राजस्थान के संगीत घराने, कलाकार, गायन शैलियाँ व प्रसिद्ध संगीतज्ञ MCQ | Latest Important Questions with Answers
इस पोस्ट में राजस्थान की कला एवं संस्कृति के टॉपिक राजस्थान के संगीत घराने, कलाकार, गायन शैलियाँ व प्रसिद्ध संगीतज्ञ से संबंधित Latest व पूर्णतः updated महत्वपूर्ण MCQ प्रश्न दिए गए हैं। इनमें फहिमुद्दीन डागर, कोमल कोठारी, गणपत लाल डांगी, पंडित उदय शंकर, मुन्ना मास्टर आदि से सम्बंधित महत्वपूर्ण जानकारियों को व्याख्या सहित शामिल किया गया है।
ये MCQ प्रश्न RPSC, RSMSSB, RSSB, RAS, Patwar, Police, LDC, VDO, Fireman, Woman Superwiser, REET तथा राजस्थान राज्य की अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए अत्यंत उपयोगी हैं।
- Subject: राजस्थान की कला एवं संस्कृति
- Topic: राजस्थान के संगीत घराने, कलाकार, गायन शैलियाँ व प्रसिद्ध संगीतज्ञ
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- Content Type: MCQ Practice Set
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Rajputana Diary –
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1. राजस्थान के कौनसे कलाकार को 'अभिनय गायन व लोकरंग की त्रिवेणी' कहा जाता है?
- (A) फहिमुद्दीन डागर
- (B) कोमल कोठारी
- (C) गणपत लाल डांगी
- (D) पंडित उदय शंकर
राजस्थान के प्रसिद्ध कलाकार गणपत लाल डांगी को अभिनय गायन और लोकरंग की त्रिवेणी कहा जाता है। उन्होंने लोकनाट्य और लोकसंगीत को जोड़कर प्रस्तुतियाँ दीं। उनकी गायकी में अभिनय का अद्भुत समावेश होता था। उन्होंने राजस्थान के पारंपरिक लोकनाट्य को जीवित रखने में महत्वपूर्ण योगदान दिया।
2. राजस्थान के किस गायक कलाकार ने अटल बिहारी वाजपेयी के लिखे गीतों के 2 अलबमों 'नई दिशा' व 'संवेदना' में भी गाया है?
- (A) मुन्ना मास्टर
- (B) गजानन वर्मा
- (C) जगजीत सिंह
- (D) हसरत जयपुरी
राजस्थान के प्रसिद्ध गायक जगजीत सिंह ने पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी द्वारा लिखित कविताओं और गीतों को अपनी आवाज दी। उन्होंने नई दिशा और संवेदना नामक एल्बमों में वाजपेयी की रचनाओं को गाकर लोकप्रिय बनाया। जगजीत सिंह की गजल गायकी ने भारतीय संगीत को नई पहचान दी।
3. मांड गीत राजस्थान के किस क्षेत्र से जुड़ा हुआ है?
- (A) बीकानेर
- (B) मेवाड़
- (C) शेखावाटी
- (D) वागड़
मांड गीत का उद्गम मुख्यतः बीकानेर और जैसलमेर क्षेत्र से माना जाता है। यह श्रृंगार प्रधान गायकी है और इसे राजस्थान का शास्त्रीय लोकगीत भी कहा जाता है।
4. नाचगान करने वाली वैश्याओं का वर्ग क्या कहलाता है?
- (A) पातुर
- (B) पासवान
- (C) जोगण
- (D) भगतण
राजस्थान में नाचगान करने वाली वैश्याओं के वर्ग को भगतन कहा जाता है। ये सामाजिक और सांस्कृतिक अवसरों पर नृत्य और गायन प्रस्तुत करती थीं।
5. निम्न में से कौन मांड गायिका है?
- (A) गवरी देवी
- (B) रूकमा मांगणियार
- (C) पार्वती जोशी
- (D) नाथी देवी
गवरी देवी (पाली) भैरवी युक्त मांड गायकी के लिए प्रसिद्ध रही हैं। दूसरी ओर बीकानेर की गवरी देवी को मांड मल्लिका कहा जाता है। दोनों ही राजस्थान की मांड गायन परंपरा की प्रमुख हस्तियाँ रही हैं।
6. गवरी देवी राजस्थान की किस गायन शैली से जुड़ी है?
- (A) माँड
- (B) मांगणियार
- (C) लंगा
- (D) तालबंदी
गवरी देवी राजस्थान की प्रसिद्ध मांड गायिका थीं, जिन्हें मरू कोकिला कहा जाता है। वे पाली जिले से थीं और भैरवी युक्त मांड गायन में सिद्धहस्त थीं। 2013 में उन्हें राजस्थान रत्न पुरस्कार से सम्मानित किया गया। मांड गायन राजस्थान की शास्त्रीयता और लोक की गहराई का सुंदर संगम है।
7. झोरावा' लोक गीत संबंध है-
- (A) उदयपुर में
- (B) जैसलमेर में
- (C) बीकानेर में
- (D) बाड़मेर में
झोरावा गीत मुख्य रूप से जैसलमेर क्षेत्र में गाया जाता है। यह एक विरह गीत है, जिसमें पत्नी अपने पति के वियोग में अपने दर्द और भावनाओं को प्रकट करती है। यह गीत राजस्थान की लोक-संस्कृति में स्त्रियों की भावनाओं का सजीव चित्रण करता है।
8. अल्ला- जिलाई- बाई की पहचान किस क्षेत्र में रही?
- (A) लंगा गायन
- (B) मांड गायन
- (C) हवेली गायन
- (D) मांगणियार लोक गीत
अल्ला जिलाई बाई बीकानेर की प्रसिद्ध मांड गायिका थीं। उन्हें राजस्थान की मरू कोकिला कहा जाता है। उनका लोकप्रिय गीत केसरिया बालम आज भी राजस्थान की पहचान बना हुआ है। उनकी स्मृति में अखिल भारतीय मांड गायन समारोह आयोजित होता है। उनके अन्य प्रसिद्ध गीतों में बाईसा रा बीरा और काली काजलिये री रेख शामिल हैं।
9. किस गायन शैली में भोपा कलाकार वाद्य यंत्र बजाता हुआ गाता है तथा भोपी हाथ में लालटेन लिए हुए लकड़ी की डंडी से पर्दे के चित्रों को दिखाती है?
- (A) ताल बंदी
- (B) हवेली संगीत
- (C) फड़ गायकी
- (D) ध्रुपद गायकी
फड़ गायकी में भोपा वाद्ययंत्र बजाता और गाता है जबकि भोपी लालटेन लेकर लकड़ी की डंडी से कपड़े पर बने चित्रों को दर्शाती है। ये फड़ प्रायः शाहपुरा (भीलवाड़ा) में चित्रित होते हैं और लोकदेवताओं की कथाओं को जीवंत रूप में प्रस्तुत करते हैं।
10. पश्चिमी राजस्थान की कौनसी संगीतजीवी जाति, जो सारंगी व रबाब वाद्ययंत्र का प्रयोग करते हुए गायन का कार्य करती हैं?
- (A) सहरिया
- (B) कंजर
- (C) गरासिया
- (D) ढाढ़ी
ढाढ़ी जाति पश्चिमी राजस्थान की प्रमुख संगीतजीवी जाति है। वे सारंगी और रबाब जैसे वाद्ययंत्र बजाते हुए लोकगीत गाने में प्रवीण होते हैं। इनकी गायकी शौर्य, भक्ति और लोककथाओं पर आधारित होती है।
11. मारवाड़ क्षेत्र में नाचने वाली पेशेवर महिलाएँ कहलाती है तथा पुरुषों को जागरी कहा जाता है-
- (A) वैरागी
- (B) भगतन
- (C) नटनी
- (D) पातुर
मारवाड़ क्षेत्र में नाचने वाली पेशेवर महिलाओं को पातुर कहा जाता है, जबकि उनके साथ गाने वाले पुरुषों को जागरी कहा जाता है। पातुर महिलाओं की प्रस्तुति सामाजिक आयोजनों में मनोरंजन का साधन मानी जाती थी।
12. गुर्जरों की एक उपजाति, जो रावणहत्था बजाने के साथ राधाकृष्ण के गीत गाते हैं?
- (A) कानगुजरी
- (B) वैरागी
- (C) जोगी
- (D) भोपा
गुर्जरों की उपजाति कानगुजरी रावणहत्था बजाने में निपुण होती है और ये विशेष रूप से राधाकृष्ण के गीत गाती है। रावणहत्था राजस्थान का पारंपरिक वाद्ययंत्र है जिसे लोकदेवताओं की कथाओं में भी प्रयोग किया जाता है।
13. कौनसी जनजाति पुंगी व खंजरी वाद्य यंत्रों का प्रयोग करते हैं व साँप पकड़ने का कार्य करते हैं?
- (A) सरगड़ा
- (B) जोगी
- (C) कालबेलिया
- (D) भोपा
कालबेलिया जनजाति साँप पकड़ने और पुंगी व खंजरी बजाने में प्रसिद्ध है। ये लोग घूम-घूमकर साँपों का खेल दिखाकर जीविकोपार्जन करते थे। कालबेलिया महिलाएँ अपने नृत्य के लिए प्रसिद्ध हैं, जिसे आज अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी पहचान मिली है।
14. वह जनजाति जो कच्छीघोड़ी नृत्य में माहिर मानी जाती है?
- (A) कंजर
- (B) सरगड़ा
- (C) सहरिया
- (D) ढाढ़ी
सरगड़ा जनजाति कच्छीघोड़ी नृत्य में माहिर मानी जाती है। यह नृत्य मुख्यतः विवाह और सामाजिक उत्सवों में किया जाता है। कलाकार घोड़े के आकार का परिधान पहनकर वीर रस और लोककथाओं पर आधारित नृत्य करते हैं।
15. नाथ सम्प्रदाय के अनुयायी जो वैरागी जीवन व्यतीत करते हुए गोपीचंद भर्तृहरि के गीत गाते हुए घर-घर घुमकर अपना जीवन निर्वाह करते हैं?
- (A) जोगी
- (B) बैरागी
- (C) मिरासी
- (D) राणा
नाथ सम्प्रदाय के अनुयायी जोगी वैरागी जीवन व्यतीत करते हैं। ये घर-घर घूमकर गोपीचंद और भर्तृहरि के गीत गाते हैं। जोगी परंपरा राजस्थान के भक्ति आंदोलन और लोकधारा का एक महत्वपूर्ण अंग है, जिसने लोकगायन और धार्मिक संस्कृति को जीवित रखा।
16. रावलों की रामत' नामक नाट्य के लिए प्रसिद्ध संगीत प्रिय 'रावल जाति' का मुख्य क्षेत्र है?
- (A) वागड़
- (B) मेवाड़
- (C) हाड़ौती
- (D) मारवाड़
रावल जाति का मुख्य क्षेत्र मारवाड़ है। यह जाति रावलों की रामत नामक लोकनाट्य के लिए प्रसिद्ध है। रामत नाट्य में पौराणिक कथाओं और लोककथाओं का मंचन गीत-संगीत और अभिनय के साथ किया जाता है। यह मारवाड़ की लोक-संस्कृति की महत्वपूर्ण धरोहर है।
17. भवाई नृत्य में माहिर जाति भवाई की उत्पत्ति मानी जाती है?
- (A) व्यावर
- (B) केकड़ी
- (C) किशनगढ़
- (D) बगरू
भवाई नृत्य राजस्थान का प्रसिद्ध लोकनृत्य है जिसमें महिलाएँ सिर पर कई घड़े रखकर नृत्य करती हैं। इसकी उत्पत्ति केकड़ी (अजमेर) क्षेत्र से मानी जाती है। भवाई जाति इस नृत्य में प्रवीण होती है और इसे कठिन संतुलन और कलात्मकता के लिए जाना जाता है।
18. ख्याल लोकनाट्य में कुशल जाति, जो ढूंढाड़ व शेखावाटी क्षेत्र में सर्वाधिक पाई जाती है?
- (A) पातुर
- (B) रावल
- (C) वैरागी
- (D) राणा
राणा जाति ख्याल लोकनाट्य में सर्वाधिक कुशल मानी जाती है। यह जाति मुख्यतः ढूंढाड़ और शेखावाटी क्षेत्र में पाई जाती है। ख्याल लोकनाट्य राजस्थान का महत्वपूर्ण नाट्य रूप है जिसमें हास्य, व्यंग्य और सामाजिक सन्देशों को गीत-संगीत के माध्यम से प्रस्तुत किया जाता है।
19. जोधपुर के बोरून्दा में 'रूपायन संस्था' की स्थापना किसने की थी?
- (A) जयनारायण व्यास
- (B) कोमल कोठारी
- (C) मामे खाँ
- (D) गजानन्द वर्मा
जोधपुर जिले के बोरुन्दा में रूपायन संस्थान की स्थापना लोकसंगीत के विद्वान कोमल कोठारी ने की थी। यह संस्थान राजस्थान के लोकसंगीत, लोककला और संस्कृति के संरक्षण और प्रचार-प्रसार के लिए कार्य करता है।
20. पश्चिमी राजस्थान में पाई जाने वाली जाति जो कामायचा व सारंगी बजाने में पारगंत होते हैं?
- (A) मांगणियार
- (B) सरगड़ा
- (C) वैरागी
- (D) कालबेलिया
पश्चिमी राजस्थान में मांगणियार जाति कामायचा और सारंगी जैसे वाद्ययंत्र बजाने में निपुण होती है। वे लोकगायकी और शास्त्रीय परंपरा के संगम के लिए प्रसिद्ध हैं। मांगणियार समाज के लोग विशेष अवसरों और उत्सवों पर गीत प्रस्तुत करते हैं।
21. निम्न में से भावभट्ट द्वारा लिखित संगीत ग्रन्थ नहीं है?
- (A) संगीत रत्नाकर
- (B) अनूप संगीत विलास
- (C) अनूप संगीत रत्नाकर
- (D) अनूप रागमाला
भावभट्ट बीकानेर के महाराजा अनूप सिंह के दरबारी कवि थे। उन्होंने अनूप संगीत विलास, अनूप संगीत रत्नाकर और अनूप रागमाला जैसे संगीत ग्रंथ लिखे। जबकि संगीत रत्नाकर के रचयिता शारंगदेव थे।
22. संगीत रत्नाकर के रचयिता है?
- (A) शारंग देव
- (B) भावभट्ट
- (C) कुमार गंधर्व
- (D) चाँद खाँ
संगीत रत्नाकर के रचयिता शारंगदेव थे। यह ग्रंथ 13वीं शताब्दी में लिखा गया और इसे भारतीय संगीत का एक आधारभूत शास्त्र माना जाता है। इसमें राग, वाद्ययंत्र और नृत्य की विस्तृत जानकारी दी गई है।
23. निम्न में से असत्य युग्म है-संगीत ग्रंथ — रचनाकार
- (A) स्वरमेल कलानिधि – रामामात्या
- (B) संगीत परिजात – अहोबल
- (C) स्वर सागर – चाँद खाँ
- (D) संगीत सागर – भावभट्ट
संगीत सागर के रचयिता गणपत भारती थे, जो सवाई प्रतापसिंह के काव्य गुरु थे। जबकि स्वरमेल कलानिधि रामामात्या, संगीत परिजात अहोबल और स्वर सागर चाँद खाँ द्वारा रचित हैं।
24. राजस्थान की विख्यात गायिका गोहर बाई की पुत्री, जो राजस्थान की प्रसिद्ध मांड गायिका हैं, का क्या नाम है?
- (A) गवरी देवी
- (B) माँगी बाई
- (C) अल्लाह जिलाई बाई
- (D) बन्नो बेगम
राजस्थान की प्रसिद्ध गायिका गोहर बाई की पुत्री बन्नो बेगम थीं। वे जयपुर दरबार की प्रसिद्ध मांड गायिका के रूप में जानी जाती हैं। बन्नो बेगम ने मांड गायकी को नई ऊँचाई दी और इसे लोकप्रिय बनाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया।
25. निम्न में से कौनसा संगीत ग्रंथ पुण्डरीक विठ्ठल द्वारा रचित है?
- (A) रागमाला
- (B) रागमंजरी
- (C) नर्तन निर्णय
- (D) उक्त सभी
पुण्डरीक विठ्ठल एक महान संगीतज्ञ और ग्रंथकार थे। उनकी प्रमुख रचनाओं में रागमाला, रागमंजरी, नर्तन निर्णय और सद्राग चन्द्रोदयशामिल हैं। इन ग्रंथों में राग-रागनियों का विस्तृत वर्णन और संगीत की विविध विधाओं की चर्चा की गई है।
26. मांड गायिकी का उद्गम राजस्थान में किस क्षेत्र से हुआ है?
- (A) जैसलमेर
- (B) जयपुर
- (C) करौली
- (D) उदयपुर
मांड गायिकी का उद्गम जैसलमेर क्षेत्र से हुआ। 10वीं-11वीं शताब्दी में जैसलमेर को मांड क्षेत्र कहा जाता था। मांड गायकी श्रृंगार प्रधान होती है और इसे शास्त्रीय और लोक संगीत की मिश्रित शैली माना जाता है।
27. राजस्थान में हवेली संगीत कहाँ का प्रसिद्ध है?
- (A) रामदेवरा
- (B) पुष्कर
- (C) नाथद्वारा
- (D) महावीर जी
राजस्थान में नाथद्वारा हवेली संगीत के लिए प्रसिद्ध है। विदेशी आक्रमणों के कारण जब मंदिर तोड़े गए तो घरों और हवेलियों में मंदिर स्थापित किए गए, जहाँ भक्ति संगीत गाया जाने लगा। इसी से हवेली संगीत की परंपरा शुरू हुई।
28. राजस्थान में किस स्थान की ताल बंदी गायकी प्रसिद्ध है?
- (A) टोंक
- (B) सवाईमाधोपुर
- (C) उदयपुर
- (D) भीलवाड़ा
ताल बंदी गायकी सवाईमाधोपुर क्षेत्र की प्रसिद्ध गायन शैली है। औरंगजेब के समय संगीत पर पाबंदी लगने पर विस्थापित कलाकारों ने यहाँ यह शैली विकसित की। आगे चलकर यह करौली, धौलपुर और भरतपुर में भी लोकप्रिय हुई।
29. सदीक खां मांगणियार लोककला व अनुसंधान परिषद् (लोकरंग) कहाँ पर स्थित है?
- (A) जयपुर
- (B) बाड़मेर
- (C) उदयपुर
- (D) जैसलमेर
प्रसिद्ध गायक और खड़ताल वादक सदीक खां की स्मृति में 2002 में जयपुर में सदीक खां मांगणियार लोककला एवं अनुसंधान परिषद् (लोकरंग) की स्थापना की गई। यह संस्था लोककला और संगीत के संरक्षण व अध्ययन का कार्य करती है।
30. ख्याल शैली के जयपुर घराने के प्रवर्तक कौन माने जाते हैं?
- (A) कल्लन खाँ
- (B) जहाँगीर खाँ
- (C) भूपत खाँ
- (D) छज्जू खाँ
जयपुर घराने के प्रवर्तक भूपत खाँ (मनरंग) माने जाते हैं। वे दिल्ली घराने के प्रवर्तक सदारंग के पुत्र थे। जयपुर घराना ख्याल गायकी की गहराई और विलंबित रागों की प्रस्तुति के लिए प्रसिद्ध है।
31. किस प्रसिद्ध मांड गायिका को कला के क्षेत्र में योगदान के लिए 1982 में पद्मश्री से सम्मानित किया गया?
- (A) अल्ला जिलाई बाई
- (B) गवरी बाई
- (C) उषा चौहान
- (D) मांगी बाई
अल्ला जिलाई बाई को उनके अद्भुत मांड गायन और लोक संगीत में योगदान के लिए वर्ष 1982 में पद्मश्री पुरस्कार से सम्मानित किया गया। उन्हें राजस्थान की मरू कोकिला कहा जाता है। बीकानेर की निवासी अल्ला जिलाई बाई का गायन इतना मधुर था कि वे राजस्थान की पहचान बन गईं। उनका गायन केवल लोकधुन नहीं था बल्कि उसमें राजस्थान की संस्कृति और परंपरा की आत्मा झलकती थी।
32. बीकानेर की गायिका अल्ला जिलाई बाई किस राग गाने के लिए प्रसिद्ध थी?
- (A) बसंती
- (B) जैजेवंती
- (C) मल्हार
- (D) माण्ड
अल्ला जिलाई बाई बीकानेर की प्रसिद्ध मांड गायिका थीं। उन्हें राजस्थान की मरू कोकिला भी कहा जाता है। उन्होंने केसरिया बालम आओ नी पधारो म्हारे देश जैसे प्रसिद्ध गीत को गाकर अमर बना दिया। वे गंगासिंह के दरबार की राजगायिका थीं और उनके गुरु हुसैन बक्श लंगड़े थे। वे मांड के अलावा ठुमरी, ख्याल और दादरा भी गाती थीं।
33. निम्न में से किसे मरूभूमि की कोकिला कहा जाता है?
- (A) गवरी देवी
- (B) मांगी बाई
- (C) बन्नो बेगम
- (D) अल्ला जिलाई बाई
अल्ला जिलाई बाई को मरूभूमि की कोकिला कहा जाता है। इनका जन्म 1 फरवरी 1902 को बीकानेर के जयसिंह देसरा गाँव में हुआ था। राजस्थान के लोकसंगीत में उनके योगदान को हमेशा याद किया जाता है। गवरी देवी को राजस्थान कोकिला कहा जाता है, जबकि अल्ला जिलाई बाई को उनके मांड गायन के कारण मरुभूमि की कोकिला के रूप में विशेष पहचान मिली।
34. केसरिया बालम आओ नी पधारो म्हारे देश' को अल्ला जिलाई बाई ने किस राग में गाया?
- (A) भोपाली
- (B) पीलू
- (C) मांड
- (D) मेघ
राजस्थान की प्रसिद्ध लोकगायिका अल्ला जिलाई बाई ने केसरिया बालम आओ नी पधारो म्हारे देश गीत को मांड राग में गाया। यह गीत आज राजस्थान की पहचान बन चुका है। अल्ला जिलाई बाई के अन्य प्रसिद्ध गीतों में बाईसा रा बीरा, काली काजलिये री रेख और झालो दियो जाय शामिल हैं। उन्होंने मांड के साथ ठुमरी, ख्याल और दादरा भी गाए।
35. पंडित जसराज गायकी से संबंधित हैं।
- (A) मौद
- (B) मेवाती
- (C) खयाल
- (D) इनमें से कोई नहीं
पंडित जसराज भारतीय शास्त्रीय संगीत के मेवाती घराने से जुड़े थे। इस घराने के संस्थापक घग्घे नजीर खां थे, जो जोधपुर के महाराजा जसवंत सिंह के दरबारी गायक थे। पंडित जसराज को 1975 में पद्मश्री और 2000 में पद्म विभूषण से सम्मानित किया गया। उन्हें मारवाड़ संगीत रत्न पुरस्कार भी मिला। 17 अगस्त 2020 को अमेरिका के न्यूजर्सी में उनका निधन हुआ।
36. ओल्यू' राजस्थानी लोक जीवन के किस अवसर से संबंधित है?
- (A) पुत्र जन्मोत्सव गीत
- (B) पुत्री विवाह का विदाई गीत
- (C) होली पर किया जाने वाला लोक नृत्य
- (D) बारात की आगवानी का गीत
राजस्थान का प्रसिद्ध गीत ओल्यू पुत्री के विवाह के समय उसके विदाई अवसर पर गाया जाता है। इसमें घर की बेटियों के विदा होते समय माँ और परिवार की भावनाओं को प्रकट किया जाता है। यह गीत लोकजीवन की संवेदनाओं और रिश्तों की गहराई को दर्शाता है। राजस्थान की लोकसंस्कृति में ओल्यू गीत बेटी की विदाई का मार्मिक चित्रण करता है।
37. निम्नलिखित में से किस संगीत का संबंध राजस्थान से नहीं है?
- (A) बाउल
- (B) मांगणियार
- (C) भोपा
- (D) लंगा
बाउल संगीत का संबंध राजस्थान से नहीं बल्कि बंगाल क्षेत्र से है। राजस्थान में प्रमुख रूप से मांगणियार, भोपा और लंगा परंपराएँ पाई जाती हैं। मांगणियार जाति के लोग कमायचा बजाते हैं, भोपा देवनारायण जी की फड़ गाते समय रावणहट्टा बजाते हैं और लंगा समुदाय सुरिंदा, मुरली और सतारा जैसे वाद्य यंत्रों का प्रयोग करता है।
38. करौली क्षेत्र में 'कैला देवी' की आराधना में गाए जाने वाले गीत हैं-
- (A) लाँगुरिया
- (B) हींडो
- (C) इंडोणी
- (D) लावणी
करौली क्षेत्र के प्रसिद्ध कैला देवी मेले में भक्त लाँगुरिया गीत गाते हैं। यह चैत्र शुक्ल अष्टमी को आयोजित मेले का प्रमुख हिस्सा होता है। इन गीतों में देवी की स्तुति और भक्ति की भावना झलकती है। मेले के दौरान जोगनिया नृत्य भी किया जाता है, जो स्थानीय लोकसंस्कृति का हिस्सा है।
39. राजस्थान के पंडित विश्वमोहन भट्ट का संबंध किस वाद्ययंत्र से है?
- (A) मोहन वीणा
- (B) सारंगी
- (C) कामायचा
- (D) खड़ताल
पंडित विश्वमोहन भट्ट ने पश्चिमी गिटार में बदलाव करके एक नया वाद्ययंत्र तैयार किया, जिसे मोहन वीणा कहा जाता है। यह वीणा, सरोद और सितार का सुंदर मिश्रण है। पंडित विश्वमोहन भट्ट ने इस वाद्ययंत्र से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर राजस्थान का नाम रोशन किया। उन्हें अपने योगदान के लिए ग्रैमी पुरस्कार से भी सम्मानित किया गया है।
40. निम्नलिखित में से कौन राजस्थान के प्रसिद्ध गायक हैं?
- (A) तुलसीदास
- (B) जुबेन गर्ग
- (C) मामे खान
- (D) सुंदरराजन
मामे खान राजस्थान के जैसलमेर जिले के सत्तु गाँव के निवासी और प्रसिद्ध लोकगायक हैं। वे मांगणियार परंपरा से जुड़े हैं। उन्होंने बॉलीवुड फिल्मों जैसे मिरज्या और सोन चिरैया में गायन किया है। वर्ष 2016 में उन्हें GIMA अवॉर्ड बेस्ट ट्रेडिशनल फोक सॉन्ग के लिए मिला। आज वे राजस्थान की लोकधुनों को वैश्विक मंच पर ले जा रहे हैं।
41. मांगणियारों द्वारा प्रयुक्त मुख्य वाद्य यंत्र कौनसा है?
- (A) कामायचा
- (B) जन्तर
- (C) रावणहत्था
- (D) मांदल
मांगणियार समुदाय राजस्थान के पश्चिमी भाग में विशेष रूप से जैसलमेर और बाड़मेर जिलों में पाया जाता है। ये लोकसंगीत और भजनों के लिए प्रसिद्ध हैं। मांगणियारों का मुख्य वाद्य यंत्र कामायचा है, जो एक प्राचीन तारवाद्य है। इसके अलावा वे ढोलक, खड़ताल और अन्य वाद्य यंत्र भी प्रयोग करते हैं, लेकिन उनकी पहचान कामायचा बजाने और गाने से ही होती है।
42. गवरी देवी किस गायन शैली से संबद्ध थी?
- (A) मांगणियार गायन
- (B) लंगा गायन
- (C) हवेली संगीत
- (D) मांड गायन
गवरी देवी राजस्थान की प्रसिद्ध मांड गायिका थीं। उन्हें मरू कोकिला की उपाधि भी मिली। वे पाली जिले से थीं और भैरवी युक्त मांड गाने में सिद्धहस्त थीं। उनकी गायकी ने राजस्थान की लोक संस्कृति को वैश्विक पहचान दिलाई। 2013 में उन्हें राजस्थान रत्न पुरस्कार से सम्मानित किया गया। मांड गायन में उनकी विशेष पकड़ थी।
43. राजस्थान के किस प्रसिद्ध भजन गायक को 2020 में पद्मश्री दिया गया है?
- (A) मामे खान
- (B) मुन्ना मास्टर
- (C) गणपत लाल डांगी
- (D) सद्दीक खान
जयपुर के बगरू निवासी मुन्ना मास्टर एक प्रसिद्ध भजन गायक हैं। इन्हें 2020 में पद्मश्री पुरस्कार से सम्मानित किया गया। मुन्ना मास्टर ने अपनी मधुर और भक्तिपूर्ण गायकी से लाखों लोगों के हृदय को स्पर्श किया। उनकी आवाज़ राजस्थान की भक्ति परंपरा को जीवंत बनाए रखती है।
44. बीकानेर की गायिका अल्लाह जिलाई बाई कौनसी राग गाने के लिए प्रसिद्ध थी?
- (A) मांगणियार गायकी
- (B) माण्ड गायकी
- (C) लंगा गायकी
- (D) तालबंदी गायकी
अल्ला जिलाई बाई बीकानेर की प्रसिद्ध मांड गायिका थीं। उन्हें राजस्थान की मरू कोकिला कहा जाता है। उनका सबसे प्रसिद्ध गीत केसरिया बालम आओ नी है, जो मांड राग में गाया गया है। वे गंगासिंह के दरबार की राजगायिका थीं और हुसैन बक्श लंगड़े की शिष्या थीं। मांड के अलावा उन्होंने ठुमरी, ख्याल और दादरा भी गाए।
45. मामे खान को 2016 में कौनसा अवॉर्ड मिला?
- (A) पद्मश्री
- (B) GIMA
- (C) पद्मभूषण
- (D) राजस्थान रत्न
मामे खान, जैसलमेर के सत्तु गाँव के निवासी और मांगणियार लोकगायक, को वर्ष 2016 में GIMA अवॉर्ड (ग्लोबल इंडियन म्यूजिक अवॉर्ड) बेस्ट ट्रेडिशनल फोक सॉन्ग के लिए मिला। उन्होंने फिल्मों जैसे मिरज्या और सोन चिरैया में अपनी गायकी से पहचान बनाई। आज वे राजस्थान के लोकसंगीत को विश्व पटल तक पहुँचा रहे हैं।
46. किसे 'मरुभूमि की कोकिला' कहा जाता है?
- (A) मांगी बाई
- (B) गवरी बाई
- (C) अल्लाह जिलाई बाई
- (D) बन्नो बेगम
अल्ला जिलाई बाई को मरुभूमि की कोकिला कहा जाता है। वे बीकानेर की निवासी थीं और अपनी मधुर मांड गायकी के लिए प्रसिद्ध थीं। उनका जन्म 1902 में हुआ था और उन्होंने अपने गीतों से मरुभूमि की संस्कृति और भावनाओं को जीवंत किया। उनके स्वर आज भी राजस्थान के लोक संगीत की धरोहर माने जाते हैं।
47. कंठगायन की कला में प्रतिष्ठित किस कलाकार को 2012 में 'राजस्थान रत्न' से सम्मानित किया गया?
- (A) जगजीत सिंह
- (B) लक्ष्मी कुमारी चूंडावत
- (C) कोमल कोठारी
- (D) पंडित उदय शंकर
प्रसिद्ध गजल गायक जगजीत सिंह का जन्म श्रीगंगानगर में हुआ था। उन्हें 2003 में पद्म भूषण और 2012 में (मरणोपरांत) राजस्थान रत्न से सम्मानित किया गया। वे अपनी गजलों और कंठ संगीत के लिए विश्वभर में लोकप्रिय रहे। उनकी आवाज़ ने गजल गायकी को एक नया आयाम दिया।
48. लोक संगीत की वह जनजाति, जो मुख्यतः मारवाड़ क्षेत्र में सर्वाधिक पाई जाती है?
- (A) कर्जर
- (B) भवाई
- (C) मिरासी
- (D) जोगी
राजस्थान के मिरासी समुदाय को लोक संगीत की एक महत्वपूर्ण जाति माना जाता है। ये विशेष रूप से मारवाड़ क्षेत्र में पाए जाते हैं। इनका मुख्य पेशा सारंगी वादन और गीत गाना है। मिरासी समाज ने राजस्थान के लोकसंगीत को संरक्षित और लोकप्रिय बनाने में बड़ा योगदान दिया है।
49. केसरिया बालम आवो नी पधारो म्हारे देश' को कौन से राग में सर्वाधिक प्रसिद्धि मिली?
- (A) मांड
- (B) मारू
- (C) सोरठ
- (D) सिन्धु
राजस्थान का प्रसिद्ध लोकगीत केसरिया बालम आओ नी पधारो म्हारे देश मांड राग में गाया जाता है। इसे सबसे अधिक लोकप्रियता अल्ला जिलाई बाई ने दी। यह गीत आज राजस्थान की संस्कृति और अतिथि सत्कार का प्रतीक माना जाता है। मांड गायकी ने इस गीत को अमर बना दिया और यह पूरे भारत में प्रसिद्ध हो गया।
50. राजस्थान की एकमात्र ध्रुपद गायिका है?
- (A) सोहन देवी
- (B) मधुभट्ट तैलंग
- (C) शंकुतला पंवार
- (D) मांगी बाई
राजस्थान की एकमात्र प्रसिद्ध ध्रुपद गायिका मधु भट्ट तैलंग हैं। उन्होंने ध्रुपद गायन की परंपरा को नई ऊँचाइयों तक पहुँचाया। ध्रुपद गायन भारतीय शास्त्रीय संगीत की प्राचीनतम विधा है, जिसमें राग की गहराई और आध्यात्मिक भावनाएँ प्रकट होती हैं। मधु भट्ट तैलंग ने देश-विदेश में ध्रुपद प्रस्तुत कर राजस्थान का नाम गौरवान्वित किया।
51. जोधपुर घराने के प्रवर्तक है?
- (A) रज्जब अली
- (B) भूपत खाँ
- (C) सदारंग खाँ
- (D) रमजान खान
जोधपुर घराने को रंगीला घराना भी कहा जाता है। इसके प्रवर्तक रमजान खान रंगीले थे, जो जोधपुर के गायक इमाम बक्श के शिष्य थे। इस घराने में संगीत की विविध शैलियों का समावेश हुआ और इसे खासतौर पर अपनी लय और रागों की अद्भुत प्रस्तुति के लिए पहचाना जाता है।
52. किस गायन शैली में 6 राग व 36 रागनियों का प्रयोग होता है?
- (A) लंगा गायकी
- (B) तालबंदी गायकी
- (C) मांगणियार गायकी
- (D) फड़ गायकी
मांगणियार गायकी में 6 राग और 36 रागनियों का प्रयोग होता है। मांगणियार जाति मूलतः सिंध प्रांत की मुस्लिम जाति है और वे शादियों, पर्व-त्योहारों और अन्य शुभ अवसरों पर गाते हैं। मांगणियार गायन पर्यटन की दृष्टि से भी प्रमुख है। इनके मुख्य वाद्य यंत्र कामायचा और खड़ताल हैं, जो इनके संगीत को अलग पहचान देते हैं।
53. मेवाड़ के महाराणा कुम्भा की पुत्री, जो संगीतज्ञ थी, इन्हें वागीश्वरी देवी भी कहा गया है-
- (A) कृष्णा कुमारी
- (B) रमा बाई
- (C) मान बाई
- (D) चन्द्र कुंवरी
मेवाड़ के प्रसिद्ध शासक महाराणा कुम्भा की पुत्री रमा बाई एक महान संगीतज्ञ थीं। उन्हें संगीत की विद्वता और गायन-कला के कारण वागीश्वरी देवी की उपाधि मिली। महाराणा कुम्भा स्वयं भी संगीत और नाटक के बड़े संरक्षक थे, और उनकी पुत्री ने इस परंपरा को और समृद्ध किया।
54. प्रसिद्ध संगीतज्ञ 'पुण्डरिक विठ्ठल' जयपुर के किस शासक के आश्रित कवि थे?
- (A) सवाई प्रताप सिंह
- (B) सवाई जय सिंह
- (C) माधोसिंह प्रथम
- (D) माधोसिंह द्वितीय
प्रसिद्ध संगीतज्ञ पुण्डरिक विठ्ठल जयपुर के शासक माधोसिंह द्वितीय के आश्रित कवि थे। उनकी प्रमुख रचनाएँ रागमाला, राजमंजरी, नर्तन निर्णय और सद्राग चन्द्रोदय हैं। इन ग्रंथों ने भारतीय संगीत की परंपरा को संरक्षित और समृद्ध किया। वे शास्त्रीय संगीत के महान विद्वान माने जाते हैं।
55. प्रसिद्ध पाकिस्तानी गजल गायक मेहंदी हसन का सम्बन्ध झुंझुनूं के किस गाँव से है?
- (A) मंडावा
- (B) बिसाऊ
- (C) लूणा
- (D) भोडकी
प्रसिद्ध गजल गायक मेहंदी हसन का जन्म झुंझुनूं जिले के लूणा गाँव में हुआ था। वे बाद में पाकिस्तान चले गए, लेकिन उनकी गायकी की जड़ें राजस्थान की मिट्टी से जुड़ी थीं। उन्हें गजल सम्राट कहा जाता है। उनकी गजलें आज भी संगीत प्रेमियों को मोहित करती हैं और विश्वभर में उनकी लोकप्रियता कायम है।
56. बन्नो बेगम का संबंध किस लोक गायन शैली से है?
- (A) माँड
- (B) तालबंदी
- (C) मांगणियार
- (D) लंगा
बन्नो बेगम जयपुर की प्रसिद्ध मांड गायिका थीं। वे जयपुर दरबार की सुप्रसिद्ध नर्तकी गौहरजान की पुत्री थीं। बन्नो बेगम ने मांड गायकी को नई पहचान दी और राजस्थान की संगीत परंपरा को समृद्ध किया। उनकी गायकी में शास्त्रीयता और लोक तत्व का सुंदर संगम देखने को मिलता है।
57. निम्न में से असंगत युग्म है-
- (A) मांड गायकी - बीकानेर
- (B) मांगणियार गायकी - बाड़मेर, बालोतरा
- (C) तालबंदी गायकी - जैसलमेर
- (D) हवेली संगीत - राजसमंद
तालबंदी गायकी, जिसे संगीत दंगल भी कहा जाता है, मुख्यतः सवाई माधोपुर क्षेत्र में प्रचलित है, न कि जैसलमेर में। मांड गायकी बीकानेर, मांगणियार गायकी बाड़मेर-बालोतरा और हवेली संगीत नाथद्वारा (राजसमंद) से सही जुड़ा हुआ है। इसलिए तालबंदी गायकी – जैसलमेर युग्म असंगत है।
58. निम्न में से अलाउद्दीन खिलजी के दरबारी संगीतज्ञ थे?
- (A) अबुल फजल
- (B) अमीर खुसरो
- (C) हम्मीर देव
- (D) भावभट्ट
दिल्ली सल्तनत के सुल्तान अलाउद्दीन खिलजी के दरबार में अमीर खुसरो प्रमुख संगीतज्ञ और कवि थे। उन्होंने कई रागों की रचना की और तबले व सितार जैसे वाद्य यंत्रों के विकास में भी योगदान दिया। अमीर खुसरो को हिन्दुस्तानी संगीत का जनक भी कहा जाता है।
59. लंगा गायकी में कौनसे वाद्ययंत्र का प्रयोग किया जाता है?
- (A) सारंगी
- (B) कामायचा
- (C) अलगोजा
- (D) उपरोक्त सभी
लंगा गायकी राजस्थान की प्रसिद्ध लोकगायन परंपरा है, जिसमें सारंगी, कामायचा और अलगोजा जैसे वाद्य यंत्रों का प्रयोग किया जाता है। इनके गीतों में सूफी और लोक दोनों का सुंदर समन्वय होता है। लंगा समुदाय की गायकी राजस्थान की सांस्कृतिक धरोहर का अभिन्न अंग है।
60. गीगला का बापू' या 'बिज्जु भाई' उपनाम से किस संगीत कलाकार को जाना जाता है?
- (A) गजानन्द वर्मा
- (B) मुन्ना मास्टर
- (C) पं. विश्व मोहन भट्ट
- (D) गणपत लाल डांगी
राजस्थान के प्रसिद्ध लोकनाट्य और गायन कलाकार गणपत लाल डांगी को गीगला का बापू और बिज्जु भाई के नाम से जाना जाता है। उन्होंने अभिनय, गायन और लोकनाट्य की त्रिवेणी को जीवंत किया। उनके कार्यक्रम लोकजीवन की झलक प्रस्तुत करते थे और वे राजस्थान की लोक संस्कृति के संवाहक माने जाते हैं।
61. ध्रुपद गायकी के चार खण्डों में से असंगत युग्म है?
- (A) गोहरहारी वाणी – तानसेन
- (B) डागुर वाणी – बृजनंद डागर
- (C) खण्डारवाणी – समोखन सिंह
- (D) नौहरवाणी – गजसिंह
नौहरवाणी के जनक श्रीचन्द नौहर को माना जाता है और इसकी उत्पत्ति जयपुर में हुई। अन्य युग्म सही हैं – गोहरहारी वाणी के प्रवर्तक तानसेन, डागुर वाणी के बृजनंद डागर और खण्डारवाणी के प्रवर्तक समोखन सिंह माने जाते हैं। इसलिए नौहरवाणी – गजसिंह युग्म असंगत है।
62. बीनकार घराना के प्रवर्तक 'रज्जब अली बीनकार' किस शासक के दरबारी संगीतकार थे?
- (A) सवाई रामसिंह द्वितीय
- (B) मानसिंह
- (C) गजसिंह
- (D) रामसिंह
रज्जब अली बीनकार राजस्थान के प्रसिद्ध बीनकार घराना के प्रवर्तक माने जाते हैं। वे जयपुर के शासक सवाई रामसिंह द्वितीय के दरबारी संगीतकार थे। उन्होंने वीणा वादन की परंपरा को समृद्ध किया और इस घराने को देशभर में ख्याति दिलाई।
63. 1965 के भारत-पाक युद्ध के दौरान राष्ट्रीय स्तर पर प्रसिद्ध हुआ आकाशवाणी पर प्रसारित धारावाहिक 'लड़े सूरमा आज जी' किस संगीतज्ञ द्वारा रचित था?
- (A) गणपत लाल डांगी
- (B) पं. विश्व मोहन भट्ट
- (C) जगजीत सिंह
- (D) रेशमा
जोधपुर के गणपत लाल डांगी द्वारा रचित लड़े सूरमा आज जी धारावाहिक 1965 के भारत-पाक युद्ध के समय आकाशवाणी पर प्रसारित हुआ और राष्ट्रीय स्तर पर प्रसिद्ध हुआ। गणपत लाल डांगी को अभिनय, गायन और लोकनाट्य की त्रिवेणी कहा जाता है। उनके कार्यक्रमों ने युद्ध के समय जनता में उत्साह और जोश भरा।
64. अल्लाह जिलाई बाई के बारे में असत्य कथन है-
- (A) बचपन में इन्होंने उस्ताद हुसैन बक्श से शिक्षा ली थी।
- (B) महाराजा गंगासिंह ने 'बीकानेर म्यूजिकल स्कूल' में भर्ती करवाया।
- (C) इन्हे 1982 में 'पद्मश्री' सम्मान मिला।
- (D) 2010 में इन पर 5 रु. का डाकटिकट जारी हुआ।
अल्लाह जिलाई बाई पर 29 दिसम्बर 2003 को 5 रुपये का डाक टिकट जारी किया गया था, न कि 2010 में। वे बीकानेर की निवासी और प्रसिद्ध मांड गायिका थीं। बचपन से ही उन्हें उस्ताद हुसैन बक्श से संगीत की शिक्षा मिली और महाराजा गंगासिंह ने उन्हें बीकानेर म्यूजिकल स्कूल में भर्ती करवाया। इन्हें 1982 में पद्मश्री पुरस्कार भी मिला।
65. पं. विश्वमोहन भट्ट के बारे में असत्य कथन है-
- (A) ये जयपुर के प्रसिद्ध सितार वादक है।
- (B) इन्होंने नई राग 'गौरीम्मा' का सृजन किया।
- (C) इन्होंने 'मोहनवीणा' नाम का नया वाद्य यंत्र बनाया।
- (D) इन्हे 2017 में 'पद्मश्री' पुरस्कार दिया गया था।
पं. विश्वमोहन भट्ट को 2002 में पद्मश्री और 2017 में पद्मभूषण पुरस्कार दिया गया था। वे जयपुर के प्रसिद्ध वादक हैं और उन्होंने मोहन वीणा नामक वाद्य यंत्र का निर्माण किया। साथ ही उन्होंने गौरीम्मा नामक नई राग की रचना भी की। उनकी संगीत कला ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत का नाम रोशन किया।
66. मांगणियार समुदाय में कितने प्रकार के गायक होते हैं?
- (A) दो
- (B) तीन
- (C) एक
- (D) चार
मांगणियार समुदाय में गायक दो प्रकार के होते हैं। पहले वे जो केवल हिंदुओं के अवसरों पर गाते हैं और दूसरे वे जो हिन्दू और मुसलमान दोनों समुदायों के अवसरों पर गाते हैं। मांगणियार लोकसंगीत राजस्थान की सांस्कृतिक परंपरा का महत्वपूर्ण हिस्सा है और ये कामायचा, ढोलक और खड़ताल जैसे वाद्य यंत्रों का प्रयोग करते हैं।
67. श्रृंगार हार' नामक रचना किस संगीतज्ञ की है?
- (A) हम्मीरदेव
- (B) महाराणा कुम्भा
- (C) सवाई प्रतापसिंह
- (D) पृथ्वीसिंह
प्रसिद्ध संगीतज्ञ हम्मीरदेव ने श्रृंगार हार नामक रचना की। वे भारतीय संगीत के विद्वान थे और उनकी रचनाओं ने शास्त्रीय संगीत को विशेष योगदान दिया। श्रृंगार रस पर आधारित इस रचना ने संगीत प्रेमियों में विशेष स्थान बनाया।
68. उदयपुर के किस प्रसिद्ध संगीतज्ञ को 'भारतीय बैले का जनक' कहा जाता है?
- (A) पं. उदयशंकर
- (B) गजानन वर्मा
- (C) जगजीत सिंह
- (D) मुन्ना मास्टर
पं. उदयशंकर को भारतीय बैले का जनक कहा जाता है। वे उदयपुर के प्रसिद्ध नर्तक और संगीतज्ञ थे। उन्होंने नृत्य और संगीत को आधुनिक रूप देकर बैले शैली का निर्माण किया। उनके कार्यों ने भारतीय नृत्य और संगीत को नई पहचान दिलाई और पश्चिमी कला-जगत तक पहुँचाया।
69. जयपुर के किस शासक ने संगीत सम्मेलन कराकर 'राधा गोविन्द संगीत सार' ग्रंथ की रचना करवाई थी?
- (A) सवाई जयसिंह
- (B) सवाई प्रतापसिंह
- (C) सवाई ईश्वरी सिंह
- (D) माधोसिंह द्वितीय
सवाई प्रतापसिंह जयपुर के कला और संस्कृति प्रेमी शासक थे। उन्होंने संगीत का विशाल सम्मेलन आयोजित किया और राधा गोविन्द संगीत सार नामक ग्रंथ की रचना करवाई। यह ग्रंथ संगीत के क्षेत्र में जयपुर दरबार की समृद्ध परंपरा को दर्शाता है।
70. किस शासक को 'अभिनव भरताचार्य' व 'नंदिकेश्वरावतार' की उपाधियाँ मिली?
- (A) महाराणा कुम्भा
- (B) सवाई प्रतापसिंह
- (C) बीसलदेव
- (D) हम्मीदेव चौहान
मेवाड़ के शासक महाराणा कुम्भा को संगीत और कला में उनके योगदान के कारण अभिनव भरताचार्य और नंदिकेश्वरावतार की उपाधियाँ मिलीं। उन्होंने संगीतराज, संगीत मीमांसा, सूड़ प्रबंध और रसिकप्रिया जैसी रचनाएँ कीं। उनकी विद्वता और संगीत प्रेम ने उन्हें भारतीय संस्कृति में अमर कर दिया।
71. सवाई प्रतापसिंह के बारे में असत्य कथन है-
- (A) सवाई प्रतापसिंह 'ब्रजनिधि' के नाम से कविताएँ लिखते थे।
- (B) इन्होंने 'राधा गोविन्द संगीत सार' ग्रन्थ लिखा।
- (C) इनके दरबार में 22 संगीतज्ञों व विद्वानों की मंडली थी।
- (D) सवाई प्रतापसिंह जयपुर के शासक थे।
सवाई प्रतापसिंह जयपुर के शासक थे और संगीत व कला के बड़े संरक्षक थे। वे स्वयं कविताएँ ब्रजनिधि उपनाम से लिखते थे। उनके दरबार में 22 संगीतज्ञ और विद्वानों की मंडली रहती थी। लेकिन राधा गोविन्द संगीत सार की रचना उन्होंने स्वयं नहीं लिखी, बल्कि यह उनके विद्वान देवर्षि ब्रजपाल भट्ट द्वारा लिखी गई थी।
72. निम्न में से सवाई प्रतापसिंह का दरबारी संगीतज्ञ नहीं था?
- (A) देवर्षि द्वारकानाथ भट्ट
- (B) चाँद खाँ
- (C) गणपत भारती
- (D) भावभट्ट
सवाई प्रतापसिंह के दरबार में देवर्षि द्वारकानाथ भट्ट, चाँद खाँ और गणपत भारती जैसे विद्वान और संगीतज्ञ थे। लेकिन भावभट्ट उनके दरबारी संगीतज्ञ नहीं थे। जयपुर दरबार संगीत परंपरा और विद्वानों की मंडली के लिए प्रसिद्ध रहा।
73. तबला व सितार का आविष्कारक किसे माना जाता है?
- (A) बदायूँनी
- (B) गुलबदन बेगम
- (C) अबुल फजल
- (D) अमीर खुसरो
अमीर खुसरो को तबला और सितार का आविष्कारक माना जाता है। वे अलाउद्दीन खिलजी के दरबारी संगीतज्ञ थे। अमीर खुसरो ने भारतीय और ईरानी संगीत शैलियों का समन्वय करके नई परंपराओं को जन्म दिया। उन्होंने ही कव्वाली शैली की भी शुरुआत की, जो आज भी लोकप्रिय है।
74. नन्हें खाँ व सलीम खाँ का सम्बन्ध किस घराने से है?
- (A) आगरा घराना
- (B) दिल्ली घराना
- (C) बीनकार घराना
- (D) सेनिया घराना
नन्हें खाँ और सलीम खाँ का संबंध आगरा घराने से है। आगरा घराना ध्रुपद, धमार और ख्याल गायकी की प्रमुख परंपराओं में गिना जाता है। यह घराना अपनी गहरी आवाज़, आलाप और तानों की जटिलता के लिए प्रसिद्ध है।
75. दिल्ली घराने के प्रवर्तक माने जाते हैं?
- (A) सदारंग खाँ/नियामत खाँ
- (B) रमजान खाँ/रज्जू खाँ
- (C) बहराम खाँ
- (D) सूरत सेन
दिल्ली घराने के प्रवर्तक सदारंग खाँ (नियामत खाँ) माने जाते हैं। उन्होंने ख्याल गायकी को लोकप्रिय बनाया और इसे दरबारी शैली से जोड़कर नया रूप दिया। दिल्ली घराना ख्याल संगीत की शुद्धता और रागों की गहराई के लिए प्रसिद्ध है।
76. महताब खाँ को किस संगीत घराने का प्रर्वतक माना जाता है?
- (A) मथुरा
- (B) दिल्ली
- (C) जयपुर
- (D) आगरा
मथुरा घराना, जिसे ब्रज क्षेत्र का प्रमुख घराना कहा जाता है, इसके प्रवर्तक महताब खाँ थे। यह घराना अपनी विशिष्ट गायन शैली और ब्रज संस्कृति से जुड़े संगीत के लिए जाना जाता है। यहाँ भक्ति भाव से जुड़े राग और ध्रुपद विशेष रूप से प्रचलित थे।
77. रंगीला घराना कहाँ स्थित है?
- (A) जयपुर
- (B) जोधपुर
- (C) कोटा
- (D) उदयपुर
रंगीला घराना राजस्थान के जोधपुर में स्थित है। इसे जोधपुर घराना भी कहा जाता है। इसके प्रवर्तक रमजान खाँ रंगीले थे। इस घराने को रागों की विशिष्ट लय और ताल में प्रयोग के लिए प्रसिद्धि मिली।
78. मोतीराम ज्योतीराम, पं. जसराज व पं. मणिराम का सम्बन्ध किस संगीत घराने से है?
- (A) पटियाला
- (B) मेवाती
- (C) जयपुर
- (D) जोधपुर
मोतीराम ज्योतीराम, पं. मणिराम और पं. जसराज सभी मेवाती घराने से जुड़े थे। इस घराने की स्थापना घग्घे नजीर खाँ ने की थी। पं. जसराज ने मेवाती घराने को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ख्याति दिलाई।
79. निम्न में से किस जाति का मुख्य कार्य अपने यजमानों की वंशावलियाँ लिखना व उनका बखान करना है?
- (A) भाट
- (B) ढोली
- (C) भोपा
- (D) ढाढ़ी
भाट जाति का मुख्य कार्य अपने यजमानों की वंशावलियाँ लिखना और उनका बखान करना है। राजस्थान में भाट लोग सामाजिक और सांस्कृतिक परंपराओं के संरक्षक माने जाते हैं। वे विवाह और अन्य अवसरों पर वंश और कुल की महिमा का वर्णन करते हैं।
80. सेनिया घराना कहाँ स्थित है?
- (A) कोटा
- (B) जोधपुर
- (C) जयपुर
- (D) उदयपुर
सेनिया घराना का संबंध जयपुर से है। इसके प्रवर्तक तानसेन के पुत्र सूरत सेन माने जाते हैं। इसे सितारियों का घराना भी कहा जाता है। इस घराने में ध्रुपद गायन शैली विशेष रूप से गोहरवाणी और खण्डारवाणी में सिद्धहस्त रही। सेनिया घराना भारतीय संगीत इतिहास में एक महत्वपूर्ण स्थान रखता है।
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Mukesh Khunga
Mukesh Khunga को राजस्थान में आयोजित होने वाली विभिन्न प्रतियोगी एवं भर्ती परीक्षाओं के परीक्षा पैटर्न और प्रश्नों के स्वरूप की अच्छी समझ है। उनके मार्गदर्शन में यह अध्ययन सामग्री और MCQ content तैयार एवं review किया गया है। Read More...








