राजस्थान की हस्तकलाएँ MCQ Questions with Answers

राजस्थान की हस्तकलाएँ MCQ in Hindi | Questions, Answers and Explanation

इस पोस्ट में राजस्थान की कला एवं संस्कृति के टॉपिक राजस्थान की हस्तकलाएँ से संबंधित Latest व पूर्णतः updated महत्वपूर्ण MCQ प्रश्न दिए गए हैं। इनमें मीनाकारी, लप्पा लप्पी, जाजम चितौड़गढ़, कुन्दन, मिरर वर्क, पेपरमैशी आदि से सम्बंधित महत्वपूर्ण जानकारियों को व्याख्या सहित शामिल किया गया है।

ये महत्वपूर्ण MCQ प्रश्न RPSC, RSSB, RAS, Patwar, Police, LDC, VDO, REET तथा राजस्थान राज्य की अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए उपयोगी हैं। इनमें विषयवार प्रश्न, सही उत्तर एवं विस्तृत व्याख्या शामिल हैं।

  • Subject: राजस्थान की कला एवं संस्कृति
  • Topic: राजस्थान की हस्तकलाएँ
  • Last Updated:
  • Content Type: Multiple Choice Questions (MCQ)
🔥 Latest Updated MCQ Questions for Exams

✍️ Prepared & Reviewed by:
Rajputana Diary – Rajasthan GK Faculty & Content Team (Since 2021)

Attempt 0
Wrong 0
Right 0
Marks 0/50

1. राजस्थान में किस राजघराने ने मीनाकारी को प्रोत्साहित किया?

A अलवर
B उदयपुर
C बीकानेर
D जयपुर
📖 व्याख्या
राजस्थान में जयपुर राजघराने ने मीनाकारी कला को विशेष संरक्षण दिया। जयपुर में यह कला आभूषणों और धातु शिल्प पर की जाती थी। इसके प्रमुख कलाकारों में सरदार कुदरत सिंह (पद्मश्री 1988), मुन्नालाल, काशीनाथ, कैलाशचन्द्र और दुर्गादास आदि प्रसिद्ध रहे हैं। जयपुर मीनाकारी आज भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रसिद्ध है।

2. लप्पा, लप्पी, किरण और गोखरू क्या है?

A राजस्थानी फिल्म 'सासु माँ' में किरदार
B गोटा की विभिन्न किस्में
C शेरवानी के नाम
D अधिक उपज देने वाले कीट
📖 व्याख्या
लप्पा, लप्पी, किरण और गोखरू राजस्थान की पारंपरिक सजावटी कला गोटा की विभिन्न किस्में हैं। गोटे का प्रयोग विशेष रूप से महिलाओं के वस्त्रों में किनारों और डिजाइनों को सुंदर बनाने के लिए किया जाता है। जयपुर, जोधपुर और अन्य क्षेत्रों में गोटे का व्यवसाय और कला अत्यधिक लोकप्रिय है। यह राजस्थान की लोकवेशभूषा की शान मानी जाती है।

3. ऊन से निर्मित वियना व फारसी डिजायन के गलीचों के लिए कौनसा स्थान विख्यात है?

A बीकानेर
B उदयपुर
C भरतपुर
D बाँसवाड़ा
📖 व्याख्या
राजस्थान में ऊन से बने वियना और फारसी डिज़ाइन के गलीचे मुख्यतः बीकानेर में बनाए जाते हैं। बीकानेर के गलीचे अपनी मजबूती, सुंदर डिज़ाइन और पारंपरिक बुनाई तकनीक के कारण प्रसिद्ध हैं। रियासती काल में बीकानेर जेल में भी गलीचे तैयार किए जाते थे, जो आज संग्रहणीय धरोहर माने जाते हैं।

4. जाजम / आजम छपाई प्रसिद्ध है।

A बाड़मेर
B चितौड़
C दौसा
D जोधपुर
📖 व्याख्या
जाजम चितौड़गढ़ की प्रसिद्ध कला है। यह सूती मोटे धागे की रेजा या रेजी द्वारा बनी मोटी दरी होती है, जिस पर हाथ से रंगीन छपाई की जाती है। इसे विशेष रूप से मांगलिक और धार्मिक अवसरों पर जमीन पर बिछाया जाता है। जाजम में सामान्यतः लाल और हरे रंग का प्रयोग होता है। यह कला राजस्थान की लोक परंपरा और सामूहिक सामाजिक जीवन का प्रतीक मानी जाती है।
Today Deals

5. जयपुर में मीनाकारी की कला महाराजा मानसिंह प्रथम द्वारा कहाँ से लाई गई?

A चीन
B लाहौर
C बलूचिस्तान
D बंगाल
📖 व्याख्या
जयपुर में प्रसिद्ध मीनाकारी की कला महाराजा मानसिंह प्रथम द्वारा लाहौर से लाई गई थी। यह कला सोने, चाँदी और तांबे पर रंगीन पच्चीकारी करके की जाती है। मीनाकारी का प्रमुख प्रयोग आभूषणों, पूजा सामग्री और सजावटी वस्तुओं में किया जाता है। जयपुर की मीनाकारी विश्व प्रसिद्ध है और इसे शाही संरक्षण मिलने के कारण यह कला और भी विकसित हुई।

6. मोती भारत' किस जिले में पारंपरिक कढ़ाई का नाम है?

A पाली
B सीकर
C बूंदी
D जालौर
📖 व्याख्या
मोती भारत जालौर जिले की प्रसिद्ध पारंपरिक कढ़ाई है। इसकी उत्पत्ति गुजरात से मानी जाती है और यह मुख्यतः मोची और काठी जाति की महिलाओं द्वारा की जाती है। इस कढ़ाई में मोतियों का प्रयोग करके आकर्षक डिज़ाइन तैयार किए जाते हैं। सीता बेन इस कला की प्रमुख कलाकार रही हैं। यह कला जालौर की लोक संस्कृति और महिलाओं की सृजनशीलता को दर्शाती है।

7. सूती या रेशमी कपड़े पर बादले से छोटी-छोटी बिंदकी की कढ़ाई कहलाती है-

A मुकेश का काम
B पेचवर्क
C चटापटी का कार्य
D ब्लॉक प्रिंटिंग
📖 व्याख्या
सूती या रेशमी कपड़े पर बादले (पतले तार) से छोटी-छोटी बिंदकी की कढ़ाई को मुकेश का काम कहा जाता है। यह कला विशेष रूप से दुपट्टों, चुनरियों और महिलाओं के परिधानों पर की जाती है। इसमें महीनता और चमक बहुत महत्वपूर्ण होती है। यह काम राजस्थान की पारंपरिक कढ़ाई शैलियों में से एक है, जो आज भी लोकप्रिय है।

8. कृषिगत औजारों के लिए प्रसिद्ध स्थान हैं-

A गजसिंहपुर (गंगानगर)
B नागौर
C झोटवाड़ा (जयपुर)
D उक्त सभी
📖 व्याख्या
राजस्थान में कृषिगत औजारों के निर्माण के लिए कई स्थान प्रसिद्ध हैं। गजसिंहपुर (गंगानगर) में हल और अन्य कृषि उपकरण बनते हैं, नागौर में कृषि उपकरणों की लोहे की कारीगरी विशेष रूप से प्रसिद्ध है तथा झोटवाड़ा (जयपुर) भी इस क्षेत्र में जाना जाता है। इसलिए सही उत्तर "उक्त सभी" है क्योंकि ये सभी स्थान कृषिगत औजारों के लिए उल्लेखनीय हैं।
काँच केरी चिमनी | Kanch Keri Chhimni

9. स्वर्णाभूषणों में कीमती पत्थर जड़ने की कला कहलाती है-

A कुन्दन
B मिरर वर्क
C पेपरमैशी
D मुरादाबादी का काम
📖 व्याख्या
स्वर्णाभूषणों में कीमती और अर्ध-कीमती रत्नों को जड़ने की कला को कुंदन कार्य कहते हैं। इसमें सोने की पन्नियों के साथ रत्नों को सावधानीपूर्वक जड़ा जाता है। यह कला मुख्य रूप से जयपुर, बड़ौदा और दिल्ली के शाही परिवारों में लोकप्रिय रही। राजस्थान की कुंदन जड़ाई विश्व प्रसिद्ध है और आज भी पारंपरिक गहनों का महत्वपूर्ण हिस्सा है।

10. पीतल के बर्तनों पर खुदाई करके उस पर कलात्मक नक्काशी का कार्य कहलाता है-

A मीनाकारी
B थेवा कला
C मुरादाबादी कार्य
D मुनव्वती का काम
📖 व्याख्या
मुरादाबादी कार्य में पीतल या तांबे के बर्तनों पर खुदाई और नक्काशी की जाती है। यह कला धातु शिल्प की सुंदर परंपरा है, जो मुख्यतः सजावटी वस्तुओं जैसे थाल, लोटे, हुक्के और दीपदान में दिखाई देती है। राजस्थान में यह कला हस्तशिल्पियों द्वारा विकसित की गई और आज भी इसका निर्यात बड़े पैमाने पर होता है।

11. ऊँट की खाल के कुप्पों पर सोने या चाँदी से कलात्मक चित्रांकन व नक्काशी कहलाती है-

A उस्ता कला या मुनव्वती का काम
B कुंदन का कार्य
C कोफ्तागिरी
D मुरादाबादी का काम
📖 व्याख्या
ऊँट की खाल पर की जाने वाली कलात्मक नक्काशी और सोने-चाँदी की सजावट को उस्ता कला या मुनव्वती का काम कहते हैं। यह कला विशेष रूप से बीकानेर में प्रसिद्ध है। इसमें ऊँट की खाल पर चित्रांकन और नक्काशी कर सुंदर सजावटी वस्तुएँ बनाई जाती हैं। 1975 में इसके लिए बीकानेर में उस्ता कैमल हाइड सेंटर भी स्थापित किया गया।

12. जयपुर मीनाकारी का एक प्रसिद्ध स्थल है। इस कला को लाने का श्रेय किनको है-

A महाराजा मानसिंह प्रथम
B मिर्जा राजा जयसिंह
C राजा भारमल
D सवाई जयसिंह
📖 व्याख्या
जयपुर में मीनाकारी की कला लाने का श्रेय महाराजा मानसिंह प्रथम को जाता है। उन्होंने इस कला के कलाकारों को लाहौर से आमेरबुलवाया था। हरिसिंह, अमरसिंह, किशनसिंह, गोभासिंह और श्यामसिंह जैसे प्रमुख कलाकारों ने इस कला को राजस्थान में विकसित किया। आज जयपुर मीनाकारी आभूषणों और सजावटी वस्तुओं के लिए विश्व प्रसिद्ध है।
Rajputana Diary Mahal aur Place MCQ

13. ऊँट के शरीर के बालों को कतर कर शरीर पर कई तरह की आकृतियाँ उकेरने की कला है-

A जट कतराई
B चर्म कला
C कुट्टी कला
D उस्ता कला
📖 व्याख्या
ऊँट के शरीर के बालों को काटकर आकृतियाँ और डिज़ाइन बनाने की कला जट कतराई कहलाती है। यह कला विशेष रूप से पशु मेलों जैसे पुष्कर और नागौर में दिखाई देती है। इसमें ऊँट के शरीर पर फूल, पत्ते, ज्यामितीय आकृतियाँ और कभी-कभी धार्मिक चिह्न भी उकेरे जाते हैं। यह कला राजस्थान की पारंपरिक पशुपालन संस्कृति का अनोखा रूप है।

14. फड़ चित्रण' के लिए राजस्थान का कौनसा जिला प्रसिद्ध है?

A केकड़ी (अजमेर)
B उदयपुर
C शाहपुरा (भीलवाड़ा)
D भीलवाड़ा
📖 व्याख्या
फड़ चित्रण के लिए राजस्थान का शाहपुरा (भीलवाड़ा) प्रसिद्ध है। इसमें कपड़े या कैनवास पर प्राकृतिक रंगों की सहायता से देवी-देवताओं और पौराणिक कथाओं के दृश्य बनाए जाते हैं। फड़ चलित मंदिर के रूप में धार्मिक अनुष्ठानों में प्रयुक्त होती है। यह कला पीढ़ी-दर-पीढ़ी जोशी परिवार द्वारा संरक्षित और विकसित की गई है।

15. बकरी के बालों से जट पट्टी की बुनाई का मुख्य केन्द्र कहाँ स्थित है?

A जयपुर
B सवाई माधोपुर
C जसोल (बालोतरा)
D खेतड़ी (झुंझुनूं)
📖 व्याख्या
बकरी के बालों से जट पट्टी की बुनाई का प्रमुख केंद्र जसोल (बालोतरा) है। यहाँ पारंपरिक तरीके से बकरी के बालों को संसाधित करके उनसे मजबूत और टिकाऊ पट्टियाँ बनाई जाती हैं। इनका प्रयोग विशेष रूप से रस्सियों और मोटे कपड़ों में किया जाता है। यह कला ग्रामीण कारीगरों की आजीविका का महत्वपूर्ण साधन रही है।

16. कागज की लुगदी बनाकर उससे कलात्मक वस्तुएँ बनाने की कला क्या कहलाती है?

A पेपर मेशी
B कागजी टेराकोटा
C कोफ्तगिरी
D बादला
📖 व्याख्या
कागज की लुगदी से विभिन्न कलात्मक वस्तुएँ बनाने की कला पेपर मेशी कहलाती है। इसमें गत्ते और कागज को गला कर गाढ़ा पेस्ट बनाया जाता है और उससे खिलौने, सजावटी सामान तथा मूर्तियाँ तैयार की जाती हैं। यह कला राजस्थान में बच्चों के खिलौनों और त्योहारों की सजावट में विशेष रूप से देखी जाती है।
Rajasthan GK Previous Year Questions

17. मलीर प्रिंट का संबंध किस जिले से है?

A बाड़मेर
B चितौड़गढ़
C जयपुर
D जोधपुर
📖 व्याख्या
मलीर प्रिंट का संबंध बाड़मेर जिले से है। यहाँ की खत्री जाति के लोग यह कार्य करते हैं। बाड़मेर में छपाई की विशिष्ट शैलियों को अजरख और मलीर छपाई कहते हैं। मलीर प्रिंट की विशेषता यह है कि इसमें केवल एक तरफ छपाई की जाती है और इसमें कत्थई व काले रंग का उपयोग अधिक होता है। यह कला राजस्थान की पारंपरिक ब्लॉक प्रिंटिंग का हिस्सा है।

18. लकड़ी के झूलों के लिए कौनसा स्थान प्रसिद्ध है?

A उदयपुर
B चितौड़गढ़
C जोधपुर
D बाड़मेर
📖 व्याख्या
राजस्थान में लकड़ी के झूलों के निर्माण के लिए जोधपुर प्रसिद्ध है। यहाँ के कारीगर लकड़ी पर सुंदर नक्काशी करके झूले और फर्नीचर तैयार करते हैं। ये झूले न केवल राजस्थान में बल्कि देश-विदेश में भी लोकप्रिय हैं। पारंपरिक डिज़ाइनों और मजबूत लकड़ी की वजह से जोधपुर का फर्नीचर और झूले विशेष पहचान रखते हैं।

19. लकड़ी का नक्काशीदार फर्नीचर कहाँ का प्रसिद्ध है?

A उदयपुर
B जोधपुर
C बाड़मेर
D जालौर
📖 व्याख्या
राजस्थान का लकड़ी का नक्काशीदार फर्नीचर विशेष रूप से बाड़मेर का प्रसिद्ध है। यहाँ के कारीगर पारंपरिक ढंग से लकड़ी पर बारीक नक्काशी करके अलमारियाँ, चौखटें, झूले और अन्य सजावटी सामान तैयार करते हैं। बाड़मेर का फर्नीचर अपनी टिकाऊ बनावट और आकर्षक डिज़ाइन के लिए देश-विदेश में लोकप्रिय है।

20. अजरख प्रिन्ट के लिये राजस्थान में कौनसा स्थान प्रसिद्ध है?

A जैसलमेर
B बाड़मेर
C पाली
D सांगानेर
📖 व्याख्या
राजस्थान में अजरख प्रिंट के लिए बाड़मेर प्रसिद्ध है। यह ब्लॉक प्रिंटिंग की पारंपरिक कला है, जिसमें गहरे नीले, लाल और काले रंगों का प्रयोग किया जाता है। खत्री समाज इस कला का मुख्य संरक्षक है। अजरख प्रिंट आज भी राजस्थान की लोककला और वस्त्र परंपरा का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
Rajputana Diary Rajasthan GK MCQ

21. किस जिले की मसूरिया, मलमल व डोरा साड़ियाँ प्रसिद्ध है?

A कोटा
B जोधपुर
C बीकानेर
D टोंक
📖 व्याख्या
मसूरिया, मलमल और डोरा साड़ियाँ विशेष रूप से कोटा जिले की प्रसिद्ध हैं। इन्हें कोटा डोरिया साड़ी भी कहा जाता है। इन साड़ियों में महीन सूती या रेशमी धागों से जालीदार बुनाई की जाती है, जो इन्हें हल्का और आरामदायक बनाती है। यह साड़ियाँ राजस्थान की वस्त्र परंपरा की शान हैं।

22. निम्न में से कौनसा युग्म असंगत है?

A हाथीदाँत की चूड़ियाँ - जोधपुर
B छपाई के घाघरे - आकोला (चित्तौड़गढ़)
C आम पापड़ - बाँसवाड़ा
D जस्ते की मूर्तियाँ - अलवर
📖 व्याख्या
जस्ते की मूर्तियाँ अलवर की नहीं बल्कि जोधपुर की प्रसिद्ध कला है। जोधपुर में बादला और जस्ते के शिल्प विशेष पहचान रखते हैं। जबकि अन्य युग्म सही हैं – जोधपुर हाथीदाँत की चूड़ियों के लिए, आकोला छपाई के घाघरों के लिए और बाँसवाड़ा आम पापड़ के लिए प्रसिद्ध है।

23. बादला' क्या होता है?

A लाख की चूड़िया बनाने वाला
B फेरों के समय पहने जाने वाले दुल्हन के वस्त्र
C जिंक से निर्मित पानी की बोतल
D ऊँट के खाल से बनी कुप्पी
📖 व्याख्या
बादला जिंक से बना या जिंक का लेप किया हुआ जल पात्र होता है। इसका प्रयोग विशेष रूप से पानी को ठंडा रखने के लिए किया जाता है। यह कला और बर्तन जोधपुर की प्रसिद्ध विशेषता हैं। राजस्थान में धातु शिल्प की परंपरा के अंतर्गत बादला एक अनोखा उदाहरण है, जो आज भी पारंपरिक उपयोग में लाया जाता है।

24. बिनोटा (दुल्हा-दुल्हन की जूतियाँ) कहाँ के प्रसिद्ध हैं?

A जोधपुर
B उदयपुर
C चुरू
D जैसलमेर
📖 व्याख्या
राजस्थान की पारंपरिक बिनोटा (दुल्हा-दुल्हन की जूतियाँ) विशेष रूप से चुरू जिले की प्रसिद्ध हैं। ये जूतियाँ हाथ से तैयार की जाती हैं और शादी-ब्याह जैसे अवसरों पर पहनी जाती हैं। बिनोटा जूतियाँ अपने आकर्षक डिज़ाइन और कढ़ाई के कारण जानी जाती हैं।
Rajasthan GK

25. सालावास गाँव की दरियाँ प्रसिद्ध हैं, सालावास गाँव किस जिले में है?

A बाड़मेर
B बालोतरा
C जयपुर
D जोधपुर
📖 व्याख्या
सालावास गाँव, जो जोधपुर जिले में स्थित है, अपनी पारंपरिक दरियों के लिए प्रसिद्ध है। यहाँ हाथ से बनी दरियाँ अपने आकर्षक रंगों और टिकाऊपन के कारण विशेष पहचान रखती हैं। यह कला स्थानीय कारीगरों की पीढ़ी-दर-पीढ़ी चली आ रही परंपरा का हिस्सा है।

26. कागज पर निर्मित देवी-देवताओं के चित्र कहलाते है-

A पेपरमेशी
B पाने
C वील
D चटापटी
📖 व्याख्या
कागज पर बने देवी-देवताओं के चित्र पाने कहलाते हैं। यह छोटे आकार के चित्र होते हैं, जिन्हें धार्मिक महत्व प्राप्त है। विशेष रूप से नाथद्वारा में श्रीनाथजी के पाने सर्वाधिक प्रसिद्ध और कलात्मक माने जाते हैं। पाने कला भक्ति और चित्रकला का सुंदर मेल है, जो राजस्थान की धार्मिक संस्कृति को दर्शाती है।

27. पश्चिमी राजस्थान में ग्रामीण क्षेत्र में महिलाओं द्वारा घर को सजाने व दैनिक उपयोग की वस्तुओं को सुरक्षित रखने के लिए बनायी जाने वाली मिट्टी की महलनुमा आकृति क्या कहलाती है?

A मोठड़ा
B वील
C बटोड़ा
D बांधनी
📖 व्याख्या
पश्चिमी राजस्थान में ग्रामीण महिलाएँ अपने घर को सजाने और उपयोगी वस्तुओं को सुरक्षित रखने के लिए मिट्टी की महलनुमा आकृतिबनाती हैं, जिसे वील कहा जाता है। वील केवल उपयोगी ही नहीं बल्कि सजावटी भी होती है। इस पर रंग, आकृतियाँ और पारंपरिक डिजाइन बनाकर घर को सुंदर बनाया जाता है। यह लोककला गाँव की महिलाओं की सृजनशीलता का अनूठा उदाहरण है।

28. ब्लू पॉटरी के लिए प्रसिद्ध कृपालसिंह का सम्बन्ध किस जिले से है?

A जयपुर
B सीकर
C झुंझुनूं
D ब्यावर
📖 व्याख्या
राजस्थान की प्रसिद्ध ब्लू पॉटरी कला का विकास मुख्यतः जयपुर में हुआ है। इसके लिए कृपाल सिंह शेखावत का योगदान अत्यधिक महत्वपूर्ण है। उन्होंने इस कला को संरक्षण और अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाई। जयपुर की ब्लू पॉटरी अपने नीले और हरे रंगों की अनोखी पारदर्शिता और आकर्षक डिजाइन के लिए विश्व प्रसिद्ध है।
Previous Year Question Papers

29. श्रीलाल जोशी, पार्वती जोशी, शांतिलाल जोशी, दुर्गेश कुमार जोशी राजस्थान की किस चित्रकला शैली के प्रसिद्ध कलाकार हैं?

A तारकशी कला
B फड़ चित्रकारी शैली
C उस्ता कला
D ब्लू पॉटरी
📖 व्याख्या
राजस्थान की फड़ चित्रकारी शैली के प्रमुख कलाकारों में श्रीलाल जोशी, पार्वती जोशी, शांतिलाल जोशी और दुर्गेश कुमार जोशी का नाम शामिल है। फड़ चित्रण में कपड़े पर देवी-देवताओं और पौराणिक कथाओं को चित्रित किया जाता है। यह चित्रकला विशेष रूप से शाहपुरा (भीलवाड़ा) में विकसित हुई और धार्मिक अनुष्ठानों से गहराई से जुड़ी है।

30. राजस्थान की प्रसिद्ध मीनाकारी हस्तकला का उद्गम कहाँ से हुआ-

A पर्शिया (ईरान)
B दमिश्क
C पेरिस
D गुजरात
📖 व्याख्या
मीनाकारी कला का उद्गम पर्शिया (ईरान) से माना जाता है। इसे मुगलों द्वारा भारत लाया गया और लाहौर में स्थापित किया गया। बाद में इस कला को राजस्थान के आमेर और जयपुर में संरक्षण मिला। यहाँ के शासकों ने इस कला को प्रोत्साहित किया और कलाकारों को बसाया। धीरे-धीरे जयपुर मीनाकारी विश्व स्तर पर प्रसिद्ध हो गई।

31. धेवा कला का सम्बन्ध राजस्थान के किस जिले से है?

A प्रतापगढ़
B नाथद्वारा
C बीकानेर
D जयपुर
📖 व्याख्या
राजस्थान की प्रसिद्ध थेवा कला (धेवा कला) का संबंध प्रतापगढ़ जिले से है। इसमें रंगीन काँच पर सोने की बारीक नक्काशी करके सुंदर आकृतियाँ बनाई जाती हैं। इस कला में बेल्जियम के रंगीन काँच का विशेष उपयोग होता है। प्रतापगढ़ का सोनी परिवार इस कला के लिए प्रसिद्ध है और इसे अंतरराष्ट्रीय पहचान दिला चुका है।

32. राजस्थान का कौनसा शहर ब्लैक पॉटरी के लिए प्रसिद्ध है?

A बीकानेर
B अलवर
C कोटा
D जयपुर
📖 व्याख्या
राजस्थान में ब्लैक पॉटरी के लिए कोटा प्रसिद्ध है। यहाँ पर काले रंग की विशेष मिट्टी से बर्तन और सजावटी वस्तुएँ बनाई जाती हैं। ब्लैक पॉटरी का कार्य सवाई माधोपुर क्षेत्र में भी देखा जाता है। यह कला अपनी विशिष्टता और अनूठे डिजाइनों के कारण आज भी हस्तशिल्प मेलों में आकर्षण का केंद्र बनी रहती है।
Rajasthan GK

33. श्री अब्दुल गफूर खाँ, इम्तियाज अली तथा अब्दुल रजाक कुरैशी किस क्षेत्र में प्रसिद्ध हैं?

A मीनाकारी
B कुंदन कला
C सांगानेरी प्रिंट
D पीतल पर खुदाई
📖 व्याख्या
अब्दुल गफूर खाँ, इम्तियाज अली और अब्दुल रजाक कुरैशी राजस्थान में पीतल पर खुदाई की कला में प्रसिद्ध रहे हैं। इस कला को मुरादाबादी कार्य भी कहा जाता है। इसमें पीतल के बर्तनों पर नक्काशी और सजावटी चित्र बनाए जाते हैं। जयपुर में इस कला को सरंक्षण मिला और कई कलाकारों ने इसे विश्वस्तर पर प्रसिद्ध किया।

34. गरासियों की फाग ओढ़नी कहाँ की प्रसिद्ध है?

A आबू रोड
B फालना
C मथानिया
D सोजत
📖 व्याख्या
गरासियों की फाग ओढ़नी विशेष रूप से सोजत क्षेत्र की प्रसिद्ध है। इस ओढ़नी को विशेष रंगों और डिजाइनों से सजाया जाता है। गरासिया जनजाति की महिलाएँ इसे त्योहारों और विशेष अवसरों पर पहनती हैं। यह ओढ़नी उनकी सांस्कृतिक पहचान और लोक परंपरा का प्रतीक है।

35. वुडन पेन्टेड फर्नीचर कहाँ का प्रसिद्ध है?

A किशनगढ़
B ब्यावर
C कोटा
D जोधपुर
📖 व्याख्या
वुडन पेंटेड फर्नीचर के लिए किशनगढ़ प्रसिद्ध है। यहाँ लकड़ी के फर्नीचर पर रंगीन चित्रकारी की जाती है, जिससे ये वस्तुएँ आकर्षक और कलात्मक बनती हैं। यह फर्नीचर घरेलू उपयोग के साथ-साथ सजावटी उद्देश्य से भी लोकप्रिय है। किशनगढ़ की यह परंपरा राजस्थान की कलात्मक धरोहर का हिस्सा है।

36. मोण' क्या है?

A आदिवासी महिलाओं की ओढ़नी
B गोटे का एक प्रकार
C मेड़ता क्षेत्र में बना मिट्टी का बड़ा मटका
D कपड़े पर मोम की परत चढ़ाया गया चित्र
📖 व्याख्या
राजस्थान के मेड़ता क्षेत्र में बनने वाले बड़े आकार के मिट्टी के मटके को मोण कहा जाता है। यह स्थानीय स्तर पर पानी संग्रहण और घरेलू उपयोग के लिए बनाए जाते हैं। मोण की विशेषता इसका बड़ा आकार और टिकाऊपन है। ग्रामीण क्षेत्रों में यह परंपरागत जीवन शैली का महत्वपूर्ण हिस्सा रहा है।
Rajasthan GK Test Series

37. कौनसा जिला भोडल की छपाई के लिए प्रसिद्ध है?

A केशवरायपाटन
B बालोतरा
C बगरू
D भीलवाड़ा
📖 व्याख्या
भीलवाड़ा जिले में भोडल की छपाई प्रसिद्ध है। यहाँ के छींपे अभ्रक (माइका) का उपयोग करके कपड़ों पर छपाई करते हैं। अभ्रक की चमक के कारण यह प्रिंट दूर से ही आकर्षक दिखाई देता है। स्थानीय भाषा में अभ्रक को भोडल कहा जाता है। इस कारण इसे भोडल की छपाई कहा जाता है, जो भीलवाड़ा की पारंपरिक शिल्पकला का हिस्सा है।

38. कम्बलों की बुनाई के लिए प्रसिद्ध स्थान है?

A गडरा रोड (बाड़मेर)
B बालोतरा
C रामसर (बीकानेर)
D नापासर (बीकानेर)
📖 व्याख्या
राजस्थान में गडरा रोड (बाड़मेर) कम्बलों की बुनाई के लिए प्रसिद्ध है। यहाँ के कम्बल अपनी मजबूती और गर्माहट के लिए जाने जाते हैं। स्थानीय कारीगर ऊन से मोटे और टिकाऊ कम्बल बनाते हैं, जो विशेष रूप से ग्रामीण और सीमावर्ती क्षेत्रों में उपयोग किए जाते हैं।

39. रामदेव जी के घोड़े कहाँ के प्रसिद्ध हैं?

A बीकानेर
B पोकरण
C कोटा
D गोगामेड़ी
📖 व्याख्या
पोकरण (जैसलमेर) के घोड़े विशेष रूप से रामदेव जी के घोड़े के रूप में प्रसिद्ध हैं। इन घोड़ों को लोक मेलों और धार्मिक अवसरों पर सजाकर प्रस्तुत किया जाता है। राजस्थान की लोक संस्कृति में इन घोड़ों का विशेष धार्मिक महत्व है।

40. आम पापड़ के लिए प्रसिद्ध जिला है?

A बाँसवाड़ा
B उदयपुर
C कोटा
D सिरोही
📖 व्याख्या
राजस्थान का बाँसवाड़ा जिला आम पापड़ के लिए प्रसिद्ध है। यहाँ पारंपरिक विधि से आम को सुखाकर पापड़ बनाया जाता है। बाँसवाड़ा के आम पापड़ स्वादिष्ट और लंबे समय तक सुरक्षित रहते हैं। यह स्थानीय कुटीर उद्योग का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
Rajputana Diary MCQ App

41. तीर कमान निर्माण के लिए प्रसिद्ध स्थान हैं?

A गलियाकोट व सागवाड़ा
B जगतपुरा व छीछ
C बोडीगामा व चन्दूजी का गढ़ा
D कलिजरा व आसपुर
📖 व्याख्या
बाँसवाड़ा जिले का चन्दूजी का गढ़ा और डूंगरपुर का बोडीगामा गाँव तीर-कमान निर्माण के लिए प्रसिद्ध हैं। यहाँ के कारीगर परंपरागत रूप से तीर और कमान बनाते रहे हैं, जो राजस्थान की आदिवासी संस्कृति और शौर्य परंपरा का प्रतीक हैं।

42. किस स्थान का रमकड़ा उद्योग प्रसिद्ध है?

A गलियाकोट
B छीछ
C किशोरी गाँव
D सिकन्दरा
📖 व्याख्या
डूंगरपुर जिले का गलियाकोट रमकड़ा उद्योग के लिए प्रसिद्ध है। यहाँ सोप स्टोन (घीया पत्थर) से मूर्तियाँ और कलात्मक वस्तुएँ बनाई जाती हैं। यह पत्थर आसानी से तराशा जा सकता है और टिकाऊ भी होता है। रमकड़ा उद्योग डूंगरपुर की पारंपरिक कला और आजीविका का मुख्य साधन है।

43. राजस्थान के किस क्षेत्र में सांझी पूजन व सांझी चित्रण का सर्वाधिक प्रचलन है?

A मेवाड़
B मेवात
C हाड़ौती
D बागड़
📖 व्याख्या
मेवाड़ क्षेत्र में सांझी पूजन और सांझी चित्रण का सबसे अधिक प्रचलन है। अमावस्या से लेकर आश्विन अमावस्या तक, कन्याएँ सफेद पुती दीवार पर गोबर से विभिन्न आकृतियाँ (सांझी) बनाती हैं और उनका पूजन करती हैं। यह परंपरा धार्मिक आस्था और सामूहिक संस्कृति का सुंदर उदाहरण है।

44. निम्न में से कौनसा स्थान काष्ठ कला के लिए प्रसिद्ध है?

A मेड़ता
B बालोतरा
C बगरू
D बस्सी
📖 व्याख्या
चित्तौड़गढ़ जिले का बस्सी कस्बा काष्ठ कला के लिए प्रसिद्ध है। यहाँ लकड़ी से बने कांवड़, बेवाण, गणगौर की प्रतिमाएँ और अन्य कलाकृतियाँ तैयार की जाती हैं। यह कला यहाँ की पहचान है। हालाँकि जयपुर जिले में भी बस्सी नामक स्थान है, लेकिन काष्ठ कला विशेष रूप से चित्तौड़गढ़ के बस्सी से जुड़ी है।
Today Deals

45. महेशराज सोनी जिनका हाल ही में निधन हुआ है, किस कला के प्रसिद्ध कलाकार थे?

A पेपर मैशी
B थेवा कला
C कोफ्तगिरी
D उस्ता कला
📖 व्याख्या
प्रतापगढ़ निवासी महेशराज सोनी प्रसिद्ध थेवा कला के कलाकार थे। इनका निधन फरवरी 2019 में हुआ। इन्हें 2015 में पद्मश्री सम्मान प्रदान किया गया था और ब्रिटिश संसद के हाउस ऑफ कॉमन्स द्वारा भी सम्मानित किया गया था। थेवा कला प्रतापगढ़ की पहचान है, जिसमें काँच पर सोने-चाँदी की नक्काशी की जाती है।

46. निम्न में से किस हस्तकला को भौगोलिक चिह्नीकरण (GI Tag) नहीं मिला है?

A फूलकारी
B पोकरण पॉटरी
C बगरू प्रिन्ट
D मीनाकारी
📖 व्याख्या
राजस्थान की कई हस्तकलाओं को GI टैग प्राप्त हुआ है। फूलकारी कला (राजस्थान, पंजाब और हरियाणा) को 2011 में, बगरू प्रिंट को 2012 में और पोकरण पॉटरी को 2018 में GI टैग दिया गया। लेकिन मीनाकारी कला को अभी तक GI टैग नहीं मिला है।

47. चटापटी वर्क के लिए प्रसिद्ध क्षेत्र है?

A मेवाड़
B शेखावाटी
C हाड़ौती
D वागड़
📖 व्याख्या
चटापटी वर्क (पेचवर्क) विशेष रूप से शेखावाटी क्षेत्र में प्रसिद्ध है। इस कला में पहले कपड़े पर मनचाहा डिजाइन ट्रेस कर टुकड़े काटे जाते हैं और फिर उन टुकड़ों को दूसरे कपड़े पर रखकर धागों से तुरपाई कर दी जाती है। यह कला राजस्थान की पारंपरिक रजाइयों और घर की सजावटी वस्तुओं में दिखाई देती है। शेखावाटी के अलावा बाड़मेर और अजमेर के तिलोनिया में भी यह कार्य होता है।

48. पाटोदा का लूगड़ा किस क्षेत्र का प्रसिद्ध है?

A मेवाड़
B शेखावाटी
C हाड़ौती
D बागड़
📖 व्याख्या
पाटोदा का लूगड़ा राजस्थान के शेखावाटी क्षेत्र का प्रसिद्ध परिधान है। यह मुख्यतः पाटोदा (लक्ष्मणगढ़) और मुकुंदगढ़ (झुंझुनूं) में बनाया जाता है। यह लूगड़ा बंधेज (टाई एंड डाई) शैली का होता है और इसे महिलाएँ विशेष अवसरों पर पहनती हैं। यह शेखावाटी की वस्त्र परंपरा की महत्वपूर्ण पहचान है।
काँच केरी चिमनी | Kanch Keri Chhimni

49. विवाह के अवसर पर दुल्हन के घर के मुख्य द्वार पर लकड़ी की एक कलाकृति टंगाई जाती है, जिसके शीर्ष भाग पर मयूर या चिड़िया बनी होती है। जिसे दुल्हा अपनी तलवार या पेड़ की डाली से छूता है, यह लकड़ी की कलाकृति क्या कहलाती है?

A तोरण
B बाजोट
C राली
D चोपड़ा
📖 व्याख्या
विवाह के समय दुल्हन के घर के मुख्य द्वार पर लकड़ी की कलाकृति टांगी जाती है, जिसे तोरण कहते हैं। इसके शीर्ष भाग पर मयूर या चिड़िया की आकृति बनी होती है। दुल्हा घर में प्रवेश करने से पहले अपनी तलवार या पेड़ की डाली से इसे छूता है। यह परंपरा सौभाग्य और मंगल का प्रतीकमानी जाती है।

50. निम्नलिखित में से किस वस्त्र का संबंध राजस्थान से नहीं है?

A कांधा
B सांगानेरी
C बांधनी
D बाड़मेरी
📖 व्याख्या
कांधा कला का संबंध बंगाल से है, यह एक प्रकार की कढ़ाई है। जबकि सांगानेरी प्रिंट (जयपुर का सांगानेर), बांधनी (जोधपुर, जयपुर, उदयपुर, सोजत आदि) और बाड़मेरी प्रिंट (बाड़मेर) राजस्थान की प्रसिद्ध वस्त्र परंपराएँ हैं। इसलिए सही उत्तर "कांधा" है।
📱

Rajputana Diary App

Full MCQ, PYQ और Test Series देकर अपनी Rank Check करें। Rajasthan GK की बेहतर तैयारी के लिए Rajputana Diary App डाउनलोड करें।

📲 Download App
❓ Question / Doubt / Correction?

इस पोस्ट से सम्बंधित किसी प्रकार का doubt, correction या कोई सुझाव हो तो, Please इस पोस्ट के comment section की जगह हमारे YouTube channel पर दिए गए discussion वीडियो के कमेंट बॉक्स में पोस्ट लिंक के साथ comment करें।

📝 Comment करने का तरीका:
• Post link
• Question number
• Short Doubt / Correction / सुझाव

✔ Link Copied

👉 Official Discussion Video:
Rajputana Diary YouTube Channel
Mukesh Choudhary

About the Author

Mukesh Choudhary

Mukesh Choudhary को राजस्थान में आयोजित होने वाली विभिन्न प्रतियोगी एवं भर्ती परीक्षाओं के परीक्षा पैटर्न और प्रश्नों के स्वरूप की अच्छी समझ है। उनके मार्गदर्शन में यह अध्ययन सामग्री और MCQ content तैयार एवं review किया गया है। Read More...

📲 Telegram 💬 WhatsApp
Scroll to Top