राजस्थान के संत-संप्रदाय MCQ Questions with Answers

राजस्थान के संत-संप्रदाय MCQ | Most Expected Questions for All Exams

इस पोस्ट में राजस्थान की कला एवं संस्कृति के टॉपिक राजस्थान के संत-संप्रदाय से संबंधित Latest व पूर्णतः updated महत्वपूर्ण MCQ प्रश्न दिए गए हैं। इनमें संत मावजी, संत पीपा, संत रैदास, संत धन्ना, दादू आदि से सम्बंधित महत्वपूर्ण जानकारियों को व्याख्या सहित शामिल किया गया है।

ये MCQ प्रश्न RPSC, RSMSSB, RSSB, RAS, Patwar, Police, LDC, VDO, Fireman, Woman Superwiser, REET तथा राजस्थान राज्य की अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए अत्यंत उपयोगी हैं।

  • Subject: राजस्थान की कला एवं संस्कृति
  • Topic: राजस्थान के संत-संप्रदाय
  • Last Updated:
  • Content Type: MCQ Practice Set
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1. कौनसे संत 'वागड़ के धणी' कहलाते हैं?

  • (A) संत पीपा
  • (B) संत धन्ना
  • (C) मावजी
  • (D) संत दुर्लभ जी

संत मावजी को वागड़ के धणी कहा जाता है। उन्होंने निष्कलंक सम्प्रदाय की स्थापना की और बेणेश्वर धाम को प्रमुख धार्मिक स्थल बनाया। वागड़ क्षेत्र (डूंगरपुर-बांसवाड़ा) में उनके अनुयायी बड़ी संख्या में पाए जाते हैं। ध्यान रहे, नरहड़ के पीर को बांगड़ का धणी कहा जाता है।

2. मीरां बाई की क्रीड़ा स्थली के नाम से प्रसिद्ध स्थान है?

  • (A) कुड़की (ब्यावर)
  • (B) पुष्कर (अजमेर)
  • (C) मेड़ता (नागौर)
  • (D) नाथद्वारा (राजसमंद)

मीरांबाई की माता की मृत्यु के बाद उनके दादा राव दूदा उन्हें मेड़ता ले आए। यहाँ उनका लालन-पालन हुआ और कृष्ण भक्ति की शुरुआत भी यहीं से मानी जाती है। इसी कारण मेड़ता को मीरां की क्रीड़ा स्थली कहा जाता है।

3. राजस्थान के प्रसिद्ध संत जिनका निर्वाण नरायणा/नरैना (दूदू) में हुआ था-

  • (A) संत पीपा
  • (B) संत रैदास
  • (C) संत धन्ना
  • (D) दादू

संत दादू दयाल का निर्वाण जयपुर जिले के नरायणा (दूदू) के निकट भैराणा पहाड़ी पर हुआ था। कहा जाता है कि दादूजी ने अपने शरीर को वहीं खुले में छोड़ दिया। उनका पंथ दादूपंथ कहलाता है और इसकी प्रमुख पीठ आज भी नरायणा में है।

4. विश्नोई सम्प्रदाय में जाम्भोजी द्वारा अभिमंत्रित जल पिलाकर विश्नोई पंथ में दीक्षित करते थे, कहलाता है?

  • (A) अलख
  • (B) साथरी
  • (C) पाहल
  • (D) सब्वंगी

विश्नोई संप्रदाय में जब किसी व्यक्ति को दीक्षित किया जाता था तो जाम्भोजी द्वारा अभिमंत्रित जल पिलाया जाता था, जिसे पाहलकहा जाता था। यह दीक्षा संस्कार बिश्नोई समाज की परंपरा में आज भी मान्य है।

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5. गुदड़ सम्प्रदाय की प्रमुख पीठ कहाँ स्थित है?

  • (A) सलेमाबाद (अजमेर)
  • (B) दांतड़ा (भीलवाड़ा)
  • (C) महामंदिर (जोधपुर)
  • (D) शिकारपुरा (जोधपुर)

गुदड़ संप्रदाय की प्रमुख पीठ दांतड़ा (भीलवाड़ा) में स्थित है। इसके प्रवर्तक संतदास जी माने जाते हैं। यह संप्रदाय समाज में भक्ति, प्रेम और नैतिक मूल्यों के प्रसार के लिए प्रसिद्ध है।

6. संत रज्जब जी का जन्म स्थान है?

  • (A) सांगानेर
  • (B) दौसा
  • (C) नरायणा
  • (D) सांभर

संत रज्जब जी का जन्म सांगानेर (जयपुर) में हुआ था। वे संत दादू दयाल के शिष्य थे और उनकी रचनाओं का संग्रह रज्जब वाणी नाम से प्रसिद्ध है। उनकी वाणी ने निर्गुण भक्ति आंदोलन को नई दिशा दी।

7. संत दरियावजी का संबंध किस सम्प्रदाय से है?

  • (A) चरणदास सम्प्रदाय
  • (B) जसनाथी सम्प्रदाय
  • (C) लालदास सम्प्रदाय
  • (D) रामस्नेही सम्प्रदाय

संत दरियाव जी का संबंध रामस्नेही संप्रदाय से था। वे इस संप्रदाय की रैण शाखा के प्रवर्तक माने जाते हैं। उनका जन्म जैतारण (ब्यावर) में हुआ और उन्होंने समाज को सादगी, भक्ति और समानता का संदेश दिया।

8. वैष्णव धर्म के सम्प्रदायों में से राजस्थान में सबसे कम लोकप्रिय कौनसा सम्प्रदाय है?

  • (A) वल्लभ सम्प्रदाय
  • (B) राधावल्लभ सम्प्रदाय
  • (C) निम्बार्क सम्प्रदाय
  • (D) रामानुज सम्प्रदाय

राधा वल्लभ सम्प्रदाय की स्थापना गोस्वामी हित हरिवंश ने की थी। यह सम्प्रदाय राधा-कृष्ण की माधुर्य भक्ति पर आधारित है, परन्तु इसका प्रभाव राजस्थान में लगभग नहीं के बराबर रहा। राजस्थान में वैष्णव सम्प्रदायों में वल्लभ, निम्बार्क और रामानुज सम्प्रदाय अधिक प्रचलित रहे, जबकि राधावल्लभ सम्प्रदाय मुख्यतः उत्तर भारत के कुछ अन्य क्षेत्रों में सीमित रहा।

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9. राजस्थान में 'शैव मत' को मानने वाला राजघराना है?

  • (A) मेवाड़
  • (B) बीकानेर
  • (C) मारवाड़
  • (D) जयपुर

राजस्थान का मेवाड़ राजघराना प्राचीन समय से ही शैव मत का अनुयायी रहा है। इसका प्रमुख प्रतीक एकलिंगजी मंदिर (उदयपुर) है, जिसे मेवाड़ के शासक अपने आराध्य देव मानते हैं। आज भी मेवाड़ के शासक स्वयं को एकलिंगजी का दीवान कहते हैं। इससे स्पष्ट होता है कि मेवाड़ शैव परंपरा का प्रमुख केन्द्र रहा है।

10. राजस्थान में लकुलीश सम्प्रदाय का प्रमुख मंदिर है?

  • (A) रणकपुर मंदिर (पाली)
  • (B) एकलिंग मंदिर (उदयपुर)
  • (C) गोविन्द देव मंदिर (जयपुर)
  • (D) श्रीनाथ मंदिर (राजसमंद)

राजस्थान में लकुलीश सम्प्रदाय का प्रमुख मंदिर एकलिंगजी (उदयपुर) है। लकुलीश, शैव मत के महत्वपूर्ण आचार्य थे जिन्होंने पाशुपत सम्प्रदाय का विस्तार किया। मेवाड़ के राजाओं ने इस मंदिर को अपनी आस्था का केंद्र बनाया। आज भी एकलिंगजी मंदिर मेवाड़ राज्य की धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान है।

11. निम्नलिखित में से कौनसा सम्प्रदाय निर्गुण भक्ति सम्प्रदाय नहीं है?

  • (A) निरंजनी
  • (B) जसनाथी
  • (C) दादूपंथी
  • (D) रामानन्दी

रामानन्दी सम्प्रदाय सगुण भक्ति पर आधारित है और इसमें राम व विष्णु की मूर्तिपूजा प्रमुख है। इसके विपरीत निरंजनी, जसनाथी और दादूपंथ निर्गुण भक्ति सम्प्रदाय माने जाते हैं, जिनमें ईश्वर को निराकार और निर्गुण रूप में पूजा जाता है। इसलिए रामानन्दी सम्प्रदाय को निर्गुण भक्ति की श्रेणी में नहीं रखा जाता।

12. रामस्नेही सम्प्रदाय का प्रमुख मेला कब भरता है?

  • (A) चैत्र कृष्ण एकम से चैत्र कृष्ण पंचमी
  • (B) बसन्त पंचमी
  • (C) फाल्गुन शुक्ल अष्टमी
  • (D) भाद्रपद शुक्ल अष्टमी

रामस्नेही सम्प्रदाय का प्रमुख मेला चैत्र कृष्ण एकम से चैत्र कृष्ण पंचमी तक भरता है। यह मेला शाहपुरा (भीलवाड़ा) स्थित रामद्वारा में आयोजित होता है। इसमें देशभर से संप्रदाय के अनुयायी बड़ी संख्या में आते हैं। यह मेला रामभक्ति, भजन-कीर्तन और संत परंपरा की शिक्षाओं के लिए प्रसिद्ध है।

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13. गुरु जांभोजी का जन्म स्थल है?

  • (A) समराथल (बीकानेर)
  • (B) मुकाम (बीकानेर)
  • (C) पीपासर (नागौर)
  • (D) कतरियासर (बीकानेर)

गुरु जांभोजी का जन्म 1451 ई. में पीपासर (नागौर) में हुआ था। उनके पिता लोहटजी पंवार और माता हंसा देवी थीं। जांभोजी ने 1485 ई. में समराथल (बीकानेर) में विश्नोई सम्प्रदाय की स्थापना की। उनके 29 नियम पर्यावरण और सामाजिक सुधार से जुड़े हैं, जिनका पालन आज भी विश्नोई समाज करता है।

14. नाथ सम्प्रदाय के प्रवर्तक हैं?

  • (A) गोरखनाथ
  • (B) मत्स्येन्द्रनाथ
  • (C) जालंधरनाथ
  • (D) भृतहरिनाथ

नाथ सम्प्रदाय के प्रवर्तक मत्स्येन्द्रनाथ माने जाते हैं। यह शैव मत का ही एक रूप है जिसे योग सम्प्रदाय या सिद्धमार्ग सम्प्रदाय भी कहा जाता है। मत्स्येन्द्रनाथ के प्रमुख शिष्य गोरखनाथ थे, जिन्होंने इस सम्प्रदाय को राजस्थान और उत्तर भारत में व्यापक रूप से फैलाया।

15. राजस्थान में नाथ की प्रमुख 2 शाखाएँ हैं, उनके नाम हैं?

  • (A) बैराग पंथ व माननाथी
  • (B) रसिक पंथ व गोरखनाथी
  • (C) ब्रह्म पंथ व माधोनाथी
  • (D) सखि पंथ व हरिनाथी

राजस्थान में नाथ सम्प्रदाय की प्रमुख दो शाखाएँ हैं – बैराग पंथ और माननाथी। नाथ सम्प्रदाय योग और तपस्या पर बल देता है। इस सम्प्रदाय ने राजस्थान में विशेषकर जोधपुर, अलवर और उदयपुर क्षेत्रों में काफी प्रभाव डाला।

16. राजस्थान में नाथ सम्प्रदाय को सर्वाधिक बढ़ावा देने वाले शासक थे?

  • (A) सवाई जयसिंह (जयपुर)
  • (B) महाराणा राजसिंह (उदयपुर)
  • (C) महाराणा कुम्भा (मेवाड़)
  • (D) महाराजा मानसिंह (जोधपुर)

राजस्थान में नाथ सम्प्रदाय को सर्वाधिक बढ़ावा जोधपुर के महाराजा मानसिंह ने दिया। उन्होंने जोधपुर में महामंदिर का निर्माण कराया, जो आज भी नाथ सम्प्रदाय की प्रमुख पीठ है। इस कारण जोधपुर क्षेत्र नाथ सम्प्रदाय का महत्वपूर्ण केन्द्र माना जाता है।

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17. राजस्थान के वे संत कौन है जो राजस्थान छोड़कर बनारस गये और रामानंद के शिष्य बन गये?

  • (A) संत दरियाव जी
  • (B) संत धन्ना जी
  • (C) संत पीपा जी
  • (D) संत भाव जी

संत धन्ना जी राजस्थान से बनारस गए और वहाँ जाकर रामानंद के शिष्य बने। धन्नाजी मूलतः टोंक जिले के धुवन गाँव के निवासी थे और जाट समुदाय से आते थे। उनकी रचनाएँ गुरु ग्रंथ साहिब में भी शामिल हैं। धन्ना जी ने भक्ति और ईश्वर की सादगीपूर्ण उपासना पर बल दिया।

18. जाम्भोजी के अनुयायी किस नाम से जाने जाते है?

  • (A) बिश्नोई
  • (B) मुकामपंथी
  • (C) गुरुपंथी
  • (D) जाम्भापंनी

गुरु जाम्भोजी द्वारा स्थापित सम्प्रदाय के अनुयायी विश्नोई कहलाते हैं। इस सम्प्रदाय की स्थापना 1485 ई. में समराथल (बीकानेर) में हुई थी। जाम्भोजी ने समाज को 29 नियम दिए जिनमें पर्यावरण संरक्षण, पशु-पक्षियों की रक्षा और सादा जीवन मुख्य हैं। विश्नोई समाज आज भी इन नियमों का पालन करता है।

19. राजस्थान में रामस्नेही सम्प्रदाय की प्रधान पीठ कहाँ है?

  • (A) डीडवाना-कुचामन
  • (B) ब्यावर
  • (C) पुष्कर (अजमेर)
  • (D) शाहपुरा (भीलवाड़ा)

रामस्नेही सम्प्रदाय की प्रमुख पीठ शाहपुरा (भीलवाड़ा) में स्थित है। इसकी स्थापना संत रामचरणजी ने की थी। शाहपुरा में रामद्वारा इस सम्प्रदाय का प्रमुख धार्मिक स्थल है जहाँ प्रतिवर्ष चैत्र मास में विशाल मेला भरता है। इस सम्प्रदाय में मूर्तिपूजा का विरोध किया गया और केवल राम नाम जपने पर जोर दिया गया।

20. दादू पंथ की मुख्य गद्दी कहाँ स्थित है?

  • (A) अहमदाबाद
  • (B) शाहपुरा (जयपुर)
  • (C) गागरोन (झालावाड़)
  • (D) नरायणा (जयपुर)

दादू पंथ की मुख्य गद्दी नरायणा (जयपुर) में स्थित है। दादू दयाल ने 1574 ई. में इस पंथ की स्थापना की थी। उनका निर्वाण भी यहीं भैराणा पहाड़ी पर हुआ। नरायणा दादूपंथ का प्रमुख केंद्र है और यहाँ आज भी संतों और अनुयायियों का बड़ा समुदाय मौजूद है।

21. मिस्किनदासजी, माधोदासजी, संतदास व जनगोपाल आदि सन्तों का सम्बन्ध किस सम्प्रदाय से माना जाता है-

  • (A) दादूपंथ
  • (B) लालदासी
  • (C) चरणदासी
  • (D) निरंजनी

मिस्किनदास, माधोदास, संतदास और जनगोपाल जैसे संत दादूपंथ से जुड़े थे। दादूदयाल के 52 शिष्यों को 52 स्तंभ कहा जाता है। इन शिष्यों ने राजस्थान में निर्गुण भक्ति का प्रचार-प्रसार किया। इनकी वाणी और विचार आज भी भक्ति साहित्य का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं।

22. पुष्टिमार्ग' सम्प्रदाय के प्रवर्तक कौन है?

  • (A) निम्बार्काचार्य
  • (B) वल्लभाचार्य
  • (C) माध्वाचार्य
  • (D) रामानुजाचार्य

पुष्टिमार्ग सम्प्रदाय के प्रवर्तक वल्लभाचार्य थे। यह सम्प्रदाय वैष्णव धर्म की शाखा है और इसमें भगवान श्रीकृष्ण की बाल स्वरूप में पूजा की जाती है। इस सम्प्रदाय का प्रमुख केंद्र नाथद्वारा (राजसमंद) है, जहाँ श्रीनाथजी की पूजा की जाती है। पुष्टिमार्ग में भक्ति को ईश्वर की कृपा का परिणाम माना गया है।

23. निम्बार्क सम्प्रदाय की प्रधान पीठ कहाँ है?

  • (A) सलेमाबाद
  • (B) अहमदाबाद
  • (C) वृंदावन
  • (D) गलता जी

निम्बार्क सम्प्रदाय की प्रधान पीठ वृंदावन में है। इसके प्रवर्तक आचार्य निम्बार्काचार्य थे जिन्होंने राधा-कृष्ण की युगल भक्ति को सर्वोच्च स्थान दिया। हालांकि राजस्थान में इसकी प्रमुख पीठ सलेमाबाद (अजमेर) मानी जाती है। इस प्रकार वृंदावन इसकी मूल पीठ है और सलेमाबाद क्षेत्रीय पीठ है।

24. कुंडा पंथ के प्रणेता कौन थे?

  • (A) राव अजीतसिंह
  • (B) राव मल्लीनाथ
  • (C) गोगाजी
  • (D) पाबूजी

कुंडा पंथ की शुरुआत राजस्थान से हुई थी और इसके प्रणेता राव मल्लीनाथ माने जाते हैं। यह एक तांत्रिक पंथ था जिसमें शरीर को ही मोक्ष प्राप्ति का साधन माना गया। इसका उद्देश्य कामभाव को नियंत्रित करके मोक्ष की प्राप्ति करना था। इसकी स्थापना लगभग 1399 ई. में हुई। इस पंथ से धारू मेघवाल, उगम सिंह भाटी, रानी रूपा देवी और नामदेव छोपा जैसे नाम जुड़े हुए हैं।

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25. धन्ना भगत के गुरु कौन थे?

  • (A) कबीर
  • (B) नानक
  • (C) रामानंद
  • (D) नामदेव

धन्ना भगत का जन्म टोंक जिले के धुवन गांव में हुआ था। बाद में वे राजस्थान से बनारस चले गए और रामानंद के शिष्य बन गए। उनकी वाणी इतनी प्रभावशाली थी कि गुरुग्रंथ साहिब में इनके तीन शब्द सम्मिलित हैं। धन्ना भगत समाज सुधार और भक्ति आंदोलन की प्रमुख कड़ी थे।

26. राजस्थान की दूसरी मीरा संत रानाबाई का जन्म कहाँ हुआ था?

  • (A) कुडकी
  • (B) कापडोद
  • (C) साबला
  • (D) हरनावा

रानाबाई को राजस्थान की दूसरी मीरा कहा जाता है। इनका जन्म नागौर जिले के हरनावा गांव में हुआ था। वे सगुण परंपरा की कृष्णभक्तरही और भक्ति भाव में लीन होकर जीवन व्यतीत किया। उन्होंने 1570 ई. में हरनावा में जीवित समाधि ली।

27. राजस्थान में 'तेरह पंथ' के प्रवर्तक रहे हैं—

  • (A) धरणीवराह जी
  • (B) श्रमणनाथ जी
  • (C) जिनसेन जी
  • (D) भीखण जी

तेरह पंथ के प्रवर्तक आचार्य भिक्षु (भीखण जी) थे। इनका जन्म कंटालिया (मारवाड़) 1726 ई. में हुआ। 1760 ई. में उन्होंने इस पंथ की स्थापना की। वे श्वेतांबर स्थानकवासी संप्रदाय में दीक्षित हुए और बाद में 13 साधुओं के साथ नया पंथ बनाया। उनकी समाधि सिरयारी (पाली) में है।

28. रज्जब वाणी' पुस्तक किस पंथ/संप्रदाय से संबंधित है?

  • (A) दादू
  • (B) विश्नोई
  • (C) रास्नेही
  • (D) निम्बार्क

रज्जब वाणी' दादूपंथ से संबंधित एक महत्वपूर्ण ग्रंथ है। इसके रचयिता रज्जब जी, जो दादूदयाल के शिष्य थे। इस ग्रंथ में भक्ति, संत वाणी और आध्यात्मिक संदेश संकलित हैं। इसकी व्याख्या स्वामी नारायणदास जी महाराज ने की थी।

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29. हरनावा गांव किस संत से जुड़ा महत्वपूर्ण स्थल है?

  • (A) मीरा
  • (B) रानाबाई
  • (C) लालगिरि
  • (D) लालागिरी

हरनावा गांव संत रानाबाई से जुड़ा हुआ है, जिन्हें राजस्थान की दूसरी मीरा कहा जाता है। वे संत चतुरदास खोजी जी की शिष्या थीं। हरनावा ही उनका जन्मस्थान और समाधि स्थल है, जिसने इसे धार्मिक और ऐतिहासिक दृष्टि से महत्वपूर्ण बना दिया है।

30. चोपड़ा नामक ग्रंथ की रचना किसने की?

  • (A) मावजी
  • (B) दरियाव जी
  • (C) रामचरण जी
  • (D) रामदास जी

मावजी को राजस्थान में निष्कलंकी संप्रदाय का प्रवर्तक माना जाता है। उन्होंने कई ग्रंथों की रचना की, जिनमें से एक प्रमुख ग्रंथ चोपड़ा है। यह ग्रंथ वाद-विवाद की शैली में लिखा गया है। इसमें लगभग 96 हजार छंद बताए जाते हैं, जिन्हें दीपावली पर बाहर निकाला जाता है।

31. वायु की गुणवत्ता सूचकांक को बताने वाला मोबाइल एप्लीकेशन है—

  • (A) राजवायु
  • (B) प्राणवायु
  • (C) मारूति
  • (D) राजपवन

राजवायु' एप राजस्थान सरकार द्वारा 5 जून 2016 को लॉन्च किया गया। इसका उद्देश्य जयपुर, जोधपुर और उदयपुर जैसे शहरों में वायु गुणवत्ता सूचकांक की जानकारी जनता तक पहुंचाना है। यह एप प्रदूषण स्तर और चेतावनी देने का काम करता है।

32. निम्नलिखित में से कौन दादू दयाल जी का शिष्य नहीं है?

  • (A) सुंदरदास जी
  • (B) गरीबदास जी
  • (C) रज्जब जी
  • (D) लालदास जी

दादूदयाल के 52 प्रमुख शिष्यों को 52 स्तंभ कहा जाता है। इनमें सुंदरदास, गरीबदास, मिस्किनदास और रज्जब प्रमुख हैं। लेकिन लालदास जी उनके शिष्यों में शामिल नहीं थे।

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33. मलूकनाथ किस पंथ के साधु थे?

  • (A) गरीबदासी पंथ
  • (B) चरणदासी पंथ
  • (C) रामानंद पंथ
  • (D) रामस्नेही पंथ

मलूकनाथ गरीबदासी पंथ के प्रमुख साधु थे। उन्होंने अलखबानी, ज्ञानबोध, पुरुषविलास और सुखसागर जैसे ग्रंथ लिखे। उनके गुरु कबीरथे और उनके शिष्य गरीबदास ने इस पंथ को आगे बढ़ाया। गरीबदास ने रत्नसागर और अमृतवाणी जैसे ग्रंथों की रचना की।

34. रसिक संप्रदाय का प्रवर्तक कौन था?

  • (A) अचलदास
  • (B) अग्रदास
  • (C) ईसरदास
  • (D) गिरधरदास

रसिक संप्रदाय का प्रवर्तक अग्रदास था, जो कृष्णदास पयहारी के शिष्य थे। इस संप्रदाय का प्रमुख पीठ रैवासा (सीकर) रहा। इसमें सीता-राम की श्रृंगारिक रूप से माधुर्य भाव की भक्ति की जाती थी। इस संप्रदाय में भक्त भगवान को प्रियतम और स्वयं को प्रिय माना करते थे। अग्रदास के शिष्य नाभादास ने भक्तिकाल का प्रसिद्ध ग्रंथ भक्तमाल लिखा, जिसमें अनेक संतों का वर्णन मिलता है। इस प्रकार रसिक संप्रदाय ने भक्ति आंदोलन में विशेष स्थान बनाया।

35. संत हरिदास.... संप्रदाय के संस्थापक थे।

  • (A) रामस्नेही
  • (B) निरंजनी
  • (C) अलखिया
  • (D) निम्बार्क

संत हरिदास जी, जिन्हें हरिसिंह सांखला भी कहा जाता है, निरंजनी संप्रदाय के प्रवर्तक थे। इन्हें राजस्थान का वाल्मीकि या कलियुग का वाल्मीकि भी कहा जाता है। हरिदास जी ने समाज में फैली कुरीतियों को दूर करने और आध्यात्मिक जागरण के लिए इस संप्रदाय की स्थापना की। इनके अनुयायी दो प्रकार के माने जाते हैं—निहंग साधु और घरबारी साधु। इस संप्रदाय ने सादगी, साधना और सेवा पर जोर दिया।

36. निम्न में से कौन सा संप्रदाय संत मावजी के द्वारा स्थापित किया गया?

  • (A) रामस्नेही संप्रदाय
  • (B) निष्कलंकी संप्रदाय
  • (C) रामानुज संप्रदाय
  • (D) निरंजनी संप्रदाय

संत मावजी को निष्कलंकी संप्रदाय का संस्थापक माना जाता है। इनका जन्म 1714 ई. में हुआ और पिता का नाम दालरूमसी तथा माता का नाम केशरबाई था। इन्हें भक्तजन कल्कि अवतार मानते हैं। संत मावजी ने सावंत 1784 माघ शुक्ल में बेणेश्वर धाम की स्थापना की, जो डूंगरपुर और बाँसवाड़ा जिलों की संगमस्थली पर स्थित है। इस संप्रदाय से जुड़े प्रमुख स्थान साबला, पूजपुर, दालावाला, शेषपुर और पालोदा रहे। इनके अनुयायी मावजी को 10वें अवतार के रूप में पूजते हैं।

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37. वाद-विवाद शैली में लिखे गए ग्रंथ 'चौपड़ा' संबंधित है—

  • (A) लालदासी संप्रदाय से
  • (B) रामस्नेही संप्रदाय से
  • (C) निष्कलंकी संप्रदाय से
  • (D) निम्बार्क संप्रदाय से

चौपड़ा ग्रंथ संत मावजी की रचनाओं में प्रमुख है और यह निष्कलंकी संप्रदाय से संबंधित है। यह ग्रंथ वाद-विवाद की शैली में लिखा गया है और इसमें विभिन्न विषयों पर प्रश्नोत्तर शैली में विचार प्रस्तुत किए गए हैं। इसमें लगभग 72 से 96 हजार छंद बताए जाते हैं। इस ग्रंथ को विशेष अवसर पर, खासकर दीपावली के दिन, बाहर निकाला जाता है। यह ग्रंथ धार्मिक, दार्शनिक और सांस्कृतिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है।

38. निम्नलिखित में से कौन-सा युग्म सही सुमेलित नहीं है?

  • (A) संत रामचरण जी – शाहपुरा
  • (B) संत हरिरामदास जी – सिंहथल
  • (C) संत दरियाव जी – रेवासा
  • (D) संत रामदास जी – खेड़ापा

इस प्रश्न में संत दरियाव जी को गलत रूप से रेवासा से जोड़ा गया है, जबकि सही स्थान रेण (नागौर) है। संत दरियाव जी के गुरु प्रेमनाथ (बालकनाथ जी) थे। उन्होंने समाज में हिंदू-मुस्लिम एकता का संदेश दिया और उनके अनुयायियों ने इस विचारधारा को आगे बढ़ाया। अन्य विकल्प सही हैं, जैसे संत रामचरण शाहपुरा, हरिरामदास सिंहथल और रामदास खेड़ापा से जुड़े हुए हैं।

39. राजस्थान के कौनसे समुदाय के लिए वन एवं वन्यप्राणी संरक्षण उनके धार्मिक अनुष्ठान का भाग बन गया है?

  • (A) गुर्जर
  • (B) सहरिया
  • (C) विश्नोई
  • (D) मीणा

राजस्थान का विश्नोई समुदाय पर्यावरण संरक्षण के लिए जाना जाता है। इनके प्रवर्तक गुरु जाम्भोजी ने 1485 ई. में 29 नियम दिए, जिनमें हरे वृक्षों की रक्षा और पशुओं की सुरक्षा का विशेष महत्व है। विश्नोई समाज में वृक्षों और जीवों को काटना या मारना पाप माना जाता है। इसी कारण इन्हें विश्व का पहला पर्यावरणवादी समाज भी कहा जाता है। गुरु जाम्भोजी को पर्यावरण संत और प्रथम पर्यावरण आंदोलन का जनक भी कहा जाता है।

40. मुकाम प्रसिद्ध है—

  • (A) जैनियों के लिए
  • (B) बिश्नोईयों के लिए
  • (C) सिक्खों के लिए
  • (D) जसनाथियों के लिए

मुकाम (बीकानेर) विश्नोई समाज का प्रमुख तीर्थ स्थल है। यहाँ गुरु जाम्भोजी की समाधि स्थित है। विश्नोई संप्रदाय की स्थापना 1485 ई. में बीकानेर के समराथल धोरा पर हुई थी। गुरु जाम्भोजी ने 120 शब्द वाणियां, जम्भ सहिता और जम्भसागर की रचना की। मुकाम में प्रतिवर्ष मेलों का आयोजन होता है और इसे विश्नोई समाज का सबसे पवित्र स्थान माना जाता है।

41. बिश्नोई संप्रदाय के प्रवर्तक गुरु जाम्भेश्वर से संबंधित मुख्य स्थान है—

  • (A) मुकाम
  • (B) गुदा बिश्नोईयान
  • (C) नौखा
  • (D) लूनी

गुरु जाम्भोजी ने 1485 ई. में बीकानेर के समराथल धोरा पर विश्नोई संप्रदाय की स्थापना की। इनका जन्म 1451 ई. में पीपासर (नागौर) में हुआ था। जाम्भोजी ने 29 नियम दिए जिनमें वृक्ष और वन्य जीवों की रक्षा प्रमुख थी। उनकी समाधि मुकाम (बीकानेर) में है, जिसे इस संप्रदाय का सबसे पवित्र तीर्थ माना जाता है। यहाँ हर वर्ष लाखों अनुयायी दर्शन करने आते हैं।

42. हरे वृक्षों की रक्षा के लिए किस संप्रदाय को जाना जाता है?

  • (A) विश्नोई
  • (B) रामस्नेही
  • (C) निरंजनी
  • (D) लालदासी

विश्नोई संप्रदाय वृक्षों और वन्य जीवों की रक्षा के लिए प्रसिद्ध है। इसकी स्थापना गुरु जाम्भोजी ने 1485 ई. में बीकानेर के समराथल धोरापर की थी। उन्होंने स्पष्ट उपदेश दिया कि हरे वृक्ष मत काटो और पशु-पक्षियों को मत मारो। इस संप्रदाय के लोग पर्यावरण की रक्षा को धार्मिक अनुष्ठान का हिस्सा मानते हैं। विश्नोई समाज के लोग वृक्षों और जानवरों के लिए अपने प्राण तक न्योछावर कर देते हैं।

43. विश्नोई संप्रदाय का संस्थापक कौन था?

  • (A) धन्नाजी
  • (B) चरणदास
  • (C) दादूजी
  • (D) जाम्भोजी

गुरु जाम्भोजी ने 1485 ई. में बीकानेर जिले के समराथल धोरा पर विश्नोई संप्रदाय की स्थापना की। इस संप्रदाय की प्रमुख पीठें मुकाम, तालवा (नोखा), जाम्भा (फलौदी) और रामड़ावास (पीपाड़) रही। जाम्भोजी द्वारा रचित प्रमुख ग्रंथ हैं—जम्भवाणी (गुरु वाणी/वेद वाणी/शब्द वाणी), जम्भसागर, जम्भ सहिता और जम्भगीता। उन्होंने 29 नियम बताए, जिनमें सत्य, पर्यावरण, पशु-पक्षियों और वृक्षों की रक्षा पर विशेष बल दिया गया। इन्हें पर्यावरण संत के नाम से भी जाना जाता है।

44. जाम्भोजी जहां प्रवचन करते थे, वह क्या कहलाता था?

  • (A) सधारी
  • (B) सबद
  • (C) वाणी
  • (D) शील

विश्नोई संप्रदाय के प्रवर्तक गुरु जाम्भोजी का प्रवचन स्थल सांधारी कहलाता था। वे पंवार वंशीय राजपूत थे और निर्गुण भक्ति संप्रदाय को आगे बढ़ाने वाले संत थे। उनका मूल उपदेश था – हृदय से विष्णु का नाम जपो और हाथों से कार्य करो। उन्होंने अपने उपदेशों के माध्यम से समाज को सच्चरित्रता और पर्यावरण संरक्षण की राह दिखाई।

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45. राजस्थान के किस लोकदेवता के माता-पिता का नाम हंसादेवी और लोहटजी था?

  • (A) पीपाजी
  • (B) धन्नाजी
  • (C) जाम्भोजी
  • (D) सिद्ध जसनाथजी

गुरु जाम्भोजी का जन्म भादवा कृष्ण अष्टमी, वि.सं. 1508 (1451 ई.) को पीपासर (नागौर) में हुआ था। उनके पिता का नाम लोहटजी पंवार और माता का नाम हंसा देवी था। इनके गुरु गोरखनाथ थे। जाम्भोजी ने 29 नियम दिए और उनकी वाणियों का संग्रह जाम्भसागर कहलाता है। वे विश्नोई संप्रदाय के प्रवर्तक और पर्यावरण संरक्षण के प्रथम संत कहे जाते हैं।

46. जाम्भा (फलौदी-जोधपुर) किस संप्रदाय से संबंधित स्थान है?

  • (A) गौड़ीय संप्रदाय
  • (B) जसनाथी संप्रदाय
  • (C) वल्लभ संप्रदाय
  • (D) विश्नोई संप्रदाय

जाम्भा (फलौदी, जोधपुर) विश्नोई संप्रदाय से संबंधित प्रमुख स्थान है। संप्रदाय के प्रवर्तक गुरु जाम्भोजी थे, जिन्होंने 1485 ई. में समराथल (बीकानेर) से इसकी स्थापना की। जाम्भा में जाम्भोजी के कहने पर जैसलमेर के राजा जैतसिंह ने तालाब बनवाया, जिसे विश्नोई समाज में पुष्कर के समान पवित्र माना जाता है।

47. निम्न में से किसने गुरु गोरखनाथ से दीक्षा ली थी?

  • (A) जाम्भोजी
  • (B) संत पीपा
  • (C) दादू दयाल
  • (D) संत चरणदास

गुरु जाम्भोजी का जन्म 1451 ई. भाद्रपद कृष्ण अष्टमी को पीपासर (नागौर) में हुआ। इन्हें कृष्ण तथा विष्णु का अवतार भी माना जाता है। जाम्भोजी ने गुरु गोरखनाथ से दीक्षा ली थी। उन्होंने समाज सुधार हेतु 29 नियम और 120 शब्द प्रतिपादित किए। इन्हें विश्व पर्यावरण आंदोलन का प्रथम प्रणेता कहा जाता है और पर्यावरण वैज्ञानिक संत की उपाधि दी जाती है।

48. लोकदेवता जाम्भोजी का जन्म कब हुआ था?

  • (A) 1351 ई.
  • (B) 1451 ई.
  • (C) 1551 ई.
  • (D) 1651 ई.

लोकदेवता गुरु जाम्भोजी का जन्म 1451 ई. (वि.सं. 1508) में भादवा कृष्ण अष्टमी को पीपासर (नागौर) में हुआ। इनके पिता का नाम लोहटजी (पंवार वंशीय राजपूत) और माता का नाम हंसा देवी था। जाम्भोजी को विष्णु का अवतार भी कहा जाता है। उन्होंने विश्नोई संप्रदाय की स्थापना की और जीवन पर्यंत पर्यावरण संरक्षण व सामाजिक सुधार का संदेश दिया।

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49. विश्नोई समुदाय के गुरु किसे माना जाता है?

  • (A) गुरु जाम्भेश्वर
  • (B) गुरु रामदेव
  • (C) गुरु नानक
  • (D) इनमें कोई नहीं

विश्नोई संप्रदाय के गुरु गुरु जाम्भेश्वर (जाम्भोजी) माने जाते हैं। इनका जन्म पीपासर (नागौर) में भादवा कृष्ण अष्टमी को हुआ। वे विष्णु के अवतार कहे जाते हैं। 1485 ई. में उन्होंने समराथल धोरा (बीकानेर) पर विश्नोई संप्रदाय की स्थापना की। उनकी समाधि मुकाम (बीकानेर) में है और यहां प्रतिवर्ष फाल्गुन व आश्विन अमावस्या को मेला भरता है।

50. किस समाज सुधारक ने अपने शिष्यों से 29 नियमों का पालन करने हेतु जोर दिया?

  • (A) पीपा जी
  • (B) जाम्भोजी
  • (C) दादूदयाल जी
  • (D) जसनाथ जी

समाज सुधारक गुरु जाम्भोजी ने अपने अनुयायियों को 29 नियमों का पालन करने का उपदेश दिया। वे विश्नोई संप्रदाय के प्रवर्तक थे। उन्हें गुंगा, गहला और विष्णु का अवतार कहा जाता है। उनके नियमों में पर्यावरण, वृक्षों, वन्यजीवों की रक्षा, सामाजिक आचरण और धार्मिक जीवन से जुड़े आदर्श बताए गए। इसी कारण जाम्भोजी को पर्यावरण वैज्ञानिक संत भी कहा जाता है।

51. संत बखनाजी, संतदासजी, संत रज्जबजी किस संप्रदाय से संबंधित थे?

  • (A) कबीरपंथ
  • (B) लालदासी
  • (C) रामस्नेही
  • (D) दादूपंथ

संत बखनाजी, संतदासजी और संत रज्जबजी सभी दादू पंथ से संबंधित थे। इसके प्रवर्तक दादूदयाल थे, जिनका जन्म 1544 ई. फाल्गुन अष्टमी को अहमदाबाद (गुजरात) में हुआ। उनके गुरु बुड़दन (वृद्धानंद) थे। दादू दयाल के प्रमुख शिष्यों में गरीबदास, मिस्किनदास, सुंदरदास, रज्जब, माधोदास और अन्य संत शामिल थे।

52. खालसा, खाकी, नागा राजस्थान के किस संप्रदाय के भाग हैं?

  • (A) रामस्नेही संप्रदाय
  • (B) दादू पंथ
  • (C) चरणदासी संप्रदाय
  • (D) लालदासी संप्रदाय

दादू पंथ की 5 प्रमुख शाखाएं मानी जाती हैं – खालसा, खाकी, नागा, उतरादे और स्थानधारी/विरक्त। इस संप्रदाय के प्रवर्तक दादूदयालको राजस्थान का कबीर भी कहा जाता है (मोतीलाल मेनारिया द्वारा)। दादूजी के अनुयायियों ने इनके उपदेशों को समाज में फैलाया और भक्ति परंपरा को मजबूत किया।

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53. दादूपंथ में सत्संग स्थल कहलाता है—

  • (A) मुक्ति धाम
  • (B) अलख दरीबा
  • (C) चौपड़ा
  • (D) रामद्वारा

दादूपंथ में सत्संग स्थल को अलख दरीबा कहा जाता है। दादू दयाल ने 1574 ई. में इस पंथ की स्थापना की थी। उन्हें राजस्थान का कबीरभी कहा जाता है। अलख दरीबा में अनुयायी एकत्र होकर भक्ति, सत्संग और आध्यात्मिक चर्चा करते थे। इस स्थान का महत्व दादूपंथ की परंपरा में विशेष है।

54. दादू पंथ की नागा शाखा किसके द्वारा स्थापित की गई थी?

  • (A) गरीबदास
  • (B) मिस्किनदास
  • (C) बनवारीदास
  • (D) सुंदरदास

दादूपंथ की कुल पाँच प्रमुख शाखाएँ मानी जाती हैं – (1) खालसा – गरीबदास द्वारा, (2) नागा – सुंदरदास द्वारा, (3) विरक्त, (4) उतरादे या स्थानधारी और (5) खाकी। नागा शाखा की विशेषता थी कि इसमें साधु लोग अपने साथ हथियार रखते थे और समाज की रक्षा के लिए तत्पर रहते थे। दादूपंथ का विस्तार राजस्थान से निकलकर उत्तर भारत तक हुआ।

55. मुगल सम्राट अकबर द्वारा जिस संत को फतेहपुर सीकरी आमंत्रित किया गया वह था—

  • (A) लालदास
  • (B) जसनाथ
  • (C) रज्जबजी
  • (D) दादू दयाल

मुगल सम्राट अकबर ने 1585 ई. में फतेहपुर सीकरी के इबादतखाना में धार्मिक विमर्श के लिए विभिन्न संतों को बुलाया। उनमें दादू दयालभी शामिल थे। दादूजी ने वहाँ 40 दिन तक प्रवचन दिए। इन्हें राजस्थान का कबीर कहा जाता है। इनका जन्म 1544 ई. अहमदाबाद में हुआ था और 1574 ई. में इन्होंने दादूपंथ की स्थापना की।

56. दादू पंथ की प्रमुख पीठ स्थित है?

  • (A) आमेर
  • (B) नरैना
  • (C) मण्डोर
  • (D) करौली

दादू पंथ की प्रमुख पीठ नरैना (जयपुर) में स्थित है। दादूदयाल ने सबसे पहले सांभर में उपदेश दिए और बाद में नरैना को मुख्य केंद्र बनाया। यहीं पर दादू खोल भैराणा पहाड़ी भी स्थित है। इनके उपदेशों का संकलन हरदेवाणी संतदास और जगन्नाथदास ने किया। दादूपंथ का सत्संग स्थल अलख दरीबा कहलाता है।

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57. दादू पंथ का प्रमुख केंद्र कहाँ है?

  • (A) पीपासर
  • (B) अजमेर
  • (C) भीनमाल
  • (D) नरैना

दादूपंथ का प्रमुख केंद्र नरैना (जयपुर) है। पंथ की स्थापना 1574 ई. में दादूदयाल ने की थी। अन्य प्रमुख केंद्र कल्याणपुर, अजमेर, सांभर और भराणा भी रहे। दादूजी की प्रमुख रचनाएँ हैं – कायाबेली, दादूजी री वाणी और दादू रा दोहा। उन्होंने निपख आंदोलन चलाया और निर्गुण भक्ति का संदेश दिया।

58. दादू की शिक्षाओं का संकलन “दादूवाणी” रचित है—

  • (A) मेवाती बोली में
  • (B) ढूंढाड़ी बोली में
  • (C) देशवाली बोली में
  • (D) बागड़ी बोली में

दादूदयाल की शिक्षाओं का संकलन दादूवाणी कहलाता है। यह ढूंढाड़ी बोली (सधुक्कड़ी भाषा) में लिखी गई है। दादूजी ने सरल भाषा में समाज सुधार और भक्ति का संदेश दिया। इसके अतिरिक्त इनके दोहे दादू रा दोहा नाम से प्रसिद्ध हैं। इस वाणी में भक्ति, नैतिकता और समानता का संदेश झलकता है।

59. निम्नलिखित में से किसे 'राजस्थान के कबीर' के नाम से जाना जाता है?

  • (A) दादू दयाल
  • (B) पाबूजी
  • (C) गोगाजी
  • (D) रामदेवजी

दादू दयाल को राजस्थान का कबीर कहा जाता है। वे निर्गुण भक्ति धारा के प्रमुख संत थे। इन्होंने जात-पात का विरोध किया और सभी को समानता और भाईचारे का संदेश दिया। दादूजी ने 1574 ई. में दादूपंथ की स्थापना की। इनके अनुयायी विभिन्न शाखाओं में बंट गए, जैसे – खालसा, नागा, खाकी आदि।

60. नारायणा किसका जाना-माना केन्द्र है?

  • (A) विश्नोई संप्रदाय
  • (B) नाथ संप्रदाय
  • (C) दादूपंथ
  • (D) रामस्नेही संप्रदाय

नारायणा (जयपुर) दादूपंथ का प्रमुख केंद्र है। दादूदयाल ने यहां अपना मुख्य प्रवास स्थान बनाया। दादूजी ने नरैना को भक्ति और समाज सुधार का केंद्र बनाया, जहां से उनके उपदेश दूर-दूर तक फैले। इसीलिए नरैना को दादूपंथ का आध्यात्मिक गढ़ कहा जाता है।

61. निम्नलिखित में से कौन दादूपंथी उप-संप्रदाय नहीं है?

  • (A) खालसा
  • (B) नागा
  • (C) खाकी
  • (D) चंडाल

दादूपंथ की पाँच प्रमुख शाखाएँ मानी जाती हैं, खालसा – गरीबदास द्वारा स्थापित, खाकी – शरीर पर भस्म रमाने वाले साधु, नागा – सुंदरदास द्वारा स्थापित, साधु हथियार रखते थे, उतरादे/स्थानधारी – उत्तर भारत में फैली शाखा, विरक्त – गृहस्थ अनुयायी, चंडाल इनमें से कोई उपसंप्रदाय नहीं है।

62. बालिन्दजी के गुरु कौन थे?

  • (A) दादूदयाल जी
  • (B) रामचरण जी
  • (C) सुंदरदास जी
  • (D) मंगलाराम जी

बालिन्दजी दादूदयाल के शिष्यों में से एक थे। दादूजी के अन्य प्रमुख शिष्य थे – गरीबदास, मिस्किनदास, सुंदरदास, बखनाजी, रज्जब, माधोदास और संतदास। इन्हें मिलाकर कुल 52 शिष्य प्रसिद्ध हुए, जिन्हें 52 स्तंभ कहा जाता है। इन शिष्यों ने दादूपंथ को जन-जन तक पहुँचाया।

63. संत पीपा का मुख्य मंदिर कहाँ स्थित है?

  • (A) औसियां (जोधपुर)
  • (B) टोडारायसिंह (टोंक)
  • (C) समदड़ी (बालोतरा)
  • (D) धुवन गाँव (टोंक)

संत पीपा का मुख्य मंदिर समदड़ी (बालोतरा) में स्थित है। वे भक्ति आंदोलन के निर्गुण संत थे और भक्ति धारा में महत्वपूर्ण योगदान दिया। संत पीपा का जन्म राजस्थान में हुआ और उन्होंने भक्ति साहित्य की रचना की। उनके भजन गुरु ग्रंथ साहिब में भी संकलित हैं। संत पीपा को निर्गुण साधना और सामाजिक सुधार के लिए याद किया जाता है।

64. कीर्तनमाला' किस संत की रचना है?

  • (A) मीरां
  • (B) गुलाबो
  • (C) गवरी बाई
  • (D) सहजो बाई

गवरी बाई की रचनाओं में कीर्तनमाला प्रमुख मानी जाती है। उन्हें बागड़ की मीरा और वागड़ की मीरा भी कहा जाता है। गवरी बाई ने अपनी रचनाओं में कृष्ण की भक्ति को सरल और मधुर शब्दों में प्रस्तुत किया। उनकी भक्ति ने समाज में प्रेम, त्याग और आध्यात्मिक चेतना का संदेश दिया।

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65. संत रैदास की छतरी स्थित है?

  • (A) गागरोन
  • (B) चित्तौड़
  • (C) समदड़ी
  • (D) डूंगरपुर

संत रैदास की छतरी चित्तौड़गढ़ में स्थित है। वे निर्गुण भक्ति धारा के महान संत थे और सामाजिक समानता, प्रेम तथा भाईचारे के संदेशवाहक थे। मीरा बाई भी उनके शिष्यत्व में रहीं और उन्होंने रैदास को अपना गुरु माना। उनकी शिक्षाएँ आज भी समाज को प्रेरित करती हैं।

66. मीरां के पिता का नाम था?

  • (A) भोजराज
  • (B) आससिंह
  • (C) केसरसिंह
  • (D) रतनसिंह

मीराबाई के पिता का नाम रतनसिंह राठौड़ था। मीराबाई का जन्म मेड़ता (नागौर) में हुआ और वे कृष्ण भक्ति की महान उपासक थीं। उन्होंने भक्ति आंदोलन को एक नई दिशा दी और अपनी रचनाओं के माध्यम से समाज में प्रेम और आध्यात्मिकता का संदेश फैलाया।

67. राजाराम संप्रदाय की प्रमुख पीठ कहाँ स्थित है?

  • (A) शिकारपुरा
  • (B) सलेमाबाद
  • (C) नरैना
  • (D) दांतड़ा

राजाराम संप्रदाय की प्रमुख पीठ शिकारपुरा में स्थित है। यह संप्रदाय भक्ति परंपरा से जुड़ा हुआ है और समाज सुधार में भी इसकी भूमिका रही। राजाराम संप्रदाय ने साधना और सेवा को महत्व दिया और अपने अनुयायियों को सरल जीवन और उच्च विचार अपनाने की प्रेरणा दी।

68. राजस्थान की कौनसी महिला संत दूसरी मीराबाई कहलाती है?

  • (A) भूरी बाई
  • (B) राना बाई
  • (C) फूली बाई
  • (D) करमा बाई

राना बाई को दूसरी मीराबाई कहा जाता है। वे कृष्ण भक्ति में लीन होकर जीवन व्यतीत करती थीं। उनका जीवनकाल लगभग 1504 ई. से 1570 ई. तक रहा। उन्होंने हरनावा गाँव (डीडवाना-कुचामन) में 1570 ई. में जीवित समाधि ली। उनकी भक्ति और त्याग ने उन्हें राजस्थान की प्रमुख संत परंपरा में विशेष स्थान दिया।

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69. संत रैदास का पैनोरमा किस जिले में निर्माणाधीन है?

  • (A) कोटा
  • (B) चित्तौड़गढ़
  • (C) डूंगरपुर
  • (D) उदयपुर

संत रैदास का पैनोरमा चित्तौड़गढ़ जिले में निर्माणाधीन है। यह स्मारक उनकी भक्ति परंपरा और शिक्षाओं को जीवित रखने के उद्देश्य से बनाया जा रहा है। संत रैदास ने समाज को समानता, प्रेम और भाईचारे का संदेश दिया और उनका योगदान आज भी याद किया जाता है।

70. प्रसिद्ध महिला संत करमेती बाई का स्मारक कहाँ पर बनाया जा रहा है?

  • (A) महुवा (दौसा)
  • (B) खंडेला (सीकर)
  • (C) साबला (डूंगरपुर)
  • (D) मेड़ता (नागौर)

प्रसिद्ध महिला संत करमेती बाई का स्मारक खंडेला (सीकर) में बनाया जा रहा है। करमेती बाई ने समाज में भक्ति, प्रेम और समानता का संदेश दिया। उनकी स्मृति में बनाया जा रहा यह स्मारक आने वाली पीढ़ियों को भक्ति और मानवीय मूल्यों से जुड़ने की प्रेरणा देगा।

71. प्रसिद्ध कृष्ण भक्त करमा बाई जाट का सम्बन्ध डीडवाना-कुचामन के किस गाँव से है?

  • (A) हरनावा
  • (B) कालवा
  • (C) परबतसर
  • (D) कुड़छी

प्रसिद्ध कृष्ण भक्त करमा बाई जाट का सम्बन्ध डीडवाना-कुचामन के कालवा गाँव से है। करमा बाई अपने कृष्ण भक्ति गीतों और भजनों के लिए जानी जाती हैं। वे समाज में सरल भक्ति और प्रेम का संदेश देती थीं। उनकी भक्ति की परंपरा राजस्थान में आज भी लोकप्रिय है।

72. सलेमाबाद में निम्बार्काचार्य पीठ की स्थापना किसने की?

  • (A) आचार्य परशुराम
  • (B) स्वामी अग्रदास
  • (C) कृष्णदास पयहारी
  • (D) गोस्वामी दामोदर

सलेमाबाद पीठ (अजमेर) की स्थापना आचार्य परशुराम ने की थी। यह पीठ रूपनगढ़ नदी के किनारे स्थित है। यहाँ राधा-कृष्ण की युगल सेवा की जाती है। यह निम्बार्क संप्रदाय का प्रमुख केंद्र है और भक्ति आंदोलन में इसका विशेष महत्व है।

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73. निम्नलिखित संतों में से कौन जन्म से मुसलमान था?

  • (A) हरिदास
  • (B) लालगिरी
  • (C) चरणदास
  • (D) लालदास

लालदास जन्म से मुसलमान थे, परंतु बाद में उन्होंने संत परंपरा को अपनाया और लालदासी संप्रदाय की स्थापना की। उन्होंने भक्ति आंदोलन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और समाज में भक्ति, समानता तथा भाईचारे का संदेश फैलाया।

74. निम्नलिखित में से कौन दादू के शिष्य नहीं है?

  • (A) सुन्दर दास
  • (B) रज्जब
  • (C) जनगोपाल
  • (D) दयाबाई

दादूदयाल के शिष्यों में सुंदरदास, रज्जब और जनगोपाल प्रमुख थे। इनके कुल 52 शिष्य थे, जिन्हें 52 स्तंभ कहा जाता है। लेकिन दयाबाई दादूजी की शिष्या नहीं थीं, वे संत चरणदास जी की शिष्या थीं। इस प्रकार सही उत्तर दयाबाई है।

75. संत दरियावजी रामस्नेही संप्रदाय की किस शाखा के प्रवर्तक थे?

  • (A) रैण
  • (B) शाहपुरा
  • (C) खेड़ापा
  • (D) सौंथल

संत दरियावजी रामस्नेही संप्रदाय की रेण (नागौर) शाखा के प्रवर्तक थे। वे संत प्रेमनाथ (बालकनाथजी) के शिष्य थे। दरियावजी ने समाज को हिंदू-मुस्लिम एकता और भक्ति भावना का संदेश दिया। रेण शाखा को रामस्नेही संप्रदाय में विशेष महत्व प्राप्त है।

76. मीराबाई किस सदी की कवयित्री थी?

  • (A) 15वीं
  • (B) 16वीं
  • (C) 17वीं
  • (D) 18वीं

मीराबाई 16वीं सदी की कवयित्री थीं। उनका जन्म 1498 ई. में मेड़ता (नागौर) में हुआ और 1547 ई. में वे वृंदावन में कृष्ण भक्ति में लीन हुईं। उन्होंने अपने भजनों और पदों से भक्ति आंदोलन को नई ऊँचाई दी। उन्हें कृष्ण की अनन्य भक्त माना जाता है।

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77. निम्नलिखित में से किस संप्रदाय के अनुयायी मेव भी हैं?

  • (A) लालदासी
  • (B) चरणदासी
  • (C) दादूपंथ
  • (D) बिश्नोई

लालदासी संप्रदाय के अनुयायी मेव भी कहलाते हैं। इस संप्रदाय की स्थापना संत लालदास ने की थी। लालदास जन्म से मुसलमान थे, लेकिन बाद में उन्होंने संत परंपरा को अपनाया और भक्ति मार्ग पर चल पड़े।

78. उस युग्म को चुनिए जिसके दोनों संत रामानंद के शिष्य थे?

  • (A) रैदास एवं गोरखनाथ
  • (B) धन्ना एवं जसनाथ जी
  • (C) धन्ना एवं पीपा
  • (D) पीपा एवं मीराबाई

धन्ना भगत और संत पीपा दोनों ही संत रामानंद के शिष्य थे। रामानंद ने निर्गुण भक्ति धारा को प्रसारित किया। धन्ना भगत का जन्म टोंक जिले में हुआ और पीपा जी राजा होकर भी भक्ति मार्ग पर चल पड़े।

79. निरंजनी संप्रदाय के संस्थापक थे?

  • (A) संत हरिदास
  • (B) संत रामचरण
  • (C) संत चरणदास
  • (D) संत नवलदास

निरंजनी संप्रदाय के संस्थापक संत हरिदास (हरिसिंह सांखला) थे। इन्हें राजस्थान का वाल्मीकि भी कहा जाता है। इनके अनुयायी दो प्रकार के माने जाते हैं— निहंग साधु और घरबारी साधु। उन्होंने सादगी और सेवा का संदेश दिया।

80. नारी संत दयाबाई शिष्या थी?

  • (A) संत लालदास
  • (B) संत रामचरण
  • (C) संत चरणदास
  • (D) संत दादू

दयाबाई संत चरणदास की प्रमुख शिष्या थीं। चरणदास जी ने चरणदासी संप्रदाय की स्थापना की और उनकी शिक्षाओं को दयाबाई ने समाज में फैलाया। दयाबाई ने भक्ति और सामाजिक सुधार में महत्वपूर्ण योगदान दिया।

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Mukesh Khunga

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Mukesh Khunga

Mukesh Khunga को राजस्थान में आयोजित होने वाली विभिन्न प्रतियोगी एवं भर्ती परीक्षाओं के परीक्षा पैटर्न और प्रश्नों के स्वरूप की अच्छी समझ है। उनके मार्गदर्शन में यह अध्ययन सामग्री और MCQ content तैयार एवं review किया गया है। Read More...

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