राजस्थान के लोक वाद्ययंत्र MCQ Quiz | Practice Set with Detailed Explanation
इस पोस्ट में राजस्थान की कला एवं संस्कृति के टॉपिक राजस्थान के लोक वाद्ययंत्र से संबंधित Latest व पूर्णतः updated महत्वपूर्ण MCQ प्रश्न दिए गए हैं। इनमें शंख, डमरू, घण्टा, बाँसुरी, अलगोजा आदि से सम्बंधित महत्वपूर्ण जानकारियों को व्याख्या सहित शामिल किया गया है।
ये MCQ प्रश्न RPSC, RSMSSB, RSSB, RAS, Patwar, Police, LDC, VDO, Fireman, Woman Superwiser, REET तथा राजस्थान राज्य की अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए अत्यंत उपयोगी हैं।
- Subject: राजस्थान की कला एवं संस्कृति
- Topic: राजस्थान के लोक वाद्ययंत्र
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- Content Type: MCQ Practice Set
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1. किस कलाकार को 'नगाड़े का जादूगर' कहा जाता है?
- (A) रामनाथ चौधरी
- (B) करणा भील
- (C) हरिप्रसाद चौरसिया
- (D) रामकिशन सोलंकी
रामकिशन सोलंकी को नगाड़े का जादूगर कहा जाता है। नगाड़ा भैंस की खाल से मढ़ा जाता है और शहनाई के साथ मांगलिक अवसरों पर बजाया जाता है। इसमें नर और मादा नगाड़ों की जोड़ी होती है, जिससे अद्भुत लय और ताल उत्पन्न होती है।
2. किस वाद्य को भगवान शिव का वाद्य माना जाता है?
- (A) शंख
- (B) डमरू
- (C) घण्टा
- (D) बाँसुरी
डमरू भगवान शिव का प्रमुख वाद्ययंत्र माना जाता है। इसे शिवजी अपने हाथों में धारण करते हैं। पौराणिक मान्यता के अनुसार, सृष्टि की उत्पत्ति नाद से हुई थी और वह नाद शिव के डमरू से निकला था। इसी कारण यह शिव का प्रिय वाद्ययंत्र है।
3. जीणमाता का मेला राजस्थान के किस जिले में वर्ष में दो बार आयोजित होता है?
- (A) सिरोही
- (B) सीकर
- (C) सवाई माधोपुर
- (D) जालौर
जीणमाता राजस्थान के सीकर जिले में स्थित शेखावाटी क्षेत्र की लोकदेवी और चौहान वंश की कुलदेवी हैं। यहाँ चैत्र और आश्विन नवरात्रि में विशाल मेला भरता है। मंदिर का निर्माण राजा हट्टड ने 1064 ई. में कराया था। लोक परंपरा में जीणमाता को मधुमक्खियों की देवी कहा जाता है और यहाँ सबसे लंबा गीत ढाई प्याला शराब का भोग गाया जाता है।
4. निम्नलिखित में से कौनसा सुषिर वाद्य है?
- (A) अलगोजा
- (B) कामायचा
- (C) तंदूरा
- (D) रावणहत्था
अलगोजा एक सुषिर वाद्य है जिसे फूँककर बजाया जाता है। जबकि कामायचा, तंदूरा और रावणहत्था सभी तार (तत्) वाद्य यंत्र हैं। सुषिर वाद्यों में हवा के प्रवाह से ध्वनि निकलती है।
5. चिकारा और चौतारा किस प्रकार वाद्य यंत्र है?
- (A) तत् वाद्य
- (B) घन वाद्य
- (C) अवनद्ध वाद्य
- (D) सुषिर वाद्य
चिकारा और चौतारा दोनों ही तार वाले (तत्) वाद्य यंत्र हैं। ये तार खींचने या बजाने से ध्वनि उत्पन्न करते हैं। इसी श्रेणी में रबाब भी आता है।
6. नाथद्वारा के डांग नृत्य में निम्न वाद्य यंत्र का प्रयोग किया जाता है।
- (A) ढोल
- (B) मांडल
- (C) थाली
- (D) उपरोक्त सभी
नाथद्वारा (राजसमंद) का प्रसिद्ध डांग नृत्य ढोल, मांडल और थाली जैसे वाद्य यंत्रों के साथ प्रस्तुत किया जाता है। यह सामूहिक नृत्य है और लोक उत्सवों में किया जाता है।
7. निम्नलिखित में से कौन सा वाद्य यंत्र बाकी तीन से अलग है?
- (A) शहनाई
- (B) खड़ताल
- (C) मशक
- (D) अलगोज़ा
खड़ताल एक घन वाद्य यंत्र है जिसे टकराकर बजाया जाता है। जबकि शहनाई, मशक और अलगोज़ा सभी सुषिर वाद्य यंत्र हैं जिन्हें फूँककर बजाया जाता है।
8. निम्न में कौनसा अवनद्य वाद्ययंत्र नहीं है?
- (A) ढोलक
- (B) पखावज
- (C) तासा
- (D) लेजिम
लेजिम एक घन वाद्ययंत्र है, अवनद्य नहीं। इसे मुख्यतः गरासिया जनजाति प्रयोग करती है। इसमें लोहे की छड़ और झंकार वाली झिल्लियां होती हैं, जिन्हें नाचते समय हाथ में पकड़कर बजाया जाता है। जबकि ढोलक, पखावज और तासा अवनद्य वाद्य हैं।
9. लोक-कथा 'देवनारायण जी की फड़' के गायन में कौन वाद्य यन्त्र प्रयोग में लाया जाता है?
- (A) चंग
- (B) मंजीरा
- (C) खड़ताल
- (D) जन्तर
देवनारायण जी की फड़ वाचन के समय जन्तर बजाया जाता है। यह एक तार वाला वाद्य यंत्र है जिसमें 5–6 तार होते हैं। इसके माध्यम से लोक भोपे फड़ की कथा गाते और सुनाते हैं।
10. राजस्थान के पं. शिवकुमार शर्मा का संबंध किस वाद्ययंत्र से है?
- (A) सारंगी
- (B) शहनाई
- (C) संतूर
- (D) सरोद
पं. शिवकुमार शर्मा प्रसिद्ध संतूर वादक थे। संतूर मूलतः एक कश्मीरी लोक वाद्य यंत्र है। उन्हें 2001 में पद्म विभूषण से सम्मानित किया गया था। उनकी वजह से संतूर को अंतरराष्ट्रीय पहचान मिली।
11. जहूर खान किस लोकवाद्य से संबंधित है?
- (A) भपंग
- (B) नड़
- (C) अलगोजा
- (D) खड़ताल
जहूर खाँ मेवाती राजस्थान के भपंग वाद्य यंत्र के प्रसिद्ध कलाकार हैं। भपंग एक तत् वाद्ययंत्र है जो डमरू से मिलता-जुलता होता है। यह कटे हुए तुम्बे से बनाया जाता है, जिसके एक सिरे पर चमड़ा मंढ़ा होता है। इसे काँख में दबाकर और लकड़ी के टुकड़े से बजाया जाता है।
12. लोक वाद्य 'भपंग' राजस्थान के किस क्षेत्र से सम्बंधित है?
- (A) मेवात
- (B) मेवाड़
- (C) मारवाड़
- (D) हाड़ौती
भपंग राजस्थान के मेवात क्षेत्र का लोकप्रिय लोक वाद्य है। यह डमरू जैसा वाद्ययंत्र है जिसे काँख में दबाकर बजाया जाता है। इसके प्रसिद्ध कलाकारों में जहूर खाँ मेवाती और उमर फारूक मेवाती का नाम विशेष रूप से लिया जाता है।
13. राजस्थान में भोपों का मुख्य वाद्ययंत्र है?
- (A) भंगल
- (B) मशक
- (C) ढाक
- (D) रावणहत्था
राजस्थान में भोपों का मुख्य वाद्ययंत्र रावणहत्था है। भोपे लोकदेवताओं की फड़ बाँचते समय इसका प्रयोग करते हैं। इसमें तार होते हैं और इसे गज से बजाया जाता है। इसकी अनूठी ध्वनि लोककथाओं और धार्मिक प्रसंगों को जीवंत बना देती है।
14. राजस्थान के प्रसिद्ध पखावज वादक कौन है, जिन्हें भारत सरकार द्वारा पद्मश्री से नवाजा जा चुका है?
- (A) बिस्मिला खाँ
- (B) पंडित पुरुषोत्तम दास
- (C) चाँद मोहम्मद खाँ
- (D) हरिप्रसाद चौरसिया
राजस्थान के प्रसिद्ध पखावज वादक पंडित पुरुषोत्तम दास हैं। उन्हें भारत सरकार द्वारा पद्मश्री से सम्मानित किया गया था। पखावज या मृदंगढोलक जैसा अवनद्ध वाद्य है, जो मंदिरों और भक्ति संगीत में प्रमुख रूप से प्रयोग किया जाता है।
15. राजस्थान के उमर फारुक मेवाती का सम्बन्ध किस क्षेत्र से था?
- (A) पर्यावरण
- (B) संगीत
- (C) खेल
- (D) चिकित्सा विज्ञान
उमर फारूक मेवाती राजस्थान के मेवात क्षेत्र के प्रसिद्ध भपंग वादक थे। उनका योगदान लोकसंगीत को जीवित रखने में महत्वपूर्ण रहा है। वे लोकसंगीत की परंपरा से जुड़े कलाकारों में गिने जाते हैं।
16. रमझोल किस प्रकार का लोक वाद्य यंत्र है?
- (A) अवनद्ध
- (B) तत्
- (C) सुषिर
- (D) घन
रमझोल एक घन वाद्य यंत्र है। इसमें चमड़े की पट्टी पर छोटे-छोटे घुंघरू लगे होते हैं, जिन्हें नृत्य के समय पैरों में बांधा जाता है। यह केवल वाद्य ही नहीं, बल्कि महिलाओं का आभूषण भी है और विशेषकर मारवाड़ क्षेत्र में प्रचलित है।
17. नड़' वाद्य यंत्र राजस्थान के किस क्षेत्र में अधिकांशतः प्रयुक्त होता है?
- (A) जैसलमेर
- (B) मेवाड़
- (C) बीकानेर
- (D) बाड़मेर
नड़ एक सुषिर वाद्य यंत्र है। यह कैर या करंज की लकड़ी से बनाया जाता है और इसमें चार छिद्र होते हैं। इसे मशक की तरह हवा भरकर बजाया जाता है। यह वाद्य मुख्य रूप से जैसलमेर क्षेत्र में लोकप्रिय है।
18. निम्नलिखित में से कौनसा युग्म (वाद्ययंत्र प्रकार) सुमेलित नहीं है?
- (A) भपंग - तत्
- (B) नड़ - घन
- (C) सिंगी - सुषिर
- (D) ताशा - अवनद्ध
नड़ वास्तव में एक सुषिर वाद्य यंत्र है, जबकि प्रश्न में इसे घन वाद्य बताया गया है, जो गलत है। सिंगी सुषिर वाद्य है, ताशा अवनद्ध वाद्य है और भपंग तत् वाद्य है।
19. उदयपुर के पं. रामनारायण का सम्बन्ध किस वाद्ययंत्र से है?
- (A) सारंगी
- (B) भपंग
- (C) शहनाई
- (D) नगाड़ा
पं. रामनारायण का सम्बन्ध सारंगी से है। वे विश्व प्रसिद्ध सारंगी वादक रहे हैं और उन्होंने इस वाद्य को अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाई। उन्होंने भारतीय शास्त्रीय संगीत में सारंगी को मुख्य धारा में स्थापित किया।
20. पाबूजी की फड़ सुनाते समय किस मुख्य वाद्ययंत्र का उपयोग किया जाता है?
- (A) भपंग
- (B) सारंगी
- (C) डेरू
- (D) रावण हत्था
पाबूजी की फड़ सुनाते समय भोपे रावणहत्था का प्रयोग करते हैं। यह एक प्राचीन तत् वाद्ययंत्र है, जिसे आधे नारियल की कटोरी और बकरे की खाल से बनाया जाता है। इसकी ध्वनि फड़ वाचन को विशेष प्रभाव देती है।
21. निम्नलिखित में से कौनसा युग्म (वाद्ययंत्र-प्रकार) सुमेलित नहीं है?वाद्ययंत्र – प्रकार
- (A) भपंग – तत्
- (B) सिंगी – सुषिर
- (C) ताशा – अवनद्ध
- (D) नड़ – घन
नड़ एक सुषिर वाद्ययंत्र है, न कि घन। इसे केर की लकड़ी से बनाया जाता है और इसमें छेद होते हैं, जिससे बांसुरी जैसी ध्वनि निकलती है। जबकि भपंग तत्, सिंगी सुषिर और ताशा अवनद्ध वाद्य सही युग्म हैं।
22. निम्नलिखित में से कौनसा युग्म असंगत है?
- (A) करताल, भरनी, रमझौल, श्रीमंडल
- (B) रावण हत्या, सारंगी, रबाज, सुरमंडल
- (C) सतारा, बांकिया, मशक, भपंग
- (D) मांदल, डमरू, ढोल, मृदंग
सतारा, बांकिया और मशक सभी सुषिर वाद्ययंत्र हैं, जबकि भपंग तत् वाद्ययंत्र है। इसी कारण यह युग्म असंगत है।
23. निम्नलिखित में से कौनसा युग्म संगत है?
- (A) झांझ, जंतर, चिंकारा
- (B) मुरल, सुरनाई, मंजीरा
- (C) खंजरी, तबला, पखावज
- (D) सारंगी, मोरचंग, चिमटा
खंजरी, तबला और पखावज तीनों अवनद्य वाद्ययंत्र हैं क्योंकि ये चमड़े पर थाप से बजाए जाते हैं। अन्य विकल्पों में अलग-अलग प्रकार के वाद्ययंत्र दिए गए हैं, इसलिए संगत केवल विकल्प (C) है।
24. निम्नलिखित में से कौनसा वाद्ययंत्र अवनद्य वाद्ययंत्र है?
- (A) अलगोजा
- (B) दमामा
- (C) थाली
- (D) गुजरी
दमामा एक बड़ा अवनद्य वाद्ययंत्र है, जो लोहे की कड़ाही जैसा होता है और इसे भैंसे की खाल से मंढ़ा जाता है। इसे भारी डंडों से बजाया जाता है और इसकी गूंज दूर-दूर तक जाती है। इसका उपयोग विशेष रूप से मेलों और युद्ध संकेतों में होता था।
25. जयपुर जिले के लूणियावास ग्राम पंचायत बंध्या 400 वर्षों से कौन से मेले के लिए विख्यात है?
- (A) गायों का मेला
- (B) भैसों का मेला
- (C) ऊंटों का मेला
- (D) गधों का मेला
जयपुर जिले के लूणियावास (सांगानेर) के बंध्या गाँव में गधों का मेला 400 वर्षों से प्रसिद्ध है। यह मेला दशहरे के समय (आसोज बड़ी सप्तमी से ग्यारस तक) खलकाणी माता मंदिर परिसर में भरता है। इसकी शुरुआत कछवाहा राजाओं ने चन्द्रामीणा को हराने के बाद की थी।
26. पण्डित विश्व मोहन भट्ट का सम्बंध किससे है?
- (A) मोहनवीणा
- (B) इकतारा
- (C) चौतारा
- (D) कामायचा
पं. विश्वमोहन भट्ट का संबंध मोहनवीणा से है। यह उनके द्वारा विकसित किया गया एक अनूठा वाद्ययंत्र है, जिसके लिए उन्हें ग्रैमी अवार्ड भी मिला। इस वाद्ययंत्र ने भारतीय संगीत को वैश्विक स्तर पर पहचान दिलाई।
27. कामायचा निम्न में से क्या है?
- (A) लोक नृत्य
- (B) राग
- (C) वाद्ययंत्र
- (D) तालाब
कामायचा एक प्राचीन तत् वाद्ययंत्र है। इसे मुख्यतः मांगणियार जाति के गायक प्रयोग करते हैं। इसका आकार सारंगी से बड़ा होता है और इसमें 16-17 तारें होती हैं। यह राजस्थान के लोकसंगीत का अभिन्न हिस्सा है।
28. गाजी खान बरना किस वाद्ययंत्र के प्रसिद्ध कलाकार है?
- (A) करताल
- (B) कामायचा
- (C) खड़ताल
- (D) सारंगी
गाजी खान बरना राजस्थान के प्रसिद्ध खड़ताल कलाकार हैं। खड़ताल घनवाद्य यंत्र है, जिसे लोकगीतों, भजनों और सूफी संगीत में विशेष रूप से बजाया जाता है।
29. वीर घंटा व चिमटा किस प्रकार के वाद्ययंत्र है?
- (A) घन वाद्ययंत्र
- (B) सुषिर वाद्ययंत्र
- (C) अवनद्य वाद्ययंत्र
- (D) तत् वाद्ययंत्र
वीर घंटा एक बड़ा घंटानुमा वाद्य है, जिसे मंदिरों में आरती के समय पुजारी बजाते हैं। यह टिकोरे का बड़ा रूप है। चिमटा लोहे की पट्टिकाओं से बना होता है, जिनमें पीतल की तश्तरियाँ लगी होती हैं और इसे भजन-कीर्तन में बजाया जाता है। दोनों ही घनवाद्ययंत्र हैं।
30. कामायचा किस प्रकार का लोक वाद्य है?
- (A) तत्
- (B) सुषिर
- (C) ताल
- (D) घन
कामायचा एक तत् वाद्ययंत्र है। इसमें 16-17 तार होते हैं, जिनमें से मुख्य तीन तार बकरे की आंत से बनाए जाते हैं। यह सारंगी से बड़ा होता है और इसे एक ही लकड़ी से बनाया जाता है। यह वाद्य राजस्थान के मांगणियार जाति के गायकों के लिए बहुत महत्वपूर्ण है।
31. निम्न में से कौनसा तंत्र वाद्य नहीं है?
- (A) जन्तर
- (B) रवाज
- (C) चौतारा
- (D) सतारा
सतारा एक सुषिर वाद्ययंत्र है, जिसे फूंक मारकर बजाया जाता है। यह बांसुरी, अलगोजा और शहनाई का मिश्रित रूप होता है और इसे मुख्यतः जैसलमेर व बाड़मेर क्षेत्र के मुस्लिम कलाकार और गड़रिये बजाते हैं। जबकि जंतर, रवाज और चौतारा सभी तत् (तंतु/तंत्र) वाद्ययंत्र हैं।
32. निम्न में से कौनसा तत् वाद्य नहीं है?
- (A) रावणहत्था
- (B) सुरमंडल
- (C) कामायचा
- (D) सतारा
सतारा एक सुषिर वाद्ययंत्र है। इसे अलगोजा, बांसुरी और शहनाई के मिश्रित रूप के रूप में देखा जाता है। जैसलमेर और बाड़मेर क्षेत्र के मुस्लिम कलाकार तथा गडरिये इसे बजाते हैं। अन्य विकल्प जैसे रावणहत्था, सुरमंडल और कामायचा सभी तत् वाद्ययंत्र हैं।
33. निम्न में से कौन-सा यंत्र राजस्थान के तेरहताली नृत्य में काम नहीं आता?
- (A) मंजीरा
- (B) तानपुरा
- (C) चौतारा
- (D) डेरु
डेरु अवनद्य वाद्ययंत्र है और गोगाजी के भक्त इसे बजाते हैं। इसे डमरू का बड़ा रूप माना जाता है। जबकि मंजीरा, तानपुरा और चौतारा का उपयोग तेरहताली नृत्य में किया जाता है।
34. चौतारा, कामायचा कौन से लोकवाद्य परंपरा से जुड़े हैं?
- (A) सुषिर वाद्य
- (B) तत् वाद्य
- (C) अवनद्य वाद्य
- (D) घन वाद्य
चौतारा और कामायचा दोनों तत् (तंतु) वाद्ययंत्र हैं। इनमें तार होते हैं और इन्हें बजाने से स्वर उत्पन्न होता है। कामायचा मांगणियार जाति का प्रमुख वाद्य है, जबकि चौतारा भी इसी श्रेणी का महत्वपूर्ण लोक वाद्य है।
35. राजस्थान में वार्षिक शीतकालीन उत्सव कहाँ मनाया जाता है?
- (A) माउंट आबू
- (B) जयपुर
- (C) जोधपुर
- (D) उदयपुर
राजस्थान का वार्षिक शीतकालीन उत्सव माउंट आबू (सिरोही) में मनाया जाता है। यह दिसम्बर माह में आयोजित होता है। वहीं ग्रीष्म महोत्सव भी माउंट आबू में ही जून महीने में आयोजित किया जाता है।
36. कौनसा तत् वाद्य नहीं है?
- (A) जन्तर
- (B) भपंग
- (C) दुकाको
- (D) नागफनी
नागफनी एक सुषिर वाद्ययंत्र है, जो पीतल की लंबी सर्पिलाकार नली से बना होता है। इसे धार्मिक अवसरों पर साधु-संत बजाते हैं। जबकि जंतर, भपंग और दुकाको सभी तत् वाद्ययंत्र हैं।
37. …… को मूल रूप से मांड महोत्सव के रूप में जाना जाता था।
- (A) मारवाड़
- (B) कोलायत
- (C) चंद्रभागा
- (D) कबीर यात्रा
मांड महोत्सव को वर्तमान में मारवाड़ महोत्सव के नाम से जाना जाता है। यह जोधपुर में आश्विन माह (सितम्बर-अक्टूबर) की शरद पूर्णिमा को आयोजित किया जाता है। उम्मेद भवन, मडोर और मेहरानगढ़ इसके मुख्य स्थल होते हैं।
38. राजस्थान में पतंग उत्सव किस महीने में मनाया जाता है?
- (A) अप्रैल
- (B) जून
- (C) जनवरी
- (D) सितम्बर
राजस्थान में पतंग उत्सव मुख्य रूप से 14 जनवरी (मकर संक्रांति) को जयपुर में आयोजित होता है। इसके अलावा जैसलमेर में भी फरवरी महीने में पतंग महोत्सव का आयोजन किया जाता है।
39. निम्नलिखित में कौन सा घन लोक वाद्य यंत्र नहीं है?
- (A) मंजीरा
- (B) चींपिया
- (C) बांकिया
- (D) हांकल
बांकिया एक सुषिर वाद्ययंत्र है क्योंकि इसे फूंक मारकर बजाया जाता है। जबकि मंजीरा, चींपिया और हांकल सभी घन वाद्ययंत्र की श्रेणी में आते हैं।
40. वाद्य यंत्र, जो कच्छी घोड़ी नृत्य में बजाया जाता है
- (A) कामायचा
- (B) अलगोजा
- (C) झांझ
- (D) सुरनाई
झांझ एक घन वाद्ययंत्र है और यह मंजीरे का बड़ा रूप माना जाता है। इसे विशेषकर शेखावटी क्षेत्र में कच्छी घोड़ी नृत्य और धार्मिक भजनों के समय बजाया जाता है। कच्छी घोड़ी नृत्य शेखावटी का प्रसिद्ध व्यावसायिक नृत्य है। इसके प्रमुख कलाकार छंवर लाल गहलोत और गोविन्द पारीक माने जाते हैं।
41. तारपी' वाद्ययंत्र का प्रयोग मुख्यतः किस जाति द्वारा किया जाता है?
- (A) कथोड़ियों
- (B) मांगणियारों
- (C) नटों
- (D) जोगियों
तारपी या पावरी एक सुषिर वाद्ययंत्र है। यह राजस्थान के उदयपुर संभाग की कथौड़ी जनजाति द्वारा बजाया जाता है। इसे फूंक मारकर बजाया जाता है और यह उनकी सांस्कृतिक पहचान का प्रमुख हिस्सा है।
42. अलवर जिले के जोगी जाति के लोग निम्न में से किस वाद्य को बजाते हैं?
- (A) रबाज
- (B) भपंग
- (C) सारंगी
- (D) जंतर
सारंगी एक प्राचीन और लोकप्रिय तत् वाद्ययंत्र है, जिसे राजस्थान में जोगी, लंगे, मीरासी और मांगणियार जातियों द्वारा बजाया जाता है। इसे सागवान, कैर और रोहिड़ा की लकड़ी से बनाया जाता है तथा तार बकरे की आंत से बनाई जाती हैं। इसे गज से बजाया जाता है जिसमें घोड़े की पूँछ के बाल बंधे होते हैं।
43. अलवर-भरतपुर के जोगियों द्वारा किस प्रकार की सारंगी बजाई जाती है?
- (A) जड़ी की सारंगी
- (B) गुजरातण सारंगी
- (C) जोगिया सारंगी
- (D) सिंधी सारंगी
जोगिया सारंगी अलवर और भरतपुर के जोगियों द्वारा बजाई जाती है। इसमें लगभग 27 तार होते हैं। यह तत् वाद्ययंत्रों में श्रेष्ठ मानी जाती है। इसे विशेष रूप से लोक वार्ता, भर्तृहरी, गोपीचंद और अन्य लोक ख्याल गाने में प्रयोग किया जाता है।
44. अधोलिखित में से (वाद्य यंत्र का प्रकार-वाद्य यंत्र) असंगत युग्म है
- (A) तत् वाद्य – इकतारा
- (B) सुषिर वाद्य – अलगोजा
- (C) घन वाद्य – खड़ताल
- (D) अवनद्ध वाद्य – जंतर
जंतर एक तत् (तंतु) वाद्ययंत्र है, जिसे तारों के माध्यम से बजाया जाता है। जबकि अवनद्ध वाद्ययंत्र वे होते हैं जो चमड़े से बनाए जाते हैं, जैसे ढोल, पखावज, मांदल आदि। इसीलिए जंतर को अवनद्ध वाद्ययंत्र कहना असंगत है।
45. राजस्थान में कामड़ जाति के लोग किस वाद्ययंत्र को बजाते हैं?
- (A) तंदूरा
- (B) सुरिंदा
- (C) गुजरी
- (D) इनमें से कोई नहीं
तंदूरा एक प्रमुख तत् वाद्ययंत्र है, जिसमें 4 तार होते हैं। इसे चौतारा भी कहा जाता है। इसे कामड़ और नाथ जाति के लोग बजाते हैं, विशेषकर रामदेवजी के भजनों और तेरहताली नृत्य के दौरान।
46. राजस्थान के प्रमुख पशु-मेलों व उनसे संबंधित स्थलों में से कौन सा युग्म सुमेलित नहीं है?
- (A) श्री गोगामेड़ी पशु मेला – नोहर, हनुमानगढ़
- (B) श्री बलदेव पशु मेला – करौली
- (C) श्री मल्लीनाथ पशु मेला – तिलवाड़ा, बाड़मेर
- (D) श्री चन्द्रभागा पशु मेला – झालरापाटन, झालावाड़
बलदेव पशु मेला करौली में नहीं, बल्कि मेड़ता सिटी (नागौर) में भरता है। यह चैत्र शुक्ला प्रतिपदा से पूर्णिमा तक आयोजित होता है। अन्य मेलों के स्थल सही हैं – गोगामेड़ी मेला (हनुमानगढ़), मल्लीनाथ मेला (बाड़मेर) और चन्द्रभागा मेला (झालावाड़)।
47. बैलगाड़ी मेले' के नाम से कौन सा मेला प्रसिद्ध है?
- (A) कैलादेवी मेला
- (B) करणी माता मेला
- (C) शीतला माता मेला
- (D) कैलादेवी और करणी माता मेला दोनों
शीतला माता मेला को बैलगाड़ी मेला भी कहा जाता है। यह चैत्र कृष्ण अष्टमी को चाकसू (जयपुर) में आयोजित होता है। इस दिन ठंडा भोजन करने और माता की पूजा करने की परंपरा है।
48. निम्न में से कौनसा युग्म सही नहीं है?
- (A) तेजाजी का मेला – बीकानेर
- (B) बेनेश्वर मेला – डूंगरपुर
- (C) समदेवजी का मेला – जैसलमेर
- (D) लक्खी मेला – करौली
तेजाजी का प्रसिद्ध पशु मेला बीकानेर में नहीं, बल्कि नागौर जिले के परबतसर में आयोजित होता है। यह भाद्रपद मास की अमावस्या तक भरता है और नागौरी बैलों की बिक्री के लिए प्रसिद्ध है। अन्य विकल्प सही हैं।
49. मरू महोत्सव कहाँ मनाया जाता है?
- (A) बीकानेर
- (B) जोधपुर
- (C) जैसलमेर
- (D) उदयपुर
मरू महोत्सव जैसलमेर में मनाया जाता है। यह थार रेगिस्तान की लोक संस्कृति, नृत्य, संगीत और हस्तशिल्प को प्रदर्शित करता है। जबकि मारवाड़ महोत्सव जोधपुर, ऊंट महोत्सव बीकानेर, और मेवाड़ महोत्सव उदयपुर में मनाए जाते हैं।
50. निम्न में से मुँह से बजाया जाने वाला वाद्ययंत्र है?
- (A) ताशा
- (B) इकतारा
- (C) अलगोजा
- (D) नौबत
अलगोजा एक सुषिर वाद्य है जिसे मुँह से फूँककर बजाया जाता है। इसमें दोहरी बांसुरी होती है, जिससे मधुर लोकधुनें बजाई जाती हैं। जबकि ताशा अवनद्ध वाद्य है, इकतारा तार वाला वाद्य है और नौबत वाद्ययंत्रों का समूह होता है।
51. राजस्थान का कौनसा कलाकार 'भपंग का जादूगर' कहलाता है?
- (A) जुहुर खाँ मेवाती
- (B) चांद मोहम्मद
- (C) अमीर मोहम्मद खाँ
- (D) पेपे खाँ
राजस्थान के जुहुर खाँ मेवाती को भपंग का जादूगर कहा जाता है। भपंग डमरू जैसा वाद्य है, जिसे काँख में दबाकर बजाया जाता है। जुहुर खाँ मेवाती ने इस वाद्य को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मंच पर लोकप्रिय बनाया।
52. कौनसा वाद्ययंत्र तत् वाद्ययंत्रों में सर्वश्रेष्ठ माना जाता है?
- (A) सारंगी
- (B) कामायचा
- (C) शहनाई
- (D) जन्तर
सारंगी को तत् वाद्यों में सर्वश्रेष्ठ माना जाता है। यह तार वाला वाद्य है जो मानवीय आवाज़ की तरह ध्वनि उत्पन्न करता है। सारंगी का प्रयोग राजस्थान और उत्तर भारत के शास्त्रीय व लोकसंगीत दोनों में होता है।
53. सुषिर वाद्ययंत्रों में सबसे लम्बा वाद्ययंत्र, जो तीन हाथ लम्बी नली जैसा होता है, भवाई जाति का प्रमुख वाद्ययंत्र है?
- (A) नड़
- (B) बाँकिया
- (C) सींगा
- (D) भंगल
भंगल (भूगल) एक लम्बा सुषिर वाद्य यंत्र है। इसकी लंबाई लगभग तीन हाथ होती है और इसे भवाई जाति के लोग बजाते हैं। युद्धों में इसे रणभेरी के नाम से भी बजाया जाता था।
54. बाँकिया, सींगी और टोटो लोकवाद्य किस परम्परा से सम्बद्ध है?
- (A) घन वाद्य
- (B) सुषिर वाद्य
- (C) ताल वाद्य
- (D) तत् वाद्य
बाँकिया, सींगी और टोटो सभी सुषिर वाद्य हैं, जिन्हें बजाने के लिए हवा फूँकी जाती है। ये वाद्ययंत्र मुख्य रूप से ग्रामीण अंचल और लोक परंपराओं में प्रचलित हैं। इनकी ध्वनि धार्मिक अनुष्ठानों, उत्सवों और मेलों में प्रयोग की जाती है। सुषिर वाद्यों की विशेषता है कि इनमें वायु का प्रवाह ध्वनि उत्पन्न करता है।
55. निम्नलिखित में से कौनसा कथन कामायचा के बारे में असत्य है-
- (A) कामायचा मांगणियार जाति के द्वारा बहुतायत से प्रयोग किया जाता है।
- (B) यह लकड़ी के एकल टुकड़े से बनाया जाता है।
- (C) इसके तीन मुख्य तंतु बकरे की आँत के बने होते हैं।
- (D) कामायचा को वायलिन का अग्रगामी माना जाता है।
कामायचा एक प्रसिद्ध तत् वाद्य है जिसका प्रयोग राजस्थान की मांगणियार जाति करती है। यह लकड़ी के एकल टुकड़े से बनाया जाता है और इसके तंतु बकरे की आँत से बने होते हैं। इसे बजाने के लिए गज का प्रयोग होता है जो घोड़े की पूंछ के बालों से बनता है। इसे वायलिन का अग्रगामी नहीं माना जाता, इसलिए विकल्प D असत्य है।
56. निम्नलिखित में से कौनसा वाद्य यंत्र तत् वाद्य नहीं है?
- (A) सारंगी
- (B) इकतारा
- (C) अलगोजा
- (D) दुकाको
अलगोजा एक सुषिर वाद्य है, जिसमें दोहरी बांसुरी होती है और इसे फूँककर बजाया जाता है। जबकि सारंगी, इकतारा और दुकाको सभी तत् वाद्य हैं, जिनसे ध्वनि तारों के कंपन से निकलती है। अलगोजा राजस्थान के लोकसंगीत में प्रमुख भूमिका निभाता है, लेकिन यह सुषिर वाद्य है।
57. राजस्थान का कौनसा कलाकार अलगोजा वाद्ययंत्र का प्रसिद्ध कलाकार है?
- (A) रामनाथ चौधरी
- (B) चांद मोहम्मद
- (C) सदिक खां मांगणियार
- (D) रामकिशन सोलंकी
अलगोजा, जिसे डबल फ्लूट भी कहा जाता है, राजस्थान के लोकसंगीत में अत्यधिक लोकप्रिय है। इसके प्रसिद्ध कलाकार रामनाथ चौधरीरहे हैं। अलगोजा की मधुर ध्वनि लोकधुनों को जीवंत बनाती है। इसका प्रयोग विशेषकर लोकनृत्यों और मांगणियार-लंगा गायन परंपराओं में होता है।
58. निम्नलिखित में से कौनसा सुषिर वाद्य नहीं है?
- (A) सुरनाई
- (B) सतारा
- (C) करणा
- (D) सुरमण्डल
सुरमण्डल एक तत् वाद्य है जिसमें तार होते हैं और इसे बजाने से मधुर ध्वनि निकलती है। इसके विपरीत, सुरनाई, सतारा और करणा सभी सुषिर वाद्य हैं जिन्हें फूँककर बजाया जाता है। इस प्रकार सुरमण्डल को सुषिर वाद्यों में शामिल करना गलत होगा।
59. वाद्य यंत्र 'टामक' का सम्बन्ध क्षेत्र से है?
- (A) मारवाड़
- (B) मेरवाड़ा
- (C) मेवाड़
- (D) मेवात
टामक वाद्ययंत्र का सम्बन्ध राजस्थान के मेवात क्षेत्र से है। यह वाद्य स्थानीय संस्कृति और लोक परंपराओं में प्रयुक्त होता है। इसे विशेष रूप से धार्मिक आयोजनों और मेलों में बजाया जाता है। इसकी ध्वनि सामूहिक उत्सवों को अधिक प्रभावशाली बनाती है।
60. घुरालियों' क्या है?
- (A) गरासियों का वाद्ययंत्र
- (B) कालबेलियों का वाद्ययंत्र
- (C) सरगड़ा जाति का वाद्ययंत्र
- (D) भीलों का वाद्ययंत्र
घुरालियों राजस्थान की कालबेलिया जाति का पारंपरिक वाद्ययंत्र है। यह बाँस की खपच्ची से बनाया जाता है और लगभग 5–6 अंगुल लंबा होता है। इसके एक छोर पर धागा बाँधा जाता है और इसे दाँतों के बीच दबाकर बजाया जाता है। यह वाद्य लोकनृत्यों में ताल देने के लिए प्रसिद्ध है।
61. राजस्थान के किस लोकवाद्य को 'ज्यूज हार्प' भी कहा जाता है?
- (A) मोरचंग
- (B) शंख
- (C) नागफणी
- (D) सुरनाई
राजस्थान का पारंपरिक वाद्य मोरचंग अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ज्यूज हार्प के नाम से जाना जाता है। यह धातु से बना छोटा वाद्ययंत्र है जिसे मुँह के पास रखकर बजाया जाता है। इसकी ध्वनि विशेष और तालबद्ध होती है। यह वाद्य विशेषकर मांगणियार और लंगा कलाकारों द्वारा बजाया जाता है और लोकसंगीत की पहचान है।
62. रावण हत्था को निम्न में से किस से बनाया जाता है?
- (A) बाँस की लकड़ी
- (B) काँच का बर्तन
- (C) नीम की लकड़ी
- (D) नारियल की कटोरी
रावण हत्था राजस्थान का सबसे प्राचीन वाद्ययंत्र माना जाता है। इसे आधे कटे हुए नारियल की कटोरी पर बकरे का चमड़ा चढ़ाकर बनाया जाता है। इसमें लगभग 9 तार होते हैं और इसे गज से बजाया जाता है। यह मुख्य रूप से भोपों द्वारा फड़ वाचन में प्रयोग किया जाता है। लोककथाओं और धार्मिक प्रसंगों को सुनाने में यह वाद्य अत्यंत महत्वपूर्ण है।
63. करणा भील किस वाद्य का प्रसिद्ध वादक था?
- (A) बांकिया
- (B) नड़
- (C) सतारा
- (D) नगाड़ा
करणा भील राजस्थान का प्रसिद्ध नड़ वादक था। नड़ कैर की लकड़ी से बनी हुई लगभग एक मीटर लंबी नली होती है जिसमें बांसुरी की तरह छेद होते हैं। इसमें मशक से हवा भरकर ध्वनि उत्पन्न की जाती है। यह वाद्य जैसलमेर क्षेत्र में अधिक प्रचलित है और लोकगीतों व धार्मिक आयोजनों में इसका प्रयोग होता है।
64. मोरचंग एक प्रकार का है-
- (A) लोकगीत
- (B) वेशभूषा
- (C) आभूषण
- (D) वाद्य यंत्र
मोरचंग राजस्थान का एक पारंपरिक घन वाद्य यंत्र है। यह लोहे का बना छोटा वाद्य होता है जिसे मुँह के पास रखकर और उँगलियों से झटके देकर बजाया जाता है। इसकी ध्वनि अनूठी और तालबद्ध होती है। इसे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ज्यूज हार्प के नाम से जाना जाता है। यह वाद्य विशेषकर मांगणियार और लंगा कलाकारों में प्रसिद्ध है।
65. लोक वाद्ययंत्र 'भपंग' राजस्थान के किस क्षेत्र से सम्बंधित है?
- (A) शेखावाटी
- (B) मेवात
- (C) मेवाड़
- (D) मारवाड़
भपंग राजस्थान का प्रमुख तत् वाद्य है जो विशेष रूप से मेवात क्षेत्र में प्रचलित है। इसे काँख में दबाकर लकड़ी की छड़ी से बजाया जाता है। यह डमरू जैसा दिखने वाला वाद्य है। इसके प्रमुख कलाकारों में जुहूर खाँ मेवाती और उमर फारूक मेवाती का नाम विशेष रूप से लिया जाता है। यह वाद्य लोकसंगीत में अलग पहचान रखता है।
66. निम्न में से असुमेलित युग्म छांटिए
- (A) इकतारा – तत् वाद्य
- (B) अलगोजा – सुषिर वाद्य
- (C) झांझ – घन वाद्य
- (D) घुरालियो – अवनद्ध वाद्य
घुरालियो वास्तव में कालबेलियों का सुषिर वाद्य है। इसे बाँस की खपच्ची से बनाया जाता है और धागे की सहायता से बजाया जाता है। इसे दाँतों में दबाकर बजाया जाता है। जबकि इकतारा, अलगोजा और झांझ अपने-अपने सही वर्ग (तत्, सुषिर और घन) में आते हैं। इस प्रकार विकल्प D असुमेलित है।
67. राजस्थान के उमर फारुक मेवाती का सम्बन्ध किस वाद्ययंत्र से था?
- (A) कामायचा
- (B) भपंग
- (C) नगाड़ा
- (D) चिकारा
उमर फारूक मेवाती राजस्थान के प्रसिद्ध भपंग वादक थे। भपंग मेवात क्षेत्र का प्रमुख वाद्य है जो डमरू जैसा दिखता है। इसे काँख में दबाकर लकड़ी की छड़ी से बजाया जाता है। उमर फारूक ने इस वाद्य को राजस्थान ही नहीं बल्कि देशभर में लोकप्रिय बनाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया।
68. फड़ बांचते समय किस वाद्य यंत्र का प्रयोग किया जाता है?
- (A) तासा
- (B) रावणहत्था
- (C) करताल
- (D) पखावज
फड़ वाचन राजस्थान की प्राचीन लोककला है जिसमें धार्मिक कथाएँ गाई जाती हैं। फड़ बांचते समय रावणहत्था मुख्य वाद्ययंत्र के रूप में प्रयोग किया जाता है। इसे गज से बजाया जाता है और इसकी ध्वनि कथावाचन को प्रभावशाली बनाती है। यह भोपों का प्रमुख वाद्य है और इसे लोकधार्मिक परंपरा से जोड़ा जाता है।
69. कौनसा सुषिर वाद्य यंत्र नहीं है?
- (A) मोरचंग
- (B) बांसुरी
- (C) तुरही
- (D) सुरमण्डल
सुरमण्डल एक तत् वाद्ययंत्र है जिसमें तार लगे होते हैं और इन्हें बजाकर ध्वनि उत्पन्न की जाती है। इसके विपरीत मोरचंग, बांसुरी और तुरही सभी सुषिर वाद्य हैं जिन्हें हवा फूँककर बजाया जाता है। इसलिए सही उत्तर सुरमण्डल है क्योंकि यह सुषिर वाद्य नहीं है।
70. राजस्थान का एकमात्र ऐसा लोक वाद्य जिसकी डोटी में तनाव के लिए पखावज की तरह लकड़ी के गुटके डाले जाते हैं?
- (A) रावलों की मादल
- (B) लेजिम गरासिया
- (C) डैरू
- (D) खंजरी
रावलों की मादल राजस्थान का विशेष लोक वाद्य है। इसमें पखावज की तरह डोटी में लकड़ी के गुटके डाले जाते हैं ताकि तार और चमड़े में उचित तनाव पैदा हो। इसे धार्मिक आयोजनों, मेलों और लोकसंगीत में प्रयोग किया जाता है। यह मादल राजस्थान की लोक परंपरा का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
71. राजस्थान का राज्य वाद्य है?
- (A) रावणहत्था
- (B) अलगोजा
- (C) कामायचा
- (D) शहनाई
राजस्थान का राज्य वाद्य अलगोजा है। यह दो बांसुरियों से मिलकर बना होता है जिनमें 4–7 छिद्र होते हैं। वादक इन्हें एक साथ मुँह में रखकर बजाता है। यह भील और कालबेलिया जाति में प्रचलित है और सामान्यतः कैर की लकड़ी से बनाया जाता है। अलगोजा की मधुर ध्वनि लोकसंगीत को जीवंत बनाती है।
72. निम्नलिखित में से कौनसा सुषिर वाद्य यंत्र है?
- (A) कामायचा
- (B) ढप
- (C) ताशा
- (D) मशक
मशक एक सुषिर वाद्य है जिसे बकरे की खाल से बनाया जाता है। यह आधुनिक बैगपाइपर जैसा दिखता है। इसमें हवा मुँह से भरी जाती है और दूसरी ओर लगी नलियों से ध्वनि निकलती है। इसे काँख में दबाकर बजाया जाता है। कामायचा तार वाला, ढप और ताशा अवनद्ध वाद्य हैं।
73. निम्नलिखित में से कौनसा युग्म सही है-
- (A) खड़ताल – सुषिर वाद्य
- (B) रबाब – तत् वाद्य
- (C) बाँकिया – घन वाद्य
- (D) डेरू – सुषिर वाद्य
रबाब एक प्रमुख तत् वाद्य है जिसमें तार होते हैं और इन्हें गज से बजाया जाता है। खड़ताल वास्तव में घन वाद्य है, बाँकिया सुषिर वाद्य है और डेरू अवनद्ध वाद्य है। अतः केवल रबाब–तत् वाद्य का युग्म सही है।
74. धातु की अर्द्ध अण्डाकार कुण्डी को भैंसे की खाल से मढ़कर चमड़े की डोरियों से कसकर लकड़ी के डंडों से बजाया जाने वाला लोक वाद्य कहलाता है?
- (A) ढाक
- (B) रमझौल
- (C) नौबत
- (D) पखावज
इस विवरण के अनुसार वाद्य नौबत है। यह एक विशेष लोक वाद्य है जिसमें धातु की अर्ध-अंडाकार कुण्डी होती है जिसे भैंसे की खाल से मढ़ा जाता है। इसे चमड़े की डोरियों से कसकर तैयार किया जाता है और फिर लकड़ी के डंडों से बजाया जाता है। यह विशेष अवसरों और धार्मिक आयोजनों में प्रयुक्त होता है।
75. निम्न में से मुँह से बजाया जाने वाला वाद्य यंत्र है?
- (A) धौसा
- (B) मशक
- (C) सुरमंडल
- (D) निशान
मशक एक थैलेनुमा वाद्य है जिसे आधुनिक बैगपाइपर से तुलना की जाती है। यह बकरे की खाल से बनाया जाता है। इसमें एक नली के माध्यम से मुँह से हवा भरी जाती है और दूसरी ओर से दो नलियों से ध्वनि निकलती रहती है। इसे काँख में दबाकर बजाया जाता है और लोकनृत्यों व मेलों में प्रयुक्त किया जाता है।
76. मारवाड़ के जोगियों द्वारा गोपीचंद, भर्तृहरि, निहालदे आदि के ख्याल गाते समय किस वाद्य का प्रयोग किया जाता है?
- (A) भपंग
- (B) सारंगी
- (C) जन्तर
- (D) मशक
सारंगी राजस्थान का प्रमुख तत् वाद्य है जिसे जोगियों द्वारा ख्याल गाते समय बजाया जाता है। इसमें मानवीय स्वर जैसी ध्वनि उत्पन्न होती है। मारवाड़ के जोगी लोककथाओं और संतों की वाणी गाते समय सारंगी का प्रयोग करते हैं, जिससे उनका गायन और भी प्रभावशाली बन जाता है।
77. प्रसिद्ध सुरनाई वादक है-
- (A) पेपे खाँ
- (B) सद्दीक खाँ
- (C) जुहूर खाँ
- (D) कमल साकर खाँ
राजस्थान के प्रसिद्ध सुरनाई वादक पेपे खाँ हैं। सुरनाई शहनाई और टोटो से मिलता-जुलता वाद्य है। यह मुख्य रूप से मांगलिक अवसरों और विवाह समारोहों में बजाया जाता है। शहनाई को शास्त्रीय वाद्य माना जाता है जबकि सुरनाई लोक वाद्य है। पेपे खाँ ने इसे राष्ट्रीय स्तर पर ख्याति दिलाई।
78. निम्न में से राजस्थान का लोकवाद्य है?
- (A) मोरचा
- (B) नोबत
- (C) नगाड़ा
- (D) उपर्युक्त सभी
राजस्थान में मोरचा, नौबत और नगाड़ा सभी लोकवाद्य प्रचलित हैं। ये वाद्य प्राचीन काल से धार्मिक उत्सवों, मेलों, लोकनाट्यों और युद्धों में बजाए जाते रहे हैं। इनकी ध्वनि समूह में ऊर्जा और जोश भर देती है। इसलिए सही उत्तर उपर्युक्त सभी है क्योंकि तीनों ही राजस्थान के लोकवाद्य हैं।
79. जो वाद्य फूंक मार कर बजाये जाते हैं, उन्हें कहा जाता है?
- (A) घन
- (B) सुषिर वाद्य
- (C) अवनद्ध
- (D) तत्
जिन वाद्यों में हवा फूँकने से ध्वनि उत्पन्न होती है उन्हें सुषिर वाद्य कहा जाता है। इनमें बांसुरी, तुरही, शहनाई, नड़ और मशक जैसे वाद्य आते हैं। ये वाद्य राजस्थान के लोकसंगीत में प्रमुख स्थान रखते हैं और धार्मिक अवसरों तथा मेलों में इनका प्रयोग होता है।
80. सारंगी' किस प्रकार का वाद्ययंत्र है?
- (A) सुषिर
- (B) घन
- (C) तत्
- (D) अवनद्ध
सारंगी राजस्थान और उत्तर भारत का प्रसिद्ध तत् वाद्ययंत्र है। इसे गज से बजाया जाता है और इसकी ध्वनि मानवीय आवाज जैसी लगती है। लोकसंगीत और शास्त्रीय संगीत दोनों में सारंगी का अत्यधिक महत्व है। इसे मांगणियार और लंगा कलाकार प्रमुखता से बजाते हैं।
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About the Author
Mukesh Khunga
Mukesh Khunga को राजस्थान में आयोजित होने वाली विभिन्न प्रतियोगी एवं भर्ती परीक्षाओं के परीक्षा पैटर्न और प्रश्नों के स्वरूप की अच्छी समझ है। उनके मार्गदर्शन में यह अध्ययन सामग्री और MCQ content तैयार एवं review किया गया है। Read More...








