिक बिनोटा (दुल्हा-दुल्हन की जूतियाँ) विशेष रूप से चुरू जिले की प्रसिद्ध हैं। ये जूतियाँ हाथ से तैयार की जाती हैं और शादी-ब्याह जैसे अवसरों पर पहनी जाती हैं। बिनोटा जूतियाँ अपने आकर्षक डिज़ाइन और कढ़ाई के कारण जानी जाती हैं।
25. सालावास गाँव की दरियाँ प्रसिद्ध हैं, सालावास गाँव किस जिले में है?
- (A) बाड़मेर
- (B) बालोतरा
- (C) जयपुर
- (D) जोधपुर
सालावास गाँव, जो जोधपुर जिले में स्थित है, अपनी पारंपरिक दरियों के लिए प्रसिद्ध है। यहाँ हाथ से बनी दरियाँ अपने आकर्षक रंगों और टिकाऊपन के कारण विशेष पहचान रखती हैं। यह कला स्थानीय कारीगरों की पीढ़ी-दर-पीढ़ी चली आ रही परंपरा का हिस्सा है।
26. कागज पर निर्मित देवी-देवताओं के चित्र कहलाते है-
- (A) पेपरमेशी
- (B) पाने
- (C) वील
- (D) चटापटी
कागज पर बने देवी-देवताओं के चित्र पाने कहलाते हैं। यह छोटे आकार के चित्र होते हैं, जिन्हें धार्मिक महत्व प्राप्त है। विशेष रूप से नाथद्वारा में श्रीनाथजी के पाने सर्वाधिक प्रसिद्ध और कलात्मक माने जाते हैं। पाने कला भक्ति और चित्रकला का सुंदर मेल है, जो राजस्थान की धार्मिक संस्कृति को दर्शाती है।
27. पश्चिमी राजस्थान में ग्रामीण क्षेत्र में महिलाओं द्वारा घर को सजाने व दैनिक उपयोग की वस्तुओं को सुरक्षित रखने के लिए बनायी जाने वाली मिट्टी की महलनुमा आकृति क्या कहलाती है?
- (A) मोठड़ा
- (B) वील
- (C) बटोड़ा
- (D) बांधनी
पश्चिमी राजस्थान में ग्रामीण महिलाएँ अपने घर को सजाने और उपयोगी वस्तुओं को सुरक्षित रखने के लिए मिट्टी की महलनुमा आकृतिबनाती हैं, जिसे वील कहा जाता है। वील केवल उपयोगी ही नहीं बल्कि सजावटी भी होती है। इस पर रंग, आकृतियाँ और पारंपरिक डिजाइन बनाकर घर को सुंदर बनाया जाता है। यह लोककला गाँव की महिलाओं की सृजनशीलता का अनूठा उदाहरण है।
28. टेराकोटा मूर्तियाँ निम्नलिखित से किससे बनायी जाती है?
- (A) सिरेमिक जैसी से
- (B) लकड़ी
- (C) अयस्क से
- (D) प्लास्टिक
टेराकोटा मूर्तियाँ मिट्टी से बनाई जाती हैं, जो पकाकर कठोर की जाती है और सिरेमिक जैसी लगती है। राजस्थान में मोलेला (राजसमंद) और बू-नरावता (नागौर) जैसे स्थान इस कला के लिए प्रसिद्ध हैं। यहाँ देवी-देवताओं व सांस्कृतिक कथाओं से जुड़ी मूर्तियाँ बनती हैं। यह कला पीढ़ी दर पीढ़ी चली आ रही है और ग्रामीण जीवन में इसका धार्मिक व सांस्कृतिक महत्व है।
29. श्री लाल जोशी का एक प्रमुख चित्रकार है-
- (A) चित्रकला
- (B) पिछवाई
- (C) माण्डणा
- (D) पट चित्रण फड़
श्रीलाल जोशी फड़ चित्रण (पट चित्रण) के प्रमुख कलाकार थे। इनका जन्म मार्च 1931 में शाहपुरा (भीलवाड़ा) में हुआ और 2018 में इनका निधन हुआ। इन्हें 2006 में पद्मश्री, 2007 में शिल्पगुरु सम्मान मिला। देवनारायण जी पर बनाई गई फड़ की वजह से ये विश्वप्रसिद्ध हुए और 1992 में भारत सरकार ने उन पर डाक टिकट भी जारी किया।
30. राजस्थान का कौन सा शहर 'अजरक प्रिंट' के लिए प्रसिद्ध है?
- (A) बाड़मेर
- (B) अजमेर
- (C) सांगानेर
- (D) भीलवाड़ा
अजरख प्रिंट बाड़मेर की प्रसिद्ध छपाई शैली है, जिसे खत्री जाति के लोग करते हैं। इसमें लाल और नीले रंगों का प्रयोग प्रमुख होता है। इसकी खासियत है कि दोनों तरफ छपाई की जाती है और ज्यामितीय अलंकरण बनाए जाते हैं। यह छपाई तुर्की टाइलों से मिलती-जुलती दिखाई देती है।
31. बाड़मेर प्रिंट किस नाम से जाना जाता है?
- (A) बादला
- (B) अजरक
- (C) फड़
- (D) पिछवाई
बाड़मेर प्रिंट अजरख प्रिंट के नाम से जाना जाता है। इसे खत्री जाति के लोग करते हैं। इसमें लाल और नीले रंग का विशेष उपयोग होता है। खास बात यह है कि अजरख प्रिंट दोनों तरफ से छापा जाता है, जिससे यह बेहद आकर्षक और टिकाऊ होता है।
32. मलीर प्रिंट का संबंध है?
- (A) उदयपुर से
- (B) बाड़मेर से
- (C) सांगानेर से
- (D) बूंदी से
मलीर प्रिंट बाड़मेर (बालोतरा) की प्रसिद्ध छपाई है। इसमें कत्थई और काले रंग का प्रयोग होता है और यह केवल एक तरफ छपाई वाली होती है। इसकी विशेषता है ज्यामितीय डिजाइनों का उपयोग। खत्री जाति के लोग इसे बनाते हैं और इस क्षेत्र के प्रसिद्ध कलाकार मोहम्मद यासीन छींपा मलीर प्रिंट के लिए विख्यात हैं।
33. बाड़मेर ब्लॉक मुद्रित कपड़े का एक और नाम क्या है?
- (A) टोकरी बुनाई
- (B) अजरक
- (C) छींट
- (D) शेवरॉन
बाड़मेर के ब्लॉक मुद्रित कपड़े अजरख या मलीर प्रिंट के नाम से जाने जाते हैं। अजरख प्रिंट में लाल-नीले रंग का उपयोग होता है और यह दोनों तरफ छपाई होती है, जबकि मलीर प्रिंट कत्थई और काले रंग में केवल एक तरफ छपाई की जाती है। दोनों में ज्यामितीय डिजाइनों की प्रधानता होती है।
34. हिसामुद्दीन किस हस्तशिल्प के सिद्धहस्त कलाकार थे?
- (A) थेवा कला
- (B) उस्ता कला
- (C) जट पट्टी कला
- (D) मीनाकारी
हिसामुद्दीन उस्ता उस्ता कला के सिद्धहस्त कलाकार थे। यह कला ऊँट की खाल पर सोने की नक्काशी (मुनव्वती कला) के रूप में प्रसिद्ध है। बीकानेर इसका प्रमुख केंद्र है। हिसामुद्दीन उस्ता को 1986 में पद्मश्री से सम्मानित किया गया था। उन्होंने कैमल हाइड ट्रेनिंग सेंटर बीकानेर में भी महत्वपूर्ण योगदान दिया।
35. जोधपुर का प्रसिद्ध बादला निम्नलिखित में से क्या है?
- (A) लकड़ी का मंदिर
- (B) जस्ते से बनी पानी की बोतल
- (C) जरी की साड़ी
- (D) टेराकोटा की मूर्तियां
बादला जोधपुर की पारंपरिक कला है, जिसमें जस्ते से बनी पानी की बोतलें प्रसिद्ध हैं। यह धातु-शिल्प का उत्कृष्ट उदाहरण है। राजस्थान के विभिन्न क्षेत्रों की अन्य कलाएँ भी उल्लेखनीय हैं – मोलेला (राजसमंद) टेराकोटा मूर्तियों के लिए, बेवाण (बस्सी, चित्तौड़गढ़) लकड़ी (फाष्ट) मंदिरों के लिए तथा जयपुर जरी की साड़ियों के लिए प्रसिद्ध है। इस प्रकार प्रत्येक क्षेत्र ने अपनी अलग पहचान बनाई।
36. फड़ चित्रण के लिए जाना जाता है।
- (A) शाहपुरा
- (B) चित्तौड़
- (C) नाथद्वारा
- (D) किशनगढ़
फड़ चित्रण राजस्थान की प्रसिद्ध लोककला है, जो मुख्यतः शाहपुरा (भीलवाड़ा) क्षेत्र में विकसित हुई। इसमें बड़े कपड़े पर धार्मिक और पौराणिक कथाएँ चित्रित की जाती हैं। यह कला चलित मंदिर के रूप में जानी जाती है और मेलों व जागरणों में सुनाई जाने वाली कहानियों को चित्रों के माध्यम से प्रस्तुत करती है। इसके प्रमुख कलाकारों में श्रीलाल जोशी और पार्वती जोशी का नाम लिया जाता है।
37. कांवड़' बनाने के लिए कौन प्रसिद्ध है?
- (A) उस्ताद लालचन्द
- (B) मांगीलाल मिस्त्री
- (C) साहिबराम
- (D) चम्पालाल
राजस्थान में कांवड़ बनाने की परंपरा विशेष रूप से मांगीलाल मिस्त्री (जांगिड़ समाज, द्वारिका) से जुड़ी है। कांवड़ लकड़ी से बने छोटे-छोटे मंदिर जैसे दिखते हैं, जिनमें धार्मिक कथाओं और देवी-देवताओं की झांकियाँ चित्रित होती हैं। यह कला लोक आस्था से गहराई से जुड़ी है और धार्मिक यात्राओं तथा पूजा-अर्चना में प्रयुक्त होती है।
38. ऊंट की खाल पर स्वर्णित नक्काशी का कार्य किस नाम से किया जाता है?
- (A) कारचोब
- (B) फड़चित्रण
- (C) उस्ता कला
- (D) मथेरण कला
ऊँट की खाल पर स्वर्णिम नक्काशी का कार्य उस्ता कला कहलाता है। इसे मुनव्वती कला भी कहते हैं। बीकानेर इसका मुख्य केंद्र है। महाराजा अनुपसिंह के समय लाहौर से लाए गए उस्ता परिवारों ने इसे विकसित किया। कलाकार हिसामुद्दीन उस्ता और मोहम्मद हनीफ इस कला के लिए प्रसिद्ध रहे।
39. मथैरण किस जिले की प्रसिद्ध लोक कला है?
- (A) जोधपुर
- (B) चुरू
- (C) बीकानेर
- (D) उदयपुर
मथैरण कला बीकानेर की प्रसिद्ध लोक कला है। इसमें देवी-देवताओं के भित्ति चित्र बनाए जाते हैं। यह पौराणिक कथाओं और धार्मिक विषयों पर आधारित होती है। मथैरण परिवार इस कला में विशेष रूप से निपुण रहा है और इसे जैन मिश्रित शैली की चित्रकारी के लिए जाना जाता है।
40. कलाकार जो बीकानेर के प्रसिद्ध मथैरण परिवार से संबंधित हैं-
- (A) मुन्नालाल एवं मुकुन्द
- (B) अहमद अली एवं शाह मोहम्मद
- (C) नारायण दास एवं बिशन दास
- (D) रामनाथ एवं मनोहर
बीकानेर का मथैरण परिवार अपने धार्मिक और भित्ति चित्रों के लिए प्रसिद्ध है। इस परिवार से जुड़े मुन्नालाल एवं मुकुन्द प्रमुख कलाकार रहे। इन्होंने देवी-देवताओं के भित्ति चित्र और व्यक्तिगत चित्र बनाने में महारत हासिल की। बीकानेर चित्र शैली के विकास में इस परिवार का बहुत योगदान है।
41. अपने बहुआयामी रूपों जैसे ऊंट की खाल का मीनाकारी, स्वर्ण मीनाकारी और महलों और हवेलियों में चित्रों (उस्ता कला) के लिए विश्व प्रसिद्ध है।
- (A) बीकानेर
- (B) जोधपुर
- (C) गंगानगर
- (D) उदयपुर
उस्ता कला बीकानेर की विश्व प्रसिद्ध कला है। इसमें ऊँट की खाल पर स्वर्ण मीनाकारी और मुनव्वती का कार्य किया जाता है। राजस्थान लघु उद्योग निगम ने बीकानेर में कैमल हाइड ट्रेनिंग सेंटर की स्थापना की, जहाँ इस कला को बढ़ावा दिया गया। यह कला केवल ऊँट की खाल तक सीमित नहीं रही बल्कि काँच, लकड़ी और मिट्टी की वस्तुओं पर भी की जाती है। प्रमुख कलाकार हिसामुद्दीन उस्ता और मोहम्मद हनीफ रहे।
42. निम्नलिखित में से राजस्थान में कौनसा विकल्प पारंपरिक उद्योग का एक उदाहरण है?
- (A) सीमेंट
- (B) ईंट निर्माण
- (C) पश्मीना शॉल
- (D) हस्तनिर्मित कालीन
हस्तनिर्मित कालीन राजस्थान का पारंपरिक उद्योग है। बीकानेर और जैसलमेर कालीन निर्माण के लिए प्रसिद्ध हैं। इसके अलावा जयपुर, बाड़मेर और टोंक ऊनी कंबल व गलीचों के लिए, नापासर खेसले के लिए, और टांकला व सालावास दरियों के लिए प्रसिद्ध हैं। ये उद्योग पीढ़ियों से चलते आ रहे हैं और स्थानीय रोजगार व संस्कृति से जुड़े हुए हैं।
43. राजस्थान में 'ब्लू पॉटरी' कला का संबंध किस जिले में है?
- (A) बीकानेर
- (B) उदयपुर
- (C) जयपुर
- (D) जोधपुर
ब्लू पॉटरी का प्रमुख केंद्र जयपुर है। इसे महाराजा रामसिंह के समय दिल्ली के भोला नामक व्यक्ति से सिखाया गया था। चूड़ामन और कालूराम जैसे कुम्हारों ने इसे अपनाया। ब्लू पॉटरी में नीले, हरे और सफेद रंगों का उपयोग चीनी मिट्टी जैसे बर्तनों पर किया जाता है। यह कला फारस और चीन से प्रेरित है और जयपुर में इसे नया रूप मिला।
44. राजस्थान की किस रियासत ने ब्लू पॉटरी को संरक्षण दिया?
- (A) बूंदी
- (B) उदयपुर
- (C) जोधपुर
- (D) जयपुर
ब्लू पॉटरी को जयपुर के शासकों ने संरक्षण दिया। विशेषकर महाराजा सवाई रामसिंह (1835–1880) के काल में यह कला खूब फली-फूली। यह कला मूल रूप से फारस और चीन से आई थी। चूड़ामन और कालूराम कुम्हारों ने इसे दिल्ली के भोला से सीखा और जयपुर में स्थापित किया। बाद में कृपालसिंह शेखावत जैसे कलाकारों ने इसे अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाई।
45. पद्मश्री कृपालसिंह शेखावत का सम्बन्ध है-
- (A) माण्डणा से
- (B) उस्ता कला से
- (C) ब्लू पॉटरी से
- (D) कालबेलिया नृत्य से
कृपालसिंह शेखावत ब्लू पॉटरी कला के महान कलाकार थे। यह कला क्वार्ट्ज मिट्टी पर नीले, सफेद और हरे रंगों से चित्रकारी की जाती है। शेखावत जी ने इसे नई पहचान दिलाई और 1974 में पद्मश्री तथा 2000 में शिल्पगुरु सम्मान प्राप्त किया। इनके योगदान से जयपुर की ब्लू पॉटरी कला अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मशहूर हुई।
46. राजस्थान के कृपालसिंह शेखावत ने उनके किस क्षेत्र में योगदान के लिए 1974 में पद्मश्री पुरस्कार प्राप्त किया?
- (A) हाथीदांत कार्य
- (B) ब्लू पॉटरी
- (C) लाख कार्य
- (D) साहित्य
कृपालसिंह शेखावत को ब्लू पॉटरी कला में योगदान के लिए पद्मश्री से सम्मानित किया गया। यह कला मूल रूप से फारस और चीन से आई थी और जयपुर में इसका विकास महाराजा रामसिंह के समय हुआ। शेखावत जी ने पारंपरिक डिजाइनों के साथ-साथ आधुनिकता का भी समावेश किया।
47. .............. जयपुर का परंपरागत शिल्प है।
- (A) थेवा कार्य
- (B) ऊनी खादी
- (C) पेन्टिंग्स
- (D) ब्लू पॉटरी
जयपुर की पारंपरिक हस्तकला ब्लू पॉटरी है। इसे पहले कामचीनी भी कहा जाता था। इसमें चीनी मिट्टी जैसी वस्तुओं पर कोबाल्ट ऑक्साइड से नीला रंग प्रमुख होता है। इसका उद्भव पर्शिया से हुआ और जयपुर में इसे विशेष पहचान मिली।
48. ब्लू पॉटरी के लिए प्रसिद्ध कृपालसिंह का सम्बन्ध किस जिले से है?
- (A) जयपुर
- (B) सीकर
- (C) झुंझुनूं
- (D) ब्यावर
राजस्थान की प्रसिद्ध ब्लू पॉटरी कला का विकास मुख्यतः जयपुर में हुआ है। इसके लिए कृपाल सिंह शेखावत का योगदान अत्यधिक महत्वपूर्ण है। उन्होंने इस कला को संरक्षण और अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाई। जयपुर की ब्लू पॉटरी अपने नीले और हरे रंगों की अनोखी पारदर्शिता और आकर्षक डिजाइन के लिए विश्व प्रसिद्ध है।
49. श्रीलाल जोशी, पार्वती जोशी, शांतिलाल जोशी, दुर्गेश कुमार जोशी राजस्थान की किस चित्रकला शैली के प्रसिद्ध कलाकार हैं?
- (A) तारकशी कला
- (B) फड़ चित्रकारी शैली
- (C) उस्ता कला
- (D) ब्लू पॉटरी
राजस्थान की फड़ चित्रकारी शैली के प्रमुख कलाकारों में श्रीलाल जोशी, पार्वती जोशी, शांतिलाल जोशी और दुर्गेश कुमार जोशी का नाम शामिल है। फड़ चित्रण में कपड़े पर देवी-देवताओं और पौराणिक कथाओं को चित्रित किया जाता है। यह चित्रकला विशेष रूप से शाहपुरा (भीलवाड़ा) में विकसित हुई और धार्मिक अनुष्ठानों से गहराई से जुड़ी है।
50. राजस्थान की प्रसिद्ध मीनाकारी हस्तकला का उद्गम कहाँ से हुआ-
- (A) पर्शिया (ईरान)
- (B) दमिश्क
- (C) पेरिस
- (D) गुजरात
मीनाकारी कला का उद्गम पर्शिया (ईरान) से माना जाता है। इसे मुगलों द्वारा भारत लाया गया और लाहौर में स्थापित किया गया। बाद में इस कला को राजस्थान के आमेर और जयपुर में संरक्षण मिला। यहाँ के शासकों ने इस कला को प्रोत्साहित किया और कलाकारों को बसाया। धीरे-धीरे जयपुर मीनाकारी विश्व स्तर पर प्रसिद्ध हो गई।
51. धेवा कला का सम्बन्ध राजस्थान के किस जिले से है?
- (A) प्रतापगढ़
- (B) नाथद्वारा
- (C) बीकानेर
- (D) जयपुर
राजस्थान की प्रसिद्ध थेवा कला (धेवा कला) का संबंध प्रतापगढ़ जिले से है। इसमें रंगीन काँच पर सोने की बारीक नक्काशी करके सुंदर आकृतियाँ बनाई जाती हैं। इस कला में बेल्जियम के रंगीन काँच का विशेष उपयोग होता है। प्रतापगढ़ का सोनी परिवार इस कला के लिए प्रसिद्ध है और इसे अंतरराष्ट्रीय पहचान दिला चुका है।
52. राजस्थान का कौनसा शहर ब्लैक पॉटरी के लिए प्रसिद्ध है?
- (A) बीकानेर
- (B) अलवर
- (C) कोटा
- (D) जयपुर
राजस्थान में ब्लैक पॉटरी के लिए कोटा प्रसिद्ध है। यहाँ पर काले रंग की विशेष मिट्टी से बर्तन और सजावटी वस्तुएँ बनाई जाती हैं। ब्लैक पॉटरी का कार्य सवाई माधोपुर क्षेत्र में भी देखा जाता है। यह कला अपनी विशिष्टता और अनूठे डिजाइनों के कारण आज भी हस्तशिल्प मेलों में आकर्षण का केंद्र बनी रहती है।
53. श्री अब्दुल गफूर खाँ, इम्तियाज अली तथा अब्दुल रजाक कुरैशी किस क्षेत्र में प्रसिद्ध हैं?
- (A) मीनाकारी
- (B) कुंदन कला
- (C) सांगानेरी प्रिंट
- (D) पीतल पर खुदाई
अब्दुल गफूर खाँ, इम्तियाज अली और अब्दुल रजाक कुरैशी राजस्थान में पीतल पर खुदाई की कला में प्रसिद्ध रहे हैं। इस कला को मुरादाबादी कार्य भी कहा जाता है। इसमें पीतल के बर्तनों पर नक्काशी और सजावटी चित्र बनाए जाते हैं। जयपुर में इस कला को सरंक्षण मिला और कई कलाकारों ने इसे विश्वस्तर पर प्रसिद्ध किया।
54. गरासियों की फाग ओढ़नी कहाँ की प्रसिद्ध है?
- (A) आबू रोड
- (B) फालना
- (C) मथानिया
- (D) सोजत
गरासियों की फाग ओढ़नी विशेष रूप से सोजत क्षेत्र की प्रसिद्ध है। इस ओढ़नी को विशेष रंगों और डिजाइनों से सजाया जाता है। गरासिया जनजाति की महिलाएँ इसे त्योहारों और विशेष अवसरों पर पहनती हैं। यह ओढ़नी उनकी सांस्कृतिक पहचान और लोक परंपरा का प्रतीक है।
55. वुडन पेन्टेड फर्नीचर कहाँ का प्रसिद्ध है?
- (A) किशनगढ़
- (B) ब्यावर
- (C) कोटा
- (D) जोधपुर
वुडन पेंटेड फर्नीचर के लिए किशनगढ़ प्रसिद्ध है। यहाँ लकड़ी के फर्नीचर पर रंगीन चित्रकारी की जाती है, जिससे ये वस्तुएँ आकर्षक और कलात्मक बनती हैं। यह फर्नीचर घरेलू उपयोग के साथ-साथ सजावटी उद्देश्य से भी लोकप्रिय है। किशनगढ़ की यह परंपरा राजस्थान की कलात्मक धरोहर का हिस्सा है।
56. मोण' क्या है?
- (A) आदिवासी महिलाओं की ओढ़नी
- (B) गोटे का एक प्रकार
- (C) मेड़ता क्षेत्र में बना मिट्टी का बड़ा मटका
- (D) कपड़े पर मोम की परत चढ़ाया गया चित्र
राजस्थान के मेड़ता क्षेत्र में बनने वाले बड़े आकार के मिट्टी के मटके को मोण कहा जाता है। यह स्थानीय स्तर पर पानी संग्रहण और घरेलू उपयोग के लिए बनाए जाते हैं। मोण की विशेषता इसका बड़ा आकार और टिकाऊपन है। ग्रामीण क्षेत्रों में यह परंपरागत जीवन शैली का महत्वपूर्ण हिस्सा रहा है।
57. कौनसा जिला भोडल की छपाई के लिए प्रसिद्ध है?
- (A) केशवरायपाटन
- (B) बालोतरा
- (C) बगरू
- (D) भीलवाड़ा
भीलवाड़ा जिले में भोडल की छपाई प्रसिद्ध है। यहाँ के छींपे अभ्रक (माइका) का उपयोग करके कपड़ों पर छपाई करते हैं। अभ्रक की चमक के कारण यह प्रिंट दूर से ही आकर्षक दिखाई देता है। स्थानीय भाषा में अभ्रक को भोडल कहा जाता है। इस कारण इसे भोडल की छपाई कहा जाता है, जो भीलवाड़ा की पारंपरिक शिल्पकला का हिस्सा है।
58. कम्बलों की बुनाई के लिए प्रसिद्ध स्थान है?
- (A) गडरा रोड (बाड़मेर)
- (B) बालोतरा
- (C) रामसर (बीकानेर)
- (D) नापासर (बीकानेर)
राजस्थान में गडरा रोड (बाड़मेर) कम्बलों की बुनाई के लिए प्रसिद्ध है। यहाँ के कम्बल अपनी मजबूती और गर्माहट के लिए जाने जाते हैं। स्थानीय कारीगर ऊन से मोटे और टिकाऊ कम्बल बनाते हैं, जो विशेष रूप से ग्रामीण और सीमावर्ती क्षेत्रों में उपयोग किए जाते हैं।
59. राजस्थान में किस राजघराने ने मीनाकारी को प्रोत्साहित किया?
- (A) अलवर
- (B) उदयपुर
- (C) बीकानेर
- (D) जयपुर
राजस्थान में जयपुर राजघराने ने मीनाकारी कला को विशेष संरक्षण दिया। जयपुर में यह कला आभूषणों और धातु शिल्प पर की जाती थी। इसके प्रमुख कलाकारों में सरदार कुदरत सिंह (पद्मश्री 1988), मुन्नालाल, काशीनाथ, कैलाशचन्द्र और दुर्गादास आदि प्रसिद्ध रहे हैं। जयपुर मीनाकारी आज भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रसिद्ध है।
60. रामदेव जी के घोड़े कहाँ के प्रसिद्ध हैं?
- (A) बीकानेर
- (B) पोकरण
- (C) कोटा
- (D) गोगामेड़ी
पोकरण (जैसलमेर) के घोड़े विशेष रूप से रामदेव जी के घोड़े के रूप में प्रसिद्ध हैं। इन घोड़ों को लोक मेलों और धार्मिक अवसरों पर सजाकर प्रस्तुत किया जाता है। राजस्थान की लोक संस्कृति में इन घोड़ों का विशेष धार्मिक महत्व है।
61. आम पापड़ के लिए प्रसिद्ध जिला है?
- (A) बाँसवाड़ा
- (B) उदयपुर
- (C) कोटा
- (D) सिरोही
राजस्थान का बाँसवाड़ा जिला आम पापड़ के लिए प्रसिद्ध है। यहाँ पारंपरिक विधि से आम को सुखाकर पापड़ बनाया जाता है। बाँसवाड़ा के आम पापड़ स्वादिष्ट और लंबे समय तक सुरक्षित रहते हैं। यह स्थानीय कुटीर उद्योग का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
62. तीर कमान निर्माण के लिए प्रसिद्ध स्थान हैं?
- (A) गलियाकोट व सागवाड़ा
- (B) जगतपुरा व छीछ
- (C) बोडीगामा व चन्दूजी का गढ़ा
- (D) कलिजरा व आसपुर
बाँसवाड़ा जिले का चन्दूजी का गढ़ा और डूंगरपुर का बोडीगामा गाँव तीर-कमान निर्माण के लिए प्रसिद्ध हैं। यहाँ के कारीगर परंपरागत रूप से तीर और कमान बनाते रहे हैं, जो राजस्थान की आदिवासी संस्कृति और शौर्य परंपरा का प्रतीक हैं।
63. किस स्थान का रमकड़ा उद्योग प्रसिद्ध है?
- (A) गलियाकोट
- (B) छीछ
- (C) किशोरी गाँव
- (D) सिकन्दरा
डूंगरपुर जिले का गलियाकोट रमकड़ा उद्योग के लिए प्रसिद्ध है। यहाँ सोप स्टोन (घीया पत्थर) से मूर्तियाँ और कलात्मक वस्तुएँ बनाई जाती हैं। यह पत्थर आसानी से तराशा जा सकता है और टिकाऊ भी होता है। रमकड़ा उद्योग डूंगरपुर की पारंपरिक कला और आजीविका का मुख्य साधन है।
64. राजस्थान के किस क्षेत्र में सांझी पूजन व सांझी चित्रण का सर्वाधिक प्रचलन है?
- (A) मेवाड़
- (B) मेवात
- (C) हाड़ौती
- (D) बागड़
मेवाड़ क्षेत्र में सांझी पूजन और सांझी चित्रण का सबसे अधिक प्रचलन है। अमावस्या से लेकर आश्विन अमावस्या तक, कन्याएँ सफेद पुती दीवार पर गोबर से विभिन्न आकृतियाँ (सांझी) बनाती हैं और उनका पूजन करती हैं। यह परंपरा धार्मिक आस्था और सामूहिक संस्कृति का सुंदर उदाहरण है।
65. निम्न में से कौनसा स्थान काष्ठ कला के लिए प्रसिद्ध है?
- (A) मेड़ता
- (B) बालोतरा
- (C) बगरू
- (D) बस्सी
चित्तौड़गढ़ जिले का बस्सी कस्बा काष्ठ कला के लिए प्रसिद्ध है। यहाँ लकड़ी से बने कांवड़, बेवाण, गणगौर की प्रतिमाएँ और अन्य कलाकृतियाँ तैयार की जाती हैं। यह कला यहाँ की पहचान है। हालाँकि जयपुर जिले में भी बस्सी नामक स्थान है, लेकिन काष्ठ कला विशेष रूप से चित्तौड़गढ़ के बस्सी से जुड़ी है।
66. महेशराज सोनी जिनका हाल ही में निधन हुआ है, किस कला के प्रसिद्ध कलाकार थे?
- (A) पेपर मैशी
- (B) थेवा कला
- (C) कोफ्तगिरी
- (D) उस्ता कला
प्रतापगढ़ निवासी महेशराज सोनी प्रसिद्ध थेवा कला के कलाकार थे। इनका निधन फरवरी 2019 में हुआ। इन्हें 2015 में पद्मश्री सम्मान प्रदान किया गया था और ब्रिटिश संसद के हाउस ऑफ कॉमन्स द्वारा भी सम्मानित किया गया था। थेवा कला प्रतापगढ़ की पहचान है, जिसमें काँच पर सोने-चाँदी की नक्काशी की जाती है।
67. निम्न में से किस हस्तकला को भौगोलिक चिह्नीकरण (GI Tag) नहीं मिला है?
- (A) फूलकारी
- (B) पोकरण पॉटरी
- (C) बगरू प्रिन्ट
- (D) मीनाकारी
राजस्थान की कई हस्तकलाओं को GI टैग प्राप्त हुआ है। फूलकारी कला (राजस्थान, पंजाब और हरियाणा) को 2011 में, बगरू प्रिंट को 2012 में और पोकरण पॉटरी को 2018 में GI टैग दिया गया। लेकिन मीनाकारी कला को अभी तक GI टैग नहीं मिला है।
68. चटापटी वर्क के लिए प्रसिद्ध क्षेत्र है?
- (A) मेवाड़
- (B) शेखावाटी
- (C) हाड़ौती
- (D) वागड़
चटापटी वर्क (पेचवर्क) विशेष रूप से शेखावाटी क्षेत्र में प्रसिद्ध है। इस कला में पहले कपड़े पर मनचाहा डिजाइन ट्रेस कर टुकड़े काटे जाते हैं और फिर उन टुकड़ों को दूसरे कपड़े पर रखकर धागों से तुरपाई कर दी जाती है। यह कला राजस्थान की पारंपरिक रजाइयों और घर की सजावटी वस्तुओं में दिखाई देती है। शेखावाटी के अलावा बाड़मेर और अजमेर के तिलोनिया में भी यह कार्य होता है।
69. पाटोदा का लूगड़ा किस क्षेत्र का प्रसिद्ध है?
- (A) मेवाड़
- (B) शेखावाटी
- (C) हाड़ौती
- (D) बागड़
पाटोदा का लूगड़ा राजस्थान के शेखावाटी क्षेत्र का प्रसिद्ध परिधान है। यह मुख्यतः पाटोदा (लक्ष्मणगढ़) और मुकुंदगढ़ (झुंझुनूं) में बनाया जाता है। यह लूगड़ा बंधेज (टाई एंड डाई) शैली का होता है और इसे महिलाएँ विशेष अवसरों पर पहनती हैं। यह शेखावाटी की वस्त्र परंपरा की महत्वपूर्ण पहचान है।
70. निम्नलिखित में से किस वस्त्र का संबंध राजस्थान से नहीं है?
- (A) कांधा
- (B) सांगानेरी
- (C) बांधनी
- (D) बाड़मेरी
कांधा कला का संबंध बंगाल से है, यह एक प्रकार की कढ़ाई है। जबकि सांगानेरी प्रिंट (जयपुर का सांगानेर), बांधनी (जोधपुर, जयपुर, उदयपुर, सोजत आदि) और बाड़मेरी प्रिंट (बाड़मेर) राजस्थान की प्रसिद्ध वस्त्र परंपराएँ हैं। इसलिए सही उत्तर कांधा है।
71. राजस्थान के किस क्षेत्र में 'पंधारी मोदक' प्रसिद्ध है?
- (A) उदयपुर
- (B) जयपुर
- (C) बीकानेर
- (D) कोटा
बीकानेर क्षेत्र पंधारी मोदक के लिए प्रसिद्ध है। यह पारंपरिक मिठाई विशेष अवसरों पर बनाई जाती है। बीकानेर की मिठाइयाँ देशभर में अपने अनोखे स्वाद और गुणवत्ता के लिए प्रसिद्ध हैं। पंधारी मोदक भी वहीं की मिठाई संस्कृति का हिस्सा है।
72. राजस्थान का पहला शिल्पग्राम कहाँ स्थित है?
- (A) बूंदी
- (B) बीकानेर
- (C) जयपुर
- (D) उदयपुर
राजस्थान का पहला शिल्पग्राम उदयपुर के हवाला ग्राम में स्थित है। इसे पारंपरिक हस्तशिल्प, लोककला और ग्रामीण संस्कृति को संरक्षित और प्रदर्शित करने के उद्देश्य से बनाया गया था। यहाँ हर वर्ष शिल्पग्राम उत्सव आयोजित होता है, जिसमें देशभर से कारीगर और कलाकार भाग लेते हैं।
73. किस लोकदेवता को कपड़े और मिट्टी के घोड़े की प्रतिकृति समर्पित की जाती है?
- (A) तेजा जी
- (B) रामदेव जी
- (C) गोगा जी
- (D) देवनारायण जी
गोगा जी को कपड़े और मिट्टी के घोड़े की प्रतिकृति समर्पित की जाती है। लोक परंपरा के अनुसार भक्तजन गोगा जी के मंदिर में जाकर ये घोड़े चढ़ाते हैं। यह आस्था और भक्ति का प्रतीक है। गोगा जी को नागों के देवता भी माना जाता है और उनकी पूजा विशेष रूप से राजस्थान और हरियाणा में होती है।
74. निम्न में से कौनसा एक लोकचित्र कला का उदाहरण नहीं है-
- (A) बणी-ठणी
- (B) फड़
- (C) मांडणा
- (D) सांझी
बणी-ठणी राजस्थान की प्रसिद्ध चित्रकला शैली है, लेकिन इसे लोकचित्र कला का उदाहरण नहीं माना जाता। यह किशनगढ़ की लघु चित्रकला का हिस्सा है। जबकि फड़ चित्रण, मांडणा और सांझी लोक जीवन और धार्मिक परंपराओं से जुड़ी चित्रकलाएँ हैं, जिन्हें लोकचित्रकला की श्रेणी में रखा जाता है।
75. निम्न में से राजस्थान का कौनसा स्थान ब्लैक पॉटरी के लिए प्रसिद्ध है?
- (A) बाँसवाड़ा
- (B) उदयपुर
- (C) चित्तौड़गढ़
- (D) सवाई माधोपुर
सवाई माधोपुर ब्लैक पॉटरी के लिए प्रसिद्ध है। यहाँ काली मिट्टी से सुंदर बर्तन और सजावटी वस्तुएँ बनाई जाती हैं। यह कला अपनी काली चमक और पारंपरिक डिजाइनों के कारण विशेष पहचान रखती है। कोटा क्षेत्र में भी ब्लैक पॉटरी का काम किया जाता है।
76. सरदार कुदरत सिंह को किस हस्तकला में महारथ के लिए पद्मश्री से अलंकृत किया गया है?
- (A) थेवा कला
- (B) कुन्दन कला
- (C) मीनाकारी कला
- (D) मुरादाबादी कार्य
जयपुर के प्रसिद्ध कलाकार सरदार कुदरत सिंह को मीनाकारी कला में महारथ के लिए 1988 में पद्मश्री सम्मान दिया गया। मीनाकारी में धातु की सतह पर रंगीन डिज़ाइन और नक्काशी की जाती है। यह कला जयपुर की विश्व प्रसिद्ध धरोहर है। कुदरत सिंह ने इस कला को देश-विदेश में पहचान दिलाई।
77. राजस्थान में हस्तकला का सबसे बड़ा केन्द्र है?
- (A) गलियाकोट (डूंगरपुर)
- (B) बस्सी (चित्तौड़गढ़)
- (C) बोरानाड़ा (जोधपुर)
- (D) सांगानेर (जयपुर)
राजस्थान में हस्तकला का सबसे बड़ा केंद्र बोरानाड़ा (जोधपुर) है। यहाँ लकड़ी, धातु, वस्त्र और चमड़े से जुड़ी अनेक प्रकार की हस्तकलाएँ विकसित हुई हैं। बोरानाड़ा का औद्योगिक क्षेत्र हस्तकला निर्यात का भी मुख्य केंद्र है। इस कारण यह स्थान राजस्थान ही नहीं बल्कि पूरे देश के हस्तशिल्प उद्योग में विशेष पहचान रखता है।
78. मांगलिक अवसरों पर कुमकुम, अक्षत व चावल आदि रखने और तिलक/टीका करने के लिए उपयोग होने वाला लकड़ी का पात्र क्या कहलाता है?
- (A) खांडा
- (B) चोपड़ा
- (C) थापा
- (D) बांकड़ी
राजस्थान में मांगलिक अवसरों पर तिलक/टीका करने के लिए कुमकुम और अक्षत रखने वाला लकड़ी का पात्र चोपड़ा कहलाता है। यह चौकोर डिब्बीनुमा पात्र होता है, जिसमें अलग-अलग खाने बने रहते हैं। इसे सुंदर नक्काशी और रंगीन चित्रकारी से सजाया जाता है। यह पारंपरिक कला धार्मिक अनुष्ठानों और त्योहारों में महत्वपूर्ण स्थान रखती है।
79. श्री लाल जोशी, जिन्हें 2006 में पद्मश्री पुरस्कार मिला था, को किस कला के लिए जाना जाता है-
- (A) उस्ता कला
- (B) कठपुतली कला
- (C) सांगानेरी प्रिन्ट
- (D) फड़ चित्रकारी
श्रीलाल जोशी राजस्थान के प्रसिद्ध फड़ चित्रकार थे। उन्हें 2006 में पद्मश्री पुरस्कार से सम्मानित किया गया। उनकी बनाई हुई देवनारायण जी की फड़ जर्मनी के संग्रहालय में प्रदर्शित है। फड़ चित्रण राजस्थान की धार्मिक लोककला है जिसमें कपड़े पर देवी-देवताओं और लोककथाओं को चित्रित किया जाता है।
80. कौनसा शहर 'तलवार' निर्माण के लिए प्रसिद्ध है-
- (A) सिकन्दरा
- (B) सिरोही
- (C) ब्यावर
- (D) अलवर
राजस्थान का सिरोही शहर तलवार निर्माण के लिए प्रसिद्ध है। यहाँ की तलवारें अपनी मजबूती, धार और कलात्मकता के लिए जानी जाती हैं। सिरोही की तलवारें ऐतिहासिक काल से ही वीरता और शौर्य का प्रतीक रही हैं। इनका उल्लेख राजस्थान की सैन्य परंपरा में विशेष रूप से मिलता है।
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Mukesh Khunga
Mukesh Khunga को राजस्थान में आयोजित होने वाली विभिन्न प्रतियोगी एवं भर्ती परीक्षाओं के परीक्षा पैटर्न और प्रश्नों के स्वरूप की अच्छी समझ है। उनके मार्गदर्शन में यह अध्ययन सामग्री और MCQ content तैयार एवं review किया गया है। Read More...








