राजस्थान में जल संरक्षण एवं जल प्रबन्धन MCQ in Hindi | महत्वपूर्ण प्रश्न उत्तर सहित
इस पोस्ट में राजस्थान का भूगोल के टॉपिक
राजस्थान में जल संरक्षण एवं जल प्रबन्धन से संबंधित Latest व पूर्णतः updated महत्वपूर्ण
MCQ
प्रश्न दिए गए हैं।
ये महत्वपूर्ण MCQ प्रश्न
RPSC,
RSSB,
RAS, Patwar, Police, LDC, VDO, REET
तथा राजस्थान राज्य की अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए
उपयोगी हैं। इनमें विषयवार प्रश्न, सही उत्तर एवं विस्तृत व्याख्या
शामिल हैं।
✍️ Prepared & Reviewed by:
Rajputana Diary –
Rajasthan GK Faculty & Content Team
(Since 2021)
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1. कुओं, झीलों एवं नहरों के जल को खेतों तक पहुँचाने का कौन-सा पारंपरिक तरीका नहीं है?
A
मोट
B
ढेकली
C
रहट
D
ड्रिप तंत्र
📖 व्याख्या
ड्रिप तंत्र आधुनिक सिंचाई प्रणाली है, जबकि मोट, ढेकली और रहट पारंपरिक तरीके हैं। ड्रिप प्रणाली में पानी बूंद-बूंद कर सीधे पौधों की जड़ों में पहुँचाया जाता है।
2. राजस्थान के शुष्क व अर्ध-शुष्क क्षेत्रों में 'पालर-पानी' शब्द किसके लिए प्रयुक्त होता है?
A
नदी जल
B
भूजल
C
वर्षा जल
D
झील जल
📖 व्याख्या
‘पालर पानी’ शब्द राजस्थान में उस वर्षा जल के लिए प्रयोग किया जाता है, जो सूखी नदी-नालों या मैदानों में बहकर अस्थायी रूप से एकत्र होता है। यह सीमित समय के लिए होता है और कृषि के लिए उपयोगी माना जाता है।
3. निम्नलिखित में से कौन-सा एक राजस्थान में वर्षा जल संग्रहण की परंपरागत विधि है?
A
तालाब
B
कुआँ
C
नदी
D
टांका
📖 व्याख्या
टांका राजस्थान की पारंपरिक वर्षा जल संग्रहण प्रणाली है, जिसमें वर्षा जल को घरों या भवनों की छतों से एकत्र कर भूमिगत टांकों में संग्रहित किया जाता है।
4. वर्षा जल संग्रहण लाभदायक है –
A
सिंचाई के लिए
B
कृषि के लिए
C
जल विद्युत उत्पादन के लिए
D
भूमिगत जल स्तर सुधारने के लिए
📖 व्याख्या
वर्षा जल को संरक्षित कर उसे जमीन में पुनर्भरण करने से भूजल स्तर में सुधार होता है। यह विशेष रूप से शुष्क क्षेत्रों में अत्यंत लाभकारी सिद्ध होता है।
5. राजस्थान के किस जिले में 'खड़ीन' जल संरक्षण की प्रचलित विधि है?
A
बाड़मेर
B
जैसलमेर
C
जोधपुर
D
बीकानेर
📖 व्याख्या
‘खड़ीन’ एक परंपरागत जल संरक्षण तकनीक है जो विशेष रूप से जैसलमेर जिले में उपयोग की जाती है। इसमें वर्षा जल को खेतों में रोक कर मिट्टी में धीरे-धीरे सोखने दिया जाता है जिससे रबी की फसल की सिंचाई होती है।
6. निम्नलिखित में से कौन-सा राजस्थान में जल संरक्षण का एक परंपरागत तरीका नहीं है?
A
टोबा
B
टांका
C
ताड़ी
D
नाडी
📖 व्याख्या
‘ताड़ी’ जल संरक्षण की परंपरागत विधि नहीं है। जबकि टोबा, टांका और नाड़ी सभी पारंपरिक जल संग्रहण प्रणालियाँ हैं जो विशेष रूप से थार के शुष्क क्षेत्रों में उपयोग की जाती हैं।
7. निम्नलिखित में से कौन-सी संरचना तालाब का छोटा रूप है, जो अधिकांशतः पश्चिमी राजस्थान में पायी जाती है?
A
झील
B
बेरी
C
नाडी
D
खड़ीन
📖 व्याख्या
नाड़ी छोटे आकार की जल संरचना होती है जो वर्षा जल को संचित करने के लिए बनाई जाती है। यह विशेष रूप से पश्चिमी राजस्थान जैसे शुष्क क्षेत्रों में पाई जाती है।
8. निम्न में से कौन-सा जल संरक्षण में सहायक नहीं है?
A
शुष्क कृषि तकनीकें
B
वनों की कटाई
C
वर्षाजल संग्रहण
D
बूंद-बूंद सिंचाई प्रणाली
📖 व्याख्या
वनों की कटाई जल संरक्षण के विपरीत कार्य है क्योंकि पेड़ जल चक्र को संतुलित रखते हैं और वर्षा जल को भूमि में सोखने में सहायक होते हैं।
A
पूर्वी राजस्थान में
B
दक्षिण राजस्थान में
C
पश्चिमी राजस्थान में
D
कोटा क्षेत्र में
📖 व्याख्या
खड़ीन एक परंपरागत जल संरक्षण प्रणाली है जो विशेष रूप से पश्चिमी राजस्थान के जैसलमेर जिले में पाई जाती है। इसमें वर्षा जल को खेतों में एकत्र कर फसलों के लिए प्रयोग किया जाता है।
10. राजस्थान की 'चौका प्रणाली' का मुख्य उद्देश्य है –
A
पानी की कम उपलब्धता वाले क्षेत्रों में पानी के संसाधनों का प्रबंधन करना
B
राजस्थान में भोजन प्रणाली का प्रबंधन करना
C
मधुमक्खी पालकों को सहयोग करना
D
पशु पालन को बढ़ाना
📖 व्याख्या
‘चौका प्रणाली’ जल संचयन की परंपरागत तकनीक है जो विशेष रूप से दक्षिणी राजस्थान के आदिवासी क्षेत्रों में प्रचलित है। इसका उद्देश्य वर्षा जल का भंडारण कर सूखे समय में उसका प्रयोग करना है।
11. राजस्थान के थार रेगिस्तानी क्षेत्र में सामान्यतया किसके लिए 'टान्का' एक परंपरागत तकनीक है?
A
सिंचाई
B
वर्षा जल संग्रहण
C
नहर निर्माण
D
बर्फ संग्रहण
📖 व्याख्या
‘टांका’ एक भूमिगत जल भंडारण प्रणाली है जिसका उपयोग वर्षा जल संग्रहण के लिए किया जाता है। यह तकनीक थार क्षेत्र में बहुत सामान्य है।
12. डिग्गी' निर्माण क्या है?
A
हथकरघा की एक तकनीक
B
नहर कमान क्षेत्र में फसलों और कृषि गतिविधियों के लिए अधिशेष जल बहाल करने का अभियान
C
सिंचाई के लिए पाइपलाइन का निर्माण
D
कृषि की एक नई पद्धति
📖 व्याख्या
‘डिग्गी निर्माण’ राजस्थान में नहरों से प्राप्त जल को भंडारित करने की एक योजना है। इसका उद्देश्य नहर कमान क्षेत्रों में अधिशेष जल को एकत्र कर सिंचाई एवं कृषि में प्रयोग करना है।
13. राजस्थान में जल संरक्षण के लिए 'अमृतम् जलम्' अभियान किसने चलाया?
A
जल शक्ति मंत्रालय
B
राजस्थान सरकार
C
राजस्थान पत्रिका
D
विश्व बैंक
📖 व्याख्या
‘अमृतम् जलम्’ एक जनसहभागिता आधारित अभियान है जिसे राजस्थान पत्रिका समाचार पत्र समूह ने जल संरक्षण की जागरूकता और कार्यवाही के लिए प्रारंभ किया।
14. निम्नलिखित में से राजस्थान में कौन-सी जल संरक्षण की परंपरागत विधि नहीं है?
A
नाली
B
नाड़ी
C
टोबा
D
जोहड़
📖 व्याख्या
नाली जल निकासी की एक प्रणाली होती है, जबकि नाड़ी, टोबा और जोहड़ राजस्थान में पारंपरिक जल संरक्षण के साधन हैं। अतः नाली इसमें शामिल नहीं है।
15. जैसलमेर जिले में पालीवाल ब्राह्मणों द्वारा शुरू की गई परम्परागत जल संरक्षण की विधि कहलाती है –
A
नाड़ी
B
टोबा
C
खड़ीन
D
तालाब
📖 व्याख्या
पालीवाल ब्राह्मणों ने जैसलमेर जिले में 'खड़ीन' प्रणाली की शुरुआत की थी, जिसमें वर्षा जल को खेतों में संचित कर फसलों की सिंचाई की जाती थी। यह एक बहुत ही सफल परंपरागत जल संरक्षण विधि है।
16. टांका' और 'खड़ीन' प्रकार हैं –
A
कृषि यंत्र
B
परम्परागत जल संरक्षण संरचनाएँ
C
पर्वतीय झीलें
D
मिट्टी की किस्में
📖 व्याख्या
‘टांका’ एक भूमिगत जल संग्रहण प्रणाली है जबकि ‘खड़ीन’ वर्षा जल को खेतों में रोकने की प्रणाली है। दोनों ही राजस्थान की पारंपरिक जल संरक्षण प्रणालियाँ हैं।
17. अमृतम् जलम्' जल संरक्षण अभियान चलाया गया है?
A
राजस्थान पत्रिका द्वारा
B
तरूण भारत संघ द्वारा
C
राजस्थान जल विभाग द्वारा
D
विकल्प 1 व 3 दोनों
📖 व्याख्या
राजस्थान पत्रिका समाचार पत्र द्वारा जल संरक्षण का संदेश देने व प्राचीन जलस्रोतों के संरक्षण के प्रति जागरूकता फैलाने के उद्देश्य से प्रतिवर्ष यह अभियान चलाया जाता है।
18. वर्षाजल को संग्रहित करने के लिए बनाया जाने वाला भूमिगत हौद क्या कहलाता है?
A
आगोर
B
जोहड़
C
नाड़ी
D
टांका
📖 व्याख्या
रेतीले मरुस्थलीय क्षेत्रों में वर्षा जल को संग्रहित करने के लिए बनाया गया भूमिगत हौद 'टांका' या कुण्ड कहलाता है।
19. नाड़ी या तालाब में वर्षा जल आने के लिए निर्धारित की गई धरती की सीमा क्या कहलाती है?
A
खड़ीन
B
पायतान
C
नेहटा
D
मदार
📖 व्याख्या
नाड़ी या तालाब में वर्षा जल जिस क्षेत्र से बहकर आता है, उस निर्धारित सीमा को ‘मदार’ कहा जाता है। यह जल संग्रहण क्षेत्र का महत्वपूर्ण भाग होता है।
20. भूमिगत जल का उपयोग करने के लिए बनाये जाने वाले सीढ़ीदार कुएं क्या कहलाते हैं?
A
बेरा
B
जोहड़
C
नाड़ी
D
बावड़ी
📖 व्याख्या
भूमिगत जल का उपयोग करने के लिए बनाये गये सीढ़ीदार कुएँ, जिनमें सीढ़ियों की सहायता से पानी की सतह तक उतरा जा सकता है, उसे बावड़ी कहा जाता है।
21. किसी जलस्रोत में एकत्र किया गया वर्षा का शुद्ध जल क्या कहलाता है?
A
बारानी
B
पालर पानी
C
नहरी पानी
D
ब्राइन
📖 व्याख्या
किसी जलस्रोत में संचित वर्षा के शुद्ध जल को ‘पालर पानी’ कहा जाता है। यह विशेष रूप से शुष्क क्षेत्रों में उपयोगी माना जाता है।
22. तालाब या नाड़ी के आसपास की पक्की भूमि, जहाँ से पानी बहकर तालाब में इक्कठा होता है, क्या कहलाती है?
A
आगोर
B
नेहटा
C
मदार
D
पायतन
📖 व्याख्या
तालाब या नाड़ी के आसपास की वह भूमि जहाँ से पानी बहकर जलाशय में एकत्र होता है, उसे ‘आगोर’ कहा जाता है।
23. नाडी या तालाब से अतिरिक्त जल की निकासी के लिए बनाया गया मार्ग क्या कहलाता है?
A
खडीन
B
पायतान
C
नेहटा
D
मदार
📖 व्याख्या
नाड़ी या तालाब से अतिरिक्त जल को बाहर निकालने के लिए बनाए गए मार्ग को ‘नेहटा’ कहा जाता है। इससे जल संरचना सुरक्षित रहती है।
24. कुएं को मारवाड़ क्षेत्र में किस नाम से जाना जाता है?
A
टांका
B
बावड़ी
C
नेहटा
D
बेरा
📖 व्याख्या
मारवाड़ क्षेत्र में कुएँ को ‘बेरा’ कहा जाता है। यह स्थानीय जल स्रोत के रूप में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
25. राजस्थान में खड़ीन कृषि का सर्वप्रथम प्रचलन किसने प्रारम्भ किया था?
A
मारवाड़ के राठीड़ो ने
B
भरतपुर के जाटों ने
C
जैसलमेर के पालीवालों ने
D
भोमट क्षेत्र के भीलों ने
📖 व्याख्या
खड़ीन कृषि का प्रारम्भ सबसे पहले 15वीं शताब्दी में जैसलमेर के पालीवाल ब्राह्मणों ने किया था। इसमें वर्षा जल को खेतों में रोककर नमी के आधार पर कृषि की जाती है। यह पश्चिमी राजस्थान की महत्वपूर्ण पारंपरिक जल संरक्षण तकनीक है।
26. निम्न में से किस जल संग्रहण ढांचे में वर्षा जल एकत्र नहीं किया जाता है?
A
नाड़ी
B
टोबा
C
झालरा
D
बावड़ी
📖 व्याख्या
नाड़ी, टोबा और झालरा में वर्षा जल का संग्रहण किया जाता है, जबकि बावड़ी मुख्यतः भूमिगत जल प्राप्त करने का साधन है। इसलिए इसमें वर्षा जल सीधे संग्रहित नहीं किया जाता।
27. खड़ीन सिंचाई सर्वाधिक कहाँ होती है?
A
जैसलमेर
B
डीडवाना-कुचामन
C
जोधपुर
D
उदयपुर
📖 व्याख्या
खड़ीन सिंचाई प्रणाली का सर्वाधिक उपयोग जैसलमेर जिले में होता है। यह तकनीक वर्षा जल को खेतों में रोककर मिट्टी में नमी बनाए रखने के लिए प्रसिद्ध है।
28. शेखावाटी क्षेत्र में चूनेदार अधः स्तर अनावृत होने के कारण आसानी से बनाये गये कच्चे कुओं को स्थानीय भाषा में क्या कहा जाता है?
A
बावड़ी
B
झालरा
C
रन
D
जोहड़
📖 व्याख्या
शेखावाटी क्षेत्र में चूनेदार अधःस्तर के कारण आसानी से बनाए गए कच्चे जल स्रोतों को स्थानीय भाषा में ‘जोहड़’ कहा जाता है। ये जल संरक्षण के महत्वपूर्ण साधन हैं।
A
जल संरक्षण तकनीक
B
मरूस्थलीय घास
C
बालुका स्तूप का एक प्रकार
D
जैसलमेर का एक रन क्षेत्र
📖 व्याख्या
खड़ीन राजस्थान की पारंपरिक जल संरक्षण तकनीक है, जिसमें वर्षा जल को खेतों में रोककर कृषि कार्य किया जाता है। यह विशेष रूप से पश्चिमी राजस्थान में प्रचलित है।
30. राजस्थान में सर्वप्रथम पक्की नाडी का निर्माण मारवाड़ के किस शासक ने करवाया था?
A
राव मालदेव
B
राव जोधा जी
C
राव सीहा
D
राव रणमल
📖 व्याख्या
राजस्थान में सर्वप्रथम पक्की नाड़ी का निर्माण मारवाड़ के शासक राव जोधा जी ने करवाया था। इसका उद्देश्य वर्षा जल का संरक्षण करना था।
31. निम्नलिखित में कौनसी राजस्थान में परम्परागत जल संरक्षण की विधि नहीं है-
A
नाली
B
खड़ीन
C
टोबा
D
टांका
📖 व्याख्या
नाली जल निकासी की प्रणाली है, जबकि खड़ीन, टोबा और टांका राजस्थान की पारंपरिक जल संरक्षण विधियाँ हैं।
32. टांका या कुण्ड में वर्षा जल को संग्रहित करने के लिए उसके चारों ओर की मिट्टी को पक्का कर बनाया गया भाग कहलाता है ?
A
खडीन
B
पायतान
C
नेहटा
D
मदार
📖 व्याख्या
टांका या कुण्ड के आसपास वर्षा जल संग्रहण हेतु पक्की बनाई गई भूमि को ‘पायतान’ कहा जाता है। इससे पानी आसानी से टांके में एकत्र हो जाता है।
33. प्रसिद्ध चौतीना कुआँ स्थित है?
A
बीकानेर
B
चुरू
C
पाली
D
नागौर
📖 व्याख्या
प्रसिद्ध चौतीना कुआँ बीकानेर में स्थित है। यह राजस्थान की पारंपरिक जल संरचनाओं में महत्वपूर्ण स्थान रखता है।
34. कुएँ से पानी निकालने या खींचने के काम में ली जाने वाली मोटी रस्सी क्या कहलाती है?
📖 व्याख्या
कुएँ से पानी निकालने के लिए प्रयोग की जाने वाली मोटी रस्सी को ‘लाव’ कहा जाता है। यह पारंपरिक जल उपयोग प्रणाली का हिस्सा है।
35. निम्न में से किस जल स्रोत का स्वयं का कोई आगोर नहीं होता है, वह अपने से ऊँचाई पर स्थित किसी तालाब या झील के रिसाव का पानी प्राप्त करता है?
A
झालरा
B
टोवा
C
जोहड़
D
टांका
📖 व्याख्या
झालरा का स्वयं का कोई आगोर नहीं होता। इसमें ऊँचाई पर स्थित तालाबों या झीलों के रिसाव से जल आता है। इसका उपयोग धार्मिक कार्यों और स्नान आदि में किया जाता था।
36. निम्न में से कौनसा संगठन अलवर में जल संरक्षण के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य कर रहा है?
A
नव भारत संगठन
B
युवा जल संगठन
C
तरूण भारत संघ
D
जलजीवन संघ
📖 व्याख्या
तरूण भारत संघ अलवर जिले में जल संरक्षण के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य कर रहा है। इसके संस्थापक राजेन्द्र सिंह हैं, जिन्हें ‘जोहड़ वाले बाबा’ भी कहा जाता है।
37. नहरी सिंचित क्षेत्र में फसलों और कृषि गतिविधियों के लिए अधिशेष जल को संचित करने की संरचना / जल हीज कहलाती है।
A
डिग्गी
B
खड़ीन
C
वेरी
D
टोबा
📖 व्याख्या
डिग्गी नहरी क्षेत्रों में अतिरिक्त जल को संग्रहित करने की संरचना है। इसका उपयोग कृषि और सिंचाई कार्यों में किया जाता है।
38. कौनसा एक राजस्थान में वर्षा जल संग्रहण की परम्परागत विधि है?
A
बावड़ी
B
कुआँ
C
टांका
D
नेहटा
📖 व्याख्या
टांका राजस्थान की पारंपरिक वर्षा जल संग्रहण प्रणाली है। इसमें वर्षा जल को भूमिगत संरचना में संग्रहित किया जाता है।
39. आकृति में लगभग नाडी के समान ही होता है लेकिन नाड़ी से अधिक गहरा होता है-
A
आगोर
B
बेरा
C
टोबा
D
झालरा
📖 व्याख्या
टोबा आकार में नाड़ी के समान होता है, लेकिन यह अधिक गहरा होता है। इसका उपयोग वर्षा जल संग्रहण के लिए किया जाता है।
40. खेतों, घरों, गढ़ों एवं दुर्गों में वर्षा जल संग्रहित करने हेतु निर्मित की जाने वाली संरचनाएँ है?
A
खड़ीन
B
टांका
C
नाडी
D
पोखर
📖 व्याख्या
टांका ऐसी संरचना है जिसका निर्माण खेतों, घरों, गढ़ों और दुर्गों में वर्षा जल संग्रहण हेतु किया जाता था।
41. पश्चिमी राजस्थान में सैकड़ों गाँवों के नाम के साथ 'सर' जुड़ा है, जो प्रमाण है-
A
मरूस्थल होने का प्रमाण
B
वहाँ तालाब होने का प्रमाण
C
प्राचीन सभ्यता होने का प्रमाण
D
लगान मुक्त भूमि होने का प्रमाण
📖 व्याख्या
पश्चिमी राजस्थान में गाँवों के नाम के साथ ‘सर’ शब्द जुड़ा होना वहाँ तालाब या जलाशय होने का संकेत माना जाता है।
42. वर्षा जल संचयन क्या है?
A
पानी का वितरण
B
उपयोग किए गए पानी का संग्रह और भंडारण
C
वर्षा जल का संग्रह और भंडारण
D
इनमें से कोई नहीं
📖 व्याख्या
वर्षा जल संचयन का अर्थ वर्षा के जल को एकत्र कर उसका भंडारण करना है, ताकि भविष्य में जल की आवश्यकता होने पर उसका उपयोग किया जा सके।
43. निम्न में से कौनसे जल प्रदूषण के कारण हो सकते है?
(1) घरेलू अपशिष्ट पदार्थों को जल में डालना।
(2) महासागरों में जहाजों से तेल का रिसाव होना।
(3) जलाशयों के निकट कपड़े धोना एवं पशुओं को नहलाना।
(4) कल-कारखानों एवं उद्योगों से निकले ठोस अपशिष्ट पदार्थों तथा रासायनिक तत्वों को जल में डालना।
A
1,2 व 4
B
केवल 3 व 4
C
1,2,3 व 4
D
केवल 3
📖 व्याख्या
घरेलू अपशिष्ट, तेल रिसाव, जलाशयों के पास कपड़े धोना तथा औद्योगिक रासायनिक अपशिष्ट सभी जल प्रदूषण के प्रमुख कारण हैं। ये जल की गुणवत्ता को प्रभावित करते हैं।
44. निम्न में से कौनसी परम्परागत जल संरक्षण की विधि नहीं है?
A
नाडी
B
खड़ीन
C
तालाव
D
इनमें से कोई नहीं
📖 व्याख्या
नाड़ी, खड़ीन और तालाब सभी राजस्थान की परम्परागत जल संरक्षण विधियाँ हैं। ये जल संचयन और सिंचाई के लिए प्राचीन समय से उपयोग में लाई जाती रही हैं।
45. निम्न में से कौनसे जल प्रदूषण को रोकने के उपाय हो सकते है?
A
जल प्रदूषण फैलाने वाली औद्योगिक इकाइयों एवं नागरिकों के प्रति सख्त कानून बनाना चाहिए।
B
शहरों के सीवरेज के जल को जलाशयों में मिलने से पहले साफ करके पुनः उपयोग योग्य बनाया जाए।
C
ठोस शहरी कचरे का निस्तारण जल स्रोतों में न करके अन्यत्र बंजर एवं अनुपयोगी भूमि पर किया जाए।
D
उपरोक्त सभी।
📖 व्याख्या
जल प्रदूषण रोकने के लिए सख्त कानून, सीवरेज जल का शोधन तथा ठोस कचरे का उचित निस्तारण आवश्यक है। ये सभी उपाय जल स्रोतों को स्वच्छ बनाए रखने में सहायक हैं।
46. छोटा कुआं या कुई को मारवाड़ में किस नाम से जाना जाता है?
A
बेरी
B
बावड़ी
C
मदार
D
टोवा
📖 व्याख्या
मारवाड़ क्षेत्र में छोटे कुएँ या कुई को ‘बेरी’ कहा जाता है। यह पारंपरिक जल स्रोत होता है जिसका उपयोग पेयजल के लिए किया जाता था।
47. गाँव के बाहर बनी छोटी तलैया जिसमें वर्षा का जल संग्रहित होता है, उसे क्या कहा जाता है?
A
टोबा
B
नाडी
C
झालरा
D
आगोर
📖 व्याख्या
गाँव के बाहर वर्षा जल संग्रहित करने हेतु बनाई गई छोटी तलैया को ‘नाड़ी’ कहा जाता है। यह ग्रामीण क्षेत्रों में जल संरक्षण का महत्वपूर्ण साधन है।
48. भविष्य का सोना' या 'नीला सोना' किसे कहा जाता है?
A
कोयला
B
कपास
C
स्वच्छ जल
D
बाजरा
📖 व्याख्या
स्वच्छ जल को ‘भविष्य का सोना’ या ‘नीला सोना’ कहा जाता है क्योंकि आने वाले समय में जल का महत्व अत्यधिक बढ़ने वाला है।
49. केन्द्रीय शुष्क अनुसंधान संस्थान, जोधपुर के एक सर्वेक्षण के अनुसार नागौर, बाड़मेर एवं जैसलमेर जिलों में पानी की कुल आवश्यकता में से कितने प्रतिशत जरूरतें नाडियों द्वारा पूरी की जाती है?
A
0.3706
B
0.354
C
0.2606
D
0.3005
📖 व्याख्या
केन्द्रीय शुष्क अनुसंधान संस्थान, जोधपुर के सर्वेक्षण के अनुसार नागौर, बाड़मेर और जैसलमेर जिलों में लगभग 37.06 प्रतिशत जल आवश्यकता नाड़ियों द्वारा पूरी की जाती है।
50. पश्चिमी राजस्थान में बावड़ी खोदने की परम्परा ईसा की प्रथम शताब्दी के लगभग……. अपने साथ लेकर आई थी।
A
शुंग जाति
B
यू-ची जाति
C
कुषाण जाति
D
शक जाति
📖 व्याख्या
पश्चिमी राजस्थान में बावड़ी निर्माण की परंपरा लगभग प्रथम शताब्दी में शक जाति द्वारा लाई गई मानी जाती है। बाद में यह जल संरक्षण की महत्वपूर्ण प्रणाली बन गई।