राजस्थान के संत-संप्रदाय MCQ Questions with Answers

राजस्थान के संत-संप्रदाय MCQ in Hindi | Questions, Answers and Explanation

इस पोस्ट में राजस्थान की कला एवं संस्कृति के टॉपिक राजस्थान के संत-संप्रदाय से संबंधित Latest व पूर्णतः updated महत्वपूर्ण MCQ प्रश्न दिए गए हैं। इनमें कुंडा पंथ, तेरह पंथ, दादूपंथ, निष्कलंकी संप्रदाय, गरीबदासी पंथ, रसिक संप्रदाय आदि से सम्बंधित महत्वपूर्ण जानकारियों को व्याख्या सहित शामिल किया गया है।

ये महत्वपूर्ण MCQ प्रश्न RPSC, RSSB, RAS, Patwar, Police, LDC, VDO, REET तथा राजस्थान राज्य की अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए उपयोगी हैं। इनमें विषयवार प्रश्न, सही उत्तर एवं विस्तृत व्याख्या शामिल हैं।

  • Subject: राजस्थान की कला एवं संस्कृति
  • Topic: राजस्थान के संत-संप्रदाय
  • Last Updated:
  • Content Type: Multiple Choice Questions (MCQ)
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1. कुंडा पंथ के प्रणेता कौन थे?

A राव अजीतसिंह
B राव मल्लीनाथ
C गोगाजी
D पाबूजी
📖 व्याख्या
कुंडा पंथ की शुरुआत राजस्थान से हुई थी और इसके प्रणेता राव मल्लीनाथ माने जाते हैं। यह एक तांत्रिक पंथ था जिसमें शरीर को ही मोक्ष प्राप्ति का साधन माना गया। इसका उद्देश्य कामभाव को नियंत्रित करके मोक्ष की प्राप्ति करना था। इसकी स्थापना लगभग 1399 ई. में हुई। इस पंथ से धारू मेघवाल, उगम सिंह भाटी, रानी रूपा देवी और नामदेव छोपा जैसे नाम जुड़े हुए हैं।

2. धन्ना भगत के गुरु कौन थे?

A कबीर
B नानक
C रामानंद
D नामदेव
📖 व्याख्या
धन्ना भगत का जन्म टोंक जिले के धुवन गांव में हुआ था। बाद में वे राजस्थान से बनारस चले गए और रामानंद के शिष्य बन गए। उनकी वाणी इतनी प्रभावशाली थी कि गुरुग्रंथ साहिब में इनके तीन शब्द सम्मिलित हैं। धन्ना भगत समाज सुधार और भक्ति आंदोलन की प्रमुख कड़ी थे।

3. राजस्थान की दूसरी मीरा संत रानाबाई का जन्म कहाँ हुआ था?

A कुडकी
B कापडोद
C साबला
D हरनावा
📖 व्याख्या
रानाबाई को राजस्थान की दूसरी मीरा कहा जाता है। इनका जन्म नागौर जिले के हरनावा गांव में हुआ था। वे सगुण परंपरा की कृष्णभक्तरही और भक्ति भाव में लीन होकर जीवन व्यतीत किया। उन्होंने 1570 ई. में हरनावा में जीवित समाधि ली।

4. राजस्थान में 'तेरह पंथ' के प्रवर्तक रहे हैं—

A धरणीवराह जी
B श्रमणनाथ जी
C जिनसेन जी
D भीखण जी
📖 व्याख्या
तेरह पंथ के प्रवर्तक आचार्य भिक्षु (भीखण जी) थे। इनका जन्म कंटालिया (मारवाड़) 1726 ई. में हुआ। 1760 ई. में उन्होंने इस पंथ की स्थापना की। वे श्वेतांबर स्थानकवासी संप्रदाय में दीक्षित हुए और बाद में 13 साधुओं के साथ नया पंथ बनाया। उनकी समाधि सिरयारी (पाली) में है।
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5. रज्जब वाणी' पुस्तक किस पंथ/संप्रदाय से संबंधित है?

A दादू
B विश्नोई
C रास्नेही
D निम्बार्क
📖 व्याख्या
रज्जब वाणी' दादूपंथ से संबंधित एक महत्वपूर्ण ग्रंथ है। इसके रचयिता रज्जब जी, जो दादूदयाल के शिष्य थे। इस ग्रंथ में भक्ति, संत वाणी और आध्यात्मिक संदेश संकलित हैं। इसकी व्याख्या स्वामी नारायणदास जी महाराज ने की थी।

6. हरनावा गांव किस संत से जुड़ा महत्वपूर्ण स्थल है?

A मीरा
B रानाबाई
C लालगिरि
D लालागिरी
📖 व्याख्या
हरनावा गांव संत रानाबाई से जुड़ा हुआ है, जिन्हें राजस्थान की दूसरी मीरा कहा जाता है। वे संत चतुरदास खोजी जी की शिष्या थीं। हरनावा ही उनका जन्मस्थान और समाधि स्थल है, जिसने इसे धार्मिक और ऐतिहासिक दृष्टि से महत्वपूर्ण बना दिया है।

7. चोपड़ा नामक ग्रंथ की रचना किसने की?

A मावजी
B दरियाव जी
C रामचरण जी
D रामदास जी
📖 व्याख्या
मावजी को राजस्थान में निष्कलंकी संप्रदाय का प्रवर्तक माना जाता है। उन्होंने कई ग्रंथों की रचना की, जिनमें से एक प्रमुख ग्रंथ चोपड़ा है। यह ग्रंथ वाद-विवाद की शैली में लिखा गया है। इसमें लगभग 96 हजार छंद बताए जाते हैं, जिन्हें दीपावली पर बाहर निकाला जाता है।

8. वायु की गुणवत्ता सूचकांक को बताने वाला मोबाइल एप्लीकेशन है—

A राजवायु
B प्राणवायु
C मारूति
D राजपवन
📖 व्याख्या
राजवायु' एप राजस्थान सरकार द्वारा 5 जून 2016 को लॉन्च किया गया। इसका उद्देश्य जयपुर, जोधपुर और उदयपुर जैसे शहरों में वायु गुणवत्ता सूचकांक की जानकारी जनता तक पहुंचाना है। यह एप प्रदूषण स्तर और चेतावनी देने का काम करता है।
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9. निम्नलिखित में से कौन दादू दयाल जी का शिष्य नहीं है?

A सुंदरदास जी
B गरीबदास जी
C रज्जब जी
D लालदास जी
📖 व्याख्या
दादूदयाल के 52 प्रमुख शिष्यों को 52 स्तंभ कहा जाता है। इनमें सुंदरदास, गरीबदास, मिस्किनदास और रज्जब प्रमुख हैं। लेकिन लालदास जी उनके शिष्यों में शामिल नहीं थे।

10. मलूकनाथ किस पंथ के साधु थे?

A गरीबदासी पंथ
B चरणदासी पंथ
C रामानंद पंथ
D रामस्नेही पंथ
📖 व्याख्या
मलूकनाथ गरीबदासी पंथ के प्रमुख साधु थे। उन्होंने अलखबानी, ज्ञानबोध, पुरुषविलास और सुखसागर जैसे ग्रंथ लिखे। उनके गुरु कबीरथे और उनके शिष्य गरीबदास ने इस पंथ को आगे बढ़ाया। गरीबदास ने 'रत्नसागर' और 'अमृतवाणी' जैसे ग्रंथों की रचना की।

11. रसिक संप्रदाय का प्रवर्तक कौन था?

A अचलदास
B अग्रदास
C ईसरदास
D गिरधरदास
📖 व्याख्या
रसिक संप्रदाय का प्रवर्तक अग्रदास था, जो कृष्णदास पयहारी के शिष्य थे। इस संप्रदाय का प्रमुख पीठ रैवासा (सीकर) रहा। इसमें सीता-राम की श्रृंगारिक रूप से माधुर्य भाव की भक्ति की जाती थी। इस संप्रदाय में भक्त भगवान को प्रियतम और स्वयं को प्रिय माना करते थे। अग्रदास के शिष्य नाभादास ने भक्तिकाल का प्रसिद्ध ग्रंथ ‘भक्तमाल’ लिखा, जिसमें अनेक संतों का वर्णन मिलता है। इस प्रकार रसिक संप्रदाय ने भक्ति आंदोलन में विशेष स्थान बनाया।

12. संत हरिदास.... संप्रदाय के संस्थापक थे।

A रामस्नेही
B निरंजनी
C अलखिया
D निम्बार्क
📖 व्याख्या
संत हरिदास जी, जिन्हें हरिसिंह सांखला भी कहा जाता है, निरंजनी संप्रदाय के प्रवर्तक थे। इन्हें राजस्थान का वाल्मीकि या कलियुग का वाल्मीकि भी कहा जाता है। हरिदास जी ने समाज में फैली कुरीतियों को दूर करने और आध्यात्मिक जागरण के लिए इस संप्रदाय की स्थापना की। इनके अनुयायी दो प्रकार के माने जाते हैं—निहंग साधु और घरबारी साधु। इस संप्रदाय ने सादगी, साधना और सेवा पर जोर दिया।
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13. निम्न में से कौन सा संप्रदाय संत मावजी के द्वारा स्थापित किया गया?

A रामस्नेही संप्रदाय
B निष्कलंकी संप्रदाय
C रामानुज संप्रदाय
D निरंजनी संप्रदाय
📖 व्याख्या
संत मावजी को निष्कलंकी संप्रदाय का संस्थापक माना जाता है। इनका जन्म 1714 ई. में हुआ और पिता का नाम दालरूमसी तथा माता का नाम केशरबाई था। इन्हें भक्तजन कल्कि अवतार मानते हैं। संत मावजी ने सावंत 1784 माघ शुक्ल में बेणेश्वर धाम की स्थापना की, जो डूंगरपुर और बाँसवाड़ा जिलों की संगमस्थली पर स्थित है। इस संप्रदाय से जुड़े प्रमुख स्थान साबला, पूजपुर, दालावाला, शेषपुर और पालोदा रहे। इनके अनुयायी मावजी को 10वें अवतार के रूप में पूजते हैं।

14. वाद-विवाद शैली में लिखे गए ग्रंथ 'चौपड़ा' संबंधित है—

A लालदासी संप्रदाय से
B रामस्नेही संप्रदाय से
C निष्कलंकी संप्रदाय से
D निम्बार्क संप्रदाय से
📖 व्याख्या
‘चौपड़ा’ ग्रंथ संत मावजी की रचनाओं में प्रमुख है और यह निष्कलंकी संप्रदाय से संबंधित है। यह ग्रंथ वाद-विवाद की शैली में लिखा गया है और इसमें विभिन्न विषयों पर प्रश्नोत्तर शैली में विचार प्रस्तुत किए गए हैं। इसमें लगभग 72 से 96 हजार छंद बताए जाते हैं। इस ग्रंथ को विशेष अवसर पर, खासकर दीपावली के दिन, बाहर निकाला जाता है। यह ग्रंथ धार्मिक, दार्शनिक और सांस्कृतिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है।

15. निम्नलिखित में से कौन-सा युग्म सही सुमेलित नहीं है?

A संत रामचरण जी – शाहपुरा
B संत हरिरामदास जी – सिंहथल
C संत दरियाव जी – रेवासा
D संत रामदास जी – खेड़ापा
📖 व्याख्या
इस प्रश्न में संत दरियाव जी को गलत रूप से रेवासा से जोड़ा गया है, जबकि सही स्थान रेण (नागौर) है। संत दरियाव जी के गुरु प्रेमनाथ (बालकनाथ जी) थे। उन्होंने समाज में हिंदू-मुस्लिम एकता का संदेश दिया और उनके अनुयायियों ने इस विचारधारा को आगे बढ़ाया। अन्य विकल्प सही हैं, जैसे संत रामचरण शाहपुरा, हरिरामदास सिंहथल और रामदास खेड़ापा से जुड़े हुए हैं।

16. राजस्थान के कौनसे समुदाय के लिए वन एवं वन्यप्राणी संरक्षण उनके धार्मिक अनुष्ठान का भाग बन गया है?

A गुर्जर
B सहरिया
C विश्नोई
D मीणा
📖 व्याख्या
राजस्थान का विश्नोई समुदाय पर्यावरण संरक्षण के लिए जाना जाता है। इनके प्रवर्तक गुरु जाम्भोजी ने 1485 ई. में 29 नियम दिए, जिनमें हरे वृक्षों की रक्षा और पशुओं की सुरक्षा का विशेष महत्व है। विश्नोई समाज में वृक्षों और जीवों को काटना या मारना पाप माना जाता है। इसी कारण इन्हें विश्व का पहला पर्यावरणवादी समाज भी कहा जाता है। गुरु जाम्भोजी को पर्यावरण संत और प्रथम पर्यावरण आंदोलन का जनक भी कहा जाता है।
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17. मुकाम प्रसिद्ध है—

A जैनियों के लिए
B बिश्नोईयों के लिए
C सिक्खों के लिए
D जसनाथियों के लिए
📖 व्याख्या
मुकाम (बीकानेर) विश्नोई समाज का प्रमुख तीर्थ स्थल है। यहाँ गुरु जाम्भोजी की समाधि स्थित है। विश्नोई संप्रदाय की स्थापना 1485 ई. में बीकानेर के समराथल धोरा पर हुई थी। गुरु जाम्भोजी ने 120 शब्द वाणियां, जम्भ सहिता और जम्भसागर की रचना की। मुकाम में प्रतिवर्ष मेलों का आयोजन होता है और इसे विश्नोई समाज का सबसे पवित्र स्थान माना जाता है।

18. बिश्नोई संप्रदाय के प्रवर्तक गुरु जाम्भेश्वर से संबंधित मुख्य स्थान है—

A मुकाम
B गुदा बिश्नोईयान
C नौखा
D लूनी
📖 व्याख्या
गुरु जाम्भोजी ने 1485 ई. में बीकानेर के समराथल धोरा पर विश्नोई संप्रदाय की स्थापना की। इनका जन्म 1451 ई. में पीपासर (नागौर) में हुआ था। जाम्भोजी ने 29 नियम दिए जिनमें वृक्ष और वन्य जीवों की रक्षा प्रमुख थी। उनकी समाधि मुकाम (बीकानेर) में है, जिसे इस संप्रदाय का सबसे पवित्र तीर्थ माना जाता है। यहाँ हर वर्ष लाखों अनुयायी दर्शन करने आते हैं।

19. हरे वृक्षों की रक्षा के लिए किस संप्रदाय को जाना जाता है?

A विश्नोई
B रामस्नेही
C निरंजनी
D लालदासी
📖 व्याख्या
विश्नोई संप्रदाय वृक्षों और वन्य जीवों की रक्षा के लिए प्रसिद्ध है। इसकी स्थापना गुरु जाम्भोजी ने 1485 ई. में बीकानेर के समराथल धोरापर की थी। उन्होंने स्पष्ट उपदेश दिया कि हरे वृक्ष मत काटो और पशु-पक्षियों को मत मारो। इस संप्रदाय के लोग पर्यावरण की रक्षा को धार्मिक अनुष्ठान का हिस्सा मानते हैं। विश्नोई समाज के लोग वृक्षों और जानवरों के लिए अपने प्राण तक न्योछावर कर देते हैं।

20. विश्नोई संप्रदाय का संस्थापक कौन था?

A धन्नाजी
B चरणदास
C दादूजी
D जाम्भोजी
📖 व्याख्या
गुरु जाम्भोजी ने 1485 ई. में बीकानेर जिले के समराथल धोरा पर विश्नोई संप्रदाय की स्थापना की। इस संप्रदाय की प्रमुख पीठें मुकाम, तालवा (नोखा), जाम्भा (फलौदी) और रामड़ावास (पीपाड़) रही। जाम्भोजी द्वारा रचित प्रमुख ग्रंथ हैं—जम्भवाणी (गुरु वाणी/वेद वाणी/शब्द वाणी), जम्भसागर, जम्भ सहिता और जम्भगीता। उन्होंने 29 नियम बताए, जिनमें सत्य, पर्यावरण, पशु-पक्षियों और वृक्षों की रक्षा पर विशेष बल दिया गया। इन्हें पर्यावरण संत के नाम से भी जाना जाता है।
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21. जाम्भोजी जहां प्रवचन करते थे, वह क्या कहलाता था?

A सधारी
B सबद
C वाणी
D शील
📖 व्याख्या
विश्नोई संप्रदाय के प्रवर्तक गुरु जाम्भोजी का प्रवचन स्थल सांधारी कहलाता था। वे पंवार वंशीय राजपूत थे और निर्गुण भक्ति संप्रदाय को आगे बढ़ाने वाले संत थे। उनका मूल उपदेश था – हृदय से विष्णु का नाम जपो और हाथों से कार्य करो। उन्होंने अपने उपदेशों के माध्यम से समाज को सच्चरित्रता और पर्यावरण संरक्षण की राह दिखाई।

22. राजस्थान के किस लोकदेवता के माता-पिता का नाम हंसादेवी और लोहटजी था?

A पीपाजी
B धन्नाजी
C जाम्भोजी
D सिद्ध जसनाथजी
📖 व्याख्या
गुरु जाम्भोजी का जन्म भादवा कृष्ण अष्टमी, वि.सं. 1508 (1451 ई.) को पीपासर (नागौर) में हुआ था। उनके पिता का नाम लोहटजी पंवार और माता का नाम हंसा देवी था। इनके गुरु गोरखनाथ थे। जाम्भोजी ने 29 नियम दिए और उनकी वाणियों का संग्रह जाम्भसागर कहलाता है। वे विश्नोई संप्रदाय के प्रवर्तक और पर्यावरण संरक्षण के प्रथम संत कहे जाते हैं।

23. जाम्भा (फलौदी-जोधपुर) किस संप्रदाय से संबंधित स्थान है?

A गौड़ीय संप्रदाय
B जसनाथी संप्रदाय
C वल्लभ संप्रदाय
D विश्नोई संप्रदाय
📖 व्याख्या
जाम्भा (फलौदी, जोधपुर) विश्नोई संप्रदाय से संबंधित प्रमुख स्थान है। संप्रदाय के प्रवर्तक गुरु जाम्भोजी थे, जिन्होंने 1485 ई. में समराथल (बीकानेर) से इसकी स्थापना की। जाम्भा में जाम्भोजी के कहने पर जैसलमेर के राजा जैतसिंह ने तालाब बनवाया, जिसे विश्नोई समाज में पुष्कर के समान पवित्र माना जाता है।

24. निम्न में से किसने गुरु गोरखनाथ से दीक्षा ली थी?

A जाम्भोजी
B संत पीपा
C दादू दयाल
D संत चरणदास
📖 व्याख्या
गुरु जाम्भोजी का जन्म 1451 ई. भाद्रपद कृष्ण अष्टमी को पीपासर (नागौर) में हुआ। इन्हें कृष्ण तथा विष्णु का अवतार भी माना जाता है। जाम्भोजी ने गुरु गोरखनाथ से दीक्षा ली थी। उन्होंने समाज सुधार हेतु 29 नियम और 120 शब्द प्रतिपादित किए। इन्हें विश्व पर्यावरण आंदोलन का प्रथम प्रणेता कहा जाता है और पर्यावरण वैज्ञानिक संत की उपाधि दी जाती है।
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25. लोकदेवता जाम्भोजी का जन्म कब हुआ था?

A 1351 ई.
B 1451 ई.
C 1551 ई.
D 1651 ई.
📖 व्याख्या
लोकदेवता गुरु जाम्भोजी का जन्म 1451 ई. (वि.सं. 1508) में भादवा कृष्ण अष्टमी को पीपासर (नागौर) में हुआ। इनके पिता का नाम लोहटजी (पंवार वंशीय राजपूत) और माता का नाम हंसा देवी था। जाम्भोजी को विष्णु का अवतार भी कहा जाता है। उन्होंने विश्नोई संप्रदाय की स्थापना की और जीवन पर्यंत पर्यावरण संरक्षण व सामाजिक सुधार का संदेश दिया।

26. विश्नोई समुदाय के गुरु किसे माना जाता है?

A गुरु जाम्भेश्वर
B गुरु रामदेव
C गुरु नानक
D इनमें कोई नहीं
📖 व्याख्या
विश्नोई संप्रदाय के गुरु गुरु जाम्भेश्वर (जाम्भोजी) माने जाते हैं। इनका जन्म पीपासर (नागौर) में भादवा कृष्ण अष्टमी को हुआ। वे विष्णु के अवतार कहे जाते हैं। 1485 ई. में उन्होंने समराथल धोरा (बीकानेर) पर विश्नोई संप्रदाय की स्थापना की। उनकी समाधि मुकाम (बीकानेर) में है और यहां प्रतिवर्ष फाल्गुन व आश्विन अमावस्या को मेला भरता है।

27. किस समाज सुधारक ने अपने शिष्यों से 29 नियमों का पालन करने हेतु जोर दिया?

A पीपा जी
B जाम्भोजी
C दादूदयाल जी
D जसनाथ जी
📖 व्याख्या
समाज सुधारक गुरु जाम्भोजी ने अपने अनुयायियों को 29 नियमों का पालन करने का उपदेश दिया। वे विश्नोई संप्रदाय के प्रवर्तक थे। उन्हें गुंगा, गहला और विष्णु का अवतार कहा जाता है। उनके नियमों में पर्यावरण, वृक्षों, वन्यजीवों की रक्षा, सामाजिक आचरण और धार्मिक जीवन से जुड़े आदर्श बताए गए। इसी कारण जाम्भोजी को पर्यावरण वैज्ञानिक संत भी कहा जाता है।

28. संत बखनाजी, संतदासजी, संत रज्जबजी किस संप्रदाय से संबंधित थे?

A कबीरपंथ
B लालदासी
C रामस्नेही
D दादूपंथ
📖 व्याख्या
संत बखनाजी, संतदासजी और संत रज्जबजी सभी दादू पंथ से संबंधित थे। इसके प्रवर्तक दादूदयाल थे, जिनका जन्म 1544 ई. फाल्गुन अष्टमी को अहमदाबाद (गुजरात) में हुआ। उनके गुरु बुड़दन (वृद्धानंद) थे। दादू दयाल के प्रमुख शिष्यों में गरीबदास, मिस्किनदास, सुंदरदास, रज्जब, माधोदास और अन्य संत शामिल थे।
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29. खालसा, खाकी, नागा राजस्थान के किस संप्रदाय के भाग हैं?

A रामस्नेही संप्रदाय
B दादू पंथ
C चरणदासी संप्रदाय
D लालदासी संप्रदाय
📖 व्याख्या
दादू पंथ की 5 प्रमुख शाखाएं मानी जाती हैं – खालसा, खाकी, नागा, उतरादे और स्थानधारी/विरक्त। इस संप्रदाय के प्रवर्तक दादूदयालको राजस्थान का कबीर भी कहा जाता है (मोतीलाल मेनारिया द्वारा)। दादूजी के अनुयायियों ने इनके उपदेशों को समाज में फैलाया और भक्ति परंपरा को मजबूत किया।

30. दादूपंथ में सत्संग स्थल कहलाता है—

A मुक्ति धाम
B अलख दरीबा
C चौपड़ा
D रामद्वारा
📖 व्याख्या
दादूपंथ में सत्संग स्थल को अलख दरीबा कहा जाता है। दादू दयाल ने 1574 ई. में इस पंथ की स्थापना की थी। उन्हें राजस्थान का कबीरभी कहा जाता है। अलख दरीबा में अनुयायी एकत्र होकर भक्ति, सत्संग और आध्यात्मिक चर्चा करते थे। इस स्थान का महत्व दादूपंथ की परंपरा में विशेष है।

31. दादू पंथ की नागा शाखा किसके द्वारा स्थापित की गई थी?

A गरीबदास
B मिस्किनदास
C बनवारीदास
D सुंदरदास
📖 व्याख्या
दादूपंथ की कुल पाँच प्रमुख शाखाएँ मानी जाती हैं – (1) खालसा – गरीबदास द्वारा, (2) नागा – सुंदरदास द्वारा, (3) विरक्त, (4) उतरादे या स्थानधारी और (5) खाकी। नागा शाखा की विशेषता थी कि इसमें साधु लोग अपने साथ हथियार रखते थे और समाज की रक्षा के लिए तत्पर रहते थे। दादूपंथ का विस्तार राजस्थान से निकलकर उत्तर भारत तक हुआ।

32. मुगल सम्राट अकबर द्वारा जिस संत को फतेहपुर सीकरी आमंत्रित किया गया वह था—

A लालदास
B जसनाथ
C रज्जबजी
D दादू दयाल
📖 व्याख्या
मुगल सम्राट अकबर ने 1585 ई. में फतेहपुर सीकरी के इबादतखाना में धार्मिक विमर्श के लिए विभिन्न संतों को बुलाया। उनमें दादू दयालभी शामिल थे। दादूजी ने वहाँ 40 दिन तक प्रवचन दिए। इन्हें राजस्थान का कबीर कहा जाता है। इनका जन्म 1544 ई. अहमदाबाद में हुआ था और 1574 ई. में इन्होंने दादूपंथ की स्थापना की।
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33. दादू पंथ की प्रमुख पीठ स्थित है?

A आमेर
B नरैना
C मण्डोर
D करौली
📖 व्याख्या
दादू पंथ की प्रमुख पीठ नरैना (जयपुर) में स्थित है। दादूदयाल ने सबसे पहले सांभर में उपदेश दिए और बाद में नरैना को मुख्य केंद्र बनाया। यहीं पर दादू खोल भैराणा पहाड़ी भी स्थित है। इनके उपदेशों का संकलन हरदेवाणी संतदास और जगन्नाथदास ने किया। दादूपंथ का सत्संग स्थल अलख दरीबा कहलाता है।

34. दादू पंथ का प्रमुख केंद्र कहाँ है?

A पीपासर
B अजमेर
C भीनमाल
D नरैना
📖 व्याख्या
दादूपंथ का प्रमुख केंद्र नरैना (जयपुर) है। पंथ की स्थापना 1574 ई. में दादूदयाल ने की थी। अन्य प्रमुख केंद्र कल्याणपुर, अजमेर, सांभर और भराणा भी रहे। दादूजी की प्रमुख रचनाएँ हैं – कायाबेली, दादूजी री वाणी और दादू रा दोहा। उन्होंने निपख आंदोलन चलाया और निर्गुण भक्ति का संदेश दिया।

35. दादू की शिक्षाओं का संकलन “दादूवाणी” रचित है—

A मेवाती बोली में
B ढूंढाड़ी बोली में
C देशवाली बोली में
D बागड़ी बोली में
📖 व्याख्या
दादूदयाल की शिक्षाओं का संकलन ‘दादूवाणी’ कहलाता है। यह ढूंढाड़ी बोली (सधुक्कड़ी भाषा) में लिखी गई है। दादूजी ने सरल भाषा में समाज सुधार और भक्ति का संदेश दिया। इसके अतिरिक्त इनके दोहे ‘दादू रा दोहा’ नाम से प्रसिद्ध हैं। इस वाणी में भक्ति, नैतिकता और समानता का संदेश झलकता है।

36. निम्नलिखित में से किसे 'राजस्थान के कबीर' के नाम से जाना जाता है?

A दादू दयाल
B पाबूजी
C गोगाजी
D रामदेवजी
📖 व्याख्या
दादू दयाल को ‘राजस्थान का कबीर’ कहा जाता है। वे निर्गुण भक्ति धारा के प्रमुख संत थे। इन्होंने जात-पात का विरोध किया और सभी को समानता और भाईचारे का संदेश दिया। दादूजी ने 1574 ई. में दादूपंथ की स्थापना की। इनके अनुयायी विभिन्न शाखाओं में बंट गए, जैसे – खालसा, नागा, खाकी आदि।
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37. नारायणा किसका जाना-माना केन्द्र है?

A विश्नोई संप्रदाय
B नाथ संप्रदाय
C दादूपंथ
D रामस्नेही संप्रदाय
📖 व्याख्या
नारायणा (जयपुर) दादूपंथ का प्रमुख केंद्र है। दादूदयाल ने यहां अपना मुख्य प्रवास स्थान बनाया। दादूजी ने नरैना को भक्ति और समाज सुधार का केंद्र बनाया, जहां से उनके उपदेश दूर-दूर तक फैले। इसीलिए नरैना को दादूपंथ का आध्यात्मिक गढ़ कहा जाता है।

38. निम्नलिखित में से कौन दादूपंथी उप-संप्रदाय नहीं है?

A खालसा
B नागा
C खाकी
D चंडाल
📖 व्याख्या
दादूपंथ की पाँच प्रमुख शाखाएँ मानी जाती हैं, खालसा – गरीबदास द्वारा स्थापित, खाकी – शरीर पर भस्म रमाने वाले साधु, नागा – सुंदरदास द्वारा स्थापित, साधु हथियार रखते थे, उतरादे/स्थानधारी – उत्तर भारत में फैली शाखा, विरक्त – गृहस्थ अनुयायी, चंडाल इनमें से कोई उपसंप्रदाय नहीं है।

39. बालिन्दजी के गुरु कौन थे?

A दादूदयाल जी
B रामचरण जी
C सुंदरदास जी
D मंगलाराम जी
📖 व्याख्या
बालिन्दजी दादूदयाल के शिष्यों में से एक थे। दादूजी के अन्य प्रमुख शिष्य थे – गरीबदास, मिस्किनदास, सुंदरदास, बखनाजी, रज्जब, माधोदास और संतदास। इन्हें मिलाकर कुल 52 शिष्य प्रसिद्ध हुए, जिन्हें ‘52 स्तंभ’ कहा जाता है। इन शिष्यों ने दादूपंथ को जन-जन तक पहुँचाया।

40. संत पीपा का मुख्य मंदिर कहाँ स्थित है?

A औसियां (जोधपुर)
B टोडारायसिंह (टोंक)
C समदड़ी (बालोतरा)
D धुवन गाँव (टोंक)
📖 व्याख्या
संत पीपा का मुख्य मंदिर समदड़ी (बालोतरा) में स्थित है। वे भक्ति आंदोलन के निर्गुण संत थे और भक्ति धारा में महत्वपूर्ण योगदान दिया। संत पीपा का जन्म राजस्थान में हुआ और उन्होंने भक्ति साहित्य की रचना की। उनके भजन गुरु ग्रंथ साहिब में भी संकलित हैं। संत पीपा को निर्गुण साधना और सामाजिक सुधार के लिए याद किया जाता है।
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41. कीर्तनमाला' किस संत की रचना है?

A मीरां
B गुलाबो
C गवरी बाई
D सहजो बाई
📖 व्याख्या
गवरी बाई की रचनाओं में ‘कीर्तनमाला’ प्रमुख मानी जाती है। उन्हें बागड़ की मीरा और वागड़ की मीरा भी कहा जाता है। गवरी बाई ने अपनी रचनाओं में कृष्ण की भक्ति को सरल और मधुर शब्दों में प्रस्तुत किया। उनकी भक्ति ने समाज में प्रेम, त्याग और आध्यात्मिक चेतना का संदेश दिया।

42. संत रैदास की छतरी स्थित है?

A गागरोन
B चित्तौड़
C समदड़ी
D डूंगरपुर
📖 व्याख्या
संत रैदास की छतरी चित्तौड़गढ़ में स्थित है। वे निर्गुण भक्ति धारा के महान संत थे और सामाजिक समानता, प्रेम तथा भाईचारे के संदेशवाहक थे। मीरा बाई भी उनके शिष्यत्व में रहीं और उन्होंने रैदास को अपना गुरु माना। उनकी शिक्षाएँ आज भी समाज को प्रेरित करती हैं।

43. मीरां के पिता का नाम था?

A भोजराज
B आससिंह
C केसरसिंह
D रतनसिंह
📖 व्याख्या
मीराबाई के पिता का नाम रतनसिंह राठौड़ था। मीराबाई का जन्म मेड़ता (नागौर) में हुआ और वे कृष्ण भक्ति की महान उपासक थीं। उन्होंने भक्ति आंदोलन को एक नई दिशा दी और अपनी रचनाओं के माध्यम से समाज में प्रेम और आध्यात्मिकता का संदेश फैलाया।

44. राजाराम संप्रदाय की प्रमुख पीठ कहाँ स्थित है?

A शिकारपुरा
B सलेमाबाद
C नरैना
D दांतड़ा
📖 व्याख्या
राजाराम संप्रदाय की प्रमुख पीठ शिकारपुरा में स्थित है। यह संप्रदाय भक्ति परंपरा से जुड़ा हुआ है और समाज सुधार में भी इसकी भूमिका रही। राजाराम संप्रदाय ने साधना और सेवा को महत्व दिया और अपने अनुयायियों को सरल जीवन और उच्च विचार अपनाने की प्रेरणा दी।
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45. राजस्थान की कौनसी महिला संत दूसरी मीराबाई कहलाती है?

A भूरी बाई
B राना बाई
C फूली बाई
D करमा बाई
📖 व्याख्या
राना बाई को दूसरी मीराबाई कहा जाता है। वे कृष्ण भक्ति में लीन होकर जीवन व्यतीत करती थीं। उनका जीवनकाल लगभग 1504 ई. से 1570 ई. तक रहा। उन्होंने हरनावा गाँव (डीडवाना-कुचामन) में 1570 ई. में जीवित समाधि ली। उनकी भक्ति और त्याग ने उन्हें राजस्थान की प्रमुख संत परंपरा में विशेष स्थान दिया।

46. संत रैदास का पैनोरमा किस जिले में निर्माणाधीन है?

A कोटा
B चित्तौड़गढ़
C डूंगरपुर
D उदयपुर
📖 व्याख्या
संत रैदास का पैनोरमा चित्तौड़गढ़ जिले में निर्माणाधीन है। यह स्मारक उनकी भक्ति परंपरा और शिक्षाओं को जीवित रखने के उद्देश्य से बनाया जा रहा है। संत रैदास ने समाज को समानता, प्रेम और भाईचारे का संदेश दिया और उनका योगदान आज भी याद किया जाता है।

47. प्रसिद्ध महिला संत करमेती बाई का स्मारक कहाँ पर बनाया जा रहा है?

A महुवा (दौसा)
B खंडेला (सीकर)
C साबला (डूंगरपुर)
D मेड़ता (नागौर)
📖 व्याख्या
प्रसिद्ध महिला संत करमेती बाई का स्मारक खंडेला (सीकर) में बनाया जा रहा है। करमेती बाई ने समाज में भक्ति, प्रेम और समानता का संदेश दिया। उनकी स्मृति में बनाया जा रहा यह स्मारक आने वाली पीढ़ियों को भक्ति और मानवीय मूल्यों से जुड़ने की प्रेरणा देगा।

48. प्रसिद्ध कृष्ण भक्त करमा बाई जाट का सम्बन्ध डीडवाना-कुचामन के किस गाँव से है?

A हरनावा
B कालवा
C परबतसर
D कुड़छी
📖 व्याख्या
प्रसिद्ध कृष्ण भक्त करमा बाई जाट का सम्बन्ध डीडवाना-कुचामन के कालवा गाँव से है। करमा बाई अपने कृष्ण भक्ति गीतों और भजनों के लिए जानी जाती हैं। वे समाज में सरल भक्ति और प्रेम का संदेश देती थीं। उनकी भक्ति की परंपरा राजस्थान में आज भी लोकप्रिय है।
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49. सलेमाबाद में निम्बार्काचार्य पीठ की स्थापना किसने की?

A आचार्य परशुराम
B स्वामी अग्रदास
C कृष्णदास पयहारी
D गोस्वामी दामोदर
📖 व्याख्या
सलेमाबाद पीठ (अजमेर) की स्थापना आचार्य परशुराम ने की थी। यह पीठ रूपनगढ़ नदी के किनारे स्थित है। यहाँ राधा-कृष्ण की युगल सेवा की जाती है। यह निम्बार्क संप्रदाय का प्रमुख केंद्र है और भक्ति आंदोलन में इसका विशेष महत्व है।

50. निम्नलिखित संतों में से कौन जन्म से मुसलमान था?

A हरिदास
B लालगिरी
C चरणदास
D लालदास
📖 व्याख्या
लालदास जन्म से मुसलमान थे, परंतु बाद में उन्होंने संत परंपरा को अपनाया और लालदासी संप्रदाय की स्थापना की। उन्होंने भक्ति आंदोलन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और समाज में भक्ति, समानता तथा भाईचारे का संदेश फैलाया।
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Mukesh Choudhary

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Mukesh Choudhary

Mukesh Choudhary को राजस्थान में आयोजित होने वाली विभिन्न प्रतियोगी एवं भर्ती परीक्षाओं के परीक्षा पैटर्न और प्रश्नों के स्वरूप की अच्छी समझ है। उनके मार्गदर्शन में यह अध्ययन सामग्री और MCQ content तैयार एवं review किया गया है। Read More...

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