राजस्थान के इतिहास के स्रोत MCQ in Hindi | महत्वपूर्ण प्रश्न उत्तर सहित
इस पोस्ट में राजस्थान का इतिहास के टॉपिक
राजस्थान के इतिहास के स्रोत से संबंधित Latest व पूर्णतः updated महत्वपूर्ण
MCQ
प्रश्न दिए गए हैं।
ये महत्वपूर्ण MCQ प्रश्न
RPSC,
RSSB,
RAS, Patwar, Police, LDC, VDO, REET
तथा राजस्थान राज्य की अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए
उपयोगी हैं। इनमें विषयवार प्रश्न, सही उत्तर एवं विस्तृत व्याख्या
शामिल हैं।
✍️ Prepared & Reviewed by:
Rajputana Diary –
Rajasthan GK Faculty & Content Team
(Since 2021)
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1. राजस्थान में वैष्णव धर्म का सर्वप्रथम उल्लेख किस शिलालेख में किया गया ?
A
घोसुण्डी शिलालेख
B
भानु शिलालेख
C
नांदसा यूप स्तम्भ लेख
D
मंडोर का शिलालेख
📖 व्याख्या
राजस्थान में वैष्णव धर्म का सबसे पहला उल्लेख घोसुण्डी शिलालेख में मिलता है। यह शिलालेख चित्तौड़गढ़ के पास घोसुण्डी से प्राप्त हुआ है और इसमें भगवान विष्णु की उपासना से संबंधित जानकारी मिलती है। यह शिलालेख प्राचीन काल में वैष्णव धर्म के प्रसार और उसकी लोकप्रियता का महत्वपूर्ण प्रमाण माना जाता है, जिससे उस समय की धार्मिक स्थिति का भी ज्ञान होता है।
2. बिजौलिया शिलालेख किस वर्ष का है-
A
973 ई.
B
1170 ई.
C
1230 ई.
D
1267 ई.
📖 व्याख्या
यह लेख बिजौलिया के पार्श्वनाथ मन्दिर की उत्तरी दीवार के पास एक चट्टान पर उत्कीर्ण है। जिसको दिगम्बरी जैन श्रावक 'लोलाक' ने मन्दिर और कुण्ड निर्माण की स्मृति में लगवाया था।
3. सिक्कों व रियासतों का निम्न में से असंगत युग्म है?
A
ग्यारसंदिया - शाहपुरा
B
ढब्बूशाही - मारवाड़
C
माधोशाही रूपया- जयपुर
D
लल्लूलिया- जैसलमेर
📖 व्याख्या
मारवाड़ रियासत में सोजत की टकसाल में बनने वाला सिक्का 'लल्लूलिया' सिक्का कहलाता था।
4. राजा के दैनिक क्रियाकलापों व उनसे मिलने वाले राजनैतिक व्यक्तियों का वर्णन किसमें मिलता है?
A
पड़ाखा-बही
B
खरीता-बही
C
ओहदा-बही
D
हकीकत-बही
📖 व्याख्या
हकीकत-बही में राजा के दैनिक जीवन, दरबार की गतिविधियों और उनसे मिलने वाले महत्वपूर्ण व्यक्तियों का विस्तृत विवरण मिलता है। इसमें उस समय की राजनीतिक परिस्थितियों, दरबारी व्यवस्था और प्रशासनिक कार्यों की जानकारी भी दी जाती थी। यह स्रोत इतिहासकारों के लिए बहुत महत्वपूर्ण है क्योंकि इससे तत्कालीन शासन व्यवस्था और सामाजिक जीवन का वास्तविक चित्र सामने आता है।
5. निम्नलिखित में से कौनसा युग्म सही सुमेलित नहीं है-
A
जगन्नाथ प्रशस्ति-1552 ई.
B
जया बावड़ी की प्रशस्ति- 1675 ई.
C
वैद्यनाथ मंदिर की प्रशस्ति- 1719 ई.
D
बेणेश्वर का लेख-1866 ई.
📖 व्याख्या
जगन्नाथ प्रशस्ति (उदयपुर) 1652 ई. की है।
6. रणकपुर प्रशस्ति के संबंध में निम्न में से असत्य कथन है?
A
प्रशस्तिकार ने इसमें भूलवश गुहिल को बाप्पा का पुत्र लिख दिया है।
B
इस प्रशस्ति में बापा और कालभोज दोनों को पृथक-पृथक व्यक्ति बताया गया है।
C
इसमें बापा से लेकर कुभ्धा तक की वंशावली दी गई है।
D
यह लेख रणकपुर के नेमीनाथ मंदिर के एक स्तम्भ पर उत्कीर्ण है।
📖 व्याख्या
1439 ई. के इस लेख की भाषा संस्कृत व लिपि नागरी है। इसमें मेवाड़ के राजवंश, धरणा श्रेष्ठि वंश का तथा उसके शिल्पी का परिचय मिलता है। यह लेख रणकपुर के चौमुखा मंदिर (आदिनाथ) के बाएं स्तम्भ पर उत्कीर्ण है।
7. रैढ़ नामक स्थान से 3075 चाँदी की आहत मुद्रायें मिली है, जो देश में उत्खनन में एक ही स्थान से प्राप्त मुद्राओं की सर्वाधिक संख्या है, उक्त स्थान किस जिले में है?
A
जयपुर
B
करीली
C
टॉक
D
भरतपुर
📖 व्याख्या
ये भारत की प्राचीनतम मुद्राएँ है। इन सिक्कों का समय छठी शताब्दी ईसा पूर्व से द्वितीय शताब्दी ईसा पूर्व आंका गया है। इन्हे धारण या पण कहा जाता था। जिन पर अलग-अलग ठप्पे से चिह्न लगाये गये हैं।
8. बीकानेर के व्यापारिक मार्गों एवं वाणिज्यिक करों की सूचना निम्न में से किन स्त्रोतों से मिलती है?
A
कागदबही
B
दस्तूर कोमवार
C
अड़सट्टा
D
हकीकतबही
📖 व्याख्या
कागदबही में परिवहन के साधन, परिवहन शुल्क, कर, हुंडियों, नियमपत्रों, स्थानीय और अंतरप्रांतीय व्यापार, मुद्रा और व्यापारियों को शासकों द्वारा दी गई छूट आदि का विवरण मिलता है।
9. राजपूताने की प्राचीनतम लिपि है?
A
महाजनी
B
खरोष्ठी
C
नागरी
D
ब्राह्मी
📖 व्याख्या
राजपूताने की प्राचीनतम लिपि ब्राह्मी मानी जाती है। यह लिपि भारत की सबसे पुरानी लिपियों में से एक है और इससे ही बाद में अन्य लिपियों का विकास हुआ। राजस्थान क्षेत्र में प्राप्त प्राचीन अभिलेखों में ब्राह्मी लिपि का प्रयोग देखने को मिलता है, जिससे उस समय की भाषा, संस्कृति और प्रशासनिक व्यवस्था के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी प्राप्त होती है।
10. दरगाह रिकॉर्ड, इस्तमरारी रिकॉर्ड व एजेन्सी रिकॉर्ड को राजस्थान राज्य अभिलेखागार के किस रिकॉर्ड में रखा गया है?
A
उदयपुर रिकॉर्ड
B
अजमेर रिकॉर्ड
C
बीकानेर रिकॉर्ड
D
जयपुर रिकॉर्ड
📖 व्याख्या
राजस्थान राज्य अभिलेखागार के उदयपुर रिकॉर्ड में देवस्थान की बहियाँ, सिलहखाना के कागजात, बक्शीखाना बहियाँ, मेहता संग्रामसिंह के बस्ते, श्यालदास संग्रह के बस्ते आदि महत्त्वपूर्ण है।
11. जयपुर राज्य से संबंधित आय-व्यय, भेंट, उपहार, युद्ध आदि में काम आये व्यक्तियों को दी गयी इज्जत आदि का विवरण प्राप्त होता है ?
A
हकीकत बही
B
हस्बुल हुक्म
C
दस्तूर कौमवार
D
ओहदा बही
📖 व्याख्या
दस्तूर कौमवार में जयपुर राज्य की आय-व्यय व्यवस्था, भेंट, उपहार, युद्ध में योगदान देने वाले व्यक्तियों को दी गई सम्मान राशि और अन्य प्रशासनिक खर्चों का विस्तृत विवरण मिलता है। यह अभिलेख राज्य की आर्थिक व्यवस्था और सामाजिक सम्मान प्रणाली को समझने के लिए महत्वपूर्ण स्रोत है, जिससे तत्कालीन प्रशासनिक ढांचे और कार्यप्रणाली की स्पष्ट जानकारी प्राप्त होती है।
12. निम्न में से कौनसी प्रशस्ति चौहान शासक विग्रहराज द्वितीय के समय की है?
A
बुचकला शिलालेख
B
हर्षनाथ की प्रशस्ति
C
डुंगरपुर की प्रशस्ति
D
बिजौलिया का लेख
📖 व्याख्या
हर्षनाथ की प्रशस्ति चौहान शासक विग्रहराज द्वितीय के समय की मानी जाती है। यह प्रशस्ति सीकर जिले के हर्षनाथ मंदिर से प्राप्त हुई है और इसमें चौहान वंश की उपलब्धियों और शासक की वीरता का वर्णन मिलता है। यह अभिलेख उस समय के राजनीतिक और सांस्कृतिक इतिहास को समझने के लिए एक महत्वपूर्ण स्रोत माना जाता है।
13. झाड़शाही सिक्का राजस्थान की कौनसी रियासत से संबधित है?
A
बीकानेर
B
जयपुर
C
मारवाड़
D
मेवाड़
📖 व्याख्या
यहाँ के सिक्कों पर 6 टहनियों के झाड़ का चिह्न बना होता था। इसलिए इन्हे 'झाड़शाही' सिक्के कहा जाता था। 1760 ई. से प्रचलित तांबे के सिक्के को 'पुराना झाड़शाही' कहते थे।
14. लाहण बावड़ी की प्रशस्ति (1042 ई.) का संबंध किस जिले से है?
A
जोधपुर
B
अजमेर
C
जालौर
D
सिरोही
📖 व्याख्या
लाहण बावड़ी की प्रशस्ति 1042 ई. की है और इसका संबंध सिरोही जिले से है। यह प्रशस्ति उस समय के सामाजिक और धार्मिक जीवन पर प्रकाश डालती है। इसमें बावड़ी निर्माण, दान और धार्मिक गतिविधियों का उल्लेख मिलता है, जिससे उस काल की जनजीवन और जल संरचनाओं के महत्व को समझने में सहायता मिलती है।
15. गंगाशाही सिक्के किस रियासत में प्रचलित थे?
A
बीकानेर
B
प्रतापगढ़
C
भरतपुर
D
जोधपुर
📖 व्याख्या
गंगाशाही सिक्के बीकानेर रियासत में प्रचलित थे। इन सिक्कों का नाम वहां के शासक गंगासिंह के नाम पर पड़ा। यह सिक्के उस समय की आर्थिक व्यवस्था और व्यापारिक लेन-देन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते थे। इनसे यह भी पता चलता है कि बीकानेर राज्य में मुद्रा प्रणाली कितनी विकसित थी और व्यापार किस स्तर तक फैला हुआ था।
16. समिद्धेश्वर मंदिर अभिलेख राजस्थान के किस जिले में लगा है?
A
अजमेर
B
डूंगरपुर
C
जयपुर
D
चितौड़गढ़
📖 व्याख्या
चित्तौड़ किले के समिद्धेश्वर / समाधीश्वर मन्दिर के सभा मंडप की पूर्वी दीवार पर 53 पंक्तियों में उत्कीर्ण यह लेख 1428 ई. का है। इस मन्दिर में 1150 ई. का कुमारपाल सोलंकी का एक लेख भी लगा है।
17. जूनागढ़ प्रशस्ति (रायसिंह प्रशस्ति) के रचियता थे?
A
नापा
B
जड़ता
C
जीजा
D
गुणभद्र
📖 व्याख्या
जूनागढ़ प्रशस्ति, जिसे रायसिंह प्रशस्ति भी कहा जाता है, के रचियता जड़ता थे। यह प्रशस्ति बीकानेर के शासक रायसिंह की उपलब्धियों और उनके शासनकाल के महत्वपूर्ण कार्यों का वर्णन करती है। इसमें उनके द्वारा कराए गए निर्माण कार्य, युद्ध और प्रशासनिक उपलब्धियों का विस्तार से उल्लेख मिलता है, जो इतिहास के अध्ययन में महत्वपूर्ण है।
18. चांदोड़ी सिक्कों का संबंध राजस्थान की किस रियासत से रहा है?
A
बीकानेर
B
करौली
C
मारवाड़
D
मेवाड़
📖 व्याख्या
मेवाड़ महाराणा भीमसिंह ने अपनी बहिन चन्द्रकुंवरी बाई की स्मृति में 'चांदोड़ी' रूपया, अठन्नी, चवन्नी, दोअन्नी और एक अन्नी चलाई थी। जिन पर फारसी हस्ताक्षर अंकित थे।
19. निम्न में से कौनसा लेख उदयपुर जिले से प्राप्त नहीं हुआ है?
A
चीरवा शिलालेख
B
जगन्नाथराय प्रशस्ति
C
वैद्यनाथ मंदिर प्रशस्ति
D
भ्रमर माता का अभिलेख
📖 व्याख्या
भ्रमर माता का लेख (490 ई.) प्रतापगढ़ की छोटी सादड़ी के भ्रमर माता मंदिर से प्राप्त हुआ है।
20. किस शिलालेख में चौहानों को 'वत्सगोत्रीय ब्राह्मण' बताया गया है?
A
सुंधा पर्वत अभिलेख
B
हस्तिकुण्डी शिलालेख
C
अपराजित का शिलालेख
D
बिजौलिया अभिलेख
📖 व्याख्या
बिजौलिया अभिलेख में चौहानों को 'वत्सगोत्रीय ब्राह्मण' बताया गया है। यह अभिलेख चौहान वंश की उत्पत्ति और उनकी सामाजिक स्थिति पर प्रकाश डालता है। इसमें उनके वंश, परंपरा और गौरवशाली इतिहास का उल्लेख मिलता है, जिससे इतिहासकारों को उस समय की जातीय संरचना और सामाजिक व्यवस्था को समझने में सहायता मिलती है।
21. बड़ली का शिलालेख किसने खोजा था?
A
कर्नल टॉड
B
जी. एच. ओझा
C
मुंशी देवी प्रसाद
D
कैप्टन बर्ट
📖 व्याख्या
बड़ली का शिलालेख प्रसिद्ध इतिहासकार जी. एच. ओझा द्वारा खोजा गया था। उन्होंने राजस्थान के अनेक प्राचीन अभिलेखों का अध्ययन किया और उन्हें प्रकाश में लाया। इस खोज से राजस्थान के प्राचीन इतिहास, संस्कृति और प्रशासनिक व्यवस्था के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी प्राप्त हुई, जिससे इतिहास लेखन को नई दिशा मिली।
22. बसन्तगढ़ का शिलालेख किस वंश से संबंधित है?
A
गुहिल वंश
B
राठौड़ वंश
C
देवड़ा वंश
D
चावड़ा वंश
📖 व्याख्या
सिरोही जिले के बसंतगढ़ में 625 ई. (विक्रम, सं. 682) का एक लेख मिला है, जो चावड़ा वंश के शासक वर्मलात के समय का है। इससे ज्ञात होता है कि उस समय में वर्मलात अर्बुद देश का स्वामी था।
23. किस शिलालेख को पश्चिमी राजस्थान का प्राचीनतम ज्ञात अभिलेख माना जाता है?
A
बंसतगढ़ शिलालेख
B
मंडोर का शिलालेख
C
गोठ मांगलोद का शिलालेख
D
ओसियां का लेख
📖 व्याख्या
गोठ-मंगलोद (नागौर) के दधिमाता मन्दिर में उत्कीर्ण 608 ई. का यह अभिलेख पश्चिमी राजस्थान का प्राचीनतम ज्ञात अभिलेख है। इस लेख के अनुसार गोठ-मंगलोद के आस-पास का क्षेत्र 'दाहिमा' क्षेत्र कहलाता था।
24. बीजक डूंगरी पर सर्वप्रथम अशोक के शिलालेख की किसने व कब खोज की थी?
A
रलचन्द्र अग्रवाल ने 1954 में
B
बी. वी. लाल ने 1952 में
C
अमलानंद घोष ने 1959 में
D
कैप्टन बर्ट ने 1837 में
📖 व्याख्या
बीजक डूंगरी पर अशोक के शिलालेख की खोज सर्वप्रथम कैप्टन बर्ट ने 1837 में की थी। यह खोज राजस्थान के प्राचीन इतिहास के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जाती है। इससे मौर्यकालीन प्रशासन, धर्म और अशोक की नीतियों के बारे में जानकारी मिलती है, जो भारतीय इतिहास के अध्ययन में विशेष स्थान रखती है।
25. किस शिलालेख में मौर्यवंशी राजा धवल का उल्लेख मिलता है?
A
कणसवा का लेख
B
मानमोरी का शिलालेख
C
अपराजिता का शिलालेख
D
सामोली शिलालेख
📖 व्याख्या
यह लेख कोटा के कणसवा गाँव के शिवालय में लगा हुआ है। जिसमें धवल नाम के एक मौर्यवंशी राजा का उल्लेख है। इस उल्लेख के बाद अन्य किसी मौर्यवंशी राजाओं का राजस्थान में वर्णन नहीं मिलता है।
26. 1150 ई. का कुमारपाल का शिलालेख चित्तौड़ के किस मंदिर में लगा है?
A
कुम्भश्याम मन्दिर
B
तुलजा भवानी मन्दिर
C
सतबीस देवरी मन्दिर
D
समीधेश्वर मंदिर
📖 व्याख्या
कुमारपाल का 1150 ई. का शिलालेख चित्तौड़गढ़ के समीधेश्वर मंदिर में लगा है। यह मंदिर उस समय जैन धर्म से जुड़ा महत्वपूर्ण स्थान था। इस लेख से यह समझ आता है कि उस दौर में मंदिरों को राजाओं का संरक्षण मिलता था और धार्मिक गतिविधियाँ काफी सक्रिय थीं।
27. रंगमहल नामक स्थान, जहाँ से कुषाणोत्तर काल के सिक्के प्राप्त हुए हैं, किस जिले में स्थित है?
A
गंगानगर
B
हनुमानगढ़
C
भरतपुर
D
टोंक
📖 व्याख्या
ध्यान रहे रंगमहल नामक स्थान, जहाँ से प्राचीन सभ्यता प्राप्त हुई है, वो स्थान गंगानगर जिले की सूरतगढ़ तहसील में आता है। रंगमहल के नाम से ग्राम पंचायत भी है, जो गंगानगर जिले में ही है। इस रंगमहल गांव से 4 किमी दूर रंगमहल के नाम से रेलवे स्टेशन है, जो हनुमानगढ़ जिले में आता है।
28. श्रृंगी ऋषि का शिलालेख का सम्बन्ध किस जिले से है?
A
चित्तौड़
B
उदयपुर
C
डूंगरपुर
D
प्रतापगढ़
📖 व्याख्या
श्रृंगी ऋषि का शिलालेख उदयपुर जिले में मिलता है। यह स्थान एकलिंगजी के पास स्थित है। यह लेख महाराणा मोकल के समय 1428 ई. का है और संस्कृत भाषा में लिखा गया है। इससे उस समय की धार्मिक मान्यताओं और राजकीय संरक्षण की झलक मिलती है।
29. वैद्यनाथ मंदिर की प्रशस्ति मेवाड़ के किस महाराणा के समय की है-
A
जगतसिंह प्रथम
B
संग्राम सिंह प्रथम
C
संग्राम सिंह द्वितीय
D
जगतसिंह द्वितीय
📖 व्याख्या
वैद्यनाथ मंदिर की प्रशस्ति महाराणा संग्राम सिंह द्वितीय के समय की है। इसमें मंदिर से जुड़े कार्यों और धार्मिक गतिविधियों का उल्लेख मिलता है। इससे पता चलता है कि उस समय मंदिरों का निर्माण और उनका रखरखाव शासकों की प्राथमिकता में शामिल था।
30. किस शिलालेख में कछवाहा वंश को रघुवंश तिलक कहकर सम्बोधित किया गया है?
A
आमेर का शिलालेख
B
रसिया की छतरी का शिलालेख
C
सुन्धा पर्वत अभिलेख
D
किणसरिया का शिलालेख
📖 व्याख्या
आमेर के शिलालेख में कछवाहा वंश को रघुवंश तिलक कहा गया है। यह शिलालेख 1612 ई. का है। इसमें मुगल सम्राट जहांगीर का भी उल्लेख मिलता है, जिससे उस समय आमेर और मुगलों के संबंधों का पता चलता है।
31. किस प्रशस्ति में कुम्भा को दानगुरु, राजगुरु व शैलगुरु कहा गया है। इसके साथ ही कुम्भा द्वारा रचित ग्रन्थों चंडीशतक, गीत गोविन्द की टीका, संगीतराज तथा कई नाटकों का उल्लेख है?
A
एकलिंग प्रशस्ति
B
राज प्रशस्ति
C
वैद्यनाथ प्रशस्ति
D
कीर्ति स्तम्भ प्रशस्ति
📖 व्याख्या
कीर्ति स्तम्भ प्रशस्ति में महाराणा कुम्भा को दानगुरु, राजगुरु और शैलगुरु कहा गया है। इसमें उनके लिखे ग्रंथ जैसे चंडीशतक, गीत गोविन्द की टीका और संगीतराज का भी जिक्र मिलता है, जिससे उनकी विद्वता का पता चलता है।
32. किस शिलालेख से राव सीहा की मृत्यु तिथि का पता चलता है?
A
बीटू का लेख
B
सच्चियाय माता मंदिर प्रशस्ति
C
सांडेराव का लेख
D
बुचकला का शिलालेख
📖 व्याख्या
राव सीहा की मृत्यु तिथि बीटू के लेख से पता चलती है। इसमें उनके जीवन से जुड़े कुछ महत्वपूर्ण तथ्य मिलते हैं, जिससे उनके समय को समझने में मदद मिलती है।
33. किस शिलालेख में महाराणा राजसिंह का प्रथम विवाह 12 वर्ष की उम्र में होना, 1660 ई. में औरंगजेब के विरुद्ध जाकर किशनगढ़ की राजकुमारी चारूमति से विवाह तथा औरंगजेब से युद्ध एवं संधि का विवरण दिया गया है?
A
जगन्नाथ राय प्रशस्ति
B
खमनौर की छतरी का लेख
C
राजप्रशस्ति
D
वैद्यनाथ मंदिर प्रशस्ति
📖 व्याख्या
राजप्रशस्ति में महाराणा राजसिंह के जीवन की कई घटनाओं का वर्णन मिलता है। इसमें उनके कम उम्र में विवाह, चारूमति से विवाह और औरंगजेब से हुए संघर्ष का उल्लेख किया गया है।
34. जया बावड़ी की प्रशस्ति कहाँ पर लगी है?
A
मांडल (भीलवाड़ा)
B
आहड़ (उदयपुर)
C
खमनौर (राजसमंद)
D
देबारी (उदयपुर)
📖 व्याख्या
जया बावड़ी की प्रशस्ति उदयपुर के देबारी में स्थित है। इसमें बावड़ी के निर्माण से जुड़ी जानकारी मिलती है,
35. अभिलेख, जो प्रतिहार शासक कक्कुक की अभीरों पर विजय का दावा करता है
A
घटियाला अभिलेख
B
बुचकला अभिलेख
C
मण्डोर का शिलालेख
D
शंकरघट्टा का लेख
📖 व्याख्या
घटियाला अभिलेख में प्रतिहार शासक कक्कुक द्वारा अभीरों पर विजय का उल्लेख मिलता है। इसमें उनके युद्ध और जीत से जुड़ी जानकारी दी गई है,
36. निम्नलिखित में से शिलालेख / प्रशस्ति और उनके उत्कीर्णन वर्ष का कौनसा जोड़ा सुमेलित नहीं है?
A
अचलेश्वर शिलालेख - 1285 ई.
B
बिजौलिया शिलालेख - 1170 ई.
C
चिरवा शिलालेख - 987 ई.
D
कुम्भलगढ़ प्रशस्ति- 1460 ई.
📖 व्याख्या
चीरवा का शिलालेख 1273 ई. का है।
37. घोसुण्डी शिलालेख की भाषा व लिपि है?
A
प्राकृत, आर्मेनियन
B
संस्कृत, भाबू
C
संस्कृत, ब्राह्मी
D
हिन्दी, देवनागरी
📖 व्याख्या
घोसुण्डी शिलालेख संस्कृत भाषा में और ब्राह्मी लिपि में लिखा गया है। यह राजस्थान के प्राचीन शिलालेखों में से एक है, जिसमें धार्मिक विषयों का उल्लेख मिलता है।
38. द्रम, विन्शोपक व रूपक आदि नामों से प्रचलित मुद्राओं का संबंध किन शासकों से है?
A
परमार
B
चौहान
C
गुहिल
D
प्रतिहार
📖 व्याख्या
द्रम, विन्शोपक और रूपक नाम की मुद्राएँ चौहान शासकों के समय चलती थीं। ये उस समय के लेन-देन में उपयोग होती थीं और व्यापारिक गतिविधियों का हिस्सा थीं।
39. वरली शिलालेख, जो कि अशोक काल से पूर्व का माना जाता है, प्राप्त हुआ है?
A
डूंगरपुर जिले में
B
भीलवाड़ा जिले में
C
व्यावर जिले में
D
अजमेर जिले में
📖 व्याख्या
वरली शिलालेख अजमेर जिले में मिला है और इसे अशोक काल से पहले का माना जाता है।
40. राजप्रशस्ति शिलालेख का काल है?
A
1576 ई.
B
1476 ई.
C
1676 ई.
D
1776 ई.
📖 व्याख्या
राजप्रशस्ति शिलालेख 1676 ई. का है और यह महाराणा राजसिंह के समय से जुड़ा है। इसमें उनके शासनकाल की घटनाओं का उल्लेख मिलता है।
41. घटियाला शिलालेख किस भाषा में लिखा गया था?
A
संस्कृत
B
प्राकृत
C
फारसी
D
ऊर्दू
📖 व्याख्या
घटियाला शिलालेख राजस्थान के महत्वपूर्ण अभिलेखों में से एक है। यह मुख्यतः संस्कृत भाषा में लिखा गया था, जो उस समय शासकीय और धार्मिक अभिलेखों की प्रमुख भाषा थी। संस्कृत का प्रयोग शासकों की उपलब्धियों और वंशावली को दर्शाने के लिए किया जाता था।
42. राजप्रशस्ति' शिलालेख के संबंध में निम्न में से असत्य कथन है?
A
यह प्रशस्ति राजसमंद झील की पाल पर लगी है।
B
यह काले रंग के 25 पत्थरों पर संस्कृत भाषा में उत्कीर्ण है।
C
इसमें बापा से लेकर महाराणा राजसिंह तक के शासकों की वंशावली व उनकी उपलब्धियों का वर्णन है।
D
प्रशस्ति से पता चलता है कि राजसमुद्र का निर्माण महाराणा राजसिंह ने नाडोल विजय की उपलक्ष में करवाया था।
📖 व्याख्या
प्रशस्ति से पता चलता है कि राजसमुद्र का निर्माण दुष्काल के समय श्रमिकों के लिए काम निकालने के लिए कराया गया था और उसे पूरा बनने में 14 वर्ष लगे थे।
43. टोंक जिले के नगर कस्बे में मालव जनपद के लगभग 6 हजार ताँबे के सिक्के किसे प्राप्त हुये थे?
A
जॉन मार्शल
B
ए.सी. एल. कार्लाइल
C
कर्नल जेम्स टॉड
D
दयाराम साहनी
📖 व्याख्या
नगर (टोंक) क्षेत्र से लगभग 6000 तांबे के सिक्के ए.सी. एल. कार्लाइल को प्राप्त हुए थे। इन सिक्कों से यह संकेत मिलता है कि यहां मालव जनपद की टकसाल स्थित थी, जहाँ सिक्कों का निर्माण किया जाता था।
44. राजस्थान में अशोक के अभिलेख कहाँ से प्राप्त हुए है?
A
बड़ली
B
बरनाला
C
बुचकला
D
बैराठ
📖 व्याख्या
मौर्य सम्राट अशोक के अभिलेख राजस्थान में बैराठ (वर्तमान जयपुर क्षेत्र) से प्राप्त हुए हैं। यहाँ से दो प्रमुख शिलालेख मिले हैं, जो लगभग 250 ईसा पूर्व के हैं और अशोक के धम्म संबंधी विचारों को दर्शाते हैं।
45. जो पत्र राजा द्वारा अपने अधीनस्थ अधिकारियों और कर्मचारियों को भेजे जाते थे, वे कहलाते थे।
A
फरमान
B
दोवर्की
C
परवाना
D
खरीता
📖 व्याख्या
प्राचीन और मध्यकालीन प्रशासन में राजा द्वारा अपने अधिकारियों को भेजे गए आदेशात्मक पत्रों को 'परवाना' कहा जाता था। यह प्रशासनिक संचार का महत्वपूर्ण माध्यम था और शासन व्यवस्था को सुचारू रूप से चलाने में सहायक था।
46. घटियाला अभिलेख से संबंधित निम्नलिखित कथनों में असत्य है-
A
अभिलेख में प्रतिहार शासक हरिशचन्द्र एवं उसके वंशजों का विवरण है।
B
अभिलेख में 'मग' जातीय ब्राह्मणों का उल्लेख है।
C
अभिलेख में नागभट्ट-1 के राजधानी को मंडोर में स्थानांतरित करने का विवरण है।
D
यह अभिलेख 4 अभिलेखीय लेखों का एक समूह है।
📖 व्याख्या
मंडोर प्रतिहारों की प्रारंभिक राजधानी पहले से ही मंडोर थी। नागभट्ट प्रथम के समय राजधानी को मंडोर से मेड़ता स्थानांतरित किया गया था, इसलिए कथन असत्य है।
47. चितौड़ की टकसाल में मुगल शासकों अकबर व जहाँगीर के समय ढाले गये सिक्के क्या कहलाते थे?
A
चांदोली सिक्के
B
सिक्का एलची
C
गधिया सिक्के
D
फदिया सिक्के
📖 व्याख्या
चित्तौड़ की टकसाल में अकबर और जहाँगीर के समय जो सिक्के ढाले गए, उन्हें 'सिक्का एलची' कहा जाता था। यह मुगल काल की मुद्रा प्रणाली का महत्वपूर्ण भाग थे और व्यापार में व्यापक रूप से उपयोग होते थे।
48. राजस्थान में प्रचलित रहे 'आदिवराह शैली' के सिक्कों का संबंध किस राजवशं से है?
A
गुर्जर प्रतिहार
B
राठौड़ राजवंश
C
देवड़ा चौहान
D
भाटी राजवंश
📖 व्याख्या
आदिवराह शैली के सिक्के गुर्जर-प्रतिहार वंश से संबंधित थे। इन सिक्कों पर भगवान विष्णु के वराह अवतार का चित्र अंकित होता था, जो इस वंश की धार्मिक आस्था और सांस्कृतिक पहचान को दर्शाता है।
49. 1886 ई. में बूंदी में महाराव रामसिंह के समय किस प्रकार के सिक्के प्रचलन में थे?
A
सालिमशाही सिक्के
B
झाड़शाही एलची
C
स्वरूपशाही सिक्के
D
कटारशाही सिक्के
📖 व्याख्या
बूंदी राज्य में 1886 ई. में महाराव रामसिंह के समय 'कटारशाही' सिक्के प्रचलित थे। इन सिक्कों पर एक ओर महारानी विक्टोरिया का नाम और कटार का चिन्ह अंकित होता था, जो उस समय की राजनीतिक स्थिति को दर्शाता है।
50. निम्नलिखित में से कौनसा युग्म (मुद्राएं- रियासत) सुमेलित नहीं है?
A
अखैशाही - जैसलमेर
B
मदनशाही- कोटा
C
विजयशाही - झालावाड़
D
गजशाही-बीकानेर
📖 व्याख्या
विजयशाही सिक्के वास्तव में मारवाड़ रियासत में प्रचलित थे, न कि झालावाड़ में। ये सिक्के सोने, चांदी और तांबे के बने होते थे और विभिन्न शासकों के काल में उपयोग में रहे।