राजस्थान के संगीत घराने, कलाकार, गायन शैलियाँ व प्रसिद्ध संगीतज्ञ MCQ in Hindi | महत्वपूर्ण प्रश्न उत्तर सहित
इस पोस्ट में राजस्थान की कला एवं संस्कृति के टॉपिक
राजस्थान के संगीत घराने, कलाकार, गायन शैलियाँ व प्रसिद्ध संगीतज्ञ से संबंधित Latest व पूर्णतः updated महत्वपूर्ण
MCQ
प्रश्न दिए गए हैं।
इनमें लंगा गायन, मांड गायन, हवेली गायन, मांगणियार लोक गीत, अल्ला जिलाई बाई, गवरी बाई आदि से सम्बंधित महत्वपूर्ण जानकारियों को व्याख्या सहित शामिल किया गया है।
ये महत्वपूर्ण MCQ प्रश्न
RPSC,
RSSB,
RAS, Patwar, Police, LDC, VDO, REET
तथा राजस्थान राज्य की अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए
उपयोगी हैं। इनमें विषयवार प्रश्न, सही उत्तर एवं विस्तृत व्याख्या
शामिल हैं।
✍️ Prepared & Reviewed by:
Rajputana Diary –
Rajasthan GK Faculty & Content Team
(Since 2021)
Attempt
0
Wrong
0
Right
0
Marks
0/50
1. मांड गीत राजस्थान के किस क्षेत्र से जुड़ा हुआ है?
A
बीकानेर
B
मेवाड़
C
शेखावाटी
D
वागड़
📖 व्याख्या
मांड गीत का उद्गम मुख्यतः बीकानेर और जैसलमेर क्षेत्र से माना जाता है। यह श्रृंगार प्रधान गायकी है और इसे राजस्थान का शास्त्रीय लोकगीत भी कहा जाता है।
2. नाचगान करने वाली वैश्याओं का वर्ग क्या कहलाता है?
A
पातुर
B
पासवान
C
जोगण
D
भगतण
📖 व्याख्या
राजस्थान में नाचगान करने वाली वैश्याओं के वर्ग को भगतन कहा जाता है। ये सामाजिक और सांस्कृतिक अवसरों पर नृत्य और गायन प्रस्तुत करती थीं।
3. निम्न में से कौन मांड गायिका है?
A
गवरी देवी
B
रूकमा मांगणियार
C
पार्वती जोशी
D
नाथी देवी
📖 व्याख्या
गवरी देवी (पाली) भैरवी युक्त मांड गायकी के लिए प्रसिद्ध रही हैं। दूसरी ओर बीकानेर की गवरी देवी को मांड मल्लिका कहा जाता है। दोनों ही राजस्थान की मांड गायन परंपरा की प्रमुख हस्तियाँ रही हैं।
4. गवरी देवी राजस्थान की किस गायन शैली से जुड़ी है?
A
माँड
B
मांगणियार
C
लंगा
D
तालबंदी
📖 व्याख्या
गवरी देवी राजस्थान की प्रसिद्ध मांड गायिका थीं, जिन्हें मरू कोकिला कहा जाता है। वे पाली जिले से थीं और भैरवी युक्त मांड गायन में सिद्धहस्त थीं। 2013 में उन्हें राजस्थान रत्न पुरस्कार से सम्मानित किया गया। मांड गायन राजस्थान की शास्त्रीयता और लोक की गहराई का सुंदर संगम है।
5. झोरावा' लोक गीत संबंध है-
A
उदयपुर में
B
जैसलमेर में
C
बीकानेर में
D
बाड़मेर में
📖 व्याख्या
झोरावा गीत मुख्य रूप से जैसलमेर क्षेत्र में गाया जाता है। यह एक विरह गीत है, जिसमें पत्नी अपने पति के वियोग में अपने दर्द और भावनाओं को प्रकट करती है। यह गीत राजस्थान की लोक-संस्कृति में स्त्रियों की भावनाओं का सजीव चित्रण करता है।
6. अल्ला- जिलाई- बाई की पहचान किस क्षेत्र में रही?
A
लंगा गायन
B
मांड गायन
C
हवेली गायन
D
मांगणियार लोक गीत
📖 व्याख्या
अल्ला जिलाई बाई बीकानेर की प्रसिद्ध मांड गायिका थीं। उन्हें राजस्थान की मरू कोकिला कहा जाता है। उनका लोकप्रिय गीत ‘केसरिया बालम’ आज भी राजस्थान की पहचान बना हुआ है। उनकी स्मृति में अखिल भारतीय मांड गायन समारोह आयोजित होता है। उनके अन्य प्रसिद्ध गीतों में ‘बाईसा रा बीरा’ और ‘काली काजलिये री रेख’ शामिल हैं।
7. किस प्रसिद्ध मांड गायिका को कला के क्षेत्र में योगदान के लिए 1982 में पद्मश्री से सम्मानित किया गया?
A
अल्ला जिलाई बाई
B
गवरी बाई
C
उषा चौहान
D
मांगी बाई
📖 व्याख्या
अल्ला जिलाई बाई को उनके अद्भुत मांड गायन और लोक संगीत में योगदान के लिए वर्ष 1982 में पद्मश्री पुरस्कार से सम्मानित किया गया। उन्हें राजस्थान की मरू कोकिला कहा जाता है। बीकानेर की निवासी अल्ला जिलाई बाई का गायन इतना मधुर था कि वे राजस्थान की पहचान बन गईं। उनका गायन केवल लोकधुन नहीं था बल्कि उसमें राजस्थान की संस्कृति और परंपरा की आत्मा झलकती थी।
8. बीकानेर की गायिका अल्ला जिलाई बाई किस राग गाने के लिए प्रसिद्ध थी?
A
बसंती
B
जैजेवंती
C
मल्हार
D
माण्ड
📖 व्याख्या
अल्ला जिलाई बाई बीकानेर की प्रसिद्ध मांड गायिका थीं। उन्हें राजस्थान की मरू कोकिला भी कहा जाता है। उन्होंने ‘केसरिया बालम आओ नी पधारो म्हारे देश’ जैसे प्रसिद्ध गीत को गाकर अमर बना दिया। वे गंगासिंह के दरबार की राजगायिका थीं और उनके गुरु हुसैन बक्श लंगड़े थे। वे मांड के अलावा ठुमरी, ख्याल और दादरा भी गाती थीं।
9. निम्न में से किसे मरूभूमि की कोकिला कहा जाता है?
A
गवरी देवी
B
मांगी बाई
C
बन्नो बेगम
D
अल्ला जिलाई बाई
📖 व्याख्या
अल्ला जिलाई बाई को ‘मरूभूमि की कोकिला’ कहा जाता है। इनका जन्म 1 फरवरी 1902 को बीकानेर के जयसिंह देसरा गाँव में हुआ था। राजस्थान के लोकसंगीत में उनके योगदान को हमेशा याद किया जाता है। गवरी देवी को राजस्थान कोकिला कहा जाता है, जबकि अल्ला जिलाई बाई को उनके मांड गायन के कारण मरुभूमि की कोकिला के रूप में विशेष पहचान मिली।
10. केसरिया बालम आओ नी पधारो म्हारे देश' को अल्ला जिलाई बाई ने किस राग में गाया?
A
भोपाली
B
पीलू
C
मांड
D
मेघ
📖 व्याख्या
राजस्थान की प्रसिद्ध लोकगायिका अल्ला जिलाई बाई ने ‘केसरिया बालम आओ नी पधारो म्हारे देश’ गीत को मांड राग में गाया। यह गीत आज राजस्थान की पहचान बन चुका है। अल्ला जिलाई बाई के अन्य प्रसिद्ध गीतों में ‘बाईसा रा बीरा’, ‘काली काजलिये री रेख’ और ‘झालो दियो जाय’ शामिल हैं। उन्होंने मांड के साथ ठुमरी, ख्याल और दादरा भी गाए।
11. पंडित जसराज गायकी से संबंधित हैं।
A
मौद
B
मेवाती
C
खयाल
D
इनमें से कोई नहीं
📖 व्याख्या
पंडित जसराज भारतीय शास्त्रीय संगीत के मेवाती घराने से जुड़े थे। इस घराने के संस्थापक घग्घे नजीर खां थे, जो जोधपुर के महाराजा जसवंत सिंह के दरबारी गायक थे। पंडित जसराज को 1975 में पद्मश्री और 2000 में पद्म विभूषण से सम्मानित किया गया। उन्हें मारवाड़ संगीत रत्न पुरस्कार भी मिला। 17 अगस्त 2020 को अमेरिका के न्यूजर्सी में उनका निधन हुआ।
12. ओल्यू' राजस्थानी लोक जीवन के किस अवसर से संबंधित है?
A
पुत्र जन्मोत्सव गीत
B
पुत्री विवाह का विदाई गीत
C
होली पर किया जाने वाला लोक नृत्य
D
बारात की आगवानी का गीत
📖 व्याख्या
राजस्थान का प्रसिद्ध गीत ‘ओल्यू’ पुत्री के विवाह के समय उसके विदाई अवसर पर गाया जाता है। इसमें घर की बेटियों के विदा होते समय माँ और परिवार की भावनाओं को प्रकट किया जाता है। यह गीत लोकजीवन की संवेदनाओं और रिश्तों की गहराई को दर्शाता है। राजस्थान की लोकसंस्कृति में ओल्यू गीत बेटी की विदाई का मार्मिक चित्रण करता है।
13. निम्नलिखित में से किस संगीत का संबंध राजस्थान से नहीं है?
A
बाउल
B
मांगणियार
C
भोपा
D
लंगा
📖 व्याख्या
बाउल संगीत का संबंध राजस्थान से नहीं बल्कि बंगाल क्षेत्र से है। राजस्थान में प्रमुख रूप से मांगणियार, भोपा और लंगा परंपराएँ पाई जाती हैं। मांगणियार जाति के लोग कमायचा बजाते हैं, भोपा देवनारायण जी की फड़ गाते समय रावणहट्टा बजाते हैं और लंगा समुदाय सुरिंदा, मुरली और सतारा जैसे वाद्य यंत्रों का प्रयोग करता है।
14. करौली क्षेत्र में 'कैला देवी' की आराधना में गाए जाने वाले गीत हैं-
A
लाँगुरिया
B
हींडो
C
इंडोणी
D
लावणी
📖 व्याख्या
करौली क्षेत्र के प्रसिद्ध कैला देवी मेले में भक्त ‘लाँगुरिया गीत’ गाते हैं। यह चैत्र शुक्ल अष्टमी को आयोजित मेले का प्रमुख हिस्सा होता है। इन गीतों में देवी की स्तुति और भक्ति की भावना झलकती है। मेले के दौरान जोगनिया नृत्य भी किया जाता है, जो स्थानीय लोकसंस्कृति का हिस्सा है।
15. राजस्थान के पंडित विश्वमोहन भट्ट का संबंध किस वाद्ययंत्र से है?
A
मोहन वीणा
B
सारंगी
C
कामायचा
D
खड़ताल
📖 व्याख्या
पंडित विश्वमोहन भट्ट ने पश्चिमी गिटार में बदलाव करके एक नया वाद्ययंत्र तैयार किया, जिसे मोहन वीणा कहा जाता है। यह वीणा, सरोद और सितार का सुंदर मिश्रण है। पंडित विश्वमोहन भट्ट ने इस वाद्ययंत्र से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर राजस्थान का नाम रोशन किया। उन्हें अपने योगदान के लिए ग्रैमी पुरस्कार से भी सम्मानित किया गया है।
16. निम्नलिखित में से कौन राजस्थान के प्रसिद्ध गायक हैं?
A
तुलसीदास
B
जुबेन गर्ग
C
मामे खान
D
सुंदरराजन
📖 व्याख्या
मामे खान राजस्थान के जैसलमेर जिले के सत्तु गाँव के निवासी और प्रसिद्ध लोकगायक हैं। वे मांगणियार परंपरा से जुड़े हैं। उन्होंने बॉलीवुड फिल्मों जैसे ‘मिरज्या’ और ‘सोन चिरैया’ में गायन किया है। वर्ष 2016 में उन्हें GIMA अवॉर्ड ‘बेस्ट ट्रेडिशनल फोक सॉन्ग’ के लिए मिला। आज वे राजस्थान की लोकधुनों को वैश्विक मंच पर ले जा रहे हैं।
17. मांगणियारों द्वारा प्रयुक्त मुख्य वाद्य यंत्र कौनसा है?
A
कामायचा
B
जन्तर
C
रावणहत्था
D
मांदल
📖 व्याख्या
मांगणियार समुदाय राजस्थान के पश्चिमी भाग में विशेष रूप से जैसलमेर और बाड़मेर जिलों में पाया जाता है। ये लोकसंगीत और भजनों के लिए प्रसिद्ध हैं। मांगणियारों का मुख्य वाद्य यंत्र कामायचा है, जो एक प्राचीन तारवाद्य है। इसके अलावा वे ढोलक, खड़ताल और अन्य वाद्य यंत्र भी प्रयोग करते हैं, लेकिन उनकी पहचान कामायचा बजाने और गाने से ही होती है।
18. गवरी देवी किस गायन शैली से संबद्ध थी?
A
मांगणियार गायन
B
लंगा गायन
C
हवेली संगीत
D
मांड गायन
📖 व्याख्या
गवरी देवी राजस्थान की प्रसिद्ध मांड गायिका थीं। उन्हें ‘मरू कोकिला’ की उपाधि भी मिली। वे पाली जिले से थीं और भैरवी युक्त मांड गाने में सिद्धहस्त थीं। उनकी गायकी ने राजस्थान की लोक संस्कृति को वैश्विक पहचान दिलाई। 2013 में उन्हें ‘राजस्थान रत्न’ पुरस्कार से सम्मानित किया गया। मांड गायन में उनकी विशेष पकड़ थी।
19. बीकानेर की गायिका अल्लाह जिलाई बाई कौनसी राग गाने के लिए प्रसिद्ध थी?
A
मांगणियार गायकी
B
माण्ड गायकी
C
लंगा गायकी
D
तालबंदी गायकी
📖 व्याख्या
अल्ला जिलाई बाई बीकानेर की प्रसिद्ध मांड गायिका थीं। उन्हें राजस्थान की मरू कोकिला कहा जाता है। उनका सबसे प्रसिद्ध गीत “केसरिया बालम आओ नी” है, जो मांड राग में गाया गया है। वे गंगासिंह के दरबार की राजगायिका थीं और हुसैन बक्श लंगड़े की शिष्या थीं। मांड के अलावा उन्होंने ठुमरी, ख्याल और दादरा भी गाए।
20. मामे खान को 2016 में कौनसा अवॉर्ड मिला?
A
पद्मश्री
B
GIMA
C
पद्मभूषण
D
राजस्थान रत्न
📖 व्याख्या
मामे खान, जैसलमेर के सत्तु गाँव के निवासी और मांगणियार लोकगायक, को वर्ष 2016 में GIMA अवॉर्ड (ग्लोबल इंडियन म्यूजिक अवॉर्ड) ‘बेस्ट ट्रेडिशनल फोक सॉन्ग’ के लिए मिला। उन्होंने फिल्मों जैसे ‘मिरज्या’ और ‘सोन चिरैया’ में अपनी गायकी से पहचान बनाई। आज वे राजस्थान के लोकसंगीत को विश्व पटल तक पहुँचा रहे हैं।
21. किसे 'मरुभूमि की कोकिला' कहा जाता है?
A
मांगी बाई
B
गवरी बाई
C
अल्लाह जिलाई बाई
D
बन्नो बेगम
📖 व्याख्या
अल्ला जिलाई बाई को ‘मरुभूमि की कोकिला’ कहा जाता है। वे बीकानेर की निवासी थीं और अपनी मधुर मांड गायकी के लिए प्रसिद्ध थीं। उनका जन्म 1902 में हुआ था और उन्होंने अपने गीतों से मरुभूमि की संस्कृति और भावनाओं को जीवंत किया। उनके स्वर आज भी राजस्थान के लोक संगीत की धरोहर माने जाते हैं।
22. कंठगायन की कला में प्रतिष्ठित किस कलाकार को 2012 में 'राजस्थान रत्न' से सम्मानित किया गया?
A
जगजीत सिंह
B
लक्ष्मी कुमारी चूंडावत
C
कोमल कोठारी
D
पंडित उदय शंकर
📖 व्याख्या
प्रसिद्ध गजल गायक जगजीत सिंह का जन्म श्रीगंगानगर में हुआ था। उन्हें 2003 में पद्म भूषण और 2012 में (मरणोपरांत) राजस्थान रत्न से सम्मानित किया गया। वे अपनी गजलों और कंठ संगीत के लिए विश्वभर में लोकप्रिय रहे। उनकी आवाज़ ने गजल गायकी को एक नया आयाम दिया।
23. लोक संगीत की वह जनजाति, जो मुख्यतः मारवाड़ क्षेत्र में सर्वाधिक पाई जाती है?
A
कर्जर
B
भवाई
C
मिरासी
D
जोगी
📖 व्याख्या
राजस्थान के मिरासी समुदाय को लोक संगीत की एक महत्वपूर्ण जाति माना जाता है। ये विशेष रूप से मारवाड़ क्षेत्र में पाए जाते हैं। इनका मुख्य पेशा सारंगी वादन और गीत गाना है। मिरासी समाज ने राजस्थान के लोकसंगीत को संरक्षित और लोकप्रिय बनाने में बड़ा योगदान दिया है।
24. केसरिया बालम आवो नी पधारो म्हारे देश' को कौन से राग में सर्वाधिक प्रसिद्धि मिली?
A
मांड
B
मारू
C
सोरठ
D
सिन्धु
📖 व्याख्या
राजस्थान का प्रसिद्ध लोकगीत “केसरिया बालम आओ नी पधारो म्हारे देश” मांड राग में गाया जाता है। इसे सबसे अधिक लोकप्रियता अल्ला जिलाई बाई ने दी। यह गीत आज राजस्थान की संस्कृति और अतिथि सत्कार का प्रतीक माना जाता है। मांड गायकी ने इस गीत को अमर बना दिया और यह पूरे भारत में प्रसिद्ध हो गया।
25. राजस्थान की एकमात्र ध्रुपद गायिका है?
A
सोहन देवी
B
मधुभट्ट तैलंग
C
शंकुतला पंवार
D
मांगी बाई
📖 व्याख्या
राजस्थान की एकमात्र प्रसिद्ध ध्रुपद गायिका मधु भट्ट तैलंग हैं। उन्होंने ध्रुपद गायन की परंपरा को नई ऊँचाइयों तक पहुँचाया। ध्रुपद गायन भारतीय शास्त्रीय संगीत की प्राचीनतम विधा है, जिसमें राग की गहराई और आध्यात्मिक भावनाएँ प्रकट होती हैं। मधु भट्ट तैलंग ने देश-विदेश में ध्रुपद प्रस्तुत कर राजस्थान का नाम गौरवान्वित किया।
26. जोधपुर घराने के प्रवर्तक है?
A
रज्जब अली
B
भूपत खाँ
C
सदारंग खाँ
D
रमजान खान
📖 व्याख्या
जोधपुर घराने को ‘रंगीला घराना’ भी कहा जाता है। इसके प्रवर्तक रमजान खान रंगीले थे, जो जोधपुर के गायक इमाम बक्श के शिष्य थे। इस घराने में संगीत की विविध शैलियों का समावेश हुआ और इसे खासतौर पर अपनी लय और रागों की अद्भुत प्रस्तुति के लिए पहचाना जाता है।
27. किस गायन शैली में 6 राग व 36 रागनियों का प्रयोग होता है?
A
लंगा गायकी
B
तालबंदी गायकी
C
मांगणियार गायकी
D
फड़ गायकी
📖 व्याख्या
मांगणियार गायकी में 6 राग और 36 रागनियों का प्रयोग होता है। मांगणियार जाति मूलतः सिंध प्रांत की मुस्लिम जाति है और वे शादियों, पर्व-त्योहारों और अन्य शुभ अवसरों पर गाते हैं। मांगणियार गायन पर्यटन की दृष्टि से भी प्रमुख है। इनके मुख्य वाद्य यंत्र कामायचा और खड़ताल हैं, जो इनके संगीत को अलग पहचान देते हैं।
28. मेवाड़ के महाराणा कुम्भा की पुत्री, जो संगीतज्ञ थी, इन्हें वागीश्वरी देवी भी कहा गया है-
A
कृष्णा कुमारी
B
रमा बाई
C
मान बाई
D
चन्द्र कुंवरी
📖 व्याख्या
मेवाड़ के प्रसिद्ध शासक महाराणा कुम्भा की पुत्री रमा बाई एक महान संगीतज्ञ थीं। उन्हें संगीत की विद्वता और गायन-कला के कारण वागीश्वरी देवी की उपाधि मिली। महाराणा कुम्भा स्वयं भी संगीत और नाटक के बड़े संरक्षक थे, और उनकी पुत्री ने इस परंपरा को और समृद्ध किया।
29. प्रसिद्ध संगीतज्ञ 'पुण्डरिक विठ्ठल' जयपुर के किस शासक के आश्रित कवि थे?
A
सवाई प्रताप सिंह
B
सवाई जय सिंह
C
माधोसिंह प्रथम
D
माधोसिंह द्वितीय
📖 व्याख्या
प्रसिद्ध संगीतज्ञ पुण्डरिक विठ्ठल जयपुर के शासक माधोसिंह द्वितीय के आश्रित कवि थे। उनकी प्रमुख रचनाएँ ‘रागमाला, राजमंजरी, नर्तन निर्णय और सद्राग चन्द्रोदय’ हैं। इन ग्रंथों ने भारतीय संगीत की परंपरा को संरक्षित और समृद्ध किया। वे शास्त्रीय संगीत के महान विद्वान माने जाते हैं।
30. प्रसिद्ध पाकिस्तानी गजल गायक मेहंदी हसन का सम्बन्ध झुंझुनूं के किस गाँव से है?
A
मंडावा
B
बिसाऊ
C
लूणा
D
भोडकी
📖 व्याख्या
प्रसिद्ध गजल गायक मेहंदी हसन का जन्म झुंझुनूं जिले के लूणा गाँव में हुआ था। वे बाद में पाकिस्तान चले गए, लेकिन उनकी गायकी की जड़ें राजस्थान की मिट्टी से जुड़ी थीं। उन्हें ‘गजल सम्राट’ कहा जाता है। उनकी गजलें आज भी संगीत प्रेमियों को मोहित करती हैं और विश्वभर में उनकी लोकप्रियता कायम है।
31. राजस्थान के किस गायक कलाकार ने अटल बिहारी वाजपेयी के लिखे गीतों के 2 अलबमों 'नई दिशा' व 'संवेदना' में भी गाया है?
A
मुन्ना मास्टर
B
गजानन वर्मा
C
जगजीत सिंह
D
हसरत जयपुरी
📖 व्याख्या
राजस्थान के प्रसिद्ध गायक जगजीत सिंह ने पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी द्वारा लिखित कविताओं और गीतों को अपनी आवाज दी। उन्होंने ‘नई दिशा’ और ‘संवेदना’ नामक एल्बमों में वाजपेयी की रचनाओं को गाकर लोकप्रिय बनाया। जगजीत सिंह की गजल गायकी ने भारतीय संगीत को नई पहचान दी।
32. राजस्थान के किस प्रसिद्ध भजन गायक को 2020 में पद्मश्री दिया गया है?
A
मामे खान
B
मुन्ना मास्टर
C
गणपत लाल डांगी
D
सद्दीक खान
📖 व्याख्या
जयपुर के बगरू निवासी मुन्ना मास्टर एक प्रसिद्ध भजन गायक हैं। इन्हें 2020 में पद्मश्री पुरस्कार से सम्मानित किया गया। मुन्ना मास्टर ने अपनी मधुर और भक्तिपूर्ण गायकी से लाखों लोगों के हृदय को स्पर्श किया। उनकी आवाज़ राजस्थान की भक्ति परंपरा को जीवंत बनाए रखती है।
33. राजस्थान के कौनसे कलाकार को 'अभिनय गायन व लोकरंग की त्रिवेणी' कहा जाता है?
A
फहिमुद्दीन डागर
B
कोमल कोठारी
C
गणपत लाल डांगी
D
पंडित उदय शंकर
📖 व्याख्या
राजस्थान के प्रसिद्ध कलाकार गणपत लाल डांगी को ‘अभिनय गायन और लोकरंग की त्रिवेणी’ कहा जाता है। उन्होंने लोकनाट्य और लोकसंगीत को जोड़कर प्रस्तुतियाँ दीं। उनकी गायकी में अभिनय का अद्भुत समावेश होता था। उन्होंने राजस्थान के पारंपरिक लोकनाट्य को जीवित रखने में महत्वपूर्ण योगदान दिया।
34. बन्नो बेगम का संबंध किस लोक गायन शैली से है?
A
माँड
B
तालबंदी
C
मांगणियार
D
लंगा
📖 व्याख्या
बन्नो बेगम जयपुर की प्रसिद्ध मांड गायिका थीं। वे जयपुर दरबार की सुप्रसिद्ध नर्तकी गौहरजान की पुत्री थीं। बन्नो बेगम ने मांड गायकी को नई पहचान दी और राजस्थान की संगीत परंपरा को समृद्ध किया। उनकी गायकी में शास्त्रीयता और लोक तत्व का सुंदर संगम देखने को मिलता है।
35. निम्न में से असंगत युग्म है-
A
मांड गायकी - बीकानेर
B
मांगणियार गायकी - बाड़मेर, बालोतरा
C
तालबंदी गायकी - जैसलमेर
D
हवेली संगीत - राजसमंद
📖 व्याख्या
तालबंदी गायकी, जिसे ‘संगीत दंगल’ भी कहा जाता है, मुख्यतः सवाई माधोपुर क्षेत्र में प्रचलित है, न कि जैसलमेर में। मांड गायकी बीकानेर, मांगणियार गायकी बाड़मेर-बालोतरा और हवेली संगीत नाथद्वारा (राजसमंद) से सही जुड़ा हुआ है। इसलिए तालबंदी गायकी – जैसलमेर युग्म असंगत है।
36. निम्न में से अलाउद्दीन खिलजी के दरबारी संगीतज्ञ थे?
A
अबुल फजल
B
अमीर खुसरो
C
हम्मीर देव
D
भावभट्ट
📖 व्याख्या
दिल्ली सल्तनत के सुल्तान अलाउद्दीन खिलजी के दरबार में अमीर खुसरो प्रमुख संगीतज्ञ और कवि थे। उन्होंने कई रागों की रचना की और तबले व सितार जैसे वाद्य यंत्रों के विकास में भी योगदान दिया। अमीर खुसरो को ‘हिन्दुस्तानी संगीत का जनक’ भी कहा जाता है।
37. लंगा गायकी में कौनसे वाद्ययंत्र का प्रयोग किया जाता है?
A
सारंगी
B
कामायचा
C
अलगोजा
D
उपरोक्त सभी
📖 व्याख्या
लंगा गायकी राजस्थान की प्रसिद्ध लोकगायन परंपरा है, जिसमें सारंगी, कामायचा और अलगोजा जैसे वाद्य यंत्रों का प्रयोग किया जाता है। इनके गीतों में सूफी और लोक दोनों का सुंदर समन्वय होता है। लंगा समुदाय की गायकी राजस्थान की सांस्कृतिक धरोहर का अभिन्न अंग है।
38. गीगला का बापू' या 'बिज्जु भाई' उपनाम से किस संगीत कलाकार को जाना जाता है?
A
गजानन्द वर्मा
B
मुन्ना मास्टर
C
पं. विश्व मोहन भट्ट
D
गणपत लाल डांगी
📖 व्याख्या
राजस्थान के प्रसिद्ध लोकनाट्य और गायन कलाकार गणपत लाल डांगी को ‘गीगला का बापू’ और ‘बिज्जु भाई’ के नाम से जाना जाता है। उन्होंने अभिनय, गायन और लोकनाट्य की त्रिवेणी को जीवंत किया। उनके कार्यक्रम लोकजीवन की झलक प्रस्तुत करते थे और वे राजस्थान की लोक संस्कृति के संवाहक माने जाते हैं।
39. ध्रुपद गायकी के चार खण्डों में से असंगत युग्म है?
A
गोहरहारी वाणी – तानसेन
B
डागुर वाणी – बृजनंद डागर
C
खण्डारवाणी – समोखन सिंह
D
नौहरवाणी – गजसिंह
📖 व्याख्या
नौहरवाणी के जनक ‘श्रीचन्द नौहर’ को माना जाता है और इसकी उत्पत्ति जयपुर में हुई। अन्य युग्म सही हैं – गोहरहारी वाणी के प्रवर्तक तानसेन, डागुर वाणी के बृजनंद डागर और खण्डारवाणी के प्रवर्तक समोखन सिंह माने जाते हैं। इसलिए नौहरवाणी – गजसिंह युग्म असंगत है।
40. बीनकार घराना के प्रवर्तक 'रज्जब अली बीनकार' किस शासक के दरबारी संगीतकार थे?
A
सवाई रामसिंह द्वितीय
B
मानसिंह
C
गजसिंह
D
रामसिंह
📖 व्याख्या
रज्जब अली बीनकार राजस्थान के प्रसिद्ध ‘बीनकार घराना’ के प्रवर्तक माने जाते हैं। वे जयपुर के शासक सवाई रामसिंह द्वितीय के दरबारी संगीतकार थे। उन्होंने वीणा वादन की परंपरा को समृद्ध किया और इस घराने को देशभर में ख्याति दिलाई।
41. 1965 के भारत-पाक युद्ध के दौरान राष्ट्रीय स्तर पर प्रसिद्ध हुआ आकाशवाणी पर प्रसारित धारावाहिक 'लड़े सूरमा आज जी' किस संगीतज्ञ द्वारा रचित था?
A
गणपत लाल डांगी
B
पं. विश्व मोहन भट्ट
C
जगजीत सिंह
D
रेशमा
📖 व्याख्या
जोधपुर के गणपत लाल डांगी द्वारा रचित ‘लड़े सूरमा आज जी’ धारावाहिक 1965 के भारत-पाक युद्ध के समय आकाशवाणी पर प्रसारित हुआ और राष्ट्रीय स्तर पर प्रसिद्ध हुआ। गणपत लाल डांगी को अभिनय, गायन और लोकनाट्य की त्रिवेणी कहा जाता है। उनके कार्यक्रमों ने युद्ध के समय जनता में उत्साह और जोश भरा।
42. अल्लाह जिलाई बाई के बारे में असत्य कथन है-
A
बचपन में इन्होंने उस्ताद हुसैन बक्श से शिक्षा ली थी।
B
महाराजा गंगासिंह ने 'बीकानेर म्यूजिकल स्कूल' में भर्ती करवाया।
C
इन्हे 1982 में 'पद्मश्री' सम्मान मिला।
D
2010 में इन पर 5 रु. का डाकटिकट जारी हुआ।
📖 व्याख्या
अल्लाह जिलाई बाई पर 29 दिसम्बर 2003 को 5 रुपये का डाक टिकट जारी किया गया था, न कि 2010 में। वे बीकानेर की निवासी और प्रसिद्ध मांड गायिका थीं। बचपन से ही उन्हें उस्ताद हुसैन बक्श से संगीत की शिक्षा मिली और महाराजा गंगासिंह ने उन्हें ‘बीकानेर म्यूजिकल स्कूल’ में भर्ती करवाया। इन्हें 1982 में पद्मश्री पुरस्कार भी मिला।
43. पं. विश्वमोहन भट्ट के बारे में असत्य कथन है-
A
ये जयपुर के प्रसिद्ध सितार वादक है।
B
इन्होंने नई राग 'गौरीम्मा' का सृजन किया।
C
इन्होंने 'मोहनवीणा' नाम का नया वाद्य यंत्र बनाया।
D
इन्हे 2017 में 'पद्मश्री' पुरस्कार दिया गया था।
📖 व्याख्या
पं. विश्वमोहन भट्ट को 2002 में पद्मश्री और 2017 में पद्मभूषण पुरस्कार दिया गया था। वे जयपुर के प्रसिद्ध वादक हैं और उन्होंने ‘मोहन वीणा’ नामक वाद्य यंत्र का निर्माण किया। साथ ही उन्होंने ‘गौरीम्मा’ नामक नई राग की रचना भी की। उनकी संगीत कला ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत का नाम रोशन किया।
44. मांगणियार समुदाय में कितने प्रकार के गायक होते हैं?
📖 व्याख्या
मांगणियार समुदाय में गायक दो प्रकार के होते हैं। पहले वे जो केवल हिंदुओं के अवसरों पर गाते हैं और दूसरे वे जो हिन्दू और मुसलमान दोनों समुदायों के अवसरों पर गाते हैं। मांगणियार लोकसंगीत राजस्थान की सांस्कृतिक परंपरा का महत्वपूर्ण हिस्सा है और ये कामायचा, ढोलक और खड़ताल जैसे वाद्य यंत्रों का प्रयोग करते हैं।
45. श्रृंगार हार' नामक रचना किस संगीतज्ञ की है?
A
हम्मीरदेव
B
महाराणा कुम्भा
C
सवाई प्रतापसिंह
D
पृथ्वीसिंह
📖 व्याख्या
प्रसिद्ध संगीतज्ञ हम्मीरदेव ने ‘श्रृंगार हार’ नामक रचना की। वे भारतीय संगीत के विद्वान थे और उनकी रचनाओं ने शास्त्रीय संगीत को विशेष योगदान दिया। श्रृंगार रस पर आधारित इस रचना ने संगीत प्रेमियों में विशेष स्थान बनाया।
46. उदयपुर के किस प्रसिद्ध संगीतज्ञ को 'भारतीय बैले का जनक' कहा जाता है?
A
पं. उदयशंकर
B
गजानन वर्मा
C
जगजीत सिंह
D
मुन्ना मास्टर
📖 व्याख्या
पं. उदयशंकर को ‘भारतीय बैले का जनक’ कहा जाता है। वे उदयपुर के प्रसिद्ध नर्तक और संगीतज्ञ थे। उन्होंने नृत्य और संगीत को आधुनिक रूप देकर बैले शैली का निर्माण किया। उनके कार्यों ने भारतीय नृत्य और संगीत को नई पहचान दिलाई और पश्चिमी कला-जगत तक पहुँचाया।
47. जयपुर के किस शासक ने संगीत सम्मेलन कराकर 'राधा गोविन्द संगीत सार' ग्रंथ की रचना करवाई थी?
A
सवाई जयसिंह
B
सवाई प्रतापसिंह
C
सवाई ईश्वरी सिंह
D
माधोसिंह द्वितीय
📖 व्याख्या
सवाई प्रतापसिंह जयपुर के कला और संस्कृति प्रेमी शासक थे। उन्होंने संगीत का विशाल सम्मेलन आयोजित किया और ‘राधा गोविन्द संगीत सार’ नामक ग्रंथ की रचना करवाई। यह ग्रंथ संगीत के क्षेत्र में जयपुर दरबार की समृद्ध परंपरा को दर्शाता है।
48. किस शासक को 'अभिनव भरताचार्य' व 'नंदिकेश्वरावतार' की उपाधियाँ मिली?
A
महाराणा कुम्भा
B
सवाई प्रतापसिंह
C
बीसलदेव
D
हम्मीदेव चौहान
📖 व्याख्या
मेवाड़ के शासक महाराणा कुम्भा को संगीत और कला में उनके योगदान के कारण ‘अभिनव भरताचार्य’ और ‘नंदिकेश्वरावतार’ की उपाधियाँ मिलीं। उन्होंने ‘संगीतराज, संगीत मीमांसा, सूड़ प्रबंध और रसिकप्रिया’ जैसी रचनाएँ कीं। उनकी विद्वता और संगीत प्रेम ने उन्हें भारतीय संस्कृति में अमर कर दिया।
49. सवाई प्रतापसिंह के बारे में असत्य कथन है-
A
सवाई प्रतापसिंह 'ब्रजनिधि' के नाम से कविताएँ लिखते थे।
B
इन्होंने 'राधा गोविन्द संगीत सार' ग्रन्थ लिखा।
C
इनके दरबार में 22 संगीतज्ञों व विद्वानों की मंडली थी।
D
सवाई प्रतापसिंह जयपुर के शासक थे।
📖 व्याख्या
सवाई प्रतापसिंह जयपुर के शासक थे और संगीत व कला के बड़े संरक्षक थे। वे स्वयं कविताएँ ‘ब्रजनिधि’ उपनाम से लिखते थे। उनके दरबार में 22 संगीतज्ञ और विद्वानों की मंडली रहती थी। लेकिन ‘राधा गोविन्द संगीत सार’ की रचना उन्होंने स्वयं नहीं लिखी, बल्कि यह उनके विद्वान देवर्षि ब्रजपाल भट्ट द्वारा लिखी गई थी।
50. निम्न में से सवाई प्रतापसिंह का दरबारी संगीतज्ञ नहीं था?
A
देवर्षि द्वारकानाथ भट्ट
B
चाँद खाँ
C
गणपत भारती
D
भावभट्ट
📖 व्याख्या
सवाई प्रतापसिंह के दरबार में देवर्षि द्वारकानाथ भट्ट, चाँद खाँ और गणपत भारती जैसे विद्वान और संगीतज्ञ थे। लेकिन भावभट्ट उनके दरबारी संगीतज्ञ नहीं थे। जयपुर दरबार संगीत परंपरा और विद्वानों की मंडली के लिए प्रसिद्ध रहा।