राजस्थान की चित्रकला शैलियाँ MCQ | Important Questions with Answers
इस पोस्ट में राजस्थान की कला एवं संस्कृति के टॉपिक
राजस्थान की चित्रकला शैलियाँ से संबंधित Latest व पूर्णतः updated महत्वपूर्ण
MCQ
प्रश्न दिए गए हैं।
इनमें मेवाड़ शैली, किशनगढ़ शैली, शेखावाटी शैली, मारवाड़ शैली, कोटा शैली, बूंदी शैली आदि से सम्बंधित महत्वपूर्ण जानकारियों को व्याख्या सहित शामिल किया गया है।
ये महत्वपूर्ण MCQ प्रश्न
RPSC,
RSSB,
RAS, Patwar, Police, LDC, VDO, REET
तथा राजस्थान राज्य की अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए
उपयोगी हैं। इनमें विषयवार प्रश्न, सही उत्तर एवं विस्तृत व्याख्या
शामिल हैं।
✍️ Prepared & Reviewed by:
Rajputana Diary –
Rajasthan GK Faculty & Content Team
(Since 2021)
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1. शेखावाटी शैली में अपने भित्ति चित्रों के लिए प्रसिद्ध है, जिस पर देवा नामक चित्रकार ने चित्रण किया है।
A
जोगीदास की छतरी (उदयपुर)
B
रामदत्त गोयनका की छतरी
C
चाँदसिंह की छतरी
D
रामगोपाल पौद्दार की छतरी
📖 व्याख्या
शेखावाटी क्षेत्र अपने भित्ति चित्रों और हवेलियों के लिए प्रसिद्ध है। यहाँ के कई चित्रकारों ने छतरियों और हवेलियों पर अद्भुत चित्रण किया। देवा नामक चित्रकार ने जोगीदास की छतरी (उदयपुर) में भित्ति चित्र बनाए, जो उस समय की चित्रकला और समाजिक जीवन को प्रदर्शित करते हैं।
2. कोटा चित्रकारी शैली की विषय वस्तु मुख्यतः है-
A
नारियों की तैराकी मुद्रा
B
वेश्याओं के चित्रण
C
बलखाती लटों का एक ओर अंकन
D
शिकार के दृश्य
📖 व्याख्या
कोटा चित्रशैली शिकार दृश्यों के लिए प्रसिद्ध है। इस शैली में हाथियों, शेरों, बाघों और अन्य जंगली जानवरों का शिकार करते हुए राजाओं का चित्रण मिलता है। जंगल और प्राकृतिक दृश्यों की बारीक रेखांकन के साथ प्रस्तुति इसे अद्वितीय बनाती है। यही कारण है कि कोटा शैली को "शिकार की शैली" भी कहा जाता है।
3. चित्रकला के विकास हेतु कार्यरत 'आयाम' व 'कलावृत' संस्थान किस जिले में स्थित है?
A
जयपुर
B
जोधपुर
C
बूंदी
D
बीकानेर
📖 व्याख्या
आयाम' और 'कलावृत' संस्थान जयपुर जिले में स्थित हैं। ये संस्थान चित्रकला और लघुचित्रों की परंपरा को सुरक्षित रखने और आगे बढ़ाने में कार्यरत हैं। यहाँ परंपरागत कलाकारों को मंच दिया जाता है और उनकी कलाकृतियों को संरक्षित तथा प्रचारित किया जाता है। इस प्रकार यह संस्थान राजस्थान की कला धरोहर को नई पीढ़ी तक पहुँचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।
4. निम्नलिखित को सुमेलित कीजिए –सूची-I — सूची-II(क) पोथीखाना संग्रहालय — जयपुर(ख) पुस्तक प्रकाश — जोधपुर(ग) सरस्वती भण्डार — उदयपुर(घ) चित्रशाला संग्रहालय — बूंदी
A
3412
B
1234
C
4321
D
1432
📖 व्याख्या
यह प्रश्न संग्रहालयों और उनके स्थानों से संबंधित है। पोथीखाना संग्रहालय जयपुर में है। पुस्तक प्रकाश जोधपुर में स्थित है। सरस्वती भण्डार उदयपुर से संबंधित है। वहीं चित्रशाला संग्रहालय बूंदी का प्रमुख सांस्कृतिक केंद्र है। सही क्रम 3412 है।
5. विभिन्न रियासतों के शासक व उनके समय के प्रसिद्ध चित्रकारों का कौनसा युग्म असुमेलित है?
A
महाराजा विनयसिंह (अलवर) — बलदेव व गुलाम अली
B
मंगल सिंह (अलवर) — मूलचंद व उदयराम
C
महाराजा जयसिंह (अलवर) — रामप्रसाद व रामगोपाल
D
सवाई प्रताप सिंह (जयपुर) — लालचन्द व साहिबराम
📖 व्याख्या
जयपुर शासक सवाई प्रताप सिंह के समय प्रसिद्ध चित्रकार गोपाल, चिमना, हुकमा, रामसेवक, उदय, सालिगराम और लक्ष्मण थे। लालचन्द और साहिबराम उनके समय के कलाकार नहीं थे, इसलिए यह युग्म असुमेलित है।
6. शेखावाटी क्षेत्र किसलिए प्रसिद्ध है?
A
हवेलियों पर भित्ति चित्रकला हेतु
B
हाथी दांत पर चित्रकारी हेतु
C
पिछवाईयों के निर्माण हेतु
D
फड़ चित्रण के लिए
📖 व्याख्या
शेखावाटी क्षेत्र अपनी भित्ति चित्रकला और हवेलियों के लिए प्रसिद्ध है। 19वीं से 20वीं सदी के बीच यहाँ के सेठों ने भव्य हवेलियाँ बनवाईं। इन हवेलियों पर आकर्षक भित्ति चित्र बनाए गए, जिनमें फतेहपुर, लक्ष्मणगढ़, रामगढ़, नवलगढ़ और मंडावा प्रमुख हैं। इसी कारण शेखावाटी को “ऑपन एयर आर्ट गैलरी” कहा जाता है।
7. कोटा के किस शासक के काल में 'शिकार का चित्रण' कोटा शैली का प्रतीक बना?
A
सावंत सिंह
B
जवाहर सिंह
C
माधो सिंह
D
महाराव उम्मेद सिंह
📖 व्याख्या
कोटा चित्रशैली में शिकार का चित्रण विशेष रूप से प्रसिद्ध है और यह इस शैली का प्रतीक बन गया। इसका उत्कर्ष महाराव उम्मेद सिंह के काल में हुआ। उस समय शिकार से संबंधित दृश्य बहुत बारीकी से बनाए जाते थे। इस शैली में जंगल, वन्य जीव, और शिकार की गतिविधियाँ वास्तविकता के साथ प्रस्तुत की गईं।
8. प्रसिद्ध 'गीत-गोविन्द' चित्र किस शैली का है?
A
मेवाड़ शैली
B
किशनगढ़ शैली
C
शेखावाटी शैली
D
मारवाड़ शैली
📖 व्याख्या
गीत-गोविन्द' चित्र मेवाड़ शैली से संबंधित है। मेवाड़ शैली धार्मिक और पौराणिक विषयों पर आधारित रही। इसमें राधा-कृष्ण लीला, भागवत पुराण और गीत-गोविन्द का सुंदर चित्रण किया गया। इस शैली में रंगों की गहराई और भावनाओं की अभिव्यक्ति को विशेष महत्व दिया गया है।
9. किस राजपूत चित्रकला शैली में नारियों और रानियों को शिकार करते चित्रित किया गया है?
A
मेवाड़ शैली
B
कोटा शैली
C
बूंदी शैली
D
मारवाड़ शैली
📖 व्याख्या
कोटा चित्रशैली शिकार दृश्यों के लिए प्रसिद्ध है। इसमें केवल पुरुषों को ही नहीं, बल्कि नारियों और रानियों को भी शिकार करते हुए चित्रित किया गया। इस शैली में पशु-पक्षियों का यथार्थवादी चित्रण किया गया, और प्राकृतिक दृश्यों के बीच शिकार के रोमांच को दिखाया गया।
10. प्रसिद्ध चित्रकार साहिबदीन चित्रकला की किस शैली से सम्बंधित है?
A
मेवाड़ शैली
B
कोटा शैली
C
बीकानेर शैली
D
मारवाड़ शैली
📖 व्याख्या
साहिबदीन मेवाड़ शैली के प्रमुख चित्रकार थे। वे महाराणा जगतसिंह प्रथम के समय में कार्यरत रहे। उन्होंने 1648 ई. में 'भागवत पुराण' का चित्रांकन किया। इनके साथ नसीरूद्दीन और मनोहर भी प्रमुख कलाकार थे। साहिबदीन ने धार्मिक विषयों को अपनी कला से जीवंत रूप दिया।
11. फारसी कवि शेख सादी द्वारा जवाहरातों की स्याही से लिखा प्रसिद्ध ग्रंथ 'गुलिस्तां' वर्तमान में किस संग्रहालय में रखा हुआ है?
A
अजमेर संग्रहालय
B
अलवर संग्रहालय
C
सिटी पैलेस, जयपुर
D
करौली संग्रहालय
📖 व्याख्या
गुलिस्तां' फारसी कवि शेख सादी का प्रसिद्ध ग्रंथ है, जिसे जवाहरातों की स्याही से लिखा गया। इसे अलवर के शासक विनयसिंह ने सुलेखित और चित्रांकित करवाया था। इसके चित्र बलदेव और गुलाम अली जैसे महान कलाकारों ने बनाए। यह ग्रंथ वर्तमान में अलवर संग्रहालय में सुरक्षित है।
12. किसके शासन में निर्मित चित्रशाला (रंगीन चित्र) बूंदी शैली का श्रेष्ठ उदाहरण है?
A
राव शत्रुशाल
B
अनिरूद्ध सिंह
C
सुर्जन सिंह
D
महाराव उम्मेद सिंह
📖 व्याख्या
बूंदी के महाराव उम्मेद सिंह ने राजमहल में एक भव्य चित्रशाला का निर्माण करवाया। इसमें बूंदी शैली के अद्भुत भित्ति चित्र बनाए गए। इस चित्रशाला को “भित्ति चित्रों का स्वर्ग” कहा जाता है। यहाँ की चित्रकला में प्रकृति, दरबारी जीवन और धार्मिक कथाओं का सुंदर चित्रण मिलता है।
13. पद्मश्री रामगोपाल विजयवर्गीय थे-
A
प्रसिद्ध चित्रकार
B
प्रसिद्ध फिल्मी गीतकार
C
मेवाड़ के प्रसिद्ध क्रांतिकारी
D
प्रसिद्ध मांड गायक
📖 व्याख्या
रामगोपाल विजयवर्गीय एक प्रसिद्ध चित्रकार थे। इनका जन्म 1905 ई. में बालेर ठिकाना (सवाई माधोपुर) में हुआ। वे राजस्थान के पहले चित्रकार थे जिन्हें 1984 में पद्मश्री सम्मान प्राप्त हुआ। उन्होंने भारतीय चित्रकला में परंपरा और आधुनिकता का सुंदर मिश्रण प्रस्तुत किया।
14. किस चित्रकला शैली में कमला व इलायची नामक महिला चित्रकार थी?
A
देवगढ़ शैली
B
नाथद्वारा शैली
C
किशनगढ़ शैली
D
अलवर शैली
📖 व्याख्या
नाथद्वारा चित्रशैली का उद्भव 1672 ई. में मेवाड़ महाराजा राजसिंह के समय हुआ। जब श्रीनाथजी की मूर्ति सिहाड़ गाँव (नाथद्वारा) लाई गई, तभी यह शैली फली-फूली। इसमें धार्मिक भावनाओं का चित्रण किया गया। इस शैली में कमला और इलायची नामक महिला चित्रकारों ने भी योगदान दिया।
15. पक्षियों को विशेष महत्व देने वाली चित्र शैली है?
A
मेवाड़ शैली
B
किशनगढ़ शैली
C
बूंदी शैली
D
नाथद्वारा शैली
📖 व्याख्या
बूंदी चित्रशैली में पशु-पक्षियों का सबसे अधिक चित्रांकन किया गया है। इसी कारण इसे 'पक्षी शैली' भी कहा जाता है। कबूतर और बतख का चित्रण विशेष रूप से मिलता है। यहाँ प्राकृतिक दृश्यों में पक्षियों की सुंदरता और जीवन को जीवंत रूप में दर्शाया गया है।
16. श्रावक प्रतिक्रमण सूत्र चूर्णि' नाम चित्रित ग्रंथ राजस्थान की किस शैली में है?
A
मेवाड़ शैली
B
किशनगढ़ शैली
C
बूंदी शैली
D
नाथद्वारा शैली
📖 व्याख्या
श्रावक प्रतिक्रमण सूत्र चूर्णि' मेवाड़ शैली का आरम्भिक चित्रित ग्रंथ है। इसे 1260 ई. में महाराणा तेजसिंह के समय चित्रित किया गया था। इसका चित्रकार कमलचंद्र था। यह चित्र आहड़ (उदयपुर) में ताड़पत्र पर बनाया गया था। यह ग्रंथ मेवाड़ शैली की प्राचीनता और धार्मिक महत्व को दर्शाता है।
17. गुलाम अली, बलदेव, सालिगराम, रामगोपाल चित्रकारों का संबंध किस चित्र शैली से रहा है?
A
अलवर शैली
B
जयपुर शैली
C
बूंदी शैली
D
कोटा शैली
📖 व्याख्या
ये चित्रकार अलवर शैली से जुड़े रहे और इस शैली को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। अलवर शैली में ईरानी और मुगल कला का प्रभाव देखने को मिलता है। हालांकि ध्यान देने योग्य तथ्य यह है कि सालिगराम नामक एक चित्रकार जयपुर शैली में भी कार्यरत था। वह सवाई प्रताप सिंह के समय सूरतखाने में चित्रण करता था। यह दर्शाता है कि कलाकार कभी-कभी विभिन्न शैलियों में भी योगदान देते थे।
18. मुहम्मद शाह और साहिबराम किस राजस्थानी चित्रकला शैली के प्रसिद्ध चित्रकार थे?
A
मेवाड़ शैली
B
किशनगढ़ शैली
C
जयपुर शैली
D
मारवाड़ शैली
📖 व्याख्या
मुहम्मद शाह और साहिबराम जयपुर चित्रशैली के विख्यात चित्रकार थे। जयपुर शैली दरबारी जीवन, शाही समारोह और आदमकद चित्रों के लिए जानी जाती है। खासकर साहिबराम ने बड़े आकार के आदमकद चित्र बनाकर एक नई परंपरा शुरू की। उनकी कला में बारीकी और यथार्थ का समावेश होता था। जयपुर दरबार में बने उनके चित्र आज भी राजस्थानी कला के महत्वपूर्ण उदाहरण माने जाते हैं।
19. बूंदी की चित्रकला शैली किस महाराजा के काल में चरम पर थी?
A
राव सुर्जन सिंह
B
जवाहर सिंह
C
माधो सिंह
D
उम्मेद सिंह
📖 व्याख्या
बूंदी चित्रशैली का उत्कर्ष महाराव उम्मेद सिंह के शासनकाल में हुआ। इस काल में राजमहल में चित्रशाला का निर्माण कराया गया, जिसे "भित्ति चित्रों का स्वर्ग" कहा जाता है। यहाँ की चित्रकला में प्रकृति के दृश्य, धार्मिक कथाएँ और शिकार के चित्र विशेष रूप से अंकित हुए। इस काल की चित्रकला में रंगों की गहराई और चित्रों की जीवंतता बूंदी शैली को विशिष्ट बनाती है।
20. जैसलमेरी शैली का कौनसा प्रमुख चित्र जैसलमेर के राज प्रासादों की प्रमुख शोभा था?
A
मूमल
B
ढोला मारू
C
रागमाला
D
बणी ठणी
📖 व्याख्या
जैसलमेरी चित्रशैली में 'मूमल' चित्र प्रमुख रहा, जो जैसलमेर के राजप्रासादों की शोभा माना जाता था। यह चित्र राजस्थानी लोककथाओं और प्रेमकथाओं पर आधारित है। जैसलमेर की चित्रशैली में रेगिस्तानी जीवन, ऊँट, लोकनृत्य और प्रेमकथाओं का चित्रण हुआ। ‘मूमल’ चित्र ने इस शैली को एक अलग पहचान दी और यह कला आज भी जैसलमेर की सांस्कृतिक धरोहर का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
21. किशनगढ़ चित्रशैली के कलाकार निहालचंद द्वारा बनाया गया विख्यात चित्र का नाम है?
A
चांदनी रात की संगोष्ठी
B
सांझी लीला
C
रागमाला
D
बणी ठणी
📖 व्याख्या
निहालचंद किशनगढ़ चित्रशैली के महान कलाकार थे और उनका सबसे प्रसिद्ध चित्र "बणी ठणी" है। इसे "राजस्थान की मोनालिसा" कहा जाता है। इसमें स्त्री सौंदर्य का अद्भुत और आदर्शीकृत चित्रण किया गया है। बणी ठणी के चित्र में लंबी आँखें, नुकीली नाक और आकर्षक मुखाकृति दिखाई देती है। यह चित्र राजस्थान ही नहीं बल्कि सम्पूर्ण भारत की कला धरोहर का प्रतीक बन गया है।
22. राजस्थानी चित्रकला का प्राचीनतम केन्द्र माना जाता है-
A
जयपुर
B
मारवाड़
C
नाथद्वारा
D
मेवाड़
📖 व्याख्या
मेवाड़ चित्रशैली को राजस्थानी चित्रकला का प्राचीनतम केन्द्र माना जाता है। इसका आरंभ 13वीं शताब्दी में हुआ और यह धार्मिक चित्रण के लिए प्रसिद्ध रही। इसमें भागवत पुराण, गीत-गोविन्द और अन्य धार्मिक ग्रंथों के चित्र बनाए गए। मेवाड़ शैली की विशेषता गहरे रंग, धार्मिक भावनाओं की अभिव्यक्ति और सरल रेखांकन है। इससे ही राजस्थान की अन्य शैलियों का विकास हुआ।
23. जयपुर राज्य के उस कारखाने का नाम क्या था, जहाँ कलाकार चित्र और लघु चित्र बनाते थे?
A
दरीखाना
B
सूरतखाना
C
चित्रशाला
D
मालखाना
📖 व्याख्या
जयपुर राज्य में कलाकारों द्वारा चित्र और लघु चित्र बनाए जाने वाला प्रमुख स्थान "सूरतखाना" कहलाता था। यहाँ दरबारी जीवन, शाही समारोह और राजपरिवार से संबंधित चित्र बनते थे। सूरतखाना में अनेक प्रसिद्ध चित्रकार कार्यरत थे, जिन्होंने जयपुर शैली को विशिष्ट पहचान दी। यह स्थान जयपुर कला धरोहर का एक अहम हिस्सा माना जाता है।
24. 1973 में भारत सरकार द्वारा राजस्थानी चित्रशैली के किस चित्र पर स्मरणीय डाक टिकट जारी किया गया?
A
मूमल
B
ढोला मारू
C
रागमाला
D
बणी ठणी
📖 व्याख्या
भारत सरकार ने 5 मई 1973 को 'बणी ठणी' चित्र पर 20 पैसे का स्मारक डाक टिकट जारी किया। यह चित्र किशनगढ़ शैली का है, जिसे कलाकार निहालचंद ने बनाया था। बणी ठणी को उसकी सौंदर्यपूर्ण आकृति और भावपूर्ण चेहरे के कारण 'राजस्थान की मोनालिसा' भी कहा जाता है। डाक टिकट पर स्थान मिलने से इस चित्र ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी ख्याति प्राप्त की।
25. चित्रकला शैली और प्रमुख चित्रकारों का कौनसा युग्म असुमेलित है?
A
बूंदी शैली – रामलाल, सुरजन सिंह
B
मेवाड़ शैली – चंपालाल, हीरालाल
C
किशनगढ़ शैली – अमरचंद, निहालचंद
D
मारवाड़ शैली – देवदास भाटी, शिवदास भाटी
📖 व्याख्या
चंपालाल और हीरालाल नाथद्वारा शैली के चित्रकार थे, न कि मेवाड़ शैली के। इसलिए यह युग्म असुमेलित है। मेवाड़ शैली में साहिबदीन, नसीरूद्दीन और मनोहर जैसे महान चित्रकारों ने महत्वपूर्ण कार्य किया। मेवाड़ शैली की विशेषता धार्मिक विषयों का चित्रण था, जबकि नाथद्वारा शैली मुख्यतः श्रीनाथजी की मूर्ति और भक्ति पर आधारित रही।
26. कौनसी शैली मारवाड़ स्कूल की उपशैली नहीं है?
A
किशनगढ़ शैली
B
जैसलमेर शैली
C
नागौर शैली
D
देवगढ़ शैली
📖 व्याख्या
देवगढ़ शैली, मेवाड़ स्कूल की उपशैली है, न कि मारवाड़ स्कूल की। मारवाड़ स्कूल की उपशैलियों में किशनगढ़, जैसलमेर और नागौर शैलियाँ आती हैं। देवगढ़ शैली मुख्यतः मेवाड़ से जुड़ी है, जहाँ धार्मिक और पौराणिक विषयों का चित्रण किया गया। इसलिए इसे मारवाड़ की उपशैली में शामिल नहीं किया जा सकता।
27. 1605 ई. में मेवाड़ के महाराणा अमर सिंह प्रथम के समय रागमाला का चित्रकार कौन था?
A
बैजनाथ
B
नारायण दास
C
नूर मोहम्मद
D
निसारदीन
📖 व्याख्या
महाराणा अमर सिंह प्रथम (1605 ई.) के शासनकाल में रागमाला चित्रित किया गया, जिसके चित्रकार निसारदीन थे। मेवाड़ शैली का यह महत्वपूर्ण उदाहरण संगीत और रागों के भावपूर्ण चित्रण को दर्शाता है। इसमें नृत्य, गायन और भावात्मक अभिव्यक्तियों का जीवंत चित्रण देखने को मिलता है। यह चित्र राजस्थान की कला धरोहर में महत्वपूर्ण स्थान रखता है।
28. कौनसा महल मारवाड़ चित्रशैली एवं जनजीवन के चित्रों की अभिव्यक्ति व युद्ध दृश्यों के लिए प्रसिद्ध है?
A
मोती महल, जोधपुर
B
तहलटी महल, जोधपुर
C
तख्त विलास, जोधपुर
D
चोखेलाव महल, जोधपुर
📖 व्याख्या
चोखेलाव महल, जोधपुर मारवाड़ चित्रशैली के लिए प्रसिद्ध है। यहाँ जनजीवन के दृश्य, दरबारी गतिविधियाँ और युद्ध के दृश्य चित्रित किए गए। मारवाड़ शैली अपनी कठोर रेखाओं और जीवंत रंगों के लिए जानी जाती है। चोखेलाव महल में चित्रकला का यह रूप स्पष्ट दिखाई देता है, जो इतिहास और संस्कृति का जीवंत दर्पण है।
29. ........... पर चित्रित पिछवाई नाथद्वारा चित्रकला शैली का सजीव उदाहरण है।
A
चमड़े
B
लकड़ी
C
कागज
D
कपड़े
📖 व्याख्या
नाथद्वारा शैली की पिछवाई प्रायः कपड़े पर चित्रित की जाती हैं। इनका मुख्य उद्देश्य श्रीनाथजी की आराधना और धार्मिक अनुष्ठानों को सजाना होता था। पिछवाई चित्रों में भगवान कृष्ण की लीलाओं, त्यौहारों और ऋतु-विशेष की झलक मिलती है। कपड़े पर बनाई गई ये पिछवाई चित्रकला नाथद्वारा की विशिष्ट धार्मिक और कलात्मक धरोहर है।
30. महाराजा रायसिंह के समय चित्रित 'भागवत पुराण' चित्र किस चित्रकला शैली का है?
A
मेवाड़ शैली
B
किशनगढ़ शैली
C
जयपुर शैली
D
बीकानेरी शैली
📖 व्याख्या
बीकानेर नरेश महाराजा रायसिंह के काल में 'भागवत पुराण' का चित्रण हुआ। यह बीकानेरी चित्रशैली का एक उत्कृष्ट उदाहरण है। बीकानेर शैली पर मुगल प्रभाव अधिक रहा और यहाँ के चित्रों में बारीक रेखाओं और सूक्ष्म रंगों का उपयोग किया गया। 'भागवत पुराण' के चित्र धार्मिक और पौराणिक महत्व के कारण विशेष माने जाते हैं।
31. मेवाड़ शैली की चित्रकला का स्वर्णयुग निम्न में से कौन सा है?
A
महाराणा जगतसिंह प्रथम के शासनकाल में
B
महाराणा राजसिंह के शासनकाल में
C
महाराणा जयसिंह के शासनकाल में
D
अमरसिंह द्वितीय के शासनकाल में
📖 व्याख्या
महाराणा जगतसिंह प्रथम (1628–1652 ई.) के शासनकाल को मेवाड़ शैली का स्वर्णयुग कहा जाता है। इस काल में साहिबदीन और मनोहर जैसे महान चित्रकार सक्रिय रहे। उन्होंने भागवत पुराण, गीत-गोविन्द और रामायण जैसे ग्रंथों का सुंदर चित्रण किया। इस समय के चित्रों में रंगों की गहराई और धार्मिक भावनाओं का अद्भुत मेल दिखाई देता है।
32. किस चित्रकला शैली में पुरुषों के चेहरों पर चोट व चेचक के दाग प्रदर्शित है?
A
जयपुर
B
मारवाड़
C
नाथद्वारा
D
मेवाड़
📖 व्याख्या
जयपुर शैली की एक विशेषता यह है कि इसमें चित्रकारों ने मानव चेहरों को वास्तविक रूप में प्रस्तुत किया। चेहरों पर चोट, चेचक और अन्य प्राकृतिक दाग भी दिखाए गए। इससे यह शैली यथार्थवादी बन गई। जयपुर शैली में दरबारी जीवन, राजदरबार और शाही व्यक्तियों के आदमकद चित्र विशेष रूप से अंकित हुए।
33. राजस्थान में भित्ति चित्रों को चिरकाल तक जीवित रखने के लिए आलेखन पद्धति है, जिसे कहते है?
A
बेवाण
B
पाना
C
वार्तिक
D
आरायश
📖 व्याख्या
राजस्थान में भित्ति चित्रों को लंबे समय तक सुरक्षित रखने के लिए आरायश पद्धति अपनाई जाती थी। इसे आरायश आलागीला या मोराकसी भी कहा जाता है। शेखावाटी क्षेत्र में इसे "पणा" नाम से भी जाना जाता था। इस तकनीक में विशेष पलस्तर और रंगों का प्रयोग किया जाता था, जिससे चित्र वर्षों तक चमकदार और टिकाऊ बने रहते थे।
34. सवाई रामसिंह द्वारा जयपुर में 'राजस्थान स्कूल ऑफ आर्ट्स' की स्थापना का वर्ष था-
A
1864 ई. में
B
1880 ई. में
C
1857 ई. में
D
1889 ई. में
📖 व्याख्या
सवाई रामसिंह द्वितीय ने 1857 ई. में जयपुर में 'महाराजा स्कूल ऑफ आर्ट्स' की स्थापना की। बाद में इसे 'राजस्थान स्कूल ऑफ आर्ट्स' के नाम से जाना जाने लगा। इस संस्थान ने लघुचित्रकला और पारंपरिक कलाओं को संरक्षित करने तथा नई पीढ़ी तक पहुँचाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया। यह आज भी कला शिक्षा का प्रमुख केंद्र है।
35. प्रसिद्ध चित्रकार धीमा, मीरबक्स, काशी एवं रामलखन राजस्थान की किस चित्रशैली से सम्बन्धित रहे है?
A
मारवाड़ी शैली
B
किशनगढ़ शैली
C
नागौर शैली
D
उणियारा शैली
📖 व्याख्या
धीमा, मीरबक्स, काशी और रामलखन उणियारा शैली से जुड़े प्रसिद्ध चित्रकार थे। उणियारा शैली टोंक ज़िले के उणियारा क्षेत्र में विकसित हुई थी। इसमें धार्मिक, पौराणिक और दरबारी जीवन के चित्रों का समावेश देखने को मिलता है। इस शैली के चित्रों में चेहरे की स्पष्टता और वस्त्रों की सुंदर सजावट प्रमुख विशेषताएँ हैं।
36. निम्नलिखित में से कौन सा चित्रकार अलवर शैली की चित्रकला से संबंधित नहीं है?
A
जमनादास
B
नानकराम
C
सालिगराम
D
नंदराम
📖 व्याख्या
नानकराम अलवर शैली से नहीं, बल्कि किशनगढ़ शैली से संबंधित चित्रकार था। अलवर शैली में बलदेव, गुलाम अली, सालिगराम और जमुनादास जैसे चित्रकारों का योगदान रहा। वहीं किशनगढ़ शैली में नानकराम ने बणी ठणी जैसे आदर्शीकृत स्त्री सौंदर्य वाले चित्रों की परंपरा को आगे बढ़ाया।
37. 1426 ई. में चित्रित 'कल्पसूत्र' ग्रन्थ किस चित्रकला शैली के प्रारम्भिक चित्रों में से एक है?
A
मेवाड़ शैली
B
मारवाड़ी शैली
C
चावण्ड शैली
D
देवगढ़ शैली
📖 व्याख्या
1426 ई. में चित्रित 'कल्पसूत्र' ग्रंथ मेवाड़ शैली के प्रारंभिक चित्रों में से एक माना जाता है। यह चित्रण मुख्य रूप से धार्मिक विषय पर आधारित था। इसमें जैन परंपरा और धार्मिक कथाओं का बारीकी से चित्रण हुआ। यह ग्रंथ मेवाड़ शैली की प्राचीनता और उसकी धार्मिक महत्ता को स्पष्ट करता है।
38. अजमेर लघु-चित्र शैली को समृद्ध करने वाले चित्रकारों में एक स्त्री चित्रकार का प्रमुख स्थान है, वह कौन है?
A
कमला
B
साहिब
C
इलायची
D
सुचिता
📖 व्याख्या
अजमेर लघुचित्र शैली को समृद्ध बनाने में महिला चित्रकार साहिब का प्रमुख योगदान रहा। स्त्रियों का चित्रकला में आना उस समय असाधारण माना जाता था। साहिब ने धार्मिक विषयों और स्त्रियों के जीवन से संबंधित चित्र बनाए। इस कारण उन्हें अजमेर चित्रशैली में विशेष पहचान मिली।
39. सीताराम, बदनसिंह और नानकराम चित्रकार किस शैली से सम्बद्ध थे?
A
किशनगढ़ शैली
B
जैसलमेर शैली
C
मेवाड़ शैली
D
कोटा शैली
📖 व्याख्या
सीताराम, बदनसिंह और नानकराम किशनगढ़ शैली से संबंधित चित्रकार थे। किशनगढ़ शैली आदर्श स्त्री सौंदर्य, राधा-कृष्ण प्रेम चित्रण और बणी ठणी जैसे उत्कृष्ट चित्रों के लिए प्रसिद्ध है। इन चित्रकारों ने अपनी कला से इस शैली को नई ऊँचाइयों तक पहुँचाया।
40. मारवाड़ शैली में निर्मित चित्रांकन 'रागमाला चित्रावली' 1623 ई. का चित्रकार कौन था?
A
मीर बक्श
B
साहिबराम
C
पुण्डरीक
D
वीरजी
📖 व्याख्या
1623 ई. में 'रागमाला चित्रावली' का चित्रण वीरजी ने किया। यह पाली के वीर पुरुष विठ्ठलदास चाँपावत के लिए बनाया गया था। यह चित्रावली मारवाड़ चित्रशैली का महत्वपूर्ण उदाहरण है। इसमें संगीत रागों का चित्रण गहराई और भावनाओं के साथ किया गया, जिससे यह शैली अद्वितीय बन गई।
41. 1623 ई. में चित्रित प्रसिद्ध चित्र 'कल्याणी रागिनी' किस शैली का चित्र है?
A
कोटा शैली
B
मारवाड़ शैली
C
उणियारा शैली
D
मेवाड़ शैली
📖 व्याख्या
कल्याणी रागिनी' 1623 ई. में मारवाड़ शैली में चित्रित हुई थी। इस चित्र में संगीत राग की भावनाओं को स्त्रियों और प्रकृति के माध्यम से प्रदर्शित किया गया। मारवाड़ शैली का यह एक विशिष्ट उदाहरण है, जिसमें मुगल और स्थानीय प्रभाव दोनों का मिश्रण दिखाई देता है।
42. कोटा शैली का स्वतंत्र अस्तित्व स्थापित करने का श्रेय किसे दिया जाता है?
A
महाराव उम्मेद सिंह
B
माधोसिंह
C
जालिम सिंह
D
महाराव रामसिंह
📖 व्याख्या
कोटा शैली का स्वतंत्र अस्तित्व महाराव रामसिंह के शासनकाल में स्थापित हुआ। इससे पहले कोटा शैली बूंदी से प्रभावित थी, लेकिन रामसिंह के समय यह स्वतंत्र पहचान के साथ विकसित हुई। कोटा शैली विशेषकर शिकार के दृश्यों और प्राकृतिक सौंदर्य के चित्रण के लिए प्रसिद्ध हुई।
43. कमल से भरे सरोवर व तैरती नौकाएँ' किस शैली का विषय है?
A
मेवाड़ शैली
B
बीकानेर शैली
C
किशनगढ़ शैली
D
शेखावाटी शैली
📖 व्याख्या
किशनगढ़ शैली अपने आदर्शवादी सौंदर्य चित्रण के लिए प्रसिद्ध है। इसमें कमल से भरे सरोवर, तैरती नौकाएँ और राधा-कृष्ण के श्रृंगारिक चित्र विशेष स्थान रखते हैं। इस शैली में प्रकृति और प्रेम का अद्भुत संगम प्रस्तुत किया गया है, जिससे यह शैली अत्यंत लोकप्रिय हुई।
44. प्रसिद्ध चित्रकृति 'ढोला मारू' की शैली है-
A
जोधपुर शैली
B
किशनगढ़ शैली
C
चावण्ड शैली
D
बूंदी शैली
📖 व्याख्या
ढोला मारू' चित्रकृति जोधपुर शैली का एक उत्कृष्ट उदाहरण है। इसमें राजस्थान की प्रसिद्ध लोककथा ढोला-मारू का चित्रण किया गया है। यह चित्र मारवाड़ के प्रेम, साहस और सांस्कृतिक परंपराओं को दर्शाता है। जोधपुर शैली में यह कृति आज भी प्रमुख स्थान रखती है।
45. चावण्ड शैली के प्रसिद्ध चितेरे नसीरुद्दीन (निसारदीन) ने 'रागमाला' का चित्रण किस शासक के संरक्षण में किया?
A
महाराणा प्रताप
B
जगतसिंह प्रथम
C
महाराणा उदयसिंह
D
अमरसिंह प्रथम
📖 व्याख्या
नसीरुद्दीन (निसारदीन) चावण्ड शैली के प्रसिद्ध चित्रकार थे। उन्होंने 'रागमाला' का चित्रण महाराणा अमरसिंह प्रथम के संरक्षण में किया। इस शैली की चित्रकला में रंगों की गहराई और विषयों की विविधता देखने को मिलती है। रागमाला चित्र संगीत और भावनाओं का कलात्मक चित्रण है, जिसमें विभिन्न रागों और उनके रस का सुंदर प्रस्तुतीकरण होता है।
46. पंचतंत्र, गीत गोविंद, महाभारत, रामायण आदि चित्रित ग्रंथ किस शैली के हैं?
A
मेवाड़ शैली
B
नाथद्वारा शैली
C
जोधपुर शैली
D
किशनगढ़ शैली
📖 व्याख्या
मेवाड़ शैली में पंचतंत्र, गीत गोविंद, महाभारत और रामायण जैसे ग्रंथों का चित्रण किया गया। इस शैली की विशेषता धार्मिक और पौराणिक कथाओं का जीवंत चित्रण है। साहिबदीन और मनोहर जैसे महान चित्रकारों ने इन ग्रंथों को कलात्मक रूप दिया। मेवाड़ चित्रशैली ने भारतीय संस्कृति और धर्मग्रंथों को चित्रकला के माध्यम से संरक्षित किया।
47. लम्बा चेहरा, लम्बा कद, लम्बी अंगुलियाँ, नुकीली नाक, पतली कमर, सुराहीदार गर्दन किस चित्रकला शैली की प्रमुख विशेषताएँ है?
A
मेवाड़ शैली
B
जोधपुर शैली
C
किशनगढ़ शैली
D
बीकानेर शैली
📖 व्याख्या
किशनगढ़ चित्रशैली की सबसे बड़ी विशेषता स्त्रियों का आदर्शीकृत स्वरूप है। इसमें चेहरा लंबा, नाक नुकीली, आँखें बड़ी और गर्दन सुराहीदार दिखाई जाती है। पतली कमर और लंबी उंगलियाँ इस शैली को अन्य शैलियों से अलग बनाती हैं। बणी-ठणी चित्र इस शैली का सर्वश्रेष्ठ उदाहरण है, जिसे "भारत की मोनालिसा" कहा जाता है।
48. कागज पर निर्मित चित्र कहलाते हैं-
A
पिछवाई
B
माण्डना
C
पाने
D
सांझी
📖 व्याख्या
कागज पर निर्मित चित्रों को 'पाने' कहा जाता है। इनमें देवी-देवताओं की झाँकियाँ और धार्मिक चित्र अंकित किए जाते हैं। विशेष रूप से श्रीनाथजी के पाने प्रसिद्ध हैं, जिन पर 24 श्रृंगारों का चित्रण किया गया है। पाने सजावटी और धार्मिक दोनों दृष्टि से महत्वपूर्ण होते थे और इन्हें भक्तिभाव से घरों व मंदिरों में लगाया जाता था।
49. मेवाड़ चित्रशैली का प्रमुख चित्र 'रागमाला चित्र' किस अजायबघर में सुरक्षित है?
A
किशनगढ़ संग्रहालय
B
बड़ौदा संग्रहालय
C
अल्बर्ट हॉल (पेरिस)
D
दिल्ली के अजायबघर में
📖 व्याख्या
मेवाड़ शैली का प्रमुख 'रागमाला चित्र' दिल्ली के अजायबघर में सुरक्षित है। रागमाला चित्रकला भारतीय संगीत के विभिन्न रागों और रागिनियों का दृश्य रूप प्रस्तुत करती है। इस चित्रण में धार्मिक और श्रृंगारिक भावों का सुंदर समन्वय है। यह चित्रकला मेवाड़ शैली की प्राचीनता और कलात्मक उत्कृष्टता का प्रतीक है।
50. राजस्थान में चित्रकला शैली व स्वर्णकाल का कौनसा युग्म असुमेलित है?
A
नाथद्वारा शैली – महाराणा राजसिंह
B
चावण्ड शैली – अमर सिंह प्रथम
C
बीकानेर शैली – महाराजा अनूप सिंह
D
मेवाड़ शैली – महाराणा प्रताप
📖 व्याख्या
मेवाड़ शैली का स्वर्णकाल महाराणा प्रताप का नहीं, बल्कि महाराणा जगतसिंह प्रथम (1628–1652 ई.) का समय था। इस काल में साहिबदीन और मनोहर जैसे चित्रकार सक्रिय थे। उन्होंने धार्मिक ग्रंथों जैसे भागवत पुराण और गीत गोविंद का सुंदर चित्रण किया। इस कारण यह युग्म असुमेलित है।