राजस्थान के प्रमुख लोक नाट्य MCQ Questions with Answers

राजस्थान के प्रमुख लोक नाट्य MCQ in Hindi | महत्वपूर्ण प्रश्न उत्तर सहित

इस पोस्ट में राजस्थान की कला एवं संस्कृति के टॉपिक राजस्थान के प्रमुख लोक नाट्य से संबंधित Latest व पूर्णतः updated महत्वपूर्ण MCQ प्रश्न दिए गए हैं। इनमें ढाड़ी, स्वांग, रम्मत, ख्याल, भवाई, गवरी आदि से सम्बंधित महत्वपूर्ण जानकारियों को व्याख्या सहित शामिल किया गया है।

ये महत्वपूर्ण MCQ प्रश्न RPSC, RSSB, RAS, Patwar, Police, LDC, VDO, REET तथा राजस्थान राज्य की अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए उपयोगी हैं। इनमें विषयवार प्रश्न, सही उत्तर एवं विस्तृत व्याख्या शामिल हैं।

  • Subject: राजस्थान की कला एवं संस्कृति
  • Topic: राजस्थान के प्रमुख लोक नाट्य
  • Last Updated:
  • Content Type: Multiple Choice Questions (MCQ)
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Rajputana Diary – Rajasthan GK Faculty & Content Team (Since 2021)

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1. चारबैत' कहाँ का लोकनाट्य है?

A भरतपुर
B जयपुर
C टोंक
D जालौर
📖 व्याख्या
चारबैत राजस्थान के टोंक शहर का प्रसिद्ध लोकनाट्य है। इसका स्वरूप संगीत दंगल जैसा होता है। मुख्य वाद्ययंत्र ढपली/डफ है और प्रस्तुति में कलाकार कव्वालों की तरह घुटनों के बल खड़े होकर गाते हैं। इसकी शुरुआत टोंक के नवाब फैजुल्ला खाँ के काल में करीम खाँ निहंग ने की थी। यह आज भी टोंक क्षेत्र की सांस्कृतिक पहचान है।

2. राजस्थान की बहुरूपिया कला को प्रसिद्धि दिलाने का श्रेय किसे जाता है?

A देवीलाल सामर
B जानकीलाल भांड
C लच्छीराम
D अल्लाह जिलाई बाई
📖 व्याख्या
राजस्थान की बहुरूपिया/स्वांग कला को अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने का श्रेय जानकीलाल भांड (भीलवाड़ा) को जाता है। इन्हें "मंकी मैन" भी कहा जाता है। इनकी प्रस्तुतियों में चाचा-चाची, सेठ-सेठानी, मेना-गुर्जरी जैसे किरदारों का जीवंत अभिनय मिलता है। साथ ही धनरूप भांडभी प्रमुख कलाकारों में गिने जाते हैं।

3. जयदयाल सोनी और चेतराम संबंधित हैं-

A हेला ख्याल से
B जयपुरी ख्याल से
C तुर्रा कलंगी ख्याल से
D शेखावटी ख्याल
📖 व्याख्या
जयदयाल सोनी और चेतराम का सम्बन्ध तुर्रा कलंगी ख्याल से है। यह ख्याल चित्तौड़गढ़ क्षेत्र में विशेष रूप से प्रचलित रहा है। इस परंपरा के अन्य प्रमुख कलाकारों में ओंकार सिंह, तारा चंद और हमीर बेग का नाम उल्लेखनीय है।

4. निम्नलिखित में से कौनसी राजस्थान में लोक नाट्य शैली नहीं है?

A ढाड़ी
B स्वांग
C रम्मत
D ख्याल
📖 व्याख्या
ढाड़ी राजस्थान की लोकनाट्य शैली नहीं है। यह पश्चिमी राजस्थान में प्रचलित एक संगीत परंपरा है, जिसमें सारंगी और रबाब का प्रयोग होता है। जबकि स्वांग/बहुरूपिया, रम्मत और ख्याल राजस्थान की प्रमुख लोक नाट्य शैलियाँ हैं।

5. निम्नलिखित में से कौनसा घटक भवाई शैली में लिखा गया है, जो राजस्थान में प्रसिद्ध है?

A अंजन सुंदरी
B मैना सुंदरी
C जस्मा ओडन
D रासधार
📖 व्याख्या
जस्मा ओडन भवाई शैली में लिखा गया है। भवाई मूलतः गुजरात का लोकनाट्य है, लेकिन यह राजस्थान के उदयपुर क्षेत्र में भी प्रसिद्ध है। इसमें स्त्री-पुरुष दोनों नृत्य करते हैं और ढोल का प्रयोग होता है। राजस्थान में इस शैली के प्रमुख कलाकार रूपसिंह, दयाराम और तारा भवाई रहे हैं।

6. एक पारंपरिक लोक नाट्य 'जसमा' के लिए पुनर्रचित कर मंचीय प्रस्तुति किसने दी?

A मणीराम व्यास ने
B शांता गांधी ने
C भानू भारती ने
D गोपीचंद ने
📖 व्याख्या
जसमा ओडन' मूलतः भवाई नाट्य पर आधारित रचना है। इसकी मंचीय प्रस्तुति शांता गांधी ने दी थी। उन्होंने इसे भारत ही नहीं बल्कि विदेशों में भी प्रस्तुत किया। भवाई गुजरात का प्रमुख लोकनाट्य है, लेकिन राजस्थान के सीमावर्ती जिलों में भी यह लोकप्रिय है।

7. जसमा ओडण का सम्बंध किस नाट्य विद्या से है?

A भवाई
B गवरी
C रम्मत
D रसधारी
📖 व्याख्या
जसमा ओडण का सम्बन्ध भवाई नाट्य से है। भवाई गुजरात की जाति 'भवाई' द्वारा प्रस्तुत किया जाने वाला लोकनाट्य है। इसमें व्यंग्य, हास्य और सामाजिक संदेश प्रधान होते हैं। राजस्थान में भी यह लोकप्रिय रहा और मशालों, ढोलक, सारंगी तथा झांझ जैसे वाद्ययंत्रों के साथ प्रस्तुत किया जाता है।

8. लोक नाट्यकार नानूराम किस ख्याल के मुख्य प्रवर्तक माने जाते हैं?

A शेखावटी ख्याल
B जयपुरी ख्याल
C हेला ख्याल
D कुचामनी ख्याल
📖 व्याख्या
नानूराम को शेखावटी ख्याल का मुख्य प्रवर्तक माना जाता है। उन्होंने हरिश्चंद्र, हीर-रांझा, ढोला-मारवण जैसे ख्याल रचे। उनकी रचनाओं ने शेखावटी क्षेत्र में इस लोकनाट्य परंपरा को नई पहचान दी।

9. तुर्रा कलंगी' लोक नाट्य के रचनाकार कौन हैं?

A अली बक्श और युनस अली
B रमजान और शोएब खान
C फैजुल्ला और करीम हसन
D शाह अली और तुक्कनगीर
📖 व्याख्या
तुर्रा कलंगी' लोक नाट्य के रचनाकार शाह अली और तुक्कनगीर माने जाते हैं। इसमें तुर्रा को शिव का प्रतीक और कलंगी को पार्वती का प्रतीक माना जाता है। कहा जाता है कि चन्देरी के शासक ने तुक्कनगीर को अपने मुकुट का तुर्रा और शाह अली को कलंगी भेंट की थी। इसी परंपरा से यह लोकनाट्य शुरू हुआ।

10. निम्नलिखित में से कौनसा युग्म सुमेलित नहीं है?

A कुचामनी ख्याल – लच्छीराम
B हेला ख्याल – हेलाशायर
C शेखावाटी ख्याल – नानूराम राणा
D अलीबक्शी ख्याल – करीम खाँ निहंग
📖 व्याख्या
अलीबक्शी ख्याल के प्रवर्तक अलवर रियासत के मुंडावर ठिकाने के राव राजा अलीबक्श माने जाते हैं। वहीं करीम खाँ निहंग टोंक क्षेत्र की प्रसिद्ध चारबैत कला के प्रवर्तक रहे हैं। ख्याल परंपराएँ राजस्थान की सांस्कृतिक धरोहर का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं, जिनमें ऐतिहासिक और पौराणिक कथाओं का गायन-नृत्य के साथ मंचन किया जाता है। इस कारण विकल्प D सुमेलित नहीं है।

11. निम्नलिखित में से कौन सा भीलों का प्रसिद्ध लोक-नाट्य है?

A रम्मत
B तमाशा
C स्वांग
D गवरी
📖 व्याख्या
भीलों का प्रमुख लोक-नाट्य गवरी है, जो मुख्यतः शिव और पार्वती से जुड़ी कथाओं पर आधारित है। इसे वर्षा ऋतु और पर्व-त्यौहारों के समय खेला जाता है। इसमें भील समुदाय के लोग वेशभूषा पहनकर नृत्य और नाट्य करते हैं। गवरी में धार्मिक तत्वों के साथ सामाजिक संदेश भी निहित रहता है, इसलिए यह राजस्थान की आदिवासी संस्कृति की पहचान है।

12. कुचामनी ख्याल से सम्बन्धित कौनसा कथन सही नहीं है?

A कुचामनी ख्याल के प्रवर्तक लच्छीराम है।
B इनमें पुरुष पात्र ही स्त्री चरित्र का अभिनय करते हैं।
C इसके कलाकार चेतराम, हमीद बेग, ताराचन्द प्रमुख हैं।
D इनमें नर्तक ही गायक का कार्य करते हैं।
📖 व्याख्या
कुचामनी ख्याल के प्रवर्तक लच्छीराम माने जाते हैं और इसमें पुरुष ही स्त्री पात्र की भूमिकाएँ निभाते हैं। इस ख्याल में नर्तक स्वयं गायक की भूमिका भी निभाते हैं। लेकिन चेतराम, हमीद बेग और ताराचंद तुर्रा कलंगी ख्याल के प्रसिद्ध कलाकार थे, न कि कुचामनी ख्याल के। इसलिए विकल्प C सही नहीं है और यह कथन असत्य है।

13. शांता गांधी द्वारा रचित नाटक 'जस्मा ओडन' किस गायन शैली में विश्व के कई देशों में मंचित किया जा चुका है?

A रम्मत शैली
B स्वांग शैली
C गवरी शैली
D भवाई शैली
📖 व्याख्या
जस्मा ओडन' गुजरात की भवाई शैली पर आधारित है। भवाई मूलतः हास्य और व्यंग्य प्रधान लोकनाट्य है, जो समाज की कुरीतियों पर चोट करता है। शांता गांधी ने इस नाटक को मंचीय रूप दिया और इसे भारत के साथ-साथ कई विदेशी मंचों पर भी प्रस्तुत किया। यह भवाई की लोकप्रियता और उसकी जीवंतता को दर्शाता है।

14. टुंटिया का सम्बंध किससे है?

A रम्मत
B विवाह
C मृत्यु
D ख्याल
📖 व्याख्या
टुंटिया का सम्बन्ध विवाह परंपरा से है। राजस्थान में विवाह के अवसर पर अलग-अलग रस्में और लोकगीत होते हैं, जिनमें टुंटिया का विशेष स्थान है। इसमें हंसी-ठिठोली, गीत और संगीत के माध्यम से विवाह समारोह का आनंद बढ़ाया जाता है। यह परंपरा ग्रामीण जीवन की सांस्कृतिक झलक प्रस्तुत करती है।

15. भीलों का प्रसिद्ध नाट्य, जो शिव तथा भस्मासुर की कथा पर आधारित है, उसे कहते हैं?

A भवाई नाट्य
B रम्मत
C गवरी या राई
D कन्हैया ख्याल
📖 व्याख्या
भीलों का लोकप्रिय नाट्य गवरी या राई कहलाता है। इसमें शिव और भस्मासुर की कथा का मंचन विशेष रूप से किया जाता है। यह नाट्य श्रावण और भाद्रपद महीनों में खेला जाता है। गवरी केवल मनोरंजन नहीं है, बल्कि धार्मिक आस्था और समुदाय की एकजुटता का प्रतीक भी है। इसमें गीत, नृत्य और अभिनय का सुंदर समन्वय दिखाई देता है।

16. राजस्थान में लोकनाट्य की सबसे लोकप्रिय विधा कौनसी है?

A ख्याल
B नौटंकी
C रामलीला
D रम्मत
📖 व्याख्या
राजस्थान में सबसे लोकप्रिय लोकनाट्य विधा ख्याल है। इसका विकास 18वीं सदी में हुआ। इसमें ऐतिहासिक और पौराणिक गाथाओं को काव्य रूप में प्रस्तुत किया जाता है। ख्याल की प्रस्तुति में गायक और नर्तक दोनों भाग लेते हैं और नगाड़ा, ढोलक, सारंगी जैसे वाद्ययंत्रों का प्रयोग किया जाता है। ख्याल ने राजस्थान की लोक संस्कृति को व्यापक पहचान दिलाई है।

17. किस कलाकार ने गोपीचन्द तथा हीर रांझा तमाशा प्रारम्भ किया?

A सदाशिव
B वासुदेव भट्ट
C जयदेव कलाली
D नानूराम
📖 व्याख्या
वासुदेव भट्ट ने गोपीचन्द और हीर-रांझा तमाशा की शुरुआत की थी। तमाशा एक पारंपरिक लोकनाट्य है जिसमें गान और अभिनय के साथ मनोरंजन प्रस्तुत किया जाता है। वासुदेव भट्ट की प्रस्तुतियों ने इसे लोकप्रिय बनाया और आम जनता के बीच यह कला व्यापक रूप से फैली। इसने लोककथाओं को जीवंत बनाए रखने में महत्वपूर्ण योगदान दिया।

18. भारत में 'चारबैत कला' का प्रवर्तक किसे माना जाता है?

A हम्मीद बेगम
B सैय्यद हसन
C करीम खाँ निहंग
D फकीरूल्ला
📖 व्याख्या
चारबैत कला का प्रवर्तन टोंक क्षेत्र में हुआ और इसके प्रवर्तक करीम खाँ निहंग माने जाते हैं। इसका आरंभ नवाब फैजुल्ला के काल में हुआ था। इसमें कवित्त या चार पंक्तियों में गीतों के माध्यम से धार्मिक और सामाजिक विषयों का चित्रण किया जाता है। यह कला टोंक की गंगा-जमुनी संस्कृति का प्रतीक है और इसे वहाँ आज भी पहचान दिलाती है।

19. किस लोक नाट्य में स्त्रियों की भूमिका पुरुष नहीं निभाते हैं?

A तुर्रा कलंगी ख्याल
B कुचामनी ख्याल
C गवरी नृत्य
D तमाशा
📖 व्याख्या
राजस्थान और भारत के अधिकतर लोकनाट्य रूपों में पुरुष ही स्त्रियों की भूमिकाएँ निभाते थे। लेकिन तमाशा एक ऐसा लोकनाट्य है जिसमें स्त्रियों की भूमिकाएँ वास्तविक महिलाएँ ही निभाती हैं। तमाशा महाराष्ट्र से लेकर राजस्थान तक प्रचलित रहा और इसमें गीत, नृत्य और अभिनय का विशेष महत्व है। इसकी सबसे बड़ी विशेषता यही है कि इसमें महिलाओं की सक्रिय भागीदारी होती है।

20. गोमा-मीणा, कालु कीर, कानगूजरी, अम्बा माता व नटड़ी आदि हैं?

A चारर्खेत की श्रेणियाँ
B भील जनजाति के नृत्यों के विभिन्न प्रकार
C छोटी नाटिकायें, जिनका मंचन गवरी उत्सव में किया जाता है।
D रम्मत के लोकगीत
📖 व्याख्या
गोमा-मीणा, कालु कीर, कानगूजरी, अम्बा माता और नटड़ी जैसी नाटिकाएँ गवरी उत्सव के दौरान मंचित की जाती हैं। गवरी भील जनजाति का धार्मिक-नाट्य रूप है, जिसमें पौराणिक कथाओं, देवी-देवताओं की लीलाओं और स्थानीय किंवदंतियों को छोटे-छोटे नाटकों के माध्यम से प्रस्तुत किया जाता है। यह उत्सव सामूहिक आनंद और सांस्कृतिक अभिव्यक्ति का महत्वपूर्ण माध्यम है।

21. तुर्रा कलंगी क्या है?

A लोकनाट्य विधा
B एक प्रकार का घन वाद्य
C चित्रकला शैली
D सांझी का एक प्रकार
📖 व्याख्या
तुर्रा कलंगी एक लोकनाट्य विधा है। इसका प्रवर्तन मेवाड़ के शाह अली और तुकनगीर संतों ने किया था। इसमें "तुर्रा" को शिव और "कलंगी" को पार्वती का प्रतीक माना गया है। इसमें गायन और अभिनय के माध्यम से धार्मिक एवं पौराणिक कथाओं का मंचन होता है। यह राजस्थान की ख्याल परंपरा की एक विशिष्ट शैली है।

22. राजस्थान के बहरूपिया कलाकार जो अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर ख्याति प्राप्त कर चुके हैं?

A पुरुषोत्तम दास भांड
B जानकी लाल भांड
C करीम खाँ निहंग
D नवाब फैजुल्ला
📖 व्याख्या
राजस्थान के प्रसिद्ध बहरूपिया कलाकार जानकी लाल भांड ने अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर ख्याति अर्जित की। इन्हें "मंकी मैन" भी कहा जाता था। इन्होंने स्वांग/बहुरूपिया कला को वैश्विक पहचान दिलाई। इनके साथ परशुराम और धनरूप भांड जैसे कलाकारों का भी नाम लिया जाता है। इनकी प्रस्तुतियाँ राजस्थान की लोकसंस्कृति की धरोहर मानी जाती हैं।

23. धौलपुर, डीग, भरतपुर, सवाई माधोपुर, खैरथल तिजारा, अलवर व करौली जिलों में प्रचलित लोकनाट्य है?

A चारबेंत
B रामलीला
C नौटंकी
D रासलीला
📖 व्याख्या
इन जिलों में नौटंकी लोकनाट्य का विशेष प्रचलन है। नौटंकी एक लोकप्रिय शैली है, जिसमें गान और अभिनय के माध्यम से कथाओं का मंचन होता है। राजस्थान में भूरिलाल ने इसे प्रसिद्ध किया, जो पहले उत्तर प्रदेश के हाथरस में नौटंकी करते थे। नौटंकी ने ग्रामीण समाज में मनोरंजन और सामाजिक संदेश दोनों का कार्य किया।

24. सम्पूर्ण भारत का एकमात्र लोकनाट्य जो केवल दिन में प्रदर्शित होता है?

A गवरी लोक नाट्य
B ट्रंटिया
C तमाशा लोक नाट्य
D हेला ख्याल
📖 व्याख्या
सम्पूर्ण भारत में केवल गवरी लोकनाट्य ही ऐसा है जिसे दिन में खेला जाता है। यह भील जनजाति का प्रमुख धार्मिक नाट्य है, जिसमें शिव-पार्वती और अन्य देवताओं की कथाओं का मंचन होता है। गवरी उत्सव के दौरान इसे गाँव-गाँव में खुले मैदानों में प्रस्तुत किया जाता है और इसमें सामूहिक नृत्य व गायन होता है।

25. चारबैत क्या है?

A टोंक में प्रचलित बेंतमार होली
B होली पर एक दूसरे को पीटने का खेल
C एक प्रकार की गीत गायन शैली
D काव्य से भरपूर एक लोकनाट्य विधा
📖 व्याख्या
चारबैत टोंक क्षेत्र का एक विशेष लोकनाट्य है, जिसमें चार पंक्तियों के पद्य (बैत) गाए जाते हैं। इसका प्रवर्तन करीम खाँ निहंग ने नवाब फैजुल्ला के समय किया था। यह कला इस्लामी प्रभाव और स्थानीय संस्कृति का मिश्रण है। इसमें सामाजिक और धार्मिक विषयों पर व्यंग्यात्मक और भावनात्मक प्रस्तुति की जाती है।

26. नौटंकी तथा रामलीला राजस्थान के किस भाग में अधिक लोकप्रिय है?

A पूर्वी
B दक्षिणी
C पश्चिमी
D
📖 व्याख्या
राजस्थान के पूर्वी भाग में नौटंकी और रामलीला विशेष रूप से लोकप्रिय हैं। भरतपुर, धौलपुर, अलवर और करौली जैसे जिलों में ये नाट्य शैलियाँ व्यापक रूप से मंचित होती हैं। नौटंकी जहाँ मनोरंजन का साधन है, वहीं रामलीला धार्मिक और सांस्कृतिक परंपरा का प्रतीक है। दोनों ने पूर्वी राजस्थान की संस्कृति को गहराई से प्रभावित किया।

27. निम्नलिखित में से कौनसा (लोक नाट्य-स्थान) सुमेलित नहीं है?

A नौटंकी – भरतपुर, डीग, धौलपुर
B तमाशा – जयपुर
C तुर्रा कलंगी – मारवाड़
D रम्मत – बीकानेर, जैसलमेर
📖 व्याख्या
तुर्रा कलंगी का सम्बन्ध मारवाड़ से नहीं है। इसका प्रवर्तन मेवाड़ में शाह अली और तुकनगीर ने किया था। जबकि नौटंकी का केंद्र पूर्वी राजस्थान, तमाशा जयपुर और रम्मत बीकानेर-जैसलमेर क्षेत्र से जुड़ा है। इसलिए विकल्प C सुमेलित नहीं है।

28. राजस्थान के भवाई नाट्य के जन्मदाता थे?

A बाघाजी
B करीम खाँ
C पृथ्वीराज
D धनरूप भांड
📖 व्याख्या
राजस्थान में भवाई नाट्य के जन्मदाता बाघाजी माने जाते हैं। भवाई मूलतः गुजरात की परंपरा से जुड़ा है, लेकिन राजस्थान के उदयपुर क्षेत्र में यह विशेष रूप से लोकप्रिय हुआ। इसमें हास्य-व्यंग्य और सामाजिक कुरीतियों पर प्रहार किया जाता है। बाघाजी ने इसे एक संगठित लोकनाट्य के रूप में विकसित किया।

29. तमाशा लोक नाट्य को सर्वाधिक प्रश्रय देने वाले शासक थे?

A सवाई जयसिंह
B रामसिंह द्वितीय
C मानसिंह प्रथम
D माधोसिंह द्वितीय
📖 व्याख्या
तमाशा जयपुर का प्रसिद्ध लोकनाट्य है। इसे सर्वाधिक प्रश्रय रामसिंह द्वितीय ने दिया। इसकी शुरुआत महाराजा सवाई प्रताप सिंह के काल में हुई थी और इसके प्रवर्तक बंशीधर भट्ट थे। तमाशा में जयपुरी ख्याल और ध्रुपद गायकी का सुंदर मिश्रण है, जिसने इसे अन्य लोकनाट्य शैलियों से अलग पहचान दी।

30. राज्य में नौटंकी का सर्वाधिक प्रचलन किस जिले में है?

A झालावाड़ व कोटा
B बीकानेर व जोधपुर
C उदयपुर व भीलवाड़ा
D भरतपुर व डीग
📖 व्याख्या
राजस्थान में नौटंकी का सर्वाधिक प्रचलन भरतपुर और डीग जिलों में पाया जाता है। यह पूर्वी राजस्थान का प्रमुख लोकनाट्य है, जहाँ इसे विशेष उत्सवों और मेलों में मंचित किया जाता है। नौटंकी में गायन, नृत्य और अभिनय का मिश्रण होता है और यह लोकजीवन के मनोरंजन का महत्वपूर्ण साधन रहा है।

31. किस लोकनाट्य में स्त्री पात्रों की भूमिका स्त्रियाँ ही निभाती हैं?

A कुचामनी ख्याल
B जयपुरी ख्याल
C तुर्रा कलंगी ख्याल
D गवरी नाट्य
📖 व्याख्या
अधिकांश लोकनाट्य शैलियों में स्त्री भूमिकाएँ पुरुष कलाकार निभाते हैं, लेकिन जयपुरी ख्याल इस दृष्टि से विशेष है। इसमें स्त्री पात्रों की भूमिकाएँ वास्तविक महिलाएँ ही निभाती हैं। इससे इस ख्याल की प्रस्तुतियाँ अधिक स्वाभाविक और प्रभावशाली बनती हैं। जयपुरी ख्याल जयपुर क्षेत्र में लोकप्रिय है और इसमें ध्रुपद गायन का प्रभाव भी दिखाई देता है।

32. अली बक्शी ख्याल के प्रवर्तक माने जाते हैं?

A राव राजा अली बक्श
B लच्छीराम
C बंशीधर भट्ट
D नानुराम राणा
📖 व्याख्या
अली बक्शी ख्याल के प्रवर्तक राव राजा अली बक्श माने जाते हैं। यह शैली अलवर रियासत के मुंडावर ठिकाने से जुड़ी है। इसमें गायन और अभिनय के माध्यम से धार्मिक एवं वीरगाथाओं का मंचन किया जाता था। अली बक्श ने इस शैली को विशेष पहचान दी और उनके नाम पर ही इसे "अली बक्शी ख्याल" कहा जाता है।

33. किशनगढ़ी ख्याल के मुख्य कलाकार हैं?

A उगमराज
B नानूराम
C बंशीधर भट्ट
D बंशीधर शर्मा
📖 व्याख्या
बंशीधर शर्मा किशनगढ़ी ख्याल के प्रमुख कलाकार रहे हैं। उन्होंने अपनी कला से इस शैली को नई पहचान दी। किशनगढ़ी ख्याल मुख्यतः किशनगढ़ क्षेत्र में प्रचलित रहा और इसमें स्थानीय जीवन, पौराणिक कथाएँ और सामाजिक विषयों को शामिल किया गया। बंशीधर शर्मा के योगदान से यह ख्याल अधिक लोकप्रिय हुआ।

34. भानू भारती द्वारा रचित प्रसिद्ध 'पशु गायत्री' नाट्य किस लोक-नाट्य पर आधारित है?

A गवरी लोक-नाट्य
B रम्मत
C चारबैंत नाट्य
D तुर्रा कलंगी ख्याल
📖 व्याख्या
भानू भारती द्वारा रचित प्रसिद्ध नाटक 'पशु गायत्री' गवरी लोकनाट्य पर आधारित है। गवरी भील जनजाति का धार्मिक नाट्य है जिसमें पौराणिक और धार्मिक कथाओं को मंचित किया जाता है। भानू भारती ने इसी शैली का प्रयोग करके "पशु गायत्री" का निर्माण किया, जिससे यह अंतरराष्ट्रीय मंचों तक पहुँचा।

35. निम्न में से व्यावसायिक लोक-नाट्य है?

A रम्मत
B गवरी
C नौटंकी
D भवाई
📖 व्याख्या
भवाई नाट्य व्यावसायिक लोकनाट्य के रूप में जाना जाता है। इसका उद्भव गुजरात में हुआ और राजस्थान के उदयपुर क्षेत्र में भी यह लोकप्रिय हुआ। इसमें भोपा-भोपी सगोजी-सगीजी के रूप में व्यंग्यात्मक प्रस्तुति करते हैं। भवाई समाज की कुरीतियों और दोषों पर हास्य के माध्यम से चोट करता है, जिससे यह सामाजिक चेतना का साधन भी बनता है।

36. तुर्रा और कलंगी लोकनाट्य में तुर्रा और कलंगी प्रतीक हैं?

A गणेश और रिद्धि के
B कृष्ण और राधा के
C विष्णु और लक्ष्मी के
D शिव और पार्वती के
📖 व्याख्या
तुर्रा और कलंगी लोकनाट्य में तुर्रा शिव का और कलंगी पार्वती का प्रतीक है। इसका प्रवर्तन मेवाड़ के शाह अली और तुकनगीर संतों ने किया। यह लोकनाट्य धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है और इसमें संवाद व गायन के माध्यम से सामाजिक एवं आध्यात्मिक संदेश दिए जाते हैं।

37. शेखावाटी ख्याल के प्रवर्तक थे?

A नानूराम
B अली बक्श
C जयदयाल सोनी
D मुंशीधर बक्ख
📖 व्याख्या
नानूराम राणा शेखावाटी ख्याल के प्रवर्तक थे। यह झुंझुनूं जिले के चिड़ावा क्षेत्र में विकसित हुआ, इसलिए इसे "चिड़ावा ख्याल" भी कहा जाता है। शेखावाटी में इसे लोकप्रिय बनाने वाले कलाकार दुलिया राणा थे। इस ख्याल में ऐतिहासिक और पौराणिक कथाओं का पद्य रूप में मंचन किया जाता है।

38. हेला ख्याल लोक संगीत राजस्थान के निम्नलिखित में से किस क्षेत्र से संबंधित है?

A दौसा- सवाई माधोपुर
B अलवर-भरतपुर
C कोटा-बारां
D अजमेर-नागौर
📖 व्याख्या
हेला ख्याल दौसा और सवाई माधोपुर क्षेत्र से संबंधित है। इसके प्रवर्तक हेला शायर माने जाते हैं। इसे संगीत दंगल के रूप में प्रस्तुत किया जाता है, जिसमें दो दल गीतों और कवित्तों के माध्यम से प्रतिस्पर्धा करते हैं। हेला ख्याल में तत्काल रचना और शायराना अंदाज इसकी विशेषता है।

39. अलीबक्शी ख्याल राजस्थान के कौन से क्षेत्र में प्रचलित लोक नाट्य शैली है?

A खैरथल तिजारा
B कोटा
C अजमेर
D बीकानेर
📖 व्याख्या
अलीबक्शी ख्याल खैरथल-तिजारा क्षेत्र की प्रसिद्ध लोकनाट्य शैली है। यह शैली अलवर रियासत के मुंडावर ठिकाने के राव राजा अली बक्श से जुड़ी है। इसमें धार्मिक, वीर और ऐतिहासिक कथाओं को संगीत और अभिनय के माध्यम से प्रस्तुत किया जाता है। इसने राजस्थान के पूर्वी हिस्से में विशेष पहचान बनाई।

40. किस ख्याल में नौबत, घेरा, मंजीरा व ढोलक वाद्य यंत्रों का प्रयोग किया जाता है?

A हेला ख्याल
B कन्हैया ख्याल
C शेखावाटी ख्याल
D तुर्रा कलंगी ख्याल
📖 व्याख्या
कन्हैया ख्याल में नौबत, घेरा, मंजीरा और ढोलक जैसे वाद्य यंत्रों का प्रयोग किया जाता है। यह ख्याल मुख्यतः कृष्ण-लीलाओं और भक्ति परंपरा से जुड़ा हुआ है। इसमें नृत्य और संगीत का विशेष महत्व होता है। कन्हैया ख्याल ने धार्मिक आस्था और लोक-संस्कृति को जोड़ते हुए दर्शकों का मनोरंजन और आध्यात्मिक संदेश दोनों दिया।

41. किस रम्मत कलाकार ने महात्मा गाँधी को 'स्वतंत्र बावनी' पुस्तक भेंट की थी?

A तेज कवि जैसलमेरी
B फागु महाराज
C बंशीधर शर्मा
D रामप्रकाश
📖 व्याख्या
स्वतंत्र बावनी' के रचयिता तेज कवि जैसलमेरी थे। उन्होंने जैसलमेर में श्रीकृष्णा कंपनी नाम से रम्मत का अखाड़ा प्रारंभ किया। वर्ष 1943 में रचित "स्वतंत्र बावनी" पुस्तक को उन्होंने महात्मा गांधी को भेंट किया था। इस कृति के कारण अंग्रेजी शासन ने उनके खिलाफ गिरफ्तारी का वारंट भी जारी किया था।

42. किस ख्याल के प्रवर्तक बंशीधर भट्ट को माना जाता है?

A नौटंकी
B स्वांग
C तमाशा
D चारबेंत
📖 व्याख्या
तमाशा ख्याल के प्रवर्तक बंशीधर भट्ट माने जाते हैं। तमाशा जयपुर क्षेत्र की प्रसिद्ध लोकनाट्य शैली है, जिसमें ध्रुपद गायन और जयपुरी ख्याल का मिश्रण दिखाई देता है। इसे विशेष रूप से शाही संरक्षण मिला और इसमें गीत, संगीत व नाट्य का सुंदर समन्वय प्रस्तुत किया गया।

43. ख्याल की प्रतियोगिता को दंगल, ख्याल का सूत्रधार……….. भाग लेने वाले कलाकार……. कहलाते हैं, इसमें दल को ………तथा दल के मुखिया को……. कहा जाता है-

A हलकारा, खिलाड़ी, अखाड़ा, उस्ताद
B हलकारा, उस्ताद, अखाड़ा, खिलाड़ी
C हलकारा, अखाड़ा, खिलाड़ी, उस्ताद
D अखाड़ा, हलकारा, खिलाड़ी, उस्ताद
📖 व्याख्या
ख्याल की प्रतियोगिता को दंगल कहा जाता है। इसमें सूत्रधार को हलकारा, भाग लेने वाले कलाकारों को खिलाड़ी, दल को अखाड़ा और दल के मुखिया को उस्ताद कहा जाता है। यह प्रणाली ख्याल की परंपरागत संरचना को दर्शाती है, जो इसे अन्य लोकनाट्यों से अलग पहचान देती है।

44. निम्न में से असंगत युग्म है-

A मरूस्थलीय क्षेत्रों के लोकनाट्यों में जनजातियों की रंगमयी संस्कृति देखने को मिलती है।
B मरूस्थलीय क्षेत्र के लोकनाट्यों में व्यंग्य विनोद प्रधानता होती है।
C अलवर, भरतपुर के लोकनाट्यों में हरियाणा व
D
📖 व्याख्या
मरूस्थलीय क्षेत्रों के लोकनाट्यों में मुख्यतः पेशेवर जातियों द्वारा मंचन होता है। यहाँ व्यंग्य, हास्य और मनोरंजन प्रधानता लिए होते हैं। जबकि जनजातीय रंगमयी संस्कृति अरावली पर्वतीय क्षेत्रों और आदिवासी लोकनाट्यों में देखने को मिलती है। इस कारण विकल्प A असंगत है।

45. निम्न में से असंगत युग्म है-ख्याल – जिला

A किशनगढ़ी ख्याल – अजमेर
B ढप्पाली ख्याल – नागौर
C अली बक्शी ख्याल – अलवर
D तुर्रा कलंगी ख्याल – चित्तौड़गढ़
📖 व्याख्या
ढप्पाली ख्याल नागौर का नहीं है। यह खैरथल तिजारा, अलवर, डीग और भरतपुर क्षेत्र में प्रचलित एक विशिष्ट ख्याल शैली है। इसमें संगीत प्रेमियों के बीच प्रतिस्पर्धा होती है। इसलिए विकल्प B असंगत है।

46. जोगी जोगण, कानगुजरी, मियां बीबी व रसीली तंबोलन आदि किस शैली के लोकप्रिय ख्याल हैं?

A जयपुरी ख्याल
B कुचामनी ख्याल
C शेखावाटी ख्याल
D हेला ख्याल
📖 व्याख्या
जोगी जोगण, कानगुजरी, मियां बीबी और रसीली तंबोलन जैसे ख्याल जयपुरी ख्याल शैली के प्रसिद्ध उदाहरण हैं। जयपुरी ख्याल जयपुर क्षेत्र में विकसित हुआ और इसमें स्त्री भूमिकाएँ महिलाएँ स्वयं निभाती हैं। इसमें संगीत और नृत्य का गहरा समन्वय मिलता है।

47. निम्न में से असंगत युग्म है-(नाट्य-स्थान)

A रम्मत – जैसलमेर
B तमाशा – जयपुर
C नौटंकी – भरतपुर
D भेंट के दंगल – बाड़मेर
📖 व्याख्या
भेंट के दंगल बाड़मेर में नहीं, बल्कि धौलपुर जिले के बाड़ी-बसेड़ी क्षेत्र में प्रचलित हैं। यह गायन-प्रत्युत्तर की शैली है। जबकि रम्मत जैसलमेर, तमाशा जयपुर और नौटंकी भरतपुर क्षेत्रों से संबंधित हैं।

48. ख्याल भारमली' नामक ख्याल के रचयिता हैं?

A हमीदुल्ला
B हेला शायर
C बंशीधर भट्ट
D अली बक्श
📖 व्याख्या
ख्याल भारमली' नामक ख्याल के रचयिता हमीदुल्ला माने जाते हैं। यह ख्याल राजस्थान की ख्याल परंपरा में एक महत्वपूर्ण स्थान रखता है। इसमें सामाजिक, पौराणिक और धार्मिक विषयों को आकर्षक ढंग से प्रस्तुत किया गया है।

49. राजस्थान के निम्नलिखित में से किस शहर में होली के अवसर पर 'रम्मत' का आयोजन किया जाता है?

A करौली
B नागौर
C बीकानेर
D जोधपुर
📖 व्याख्या
बीकानेर में होली के अवसर पर 'रम्मत' का आयोजन विशेष रूप से किया जाता है। इसमें लोक कलाकार पारंपरिक वेशभूषा और वाद्य यंत्रों के साथ पौराणिक व ऐतिहासिक कथाओं का मंचन करते हैं। यह बीकानेर की सांस्कृतिक पहचान और होली उत्सव का मुख्य आकर्षण माना जाता है।

50. उगमराज का संबंध किस ख्याल से है?

A हेला ख्याल
B कुचामनी ख्याल
C शेखावाटी ख्याल
D कन्हैया ख्याल
📖 व्याख्या
उगमराज का संबंध कुचामनी ख्याल से है। कुचामनी ख्याल का विकास नागौर जिले के कुचामन क्षेत्र में हुआ और इसके प्रवर्तक लच्छीराम माने जाते हैं। यह ख्याल सामाजिक व्यंग्य पर आधारित होता है तथा इसमें गान और अभिनय का अद्भुत मिश्रण देखने को मिलता है। उगमराज जैसे कलाकारों ने इस शैली को लोकप्रिय बनाने में योगदान दिया।
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Mukesh Choudhary

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Mukesh Choudhary

Mukesh Choudhary को राजस्थान में आयोजित होने वाली विभिन्न प्रतियोगी एवं भर्ती परीक्षाओं के परीक्षा पैटर्न और प्रश्नों के स्वरूप की अच्छी समझ है। उनके मार्गदर्शन में यह अध्ययन सामग्री और MCQ content तैयार एवं review किया गया है। Read More...

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